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कोलकाता का प्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज, जिस पर जापानियों द्वारा 131 बम गिराए जाने के बाद भी उसे नुकसान नहीं पहुंचा था, उसे ₹5 के गुटके ने थूक-थूककर तोड़ दिया है। इस पुल से रोज़ाना गुजरने वाले लोग लगातार इस पर थूकते थे और इसी का परिणाम आज सबके सामने है। भीषण बमबारी को भी आसानी से झेल जाने वाले इतने मजबूत पुल को महज़ ₹5 के गुटके की ताकत ने तोड़कर रख दिया है।
PARUL SIROHI BC MEERUT
कोलकाता का प्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज, जिस पर जापानियों द्वारा 131 बम गिराए जाने के बाद भी उसे नुकसान नहीं पहुंचा था, उसे ₹5 के गुटके ने थूक-थूककर तोड़ दिया है। इस पुल से रोज़ाना गुजरने वाले लोग लगातार इस पर थूकते थे और इसी का परिणाम आज सबके सामने है। भीषण बमबारी को भी आसानी से झेल जाने वाले इतने मजबूत पुल को महज़ ₹5 के गुटके की ताकत ने तोड़कर रख दिया है।
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- मेरठ के सरधना में कानूनी विमर्श को बढ़ावा देने के लिए 'फ्रॉम द कोर्टरूम टू द कन्वर्सेशन' पॉडकास्ट का पहला एपिसोड जारी किया गया है। 02/07/2026 को जारी हुए इस एपिसोड में अधिवक्ता शिवम गुप्ता के साथ 'पिक्यूनियरी ज्यूरिस्डिक्शन' (आर्थिक क्षेत्राधिकार) के महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत पर विस्तार से चर्चा की गई है। इस व्यावहारिक बातचीत में मुकदमेबाजी पर इसके महत्व और प्रभावों को रेखांकित किया गया है, जो कानूनी पेशेवरों और वादकारियों दोनों के लिए बेहद जानकारीपूर्ण है। दर्शकों से इस पॉडकास्ट को देखने, अपनी प्रतिक्रिया देने और इसे कानूनी बिरादरी में प्रसारित करने की अपील की गई है। इसके साथ ही, इस कानूनी चर्चा में एक गंभीर सवाल भी उठाया गया है कि जब एक जज मर्डर केस में फाँसी की सजा सुना सकता है, तो 5-10 करोड़ रुपये के मामलों में ऐसा क्यों नहीं कर सकता।1
- मेरठ के हस्तिनापुर अंतर्गत भीमकुंड मार्ग पर जलभराव और सड़क की बदहाल स्थिति का जायजा लेने आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष अंकुश चौधरी पहुंचे। उन्होंने मौके पर स्थिति का निरीक्षण करने के बाद पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता अभिषेक कुमार से इस समस्या को लेकर विस्तृत वार्ता की। अंकुश चौधरी ने क्षेत्र की बदहाली पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण क्षेत्र के किसानों की फसलें जलभराव में डूब गई हैं, कई घरों में पानी भर गया है और पशुओं का चारा भी प्रभावित हुआ है। इसी बीच अज्ञात लोगों द्वारा जेसीबी से मार्ग काट दिए जाने के कारण हजारों लोगों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। उन्होंने मांग की कि किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करते हुए इस महत्वपूर्ण मार्ग को भी जल्द से जल्द सुचारु रूप से चालू किया जाना चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर पीडब्ल्यूडी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि विभाग समय रहते आवश्यक पुलियों का निर्माण और जल निकासी की समुचित व्यवस्था कर देता, तो आज यह नौबत नहीं आती। अधिकारियों के मुताबिक पुलिया निर्माण सहित अन्य आवश्यक कार्यों का प्रस्ताव फिलहाल लंबित है। इस समस्या के स्थायी समाधान के संबंध में अंकुश चौधरी कल जिलाधिकारी और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा करेंगे। इस मौके पर उनके साथ जिला संरक्षक एस. के. शर्मा, जिला महासचिव हेम कुमार, जिला सचिव वैभव मलिक और जिला सचिव अतुल नगर सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- मेरठ में डीपी पब्लिक स्कूल, डेवलॉक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास पिछले दो महीनों से नालियों से गंदा पानी बाहर निकल कर आ रहा है और यहाँ कोई सफाई भी नहीं की जा रही है। इस वजह से लोगों को बेहद गंदे नाली के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर लोगों ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए सख्त कार्रवाई करने और इसका समाधान जल्द से जल्द करने का अनुरोध किया है। इस समस्या के संबंध में संपर्क के लिए मोबाइल नंबर 7451923290 भी दिया गया है।3
