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पाली जिले के ईटन्दरा चारनान गांव में इन दिनों भीषण पेयजल संकट गहरा गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पानी की आपूर्ति अनियमित और असमान तरीके से हो रही है, जिसके कारण आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के लिए ग्रामीण जल आपूर्ति व्यवस्था के कार्मिक रामलाल मीणा की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने सरपंच एवं ग्राम सचिव रमेश मीणा के समक्ष इस संबंध में कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की पानी की टंकी से पानी भगवान स्टेशन की ओर भेजा जा रहा है, जबकि गांव के लोग स्वयं पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। भीषण गर्मी में पानी की इस समस्या ने ग्रामीणों के जीवन को और भी कठिन बना दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निष्पक्ष जांच करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि गांव में नियमित और समान जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो गांववासी मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

2 hrs ago
user_Jitendra Gehlot 🥇
Jitendra Gehlot 🥇
Local News Reporter रानी, पाली, राजस्थान•
2 hrs ago

पाली जिले के ईटन्दरा चारनान गांव में इन दिनों भीषण पेयजल संकट गहरा गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पानी की आपूर्ति अनियमित और असमान तरीके से हो रही है, जिसके कारण आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के लिए ग्रामीण जल आपूर्ति व्यवस्था के कार्मिक रामलाल मीणा की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने सरपंच एवं ग्राम सचिव रमेश मीणा के समक्ष इस संबंध में कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की पानी की टंकी से पानी भगवान स्टेशन की ओर भेजा जा रहा है, जबकि गांव के लोग स्वयं पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। भीषण गर्मी में पानी की इस समस्या ने ग्रामीणों के जीवन को और भी कठिन बना दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निष्पक्ष जांच करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि गांव में नियमित और समान जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो गांववासी मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

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  • पाली में करीब आठ वर्ष पुराने ₹10 लाख के चर्चित चेक अनादरण (चेक बाउंस) प्रकरण में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण संख्या-2) की पीठासीन अधिकारी विनस चौधरी ने अहम फैसला सुनाया है। इस निर्णय में मारवाड़ जंक्शन निवासी आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया को लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया है। यह प्रकरण परिवादी गौरव मर्लेचा निवासी सुमेरपुर रोड, पाली ने न्यायालय में प्रस्तुत किया था। परिवादी ने आरोप लगाया था कि अक्टूबर 2017 में आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने उनसे ₹10 लाख उधार लिए थे। इस राशि को लौटाने के लिए आरोपी द्वारा ₹5-5 लाख के दो चेक दिए गए, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर “फंड्स इनसफिशिएंट” (अपर्याप्त निधि) के कारण अनादृत हो गए। विधिक नोटिस के बावजूद भुगतान न मिलने पर परिवादी ने न्यायालय में मुकदमा दायर किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि उन्होंने परिवादी से कोई ऋण नहीं लिया था। बचाव पक्ष ने यह तर्क दिया कि गौरव मर्लेचा मारवाड़ जंक्शन में एक वीसी (कमेटी) का संचालन करते थे और उसी के संबंध में सुरक्षा के तौर पर आरोपी के पांच हस्ताक्षरित खाली चेक लिए गए थे, जिन्हें वीसी समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटाया गया। आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अरोड़ा और उनके सहयोगी अधिवक्ता मोहम्मद शरीफ ने पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि वर्ष 2017 में परिवादी की ₹10 लाख उधार देने की आर्थिक क्षमता नहीं थी। वहीं, आरोपी की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि उसे इतनी बड़ी राशि की आवश्यकता होती, क्योंकि वह पानी के कैंपर भरकर बेचने का व्यवसाय करता है। बचाव पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से यह भी दर्शाया कि नोटबंदी के बाद वर्ष 2017 में परिवादी द्वारा ₹500-500 रुपये के नए नोटों में ऋण देने का दावा किया गया था। इसी अवधि में परिवादी ने अन्य व्यक्तियों को भी लाखों रुपये उधार देने के दावे कर उनके विरुद्ध चेक बाउंस के मुकदमे दायर किए थे, जिससे उनके दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह माना कि परिवादी ₹10 लाख उधार देने की अपनी आर्थिक क्षमता को विश्वसनीय और संतोषजनक ढंग से सिद्ध नहीं कर पाया। इसके विपरीत, बचाव पक्ष की जिरह और प्रस्तुत दस्तावेजों से परिवादी के कथनों पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ। अदालत ने कहा कि आरोपी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई. एक्ट) के तहत परिवादी के पक्ष में उपलब्ध वैधानिक उपधारणा को सफलतापूर्वक खंडित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित किया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला चेक बाउंस मामलों में परिवादी द्वारा ऋण देने की वास्तविक आर्थिक क्षमता सिद्ध किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
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    पाली में करीब आठ वर्ष पुराने ₹10 लाख के चर्चित चेक अनादरण (चेक बाउंस) प्रकरण में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण संख्या-2) की पीठासीन अधिकारी विनस चौधरी ने अहम फैसला सुनाया है। इस निर्णय में मारवाड़ जंक्शन निवासी आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया को लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया है।

