भाजपा संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज, डुमरी में नई कमेटी का गठन भाजपा संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज, डुमरी में नई कमेटी का गठन डुमरी (गुमला): डुमरी प्रखंड के दुर्गा मंदिर परिसर में भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और सक्रिय सदस्य शामिल हुए। जानकारी देते हुए बुधवार तीन बजे बताया गया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना तथा नई कमेटी का विस्तार करना था। इस दौरान बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय करने और जनसंपर्क बढ़ाने पर विशेष चर्चा की गई। बैठक में जिला मंत्री दिलीप चिक बढ़ई ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन में अनुशासन, समर्पण और सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन ही पार्टी की असली ताकत है और प्रत्येक कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण है। अध्यक्ष जवाहर कवर ने कहा कि गांव-गांव तक संगठन को सशक्त बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को लगातार जनता के बीच रहना होगा। बैठक के दौरान नई कमेटी का गठन करते हुए जवाहर कवर को प्रखंड अध्यक्ष बनाया गया। उपाध्यक्ष के रूप में जगन्नाथ भगत, चंद्रबली साहू, अन्नपूर्णा देवी और पवन कुमार केसरी को जिम्मेदारी दी गई, जबकि महामंत्री पद पर राजेश केसरी एवं संजय उरांव नियुक्त किए गए। बैठक में सदस्यता अभियान तेज करने, युवाओं एवं महिलाओं को जोड़ने तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर पहुंचाने का निर्णय लिया गया। अंत में नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी गईं।
भाजपा संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज, डुमरी में नई कमेटी का गठन भाजपा संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज, डुमरी में नई कमेटी का गठन डुमरी (गुमला): डुमरी प्रखंड के दुर्गा मंदिर परिसर में भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता और सक्रिय सदस्य शामिल हुए। जानकारी देते हुए बुधवार तीन बजे बताया गया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना तथा नई कमेटी का विस्तार करना था। इस दौरान बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय करने और जनसंपर्क बढ़ाने पर विशेष चर्चा की गई। बैठक में जिला मंत्री दिलीप चिक बढ़ई ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन में अनुशासन, समर्पण और सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन ही पार्टी की असली ताकत है और प्रत्येक कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण है। अध्यक्ष जवाहर कवर ने कहा कि गांव-गांव तक संगठन को सशक्त बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को लगातार जनता के बीच रहना होगा। बैठक के दौरान नई कमेटी का गठन करते हुए जवाहर कवर को प्रखंड अध्यक्ष बनाया गया। उपाध्यक्ष के रूप में जगन्नाथ भगत, चंद्रबली साहू, अन्नपूर्णा देवी और पवन कुमार केसरी को जिम्मेदारी दी गई, जबकि महामंत्री पद पर राजेश केसरी एवं संजय उरांव नियुक्त किए गए। बैठक में सदस्यता अभियान तेज करने, युवाओं एवं महिलाओं को जोड़ने तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर पहुंचाने का निर्णय लिया गया। अंत में नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी गईं।
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- झारखंड के कई इलाकों में पानी का भीषण संकट गहरा गया है। जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, जिससे हाहाकार मचा हुआ है।1
- लोहरदगा जिले में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की गई। इस बैठक का उद्देश्य पानी की समस्या का स्थायी समाधान ढूंढना है।1
- झारखंड के लातेहार जिले में पुलिस ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन जेजेएमपी के दो उग्रवादियों को अत्याधुनिक हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है। कुरुमखेता जंगल से हुई इस कार्रवाई में एके-47 राइफल, एसएलआर और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद हुआ। हालांकि, संगठन का सरगना शंकर राम भागने में सफल रहा, जिसकी तलाश जारी है।1
- आज लोहरदगा जिले के कुरु प्रखंड के चिरी नाम तोले में एक नया किराना दुकान खुला है। सद्दाम बाबू द्वारा खोले गए इस स्टोर से स्थानीय निवासियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।1
- छत्तीसगढ़ के सीतापुर गैंगरेप मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। विधायक रामकुमार टोप्पो के बयान से केस में नया मोड़ आ गया है, जिससे कई अनसुनी बातें उजागर होने की उम्मीद है।1
- झारखंड के गुमला में एक इंदिरा आवास ढहने से 72 वर्षीय बुजुर्ग भोवा झोरा की मौत हो गई। तेज आंधी-बारिश के बीच घटिया निर्माण के कारण रात में घर गिरने से वे मलबे में दब गए। ग्रामीणों ने मुआवजे और सुरक्षित आवास की मांग करते हुए प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।1
- Shuru ऐप पर लोहरदगा की लोकेशन को लेकर एक सवाल पूछा गया है। यूज़र्स से इस जगह के बारे में सही जानकारी कमेंट बॉक्स में साझा करने की अपील की गई है।1
- रूस ने यूक्रेन पर ताबड़तोड़ ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिसमें 26 लोग मारे गए और 80 से अधिक घायल हो गए। यह हमला कीव के युद्धविराम शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले और मॉस्को के प्रस्तावित युद्धविराम से तीन दिन पहले हुआ, जिससे शांति की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है।1