शामली जिले में स्मार्ट मीटर ने जीता उपभोक्ताओं का भरोसा, जाँच से साबित हुई सटीकता शामली। शामली जिले में स्मार्ट मीटर पखवाड़ा के तहत बिजली विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान से उपभोक्ताओं में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। जिले में कुल करीब 2.88 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से बड़ी संख्या में घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जिन उपभोक्ताओं ने ये मीटर लगवाए हैं, वे अब काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए कई जगहों पर चेक मीटर लगाकर रीडिंग की जांच की, जिसमें स्मार्ट मीटर की सटीकता पूरी तरह साबित हुई। शामली, कैराना और ऊन तहसीलों के कई इलाकों में यह जांच हुई, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है। एक स्थानीय निवासी नदीम चौहान ने बताया, "पहले बिल अनुमानित आते थे और हैरानी होती थी कि इतना क्यों आया। अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद मोबाइल ऐप पर रोजाना की खपत देखकर हम बिजली बचाने लगे हैं। बिल बिल्कुल सही और पारदर्शी आता है, कोई गड़बड़ी नहीं।" चेक मीटर से सामने आया सच अधिकारियों के अनुसार, जागरूकता कार्यक्रमों, चेक मीटर वेरिफिकेशन और प्रचार से भ्रांतियां दूर हो रही हैं। कई उपभोक्ता अब खुद आगे आकर स्मार्ट मीटर लगवा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य जिले में पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बिजली व्यवस्था स्थापित करना है। उपभोक्ता चेक मीटर लगवाकर खुद स्मार्ट मीटर की सत्यता जांच सकते हैं। स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पारंपरिक मीटर जैसा ही है, लेकिन इसमें कम्यूनिकेशन मॉड्यूल लगा होता है। यह मॉड्यूल बिजली खपत और रीडिंग की जानकारी सीधे डिजिटल सर्वर पर भेजता है। उपभोक्ता मोबाइल ऐप पर रियल-टाइम में अपनी खपत देख सकते हैं, जिससे अनुमानित बिलिंग और गलत रीडिंग की शिकायतें लगभग खत्म हो गई हैं। मीटर रीडर की जरूरत खत्म स्मार्ट मीटर से अब मीटर रीडर को घर-घर जाकर रीडिंग लेने की आवश्यकता नहीं। रीडिंग ऑटोमैटिक कंपनी के सॉफ्टवेयर में दर्ज हो जाती है। इससे बिल वितरण में देरी और गड़बड़ियां खत्म हो रही हैं, साथ ही सर्विस चार्ज भी नहीं देना पड़ता। कोई सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाने पर कोई सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) नहीं ली जाती। पहले मीटर बदलवाने पर अतिरिक्त चार्ज लगते थे, लेकिन अब यह सुविधा नहीं है। उपभोक्ता का फायदा ही फायदा अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र कुमार ने बताया कि स्मार्ट मीटर से सटीक बिलिंग के साथ उपभोक्ताओं को पारदर्शिता, छूट, समय की बचत और बेहतर नियंत्रण जैसे कई फायदे मिल रहे हैं। विभाग अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहा है और अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
शामली जिले में स्मार्ट मीटर ने जीता उपभोक्ताओं का भरोसा, जाँच से साबित हुई सटीकता शामली। शामली जिले में स्मार्ट मीटर पखवाड़ा के तहत बिजली विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान से उपभोक्ताओं में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। जिले में कुल करीब 2.88 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से बड़ी संख्या में घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जिन उपभोक्ताओं ने ये मीटर लगवाए हैं, वे अब काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए कई जगहों पर चेक मीटर लगाकर रीडिंग की जांच की, जिसमें स्मार्ट मीटर की सटीकता पूरी तरह साबित हुई। शामली, कैराना और ऊन तहसीलों के कई इलाकों में यह जांच हुई, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है। एक स्थानीय निवासी नदीम चौहान ने बताया, "पहले बिल अनुमानित आते थे और हैरानी होती थी कि इतना क्यों आया। अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद मोबाइल ऐप पर रोजाना की खपत देखकर हम बिजली बचाने लगे हैं। बिल बिल्कुल सही और पारदर्शी आता है, कोई गड़बड़ी नहीं।" चेक मीटर से सामने आया सच अधिकारियों के अनुसार, जागरूकता कार्यक्रमों, चेक मीटर वेरिफिकेशन और प्रचार से भ्रांतियां दूर हो