यह प्रकरण परिवादी गौरव मर्लेचा निवासी सुमेरपुर रोड, पाली ने न्यायालय में प्रस्तुत किया था। परिवादी ने आरोप लगाया था कि अक्टूबर 2017 में आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने उनसे ₹10 लाख उधार लिए थे। इस राशि को लौटाने के लिए आरोपी द्वारा ₹5-5 लाख के दो चेक दिए गए, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर “फंड्स इनसफिशिएंट” (अपर्याप्त निधि) के कारण अनादृत हो गए। विधिक नोटिस के बावजूद भुगतान न मिलने पर परिवादी ने न्यायालय में मुकदमा दायर किया था।

हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि उन्होंने परिवादी से कोई ऋण नहीं लिया था। बचाव पक्ष ने यह तर्क दिया कि गौरव मर्लेचा मारवाड़ जंक्शन में एक वीसी (कमेटी) का संचालन करते थे और उसी के संबंध में सुरक्षा के तौर पर आरोपी के पांच हस्ताक्षरित खाली चेक लिए गए थे, जिन्हें वीसी समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटाया गया। आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अरोड़ा और उनके सहयोगी अधिवक्ता मोहम्मद शरीफ ने पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि वर्ष 2017 में परिवादी की ₹10 लाख उधार देने की आर्थिक क्षमता नहीं थी। वहीं, आरोपी की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि उसे इतनी बड़ी राशि की आवश्यकता होती, क्योंकि वह पानी के कैंपर भरकर बेचने का व्यवसाय करता है।

बचाव पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से यह भी दर्शाया कि नोटबंदी के बाद वर्ष 2017 में परिवादी द्वारा ₹500-500 रुपये के नए नोटों में ऋण देने का दावा किया गया था। इसी अवधि में परिवादी ने अन्य व्यक्तियों को भी लाखों रुपये उधार देने के दावे कर उनके विरुद्ध चेक बाउंस के मुकदमे दायर किए थे, जिससे उनके दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह माना कि परिवादी ₹10 लाख उधार देने की अपनी आर्थिक क्षमता को विश्वसनीय और संतोषजनक ढंग से सिद्ध नहीं कर पाया। इसके विपरीत, बचाव पक्ष की जिरह और प्रस्तुत दस्तावेजों से परिवादी के कथनों पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ।

