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नंदगांव के हुरियारों पर बरसी प्रेम भरी लाठियां दूर दराज से आए श्रद्धालु मथुरा जनपद के बरसाना में लठमार होली पर होली देखने आए लाखों की संख्या में श्रद्धालु नंदगांव के हुरियारे पर बरसी जमकर प्रेम भरी लाठियां
Lokesh Garg
नंदगांव के हुरियारों पर बरसी प्रेम भरी लाठियां दूर दराज से आए श्रद्धालु मथुरा जनपद के बरसाना में लठमार होली पर होली देखने आए लाखों की संख्या में श्रद्धालु नंदगांव के हुरियारे पर बरसी जमकर प्रेम भरी लाठियां
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- राधा बल्लभ मन्दिर दर्शन1
- कर्म में नियम का ध्यान रखना होता है - पंडित मुरारी लाल पाराशर लक्ष्मण मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस कृष्ण जन्म कथा का सुनाया वृतांत अमर दीप सेन डीग। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बाबा शिवराम दास जी महाराज पान्हौरी वाले के सानिध्य में शहर के लक्ष्मण मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस की कथा में व्यास पीठ पर विराजमान मंदिर महंत पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा भक्तिरस का समुद्र है। भक्ति स्वतंत्र है, ज्ञान की एक सुनिश्चित परिभाषा है। ज्ञान सत्य के संज्ञानकर का मार्ग अवश्य है, ज्ञान से मोक्ष प्राप्त हो सकता है। कर्म वैराग्य में व्यक्ति को पग पग पर नियम आदि का ध्यान करना होता है परंतु भक्ति की धारणा वस्तुत व्यक्ति को स्वतंत्रता की अनुभूति करती है। भक्ति में आप जिस संस्कार में, स्थिति में, देशकाल में स्थित है, उसी में भक्ति कर सकते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा 'भाव कुभाव अनख आलस ऊं 'नाम जपत मंगल दिस दशऊ, आप सोते उठते, भोजन करते, चलते फिरते, कार्य में निमग्न होते हुए भगवान का नाम ले सकते हैं। सती चरित्र पर बोलते हुए पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहा कि सती जी राजा दक्ष की पुत्री है। राजा दक्ष प्रजापति भगवान शिव से द्रोह करते है। उन्होंने यज्ञ करने को लेकर सभी को निमंत्रण दिया परन्तु भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया। जब सती को समाचार मिला तो बिना निमंत्रण के ही पिता के यज्ञ में पहुंची। वहां सभी देवताओं का आसान लगा हुआ था परन्तु भगवान शंकर का स्थाना कहीं नहीं था। इसको देखकर सती जी बहुत क्रोधित हुई और विचारा करने लगी कि जब में भगवान शंकर के पास इस शरीर के साथ जाऊंगी तो वे मुझे दक्ष सुता कहकर संबोधित करेंगे। उन्होंने कहा कि वो इस शरीर से भगवान के पास नहीं जाएंगी। उन्होंने अपने शरीर से योगाग्नि पैदा की और अपने शरीर को अग्नि में भस्म कर लिया। कृष्ण जन्म का हुआ आयोजन - इस दौरान कथा में पाराशर ने कृष्ण जन्म की कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि भाद्रपद माह की अष्टमी को कृष्ण पक्ष में विष्णु जी के 8वें अवतार के रूप में श्री कृष्ण का जन्म हुआ।इस दौरान जैसे ही भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ तो समूचे मंदिर परिसर में झालर घंटों की ध्वनि से आरतीकी गई। और बधाई गायन के साथ में मिठाई, ट्रॉफी, खिलौने आदि की बौछार की गई। इस अवसर पर वैध नन्द किशोर गांधी,राकेश गोयल अराधना वाले,सुन्दर सरपंच, देवेंद्र बंसल,केदार सौखिया, पूर्व पार्षद महेंद्र शर्मा, गोविंद सौखिया,राजू काका,हरिओम पाराशर,शिवचरन शर्मा,धनीराम गुजरात वाले,आचार्य गणेश दत्त पाराशर,गोपाल दास,छीतरमल खण्डेलवाल,जुगला खण्डेलवाल,महेश अग्रवाल,गोकुल झालानी,राधे श्याम गर्ग जयपुर वाले,चन्द्रभान शर्मा चउआ सर, रमाकांत शर्मा नाहरौली वाले,हरेश बंसल,रमेश अरोड़ा,गोपाल बीड़ी वाले,सुगन फौजी,बंटी खण्डेलवाल ,ममता बंसल,सुनिता सौखिया,लता अरोड़ा,लक्ष्मी तमोलिया,गीता तमोलिया,लक्ष्मी सौनी,सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष भक्त उपस्थित थे।3
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