जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ लालच में रिश्तों को शर्मसार करते हुए सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी ही तीन अनाथ भतीजियों, कुमारी संध्या और चांदनी, का हक छीन लिया। इन बच्चियों को पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया गया है। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार की गई है। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पूर्व मृत्यु हो गई थी। पति की मौत के बाद, उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो अपने पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गई हैं। नियम और नैतिकता के आधार पर पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज नौगांव, खसरा संख्या 683 के संबंध में एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली। इस फर्जी वसीयत में वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि, "जब बच्चियों के पिता जीवित ही नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है। बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है।" इस धोखाधड़ी के बाद, तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं; उनके पास न तो रहने के लिए छत है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से इस मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।
जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ लालच में रिश्तों को शर्मसार करते हुए सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी ही तीन अनाथ भतीजियों, कुमारी संध्या और चांदनी, का हक छीन लिया। इन बच्चियों को पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया गया है। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार की गई है। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पूर्व मृत्यु हो गई थी। पति की मौत के बाद, उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो अपने पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गई हैं। नियम और नैतिकता के आधार पर पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज नौगांव, खसरा संख्या 683 के संबंध में एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली। इस फर्जी वसीयत में वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि, "जब बच्चियों के पिता जीवित ही नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है। बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है।" इस धोखाधड़ी के बाद, तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं; उनके पास न तो रहने के लिए छत है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से इस मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।
- Sangeetaमथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश97560025932 hrs ago
- जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ लालच में रिश्तों को शर्मसार करते हुए सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी ही तीन अनाथ भतीजियों, कुमारी संध्या और चांदनी, का हक छीन लिया। इन बच्चियों को पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया गया है। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार की गई है। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पूर्व मृत्यु हो गई थी। पति की मौत के बाद, उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो अपने पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गई हैं। नियम और नैतिकता के आधार पर पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज नौगांव, खसरा संख्या 683 के संबंध में एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली। इस फर्जी वसीयत में वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि, "जब बच्चियों के पिता जीवित ही नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है। बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है।" इस धोखाधड़ी के बाद, तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं; उनके पास न तो रहने के लिए छत है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से इस मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।1
- डीग के पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ कांबले ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए सड़क दुर्घटना में घायल एक वृद्ध महिला को बिना एंबुलेंस का इंतजार किए अपनी सरकारी गाड़ी से तत्काल जिला अस्पताल पहुँचाया। यह घटना तब हुई जब शहर के अऊ गेट निवासी 70 वर्षीय वीरवती पत्नी रघुवीर भरतपुर रोड स्थित पुलिस लाइन के पास अपनी गाय को लेकर घर लौट रही थीं और एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गईं। संयोगवश उसी समय उसी मार्ग से गुजर रहे पुलिस अधीक्षक कांबले ने दुर्घटना देखते ही अपनी गाड़ी रुकवाई और घायल वृद्धा को तत्काल अपनी सरकारी गाड़ी में बैठाकर अस्पताल ले गए। अस्पताल में भी वे उपचार शुरू होने तक मौजूद रहे और चिकित्सकों से घायल महिला के इलाज की जानकारी लेते रहे। उनकी तत्परता के कारण वृद्धा को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी, जिससे उनकी स्थिति को संभालने में मदद मिली। पुलिस अधीक्षक की इस संवेदनशील और मानवीय पहल की स्थानीय लोगों ने खुले दिल से सराहना की, उनका कहना था कि यह घटना पुलिस के मानवीय और जनसेवा वाले चेहरे को भी उजागर करती है। यह भी बताया गया कि एसपी कांबले जनसेवा के तहत 84 कोस के तीर्थ यात्रियों की भी खुद सेवा करते नजर आए हैं।4
- ब्यावर जिले की लांबिया ग्राम पंचायत भवन में मंगलवार को उपखंड अधिकारी मनोज कुमार मीणा की अध्यक्षता में एक ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 22 विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया, जिन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और मौके पर ही अनेक मामलों का समाधान किया। उपखंड अधिकारी मनोज कुमार मीणा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। शिविर के दौरान ग्रामीणों ने मुख्य पेयजल लाइन में बार-बार लीकेज, नलों में गंदा एवं बदबूदार पानी आने तथा कई मोहल्लों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने जैसी गंभीर समस्याएं उठाईं। इस पर संबंधित विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, बारिश के मौसम को देखते हुए नालों और पानी निकासी मार्गों पर रेत-मिट्टी के ढेर तथा अतिक्रमण हटाकर जलभराव की समस्या से बचाव के भी निर्देश दिए गए। शिविर में पट्टा वितरण, म्यूटेशन (नामांतरण), नाम शुद्धिकरण, जन्म-मृत्यु और जाति प्रमाण पत्र संबंधी प्रकरणों का निस्तारण किया गया। कृषि विभाग ने तारबंदी, फसली बीमा एवं कृषि ऋण से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की। वहीं, रास्तों से अतिक्रमण हटाने और खेल मैदान स्वीकृति सहित विभिन्न विभागों से संबंधित कार्यों का भी समाधान किया गया। इस अवसर पर शिविर प्रभारी नायब तहसीलदार प्रहलादराम, अतिरिक्त विकास अधिकारी रामरसिया आचार्य, पीईईओ सत्यनारायण वैष्णव, ग्राम विकास अधिकारी सोहनलाल विश्नोई, प्रशासक प्रतिनिधि मानसिंह राठौड़ के साथ-साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- आज की ताजा खबर सोने की बढ़ती कीमतों से संबंधित है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने और समर्थन देने की अपील की गई है।1
- जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से रिश्तों को शर्मसार करने और लालच में अपनों का ही हक मारने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी तीन अनाथ भतीजियों कुमारी संध्या और चांदनी का हक छीन लिया और उन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार कराई गई है। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गईं। नियमों के अनुसार, पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था, लेकिन बच्चियों के चाचा और ताऊ की नियत डोल गई। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज़ नौगांव खसरा संख्या 683 की एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली, जिसमें वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चियों के पिता जीवित नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है और बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है। इस धोखाधड़ी के बाद तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं, उनके पास न तो रहने के लिए छत बची है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।1
- मथुरा के गोवर्धन चौराहे पर मंगलवार को एक डंफर और कार की टक्कर के बाद ज़ोरदार हंगामा हो गया, जहाँ बीच सड़क पर लोगों ने जमकर लात-घूंसे चलाए। इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राधा सिटी निवासी पूजा नाम की महिला ने आरोप लगाया है कि डंफर चालक ने उनकी कार में टक्कर मारने के बाद उनके साथ मारपीट और अभद्रता की। पीड़ित महिला पूजा को बीच सड़क पर ही बुरी तरह पीटा गया, जिसके दृश्य वायरल हुए एक वीडियो में कैद हो गए हैं। इस मामले में ट्रैफिक पुलिस कर्मियों पर भी अभद्रता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हंगामे और मारपीट का यह पूरा वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।1