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अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद, दान की गिनती में लगे लगभग 40 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। इन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जिसके बाद उनकी जगह अब बैंक द्वारा नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इस घटनाक्रम के मद्देनजर मंदिर की सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करते हुए सीसीटीवी कैमरों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है। वहीं, इस पूरे मामले पर पवन पांडेय ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रभु श्रीराम ने खुद चढ़ावा चोरी की बात अखिलेश को बताई।
आशीष कुमार मिश्रा
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद, दान की गिनती में लगे लगभग 40 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। इन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जिसके बाद उनकी जगह अब बैंक द्वारा नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इस घटनाक्रम के मद्देनजर मंदिर की सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करते हुए सीसीटीवी कैमरों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है। वहीं, इस पूरे मामले पर पवन पांडेय ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रभु श्रीराम ने खुद चढ़ावा चोरी की बात अखिलेश को बताई।
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- लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने और इस घटना की जांच कराने के भी आदेश दिए गए हैं।1
- लखनऊ में योगीराज के तहत, थाना विभूतिखंड क्षेत्र के जलवा क्लब, साइबर हाइट्स के बाहर एक किशोरी के साथ हुई गंभीर आपराधिक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जलवा क्लब में गांजा और अफीम परोसा जा रहा है, और इसी क्लब के बाहर एक महिला से मारपीट, नशेबाज़ी और वीडियो बनाकर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया। समिट पुलिस चौकी प्रभारी पर कार्रवाई न करने का भी गंभीर आरोप है। पीड़िता किशोरी ने बताया कि 25 जनवरी 2026 की रात करीब 12:10 बजे कुछ युवतियों ने उसे कागज़ात लौटाने के बहाने बुलाकर योजनाबद्ध तरीके से बेरहमी से पीटा। इस दौरान न केवल मारपीट की गई, बल्कि गाली-गलौज करते हुए उसका वीडियो भी बनवाया गया, जिससे उसे बदनाम करने की धमकी दी गई। किशोरी का कहना है कि आरोपी युवतियां पहले भी चोरी, धमकी और नशे की हालत में हिंसा जैसी घटनाओं में शामिल रही हैं। जलवा क्लब के बाहर देर रात तक खुलेआम नशेबाज़ी और गांजा पीने के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जो कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। घटना सीसीटीवी में कैद होने और 112 पर कॉल करने के बावजूद, अब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज न होना पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है। किशोरी पीड़ित ने स्पष्ट किया है कि यदि लखनऊ पुलिस उनकी सुनवाई नहीं करती है, तो उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। उसने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ योगी सरकार है और दूसरी तरफ लखनऊ पुलिस बेलगाम हो चुकी है, जिसके कारण उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है। यह सवाल बना हुआ है कि क्या इस मामले में कार्रवाई होगी या इसे भी दबा दिया जाएगा।1
- लखनऊ से संवाददाता आशीष मिश्रा की ब्रेकिंग न्यूज़ के अनुसार, शहर में हुए अग्निकांड ने गहरा दर्द दिया है। इस दुखद घटना के दौरान एक बच्चे की हृदयविदारक पुकार सामने आई, जिसने कहा, "पापा आग लग गई, बाथरूम में हूं, बचा लो।" इस बीच, बच्चे की मां रोते हुए अपने बच्चे को ढूंढने की गुहार लगाती रही, बार-बार कहती रही, "कोई तो मेरे बच्चे को ढूंढ दो…", और फिर बेहोश हो गई। यह पूरा दृश्य लखनऊ अग्निकांड के दर्द को बयां करता है।1
- लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड में कई लोगों की दर्दनाक मौत के बाद, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक घटनास्थल पर पहुंचे। मीडिया से बातचीत के दौरान, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक हादसे के भयावह मंजर को याद करते हुए भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।1
- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र अंतर्गत उमरावखेड़ा (जेहटा) में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहाँ एक पीड़ित परिवार दबंगों के खौफ और स्थानीय पुलिस की कथित बेरुखी के कारण अपना घर छोड़कर दर-दर भटकने को मजबूर हो गया है। पीड़ित परिवार ने जेहटा चौकी पुलिस पर दबंगों को खुला संरक्षण देने का संगीन आरोप लगाया है, जबकि पिछले एक साल से उनके खिलाफ जानलेवा हमले, छेड़छाड़, लूटपाट और प्रताड़ना का सिलसिला जारी है। पीड़ित अशोक कुमार (निवासी उमरावखेड़ा, जेहटा) ने बताया कि बीते 30 मई 2026 की रात करीब 09:58 बजे पड़ोसी आरोपी काशी ने बाहर से एक टेंपो में गुंडे बुलाए। इन बदमाशों ने उनके घर में घुसकर तांडव मचाया, उनकी पत्नी के साथ छेड़छाड़ व लूटपाट की और लाठी-डंडों व सरियों से पूरे परिवार को बेरहमी से पीटा, जिससे सभी को गंभीर चोटें आईं। यह पूरी वारदात घर के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। पीड़ित का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें पूरी रात दुबग्गा थाने में बैठना पड़ा, तब जाकर मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। इस मामले में कार्रवाई न होने पर पीड़ित परिवार 5 जून 2026 को एसीपी महोदय के समक्ष पेश हुआ। एसीपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जेहटा चौकी इंचार्ज को फोन पर फटकार लगाई और तत्काल गिरफ्तारी तथा मुकदमे में उचित धाराएं बढ़ाकर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया। हालांकि, आरोप है कि जेहटा चौकी इंचार्ज ने एसीपी के आदेश को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया और कोई कदम नहीं उठाया। पीड़ित अशोक कुमार ने जेहटा चौकी इंचार्ज सुमित श्रीवास्तव और दरोगा जयप्रकाश पर आरोपियों से साठगांठ का आरोप लगाते हुए पूर्व की कई घटनाओं का ब्योरा भी दिया। इनमें 5 जुलाई 2025 को आरोपी राजेश, धीरज और पप्पू द्वारा जानलेवा हमला करना, 6 दिसंबर 2025 को धीरज द्वारा पीड़ित के बेटे की उंगली तोड़ना, 14 अप्रैल 2026 को धीरज द्वारा घर की तरफ बारूद जैसी ज्वलनशील वस्तु फेंकना, और 18 अप्रैल 2026 को आरोपी काशी द्वारा चौकी के अंदर ही पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में पीड़ित परिवार को 'बोटी-बोटी काटने' की धमकी देना शामिल है। इन सभी घटनाओं में पुलिस ने मामूली धाराओं में मामला दर्ज कर या सिर्फ एनसीआर काटकर इतिश्री कर ली और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पीड़ित परिवार ने अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि वे अपनी जान बचाने के लिए पलायन कर चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसके जिम्मेदार नामजद आरोपियों (काशी, राजेश, धीरज, पप्पू, पूर्णिमा, शांति) के साथ-साथ जेहटा चौकी इंचार्ज सुमित श्रीवास्तव और संबंधित दरोगा जयप्रकाश भी होंगे। परिवार ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच जेहटा चौकी पुलिस से हटाकर किसी अन्य अधिकारी से कराई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो और दबंगों व उनके अज्ञात गुंडों को गिरफ्तार कर परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाए।2