अदालत ने कहा कि आरोपी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई. एक्ट) के तहत परिवादी के पक्ष में उपलब्ध वैधानिक उपधारणा को सफलतापूर्वक खंडित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित किया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला चेक बाउंस मामलों में परिवादी द्वारा ऋण देने की वास्तविक आर्थिक क्षमता सिद्ध किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
    user_Praveen singh od
    Praveen singh od
    Actor पाली, पाली, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • पाली में लगभग आठ वर्ष पुराने 10 लाख रुपये के चर्चित चेक अनादरण प्रकरण में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण संख्या-2) की पीठासीन अधिकारी विनस चौधरी ने आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया निवासी सिंधी बाजार, मारवाड़ जंक्शन को आरोपों से बरी करने का आदेश पारित किया है। अदालत ने अपने निर्णय में पाया कि परिवादी गौरव मर्लेचा 10 लाख रुपये उधार देने की अपनी आर्थिक क्षमता को विश्वसनीय एवं संतोषजनक ढंग से सिद्ध नहीं कर पाया, जिसके चलते परिवादी की कहानी पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ। यह प्रकरण परिवादी गौरव मर्लेचा निवासी सुमेरपुर रोड, पाली द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2017 में आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने उससे 10 लाख रुपये उधार लिए थे। आरोप के अनुसार, राशि लौटाने के लिए आरोपी द्वारा 5-5 लाख रुपये के दो चेक दिए गए थे, जो बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर "फंड्स इनसफिशिएंट" के कारण अनादृत हो गए थे। विधिक नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं होने पर परिवादी ने न्यायालय की शरण ली थी। सुनवाई के दौरान, आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उसने परिवादी से कोई ऋण नहीं लिया था। बचाव पक्ष ने, जिसकी पैरवी सीनियर एडवोकेट अशोक अरोड़ा और उनके सहयोगी अधिवक्ता मोहम्मद शरीफ ने की, तर्क दिया कि गौरव मर्लेचा मारवाड़ जंक्शन में वीसी का संचालन करता था और उसी संबंध में सुरक्षा के तौर पर आरोपी के पांच हस्ताक्षरित खाली चेक लिए गए थे, जिन्हें वीसी समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटाया गया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि वर्ष 2017 में परिवादी की 10 लाख रुपये उधार देने की आर्थिक क्षमता नहीं थी, और न ही पानी के कैम्पर भरकर बेचने का कार्य करने वाले आरोपी को इतनी बड़ी राशि की आवश्यकता थी। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अरोड़ा ने न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए यह भी दर्शाया कि 2016 में नोटबंदी के बाद 2017 में परिवादी ने 500-500 रुपये के नए नोटों में ऋण देने का दावा किया, और उसी अवधि में अन्य व्यक्तियों को भी 25 लाख रुपये उधार देने का दावा करते हुए उनके विरुद्ध भी चेक बाउंस के मुकदमे दायर किए, जिससे उसके दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया। न्यायालय ने बचाव पक्ष की जिरह एवं प्रस्तुत दस्तावेजों से परिवादी के कथनों पर गंभीर संदेह उत्पन्न पाया। अपने निर्णय में न्यायालय ने यह माना कि आरोपी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई. एक्ट) के अंतर्गत परिवादी के पक्ष में उपलब्ध वैधानिक उपधारणा को सफलतापूर्वक खंडित कर दिया। परिणामस्वरूप, आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित कर दिया गया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय चेक बाउंस मामलों में परिवादी द्वारा ऋण देने की आर्थिक क्षमता सिद्ध किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
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    पाली में लगभग आठ वर्ष पुराने 10 लाख रुपये के चर्चित चेक अनादरण प्रकरण में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण संख्या-2) की पीठासीन अधिकारी विनस चौधरी ने आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया निवासी सिंधी बाजार, मारवाड़ जंक्शन को आरोपों से बरी करने का आदेश पारित किया है। अदालत ने अपने निर्णय में पाया कि परिवादी गौरव मर्लेचा 10 लाख रुपये उधार देने की अपनी आर्थिक क्षमता को विश्वसनीय एवं संतोषजनक ढंग से सिद्ध नहीं कर पाया, जिसके चलते परिवादी की कहानी पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ।

