केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने जतारा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर जन चौपालों का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम मुहारा, वाजीतपुरा, पठारी और उदयपुरा पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्रामीणों ने पेयजल, बिजली, सड़क, आवास, पेंशन तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी अपनी दिक्कतें मंत्री के समक्ष रखीं। मंत्री ने सभी शिकायतों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, जिसके लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता और समयबद्ध तरीके से कार्य करना चाहिए। डॉ. कुमार ने ग्रामीणों को यह भी आश्वासन दिया कि पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने और क्षेत्रीय विकास कार्यों को गति देने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इन जन चौपालों में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। इन आयोजनों से ग्रामीणों को अपनी समस्याओं को सीधे केंद्रीय मंत्री और प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर मिला।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने जतारा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर जन चौपालों का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम मुहारा, वाजीतपुरा, पठारी और उदयपुरा पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्रामीणों ने पेयजल, बिजली, सड़क, आवास, पेंशन तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी अपनी दिक्कतें मंत्री के समक्ष रखीं। मंत्री ने सभी शिकायतों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य
सरकार की प्राथमिकता जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, जिसके लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता और समयबद्ध तरीके से कार्य करना चाहिए। डॉ. कुमार ने ग्रामीणों को यह भी आश्वासन दिया कि पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने और क्षेत्रीय विकास कार्यों को गति देने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इन जन चौपालों में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। इन आयोजनों से ग्रामीणों को अपनी समस्याओं को सीधे केंद्रीय मंत्री और प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर मिला।
- टीकमगढ़ जिले के पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है, जहाँ मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा और डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के प्रदेश प्रमुख सचिव राम रतन दीक्षित और उनकी टीम ने इन शिकायतों के बाद अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और अव्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देखने के बाद सीएमएचओ डॉक्टर अनुरागी को भी अवगत कराया। आरोप है कि डॉक्टर मुकेश साहू, जिनका बंधपत्र अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुका है, वे अब भी ओपीडी में बैठकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं और सरकारी क्वार्टर में निवास कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि ऐसी स्थिति में यदि किसी मरीज की हालत बिगड़ती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इसके अतिरिक्त, मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के बजाय बाहर की कमीशन वाली दवाइयां लिखी जा रही हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के बीच लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण मरीजों को भीषण गर्मी में घंटों भटकना पड़ता है। मरीजों और उनके परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर टी-शर्ट और चप्पल पहने हुए थे, जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा था। इस पूरे मामले में डॉ. अंकित राजपूत और डॉ. महेंद्र पटेल के नाम भी चर्चा में हैं। कुछ दिनों पहले अस्पताल परिसर में डॉक्टर के चेंबर में एक आवारा कुत्ते के आराम करते हुए फोटो सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल में साफ-सफाई और अनुशासन की स्थिति बेहद खराब है, और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।2
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के बम्होरी कलां थाना क्षेत्र में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री के विरोध में महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। महिलाओं ने पलेरा-जतारा रोड पर घंटों तक जाम लगाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया, जिसके चलते सड़क पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित रहा। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र के गांव-गांव में अवैध शराब परोसी जा रही है, जिसने सरकार के 'नशा मुक्ति अभियान' को पूरी तरह मज़ाक बना दिया है। पुलिस द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद ही जाम खोला जा सका और यातायात सुचारु हो पाया। यह घटना स्थानीय स्तर पर अवैध शराब के व्यापक प्रसार और इसके खिलाफ जनता के बढ़ते असंतोष को उजागर करती है।1
- टीकमगढ़ जिले के अजनौर में गरीबों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। यहां एक राशन की दुकान को सील कर दिया गया है, जहाँ से 119 क्विंटल अनाज गायब पाया गया है। यह कार्रवाई गरीबों के लिए आए अनाज की कथित हेराफेरी को लेकर की गई है।1
- शुक्रवार की रात करीब 9:30 बजे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में काले बादल छाने के साथ ही तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। पिछले कई दिनों से भीषण तपन और उमस झेल रहे टीकमगढ़ वासियों के लिए यह बारिश बड़ी राहत बनकर आई है। नौतपा की झुलसाने वाली गर्मी के बीच हुई इस बारिश और ठंडी हवाओं के चलते शहर का तापमान लुढ़ककर 27 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जिससे वातावरण में अच्छी ठंडक घुल गई है। बारिश के दौरान लगभग 9 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं, जिसने परेशान लोगों को काफी सुकून प्रदान किया है।1
- टीकमगढ़ जिले के दिगौड़ा कस्बे के मेन मार्केट में शनिवार, 30 मई को बिजली के करंट की चपेट में आने से एक गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना में दो महिलाएं भी बिजली का करंट लगने से बाल-बाल बचीं। लोगों ने इस मामले में बिजली विभाग और उसके कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मुहल्ले वासियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि मेन मार्केट में गजेंद्र श्रीवास्तव के मकान के पास लगे बिजली के खंभे में पिछले कई दिनों से बिजली का करंट आ रहा था। लोगों ने इसकी शिकायत बिजली कार्यालय में भी की थी, लेकिन शिकायत के बावजूद बिजली कर्मचारियों ने मौके पर आकर कोई सुधारात्मक कार्य नहीं किया। इसी लापरवाही के कारण, गौवंश बिजली के खंभे के पास पहुंचा और करंट की चपेट में आने से उसकी जान चली गई। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे मेन मार्केट में जाम की स्थिति बन गई। बाद में ग्राम पंचायत के द्वारा मृत गौवंश को ट्रैक्टर से हटवाया गया। लोगों ने यह भी जानकारी दी कि गांव में कई जगह बिजली की केबलें क्षतिग्रस्त हैं और बिल्कुल नीचे लटक रही हैं, जिससे भविष्य में कोई दूसरी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने मेन मार्केट सहित पूरे गांव में अव्यवस्थित तरीके से डाली गई बिजली केबलों में सुधार कार्य कराने की तत्काल मांग की है।1
- हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जतारा स्थित पत्रिका कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के अनेक पत्रकारों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के महत्व, दायित्वों और वर्तमान चुनौतियों पर विचार व्यक्त करना था। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार आदम कादरी ने किया, जिन्होंने पत्रकारों से सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने, एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय निष्पक्षता और अपने विशिष्ट अंदाज में पत्रकारिता करने का आह्वान किया। इस दौरान, पूर्व जिला उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी ने पत्रकारिता को समाज की आवाज बताते हुए पत्रकारों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने पर जोर दिया। बालकिशन प्रजापति ने पत्रकारिता के मूल गुणों और उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला, जबकि दशरथ विश्वकर्मा ने पत्रकारों की भूमिका को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। लाली झा ने जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने तथा समाज के प्रति पत्रकारों की जवाबदेही पर महत्वपूर्ण विचार रखे। वहीं, आलोक भार्गव ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के इतिहास और उसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी, और बॉबी दुबे ने पत्रकारिता के आदर्शों, नैतिक मूल्यों और जनसेवा की भावना को बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में, सभी पत्रकारों ने हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने तथा निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया। यह पूरा कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।4
- टीकमगढ़ जिले के जतारा और पलेरा के बीच कनेरा चौकी क्षेत्र के कुड़ियाला गांव में शराब की बिक्री और सेवन के विरोध में ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने, पलेरा-जतारा मार्ग को अवरुद्ध कर जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे सड़क पर जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गांव और आसपास के क्षेत्र में शराब के अवैध कारोबार के कारण सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव परिवारों तथा युवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं ने सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। इस प्रदर्शन के कारण पलेरा-जतारा मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में उनके आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।1