मध्य प्रदेश के गंजबासौदा में सकल हिंदू समाज के गौ सेवकों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर गौसेवकों पर हुई कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। इस ज्ञापन के माध्यम से सिवनी मालवा में 14 गौसेवकों को सुनाए गए आजीवन कारावास के फैसले और सागर जिले के खिमलासा तहसील में 11 गौसेवकों पर दर्ज किए गए मुकदमे को वापस लेने की मांग की गई है। इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने गोचर भूमि को तत्काल अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। गौ सेवकों का कहना है कि गौरक्षक बिना किसी सरकारी वेतन या सुविधा के, दिन-रात निस्वार्थ भाव से गौ माता की सेवा और सुरक्षा में लगे रहते हैं, लेकिन फिर भी उन पर अत्याचार किया जा रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि चरनोई की भूमि को मुक्त कराने के लिए पिछले 3 वर्षों में सागर जिले के एसडीएम, तहसीलदार, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों को 164 बार ज्ञापन दिए गए। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो खुरई और बीना में चक्काजाम की लिखित सूचना देकर हताश गौसेवक सड़कों पर रोने-चिल्लाने बैठ गए। इस पर पुलिस ने 11 गौसेवकों पर ही सड़क पर बैठने का मुकदमा दर्ज कर दिया, जिसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने 'यह कैसा न्याय है' कहकर अपना आक्रोश जताया है। इस कार्रवाई के विरोध में राष्ट्रीय हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश सोनी ने खुली चेतावनी दी है कि या तो सरकार गोचर भूमि मुक्त कर गौ माता की व्यवस्था करे, अन्यथा यह आंदोलन पूरे मध्य प्रदेश में बड़ा रूप लेगा। वहीं, गौ रक्षक सेना और सनातन रक्षक सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विशालदास वैष्णव ने मांग की है कि सरकार को पूरे भारतवर्ष में गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने के लिए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि चरनोई भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और गौ रक्षकों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो आगे जगह-जगह उग्र आंदोलन किए जाएंगे।
मध्य प्रदेश के गंजबासौदा में सकल हिंदू समाज के गौ सेवकों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर गौसेवकों पर हुई कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। इस ज्ञापन के माध्यम से सिवनी मालवा में 14 गौसेवकों को सुनाए गए आजीवन कारावास के फैसले और सागर जिले के खिमलासा तहसील में 11 गौसेवकों पर दर्ज किए गए मुकदमे को वापस लेने की मांग की गई है। इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने गोचर भूमि को तत्काल अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। गौ सेवकों का कहना है कि गौरक्षक बिना किसी सरकारी वेतन या सुविधा के, दिन-रात निस्वार्थ भाव से गौ माता की सेवा और सुरक्षा में लगे रहते हैं, लेकिन फिर भी उन पर अत्याचार किया जा रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि चरनोई की भूमि को मुक्त कराने के लिए पिछले 3 वर्षों में सागर जिले के एसडीएम, तहसीलदार, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों को 164 बार ज्ञापन दिए गए। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो खुरई और बीना में चक्काजाम की लिखित सूचना देकर हताश गौसेवक सड़कों पर रोने-चिल्लाने बैठ गए। इस पर पुलिस ने 11 गौसेवकों पर ही सड़क पर बैठने का मुकदमा दर्ज कर दिया, जिसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने 'यह कैसा न्याय है' कहकर अपना आक्रोश जताया है। इस कार्रवाई के विरोध में राष्ट्रीय हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश सोनी ने खुली चेतावनी दी है कि या तो सरकार गोचर भूमि मुक्त कर गौ माता की व्यवस्था करे, अन्यथा यह आंदोलन पूरे मध्य प्रदेश में बड़ा रूप लेगा। वहीं, गौ रक्षक सेना और सनातन रक्षक सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विशालदास वैष्णव ने मांग की है कि सरकार को पूरे भारतवर्ष में गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने के लिए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि चरनोई भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और गौ रक्षकों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो आगे जगह-जगह उग्र आंदोलन किए जाएंगे।
- उत्तर प्रदेश के मेरठ में थाना लोहियानगर पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंग लीडर अलाउद्दीन की करीब ₹2.50 करोड़ की अवैध संपत्ति को कुर्क कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत की है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बकायदा ढोल-नगाड़ों के साथ मुनादी कराई और जब्त की गई संपत्तियों पर नोटिस चस्पा किए। कुर्क की गई अवैध संपत्तियों में ग्राम बजौट स्थित चार प्लॉट और मेरठ रेजीडेंसी का एक मकान शामिल है। आरोपी अलाउद्दीन (पुत्र अय्यूब) मुख्य रूप से जाकिर हुसैन कॉलोनी का निवासी है और वर्तमान में बिजली बंबा बाईपास स्थित जामिया रेजीडेंसी में रह रहा था। आरोपी के खिलाफ मेरठ, अयोध्या और राजस्थान में साइबर ठगी समेत अन्य गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं।1