यह प्रकरण परिवादी गौरव मर्लेचा निवासी सुमेरपुर रोड, पाली द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2017 में आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने उससे 10 लाख रुपये उधार लिए थे। आरोप के अनुसार, राशि लौटाने के लिए आरोपी द्वारा 5-5 लाख रुपये के दो चेक दिए गए थे, जो बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर "फंड्स इनसफिशिएंट" के कारण अनादृत हो गए थे। विधिक नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं होने पर परिवादी ने न्यायालय की शरण ली थी।

सुनवाई के दौरान, आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उसने परिवादी से कोई ऋण नहीं लिया था। बचाव पक्ष ने, जिसकी पैरवी सीनियर एडवोकेट अशोक अरोड़ा और उनके सहयोगी अधिवक्ता मोहम्मद शरीफ ने की, तर्क दिया कि गौरव मर्लेचा मारवाड़ जंक्शन में वीसी का संचालन करता था और उसी संबंध में सुरक्षा के तौर पर आरोपी के पांच हस्ताक्षरित खाली चेक लिए गए थे, जिन्हें वीसी समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटाया गया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि वर्ष 2017 में परिवादी की 10 लाख रुपये उधार देने की आर्थिक क्षमता नहीं थी, और न ही पानी के कैम्पर भरकर बेचने का कार्य करने वाले आरोपी को इतनी बड़ी राशि की आवश्यकता थी। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अरोड़ा ने न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए यह भी दर्शाया कि 2016 में नोटबंदी के बाद 2017 में परिवादी ने 500-500 रुपये के नए नोटों में ऋण देने का दावा किया, और उसी अवधि में अन्य व्यक्तियों को भी 25 लाख रुपये उधार देने का दावा करते हुए उनके विरुद्ध भी चेक बाउंस के मुकदमे दायर किए, जिससे उसके दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया।

न्यायालय ने बचाव पक्ष की जिरह एवं प्रस्तुत दस्तावेजों से परिवादी के कथनों पर गंभीर संदेह उत्पन्न पाया। अपने निर्णय में न्यायालय ने यह माना कि आरोपी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई. एक्ट) के अंतर्गत परिवादी के पक्ष में उपलब्ध वैधानिक उपधारणा को सफलतापूर्वक खंडित कर दिया। परिणामस्वरूप, आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित कर दिया गया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय चेक बाउंस मामलों में परिवादी द्वारा ऋण देने की आर्थिक क्षमता सिद्ध किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
    user_मनोज शर्मा
    मनोज शर्मा
    Court reporter पाली, पाली, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • राजस्थान के जालोर जिले की आहोर तहसील के अंतर्गत भवरानी गांव आता है, जिसका पिन कोड 343042 है। इस गांव के सरपंच गोविंद राम सुथार हैं।
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    राजस्थान के जालोर जिले की आहोर तहसील के अंतर्गत भवरानी गांव आता है, जिसका पिन कोड 343042 है। इस गांव के सरपंच गोविंद राम सुथार हैं।
    user_Dileep Goyal
    Dileep Goyal
    Advertising agency आहोर, जालोर, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • जालौर शहर में कल शनिवार को अधिक मास की नगर परिक्रमा भक्ति भाव और धूमधाम के साथ आयोजित की जाएगी। हिंदू सेवा समिति के अंबालाल व्यास ने जानकारी दी है कि इस नगर परिक्रमा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है, और कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। यह परिक्रमा कल सुबह 7 बजे सूरज पोल से रवाना होगी।
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    जालौर शहर में कल शनिवार को अधिक मास की नगर परिक्रमा भक्ति भाव और धूमधाम के साथ आयोजित की जाएगी। हिंदू सेवा समिति के अंबालाल व्यास ने जानकारी दी है कि इस नगर परिक्रमा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है, और कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। यह परिक्रमा कल सुबह 7 बजे सूरज पोल से रवाना होगी।
    user_कमलेश शर्मा
    कमलेश शर्मा
    Voice of people जालोर, जालोर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • गुरुवार को देसूरी पंचायत समिति की ग्राम पंचायत घाणेराव में ब्लॉक स्तरीय विशेष जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस जनसुनवाई में जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर कई प्रकरणों का मौके पर ही समाधान किया। साथ ही, उन्होंने शेष लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जनसुनवाई कार्यक्रम में ग्राम पंचायत प्रशासक चंद्रशेखर मेवाड़ा, बाली एडीएम शैलेन्द्र सिंह, देसूरी उपखंड अधिकारी सिद्धार्थ सांदू, विकास अधिकारी भोपालसिंह जोधा, तहसीलदार फतेहसिंह जसोल, ग्राम विकास अधिकारी ढलाराम चौहान, और थानाधिकारी उरजाराम सहित विभिन्न विभागों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान ग्रामीणों ने बिजली, पेयजल, अतिक्रमण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन तथा राजस्व विभाग से जुड़े लंबित मामलों को जिला कलेक्टर के समक्ष रखा। डॉ. गोस्वामी ने शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और कई मामलों का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। उन्होंने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों से यह भी कहा कि आमजन की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की। इस विशेष जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को सीधे जिला प्रशासन के समक्ष रखा, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली और प्रशासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हुआ। कार्यक्रम के अंत में, जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने पात्र लाभार्थियों को भूमि पट्टों का वितरण कर उन्हें स्वामित्व अधिकारों से लाभान्वित किया।
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    गुरुवार को देसूरी पंचायत समिति की ग्राम पंचायत घाणेराव में ब्लॉक स्तरीय विशेष जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस जनसुनवाई में जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर कई प्रकरणों का मौके पर ही समाधान किया। साथ ही, उन्होंने शेष लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जनसुनवाई कार्यक्रम में ग्राम पंचायत प्रशासक चंद्रशेखर मेवाड़ा, बाली एडीएम शैलेन्द्र सिंह, देसूरी उपखंड अधिकारी सिद्धार्थ सांदू, विकास अधिकारी भोपालसिंह जोधा, तहसीलदार फतेहसिंह जसोल, ग्राम विकास अधिकारी ढलाराम चौहान, और थानाधिकारी उरजाराम सहित विभिन्न विभागों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान ग्रामीणों ने बिजली, पेयजल, अतिक्रमण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन तथा राजस्व विभाग से जुड़े लंबित मामलों को जिला कलेक्टर के समक्ष रखा।

