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लखीमपुर खीरी कचहरी में अधिवक्ता पर गोली चलाई गई, यह पुलिस प्रशासन और अधिवक्ताओं की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े करते हैं, #fbpost2026シ #facebookpostシ #facebookreelsvideo #fb #up #videoviralシ #videoviralシ #Lakhimpur लखीमपुर खीरी कचहरी में अधिवक्ता पर गोली चलाई गई, यह पुलिस प्रशासन और अधिवक्ताओं की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े करते हैं, #fbpost2026シ #facebookpostシ #facebookreelsvideo #fb #up #videoviralシ #videoviralシ #Lakhimpur
Tatkal News Bihar 24
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- वे एक ब्राह्मण परिवार से थे और बचपन से ही साहसी स्वभाव के थे। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही थे। उस समय भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव और अन्याय किया जाता था, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा था। 1857 की क्रांति की एक बड़ी वजह एनफील्ड राइफल के कारतूस थे, जिनमें गाय और सूअर की चर्बी होने की बात कही गई। इससे सैनिकों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और विद्रोह की स्थिति बन गई। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में मंगल पांडेय ने अंग्रेज अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह कर दिया। उन्होंने अपने अधिकारियों पर गोली चलाई और अन्य सैनिकों को भी क्रांति के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। उनका बलिदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और पूरे देश में क्रांति की चिंगारी फैल गई। मंगल पांडेय आज भी साहस, देशभक्ति और बलिदान के प्रतीक माने जाते हैं।सन् 1857 की क्रांति का नाम आते ही जिस वीर सिपाही की छवि सबसे पहले उभरती है, वह हैं मंगल पांडे। उन्हें भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का अग्रदूत और पहला शहीद माना जाता है। 8 अप्रैल का दिन उनके बलिदान की याद दिलाता है, जब उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाकर इतिहास रच दिया। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे ने अंग्रेज अधिकारियों के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया। उन्होंने अपने साथियों को पुकारते हुए अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़े होने का आह्वान किया और दो अंग्रेज अधिकारियों पर गोली चला दी। यह वह क्षण था जब पहली बार किसी भारतीय सिपाही ने खुलेआम अंग्रेज सत्ता को चुनौती दी। उत्तर प्रदेश के बलिया (तत्कालीन गाजीपुर) जिले के नगवा गांव में 30 जनवरी 1831 को जन्मे मंगल पांडे बचपन से ही साहसी और स्वाभिमानी थे। उनके पिता सुदिष्ट पांडे और माता जानकी देवी थीं। कम उम्र में ही वे ब्रिटिश सेना की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री में भर्ती हो गए, जहां उनकी बहादुरी और अनुशासन के लिए पहचान बनी। 1857 के विद्रोह की चिंगारी उस समय भड़की जब नई एनफील्ड राइफल के कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी होने की बात सामने आई। इससे हिंदू और मुस्लिम दोनों सैनिकों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 की मुख्य वजह बनी। हालांकि उनके साथियों ने उस समय खुलकर साथ नहीं दिया, लेकिन उनके साहस ने पूरे देश में विद्रोह की आग फैला दी। अंततः उन्हें गिरफ्तार कर सैन्य अदालत में पेश किया गया और 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। एक ब्राह्मण परिवार से थे और बचपन से ही साहसी स्वभाव के थे। वे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही थे। उस समय भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव और अन्याय किया जाता था, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा था।1
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- रसड़ा (बलिया): बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने और शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकास खंड रसड़ा के प्राथमिक विद्यालय प्रधानपुर में 'स्कूल चलो अभियान' रैली का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी (SDM) रसड़ा, श्री रवि कुमार ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। रैली के दौरान बच्चों ने हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर पूरे गांव में भ्रमण किया और "आधी रोटी खाएंगे, स्कूल जरूर जाएंगे" जैसे नारों से ग्रामीणों को जागरूक किया। इस अवसर पर मौजूद विशिष्ट अतिथियों ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया: श्री रवि कुमार (SDM) उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज की उन्नति का एकमात्र मार्ग है। अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन सरकारी विद्यालयों में अवश्य कराएं। श्री पवन कुमार सिंह (BEO) खंड शिक्षा अधिकारी ने सरकार द्वारा मिल रही सुविधाओं जैसे नि:शुल्क यूनिफॉर्म, किताबों और मिड-डे मील के बारे में जानकारी दी। श्री विशाल कुमार (CDPO) एवं श्री शिवांकित वर्मा (BDO) अधिकारियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में प्रधानपुर के प्रधान प्रतिनिधि जितेन्द्र यादव एवं मुकेश कुमार सिंह सहित क्षेत्र के कई गणमान्य सदस्य मौजूद रहे। विद्यालय के शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया। रैली के माध्यम से अभिभावकों को प्रेरित किया गया कि वे 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे का स्कूल में दाखिला सुनिश्चित करें।1
- खबर रोहतास जिला के बिक्रमगंज से है। जहां बिक्रमगंज बाजार के एक मैरिज हॉल में पुलिस ने छापामारी कर 24 लोगों को हिरासत में लिया है। जिसमें से 8 महिलाएं हैं। उनमें एक नाबालिक लड़की भी है। वही एक लाख रुपए कैश तथा आभूषण भी बरामद किया गया है। मामला एक नाबालिक लड़की का मध्य प्रदेश के रतलाम के एक युवक से शादी कराने से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र के गरीब परिवार को लालच देकर उसकी नाबालिक बच्ची का मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से आए एक युवक से शादी कराई जा रही है। इसी सूचना पर बिक्रमगंज के शिव मैरिज हॉल में बिक्रमगंज थाना की पुलिस ने दबिश दी तथा यहां से बक्सर जिला के चकिया की एक नाबालिग लड़की को बरामद किया गया। जिसकी शादी मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के पेलादरी का रहने वाला एक युवक से कराई जा रही थी। पुलिस को शक है की दूसरे प्रांतों से लोग यहां गरीब बच्चियों को बहला-फुसला कर शादी कराने वाले गिरोह की यह करतूत तो नहीं है? पुलिस ने लड़का तथा लड़की पक्ष के 16 लोगों को हिरासत में लिया है। जिसमें से आठ महिलाएं हैं। उन सभी से पूछताछ की जा रही है। बता दे की हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि से पहले भी लोग इस इलाके के गरीब परिवार के बच्चियों को शादी के लिए दलालों के माध्यम से खरीद फरोख्त कर ले जाने जैसे करतूत सामने आ चुका है। इसके बाद पुलिस का कान खड़ा है। फिलहाल सभी से पूछताछ की जा रही है। मध्य प्रदेश के रतलाम से अपने बेटे की शादी करने पहुंचे शंकर लाल चौहान ने बताया कि वह अपने पुत्र की शादी के लिए बिहार आए हैं। फिलहाल पुलिस अधिकारी जांच के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ बताने की बात कह रहे हैं।1
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