- मेरठ में डीपी पब्लिक स्कूल, डेवलॉक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास पिछले दो महीनों से नालियों से गंदा पानी बाहर निकल कर आ रहा है और यहाँ कोई सफाई भी नहीं की जा रही है। इस वजह से लोगों को बेहद गंदे नाली के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर लोगों ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए सख्त कार्रवाई करने और इसका समाधान जल्द से जल्द करने का अनुरोध किया है। इस समस्या के संबंध में संपर्क के लिए मोबाइल नंबर 7451923290 भी दिया गया है।3
- मध्य प्रदेश के गंजबासौदा में सकल हिंदू समाज के गौ सेवकों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपकर गौसेवकों पर हुई कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। इस ज्ञापन के माध्यम से सिवनी मालवा में 14 गौसेवकों को सुनाए गए आजीवन कारावास के फैसले और सागर जिले के खिमलासा तहसील में 11 गौसेवकों पर दर्ज किए गए मुकदमे को वापस लेने की मांग की गई है। इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने गोचर भूमि को तत्काल अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। गौ सेवकों का कहना है कि गौरक्षक बिना किसी सरकारी वेतन या सुविधा के, दिन-रात निस्वार्थ भाव से गौ माता की सेवा और सुरक्षा में लगे रहते हैं, लेकिन फिर भी उन पर अत्याचार किया जा रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि चरनोई की भूमि को मुक्त कराने के लिए पिछले 3 वर्षों में सागर जिले के एसडीएम, तहसीलदार, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों को 164 बार ज्ञापन दिए गए। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो खुरई और बीना में चक्काजाम की लिखित सूचना देकर हताश गौसेवक सड़कों पर रोने-चिल्लाने बैठ गए। इस पर पुलिस ने 11 गौसेवकों पर ही सड़क पर बैठने का मुकदमा दर्ज कर दिया, जिसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने 'यह कैसा न्याय है' कहकर अपना आक्रोश जताया है। इस कार्रवाई के विरोध में राष्ट्रीय हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश सोनी ने खुली चेतावनी दी है कि या तो सरकार गोचर भूमि मुक्त कर गौ माता की व्यवस्था करे, अन्यथा यह आंदोलन पूरे मध्य प्रदेश में बड़ा रूप लेगा। वहीं, गौ रक्षक सेना और सनातन रक्षक सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विशालदास वैष्णव ने मांग की है कि सरकार को पूरे भारतवर्ष में गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने के लिए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि चरनोई भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और गौ रक्षकों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो आगे जगह-जगह उग्र आंदोलन किए जाएंगे।1
- उत्तर प्रदेश के हापुड़ (अर्जुन नगर) में एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक शिक्षिका को सीलपैक पानी की बोतल पर भरोसा करना बेहद भारी पड़ गया। शिक्षिका ने दुकान से पानी की एक सीलपैक बोतल खरीदी थी, लेकिन जैसे ही उन्होंने बोतल खोलकर पहला घूंट लिया, उनका मुंह और गला बुरी तरह झुलस गया। वास्तव में उस बोतल में पानी की जगह खतरनाक एसिड भरा हुआ था। इस भयानक हादसे के बाद शिक्षिका की हालत बिगड़ गई और उन्हें तुरंत मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद मेरठ और हापुड़ में हड़कंप मच गया है। पानी की इस सीलपैक बोतल ने एक तरह से मौत की दस्तक दी है, जिससे अब उस ब्रांडेड कंपनी और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इतनी बड़ी और जानलेवा लापरवाही आखिर कैसे हुई और क्या ब्रांडेड पानी की बोतलें भी अब सुरक्षित नहीं रह गई हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपनी प्यास बुझाने से पहले पूरी सावधानी बरतें और सीलपैक बोतलों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। इस घटना को लेकर लोगों को जागरूक और सुरक्षित करने के उद्देश्य से जानकारी को ज्यादा से ज्यादा साझा करने की बात कही जा रही है। 'Channel N TV LIVEWEBNEWS मेरठ मित्र' पर ऐंकर नवेद खान के साथ आई इस पूरी रिपोर्ट ने सीलपैक बोतलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिए हैं।1
- मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे के कथित व्यवहार और एक वायरल वीडियो को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ललिता गौतम हत्याकांड और उसके बाद प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से नाराज अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के लोग अब दूसरे जिलों से भी मेरठ की ओर पहुंच रहे हैं। कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के लोग पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय की मांग उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और नाराज लोगों की मांग है कि एसएसपी के व्यवहार और वायरल वीडियो से जुड़े पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और उनके खिलाफ बर्खास्तगी जैसी सख्त कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की चुप्पी को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में आए इस बड़े विवाद के बावजूद सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट कार्रवाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उस दिन पुलिस अधिकारियों के तेवर इतने सख्त क्यों थे और क्या यह कार्रवाई केवल स्थानीय स्तर पर लिया गया कोई फैसला थी, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल मेरठ में स्थिति बेहद गर्म बनी हुई है और माहौल को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है। अब सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस पूरे विवाद पर कोई बड़ा फैसला लेगी या फिर यह मामला यूं ही आगे और तूल पकड़ता रहेगा।1