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बिहार में असुरक्षा के माहौल के बीच स्थानीय निवासियों ने प्रशांत किशोर जी से भावुक गुहार लगाई है। निवासियों का कहना है कि वे क्षेत्र में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसी डर और असुरक्षा के भाव के साथ लोगों ने प्रशांत किशोर जी के सामने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है।
Saroj kumar (pk)
बिहार में असुरक्षा के माहौल के बीच स्थानीय निवासियों ने प्रशांत किशोर जी से भावुक गुहार लगाई है। निवासियों का कहना है कि वे क्षेत्र में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसी डर और असुरक्षा के भाव के साथ लोगों ने प्रशांत किशोर जी के सामने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है।
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- Post by Sharda Singh1
- महिला आरक्षण कानून से जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाने, संसद की वर्तमान संख्या के आधार पर इसे तुरंत बिना शर्त लागू करने और इसके भीतर पिछड़ी, अतिपिछड़ी व एससी/एसटी जातियों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर बिहार के आरा में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोशिएशन (ऐपवा) ने मार्च निकाला। भाकपा-माले जिला कार्यालय श्रीटोला से शुरू हुआ यह मार्च बस स्टैंड पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और जिला सचिव इंदू सिंह ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला आरक्षण का उपयोग अपने राजनीतिक एजेंडे, यानी परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को आगे बढ़ाने के लिए एक बहाने के रूप में कर रही है। वहीं, ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और नगर सचिव संगीता सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार केवल 'नारी शक्ति' की दिखावटी बातें कर रही है और महिला आरक्षण को राजनीतिक रूप से विवादास्पद परिसीमन के मुद्दे से अलग नहीं कर रही है। उन्होंने इस तरह के ढोंग और इसे लागू करने में की जा रही लंबी देरी को एक गहरी पितृसत्तात्मक वास्तविकता बताया जो महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को रोक रही है। सभा में ऐपवा की राष्ट्रीय पार्षद और नगर अध्यक्ष शोभा मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र-युवाओं के आंदोलन के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नारी सशक्तिकरण के दावों के बीच जीविका दीदियों को काम से हटाने की धमकी दी जा रही है, जिसके खिलाफ ऐपवा लड़ाई लड़ेगी और सरकार को घेरेगी। इस विरोध कार्यक्रम में संगीता सिंह, इंदू सिंह, संध्या पाल, शोभा मंडल, कलावती देवी, आरती कुमारी और ज्ञान्ती देवी सहित कई महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल रहीं।1
- भोजपुर के आरा में ओम नमः शिवाय और जय शिव शंकर के पावन मंत्रों का अनवरत जाप किया गया है। इस पूरे जाप में केवल 'ओम नमः शिवाय', 'जय शिव शंकर' और 'ओम' के पवित्र नाम की श्रद्धापूर्वक बार-बार पुनरावृत्ति की गई है।1
- देश में 21 जुलाई 2026 से नए नियम लागू कर दिए गए हैं। एमएसजी न्यूज (MSG NEWS) द्वारा जारी मुख्य समाचारों के अनुसार, इस तारीख से एलपीजी (LPG), आईटीआर (ITR) और आधार से जुड़े क्षेत्रों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इन महत्वपूर्ण बदलावों को लेकर आज की बड़ी और ताजा खबरों के लाइव अपडेट के रूप में जानकारी साझा की गई है।1
- भाकपा-माले, आइसा और इनौस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आरा में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और पेपर लीक के खिलाफ एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। यह विशाल आक्रोश मार्च पूर्वी रेलवे गुमटी से शुरू होकर शहर के स्टेशन रोड, नवादा चौक, शिवगंज, गोपाली चौक और टाउन थाना होते हुए अम्बेडकर चौक पहुंचा, जहां यह एक विरोध सभा में तब्दील हो गया। इस प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए (NTA) को भंग करने, पारदर्शी व जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू करने और पेपर लीक व परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही, पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को अनशन के दौरान गिरफ्तार किए जाने और दिल्ली में आंदोलनकारियों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के खिलाफ भी तीखा विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि सोनम वांगचुक से बातचीत करने के बदले उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया, और सीधे तौर पर 'मोदी-शाह जवाब दो' के नारे लगाए। सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले केंद्रीय कमेटी सदस्य और जिला सचिव अभ्युदय ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनशन आंदोलन लगातार जारी है। पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, आइसा अध्यक्ष नेहा सिंह, मनीष और आमीन की भूख हड़ताल को आज 22 दिन पूरे हो चुके हैं, जिसमें से सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है और आइसा के दो अनशनकारी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर कान में तेल डाले बैठी है और आज तक सरकार का कोई भी प्रतिनिधि अनशनकारियों से वार्ता करने नहीं आया है।3
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