- मध्य प्रदेश के गंजबासौदा में सकल हिंदू समाज के गौ सेवकों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर गौसेवकों पर हुई कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। इस ज्ञापन के माध्यम से सिवनी मालवा में 14 गौसेवकों को सुनाए गए आजीवन कारावास के फैसले और सागर जिले के खिमलासा तहसील में 11 गौसेवकों पर दर्ज किए गए मुकदमे को वापस लेने की मांग की गई है। इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने गोचर भूमि को तत्काल अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। गौ सेवकों का कहना है कि गौरक्षक बिना किसी सरकारी वेतन या सुविधा के, दिन-रात निस्वार्थ भाव से गौ माता की सेवा और सुरक्षा में लगे रहते हैं, लेकिन फिर भी उन पर अत्याचार किया जा रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि चरनोई की भूमि को मुक्त कराने के लिए पिछले 3 वर्षों में सागर जिले के एसडीएम, तहसीलदार, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों को 164 बार ज्ञापन दिए गए। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो खुरई और बीना में चक्काजाम की लिखित सूचना देकर हताश गौसेवक सड़कों पर रोने-चिल्लाने बैठ गए। इस पर पुलिस ने 11 गौसेवकों पर ही सड़क पर बैठने का मुकदमा दर्ज कर दिया, जिसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने 'यह कैसा न्याय है' कहकर अपना आक्रोश जताया है। इस कार्रवाई के विरोध में राष्ट्रीय हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश सोनी ने खुली चेतावनी दी है कि या तो सरकार गोचर भूमि मुक्त कर गौ माता की व्यवस्था करे, अन्यथा यह आंदोलन पूरे मध्य प्रदेश में बड़ा रूप लेगा। वहीं, गौ रक्षक सेना और सनातन रक्षक सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विशालदास वैष्णव ने मांग की है कि सरकार को पूरे भारतवर्ष में गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने के लिए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि चरनोई भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और गौ रक्षकों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो आगे जगह-जगह उग्र आंदोलन किए जाएंगे।1
- उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा के तेज कटान के कारण मेरठ-बिजनौर (हस्तिनापुर-चांदपुर) मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। गंगा नदी के तेज कटान की वजह से सड़क कटकर एक नाले के रूप में बदल गई है, जिससे दोनों ओर से आवागमन पूरी तरह ठप पड़ गया है। मार्ग के इस हिस्से पर वाहनों और लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं, जिसके चलते करीब 8 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इस संकट के बीच ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाया है कि जेसीबी की मदद से जानबूझकर सड़क को काटकर गंगा का पानी मोड़ा गया है। बढ़ते जलस्तर के कारण अब क्षेत्र के कई गांवों पर बाढ़ का भारी खतरा मंडरा रहा है। इस बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए सड़क को बहाल करने और प्रभावित लोगों के लिए राहत कार्य तेज कर दिए हैं।1
- मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे के कथित व्यवहार और एक वायरल वीडियो को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ललिता गौतम हत्याकांड और उसके बाद प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से नाराज अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के लोग अब दूसरे जिलों से भी मेरठ की ओर पहुंच रहे हैं। कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के लोग पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय की मांग उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और नाराज लोगों की मांग है कि एसएसपी के व्यवहार और वायरल वीडियो से जुड़े पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और उनके खिलाफ बर्खास्तगी जैसी सख्त कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की चुप्पी को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में आए इस बड़े विवाद के बावजूद सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट कार्रवाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उस दिन पुलिस अधिकारियों के तेवर इतने सख्त क्यों थे और क्या यह कार्रवाई केवल स्थानीय स्तर पर लिया गया कोई फैसला थी, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल मेरठ में स्थिति बेहद गर्म बनी हुई है और माहौल को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है। अब सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस पूरे विवाद पर कोई बड़ा फैसला लेगी या फिर यह मामला यूं ही आगे और तूल पकड़ता रहेगा।1