डॉ. गोस्वामी ने शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और कई मामलों का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। उन्होंने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों से यह भी कहा कि आमजन की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की।

इस विशेष जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को सीधे जिला प्रशासन के समक्ष रखा, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली और प्रशासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हुआ। कार्यक्रम के अंत में, जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने पात्र लाभार्थियों को भूमि पट्टों का वितरण कर उन्हें स्वामित्व अधिकारों से लाभान्वित किया।
    user_मारवाड़ गोडवाड न्यूज़(रजिस्टेड)
    मारवाड़ गोडवाड न्यूज़(रजिस्टेड)
    Agricultural production बाली, पाली, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • पाली पुलिस ने सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से एक विशेष यातायात अभियान शुरू किया है। यह अभियान 4 जून से 30 जून 2026 तक पूरे जिले में संचालित किया जाएगा। इस दौरान वाहनों में किए गए अवैध संशोधन, जैसे लाल-नीली बत्ती, हूटर, प्रेशर हॉर्न, ब्लैक फिल्म, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट और अन्य अनधिकृत चिह्नों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला पुलिस अधीक्षक मोनिका सेन (आईपीएस) ने बताया कि ये वाहन न केवल मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करते हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई मामलों में ऐसे वाहनों का उपयोग अवैध गतिविधियों और अपराधों में किया जाता है। यह विशेष अभियान राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के आधार पर चलाया जा रहा है। अभियान के तहत, वाहन की बॉडी और चेसिस में अवैध परिवर्तन करने वालों, लाल-नीली बत्ती व फ्लैशर लगाने वालों, प्रेशर हॉर्न व एयर हॉर्न का उपयोग करने वालों, ब्लैक फिल्म चढ़े वाहनों और नियम विरुद्ध नंबर प्लेट लगाने वालों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) सभी पंजीकृत वाहनों के लिए अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, हिस्ट्रीशीटरों और हार्डकोर अपराधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे वाहनों की भी विशेष जांच की जाएगी, और आवश्यकतानुसार वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। पाली पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और अपने वाहनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखें, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
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    पाली पुलिस ने सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से एक विशेष यातायात अभियान शुरू किया है। यह अभियान 4 जून से 30 जून 2026 तक पूरे जिले में संचालित किया जाएगा। इस दौरान वाहनों में किए गए अवैध संशोधन, जैसे लाल-नीली बत्ती, हूटर, प्रेशर हॉर्न, ब्लैक फिल्म, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट और अन्य अनधिकृत चिह्नों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला पुलिस अधीक्षक मोनिका सेन (आईपीएस) ने बताया कि ये वाहन न केवल मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करते हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई मामलों में ऐसे वाहनों का उपयोग अवैध गतिविधियों और अपराधों में किया जाता है। यह विशेष अभियान राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के आधार पर चलाया जा रहा है।

अभियान के तहत, वाहन की बॉडी और चेसिस में अवैध परिवर्तन करने वालों, लाल-नीली बत्ती व फ्लैशर लगाने वालों, प्रेशर हॉर्न व एयर हॉर्न का उपयोग करने वालों, ब्लैक फिल्म चढ़े वाहनों और नियम विरुद्ध नंबर प्लेट लगाने वालों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) सभी पंजीकृत वाहनों के लिए अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, हिस्ट्रीशीटरों और हार्डकोर अपराधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे वाहनों की भी विशेष जांच की जाएगी, और आवश्यकतानुसार वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

पाली पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और अपने वाहनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखें, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
    user_Praveen singh od
    Praveen singh od
    Actor पाली, पाली, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • जालौर कलेक्ट्रेट के बाहर वाटरशेड ठेकेदारों का धरना शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा, जहाँ वे अपने लंबित बिलों के भुगतान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आज धरना स्थल पर दो ठेकेदार, सुखराम धुन और विष्णु माली, भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। धरना स्थल पर मौजूद ठेकेदारों ने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। उन्होंने दृढ़ता से कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका यह धरना प्रदर्शन शुरू रहेगा।
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    जालौर कलेक्ट्रेट के बाहर वाटरशेड ठेकेदारों का धरना शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा, जहाँ वे अपने लंबित बिलों के भुगतान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आज धरना स्थल पर दो ठेकेदार, सुखराम धुन और विष्णु माली, भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

धरना स्थल पर मौजूद ठेकेदारों ने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। उन्होंने दृढ़ता से कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका यह धरना प्रदर्शन शुरू रहेगा।
    user_कमलेश शर्मा
    कमलेश शर्मा
    Voice of people जालोर, जालोर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • पाली के नया बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित एक होटल में देर रात शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। इस घटना में होटल का सामान जल गया, लेकिन गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। आग लगने के दौरान चारों तरफ धुआं फैल गया था, जिसके बावजूद होटल स्टाफ ने अपनी सूझबूझ से कमरे में फंसे दो यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सूचना मिलते ही दमकल टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इस घटना के बाद अगले ही दिन सुबह नगर निगम ने एक टीम बनाकर क्षेत्र के सभी होटलों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।
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    पाली के नया बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित एक होटल में देर रात शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। इस घटना में होटल का सामान जल गया, लेकिन गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। आग लगने के दौरान चारों तरफ धुआं फैल गया था, जिसके बावजूद होटल स्टाफ ने अपनी सूझबूझ से कमरे में फंसे दो यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

सूचना मिलते ही दमकल टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। इस घटना के बाद अगले ही दिन सुबह नगर निगम ने एक टीम बनाकर क्षेत्र के सभी होटलों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।
    user_Hastpal singh
    Hastpal singh
    पाली, पाली, राजस्थान•
    6 hrs ago
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