रही हैं। कई उपभोक्ता अब खुद आगे आकर स्मार्ट मीटर लगवा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य जिले में पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बिजली व्यवस्था स्थापित करना है। उपभोक्ता चेक मीटर लगवाकर खुद स्मार्ट मीटर की सत्यता जांच सकते हैं। स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पारंपरिक मीटर जैसा ही है, लेकिन इसमें कम्यूनिकेशन मॉड्यूल लगा होता है। यह मॉड्यूल बिजली खपत और रीडिंग की जानकारी सीधे डिजिटल सर्वर पर भेजता है। उपभोक्ता मोबाइल ऐप पर रियल-टाइम में अपनी खपत देख सकते हैं, जिससे अनुमानित बिलिंग और गलत रीडिंग की शिकायतें लगभग खत्म हो गई हैं। मीटर रीडर की जरूरत खत्म स्मार्ट मीटर से अब मीटर रीडर को घर-घर जाकर रीडिंग लेने की आवश्यकता नहीं। रीडिंग ऑटोमैटिक कंपनी के सॉफ्टवेयर में दर्ज हो जाती है। इससे बिल वितरण में देरी और गड़बड़ियां खत्म हो रही हैं, साथ ही सर्विस चार्ज भी नहीं देना पड़ता। कोई सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाने पर कोई सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) नहीं ली जाती। पहले मीटर बदलवाने पर अतिरिक्त चार्ज लगते थे, लेकिन अब यह सुविधा नहीं है। उपभोक्ता का फायदा ही फायदा अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र कुमार ने बताया कि स्मार्ट मीटर से सटीक बिलिंग के साथ उपभोक्ताओं को पारदर्शिता, छूट, समय की बचत और बेहतर नियंत्रण जैसे कई फायदे मिल रहे हैं। विभाग अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहा है और अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
- शामली। शामली जिले में स्मार्ट मीटर पखवाड़ा के तहत बिजली विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान से उपभोक्ताओं में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। जिले में कुल करीब 2.88 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से बड़ी संख्या में घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जिन उपभोक्ताओं ने ये मीटर लगवाए हैं, वे अब काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए कई जगहों पर चेक मीटर लगाकर रीडिंग की जांच की, जिसमें स्मार्ट मीटर की सटीकता पूरी तरह साबित हुई। शामली, कैराना और ऊन तहसीलों के कई इलाकों में यह जांच हुई, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है। एक स्थानीय निवासी नदीम चौहान ने बताया, "पहले बिल अनुमानित आते थे और हैरानी होती थी कि इतना क्यों आया। अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद मोबाइल ऐप पर रोजाना की खपत देखकर हम बिजली बचाने लगे हैं। बिल बिल्कुल सही और पारदर्शी आता है, कोई गड़बड़ी नहीं।" चेक मीटर से सामने आया सच अधिकारियों के अनुसार, जागरूकता कार्यक्रमों, चेक मीटर वेरिफिकेशन और प्रचार से भ्रांतियां दूर हो रही हैं। कई उपभोक्ता अब खुद आगे आकर स्मार्ट मीटर लगवा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य जिले में पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बिजली व्यवस्था स्थापित करना है। उपभोक्ता चेक मीटर लगवाकर खुद स्मार्ट मीटर की सत्यता जांच सकते हैं। स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पारंपरिक मीटर जैसा ही है, लेकिन इसमें कम्यूनिकेशन मॉड्यूल लगा होता है। यह मॉड्यूल बिजली खपत और रीडिंग की जानकारी सीधे डिजिटल सर्वर पर भेजता है। उपभोक्ता मोबाइल ऐप पर रियल-टाइम में अपनी खपत देख सकते हैं, जिससे अनुमानित बिलिंग और गलत रीडिंग की शिकायतें लगभग खत्म हो गई हैं। मीटर रीडर की जरूरत खत्म स्मार्ट मीटर से अब मीटर रीडर को घर-घर जाकर रीडिंग लेने की आवश्यकता नहीं। रीडिंग ऑटोमैटिक कंपनी के सॉफ्टवेयर में दर्ज हो जाती है। इससे बिल वितरण में देरी और गड़बड़ियां खत्म हो रही हैं, साथ ही सर्विस चार्ज भी नहीं देना पड़ता। कोई सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाने पर कोई सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) नहीं ली जाती। पहले मीटर बदलवाने पर अतिरिक्त चार्ज लगते थे, लेकिन अब यह सुविधा नहीं है। उपभोक्ता का फायदा ही फायदा अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र कुमार ने बताया कि स्मार्ट मीटर से सटीक बिलिंग के साथ उपभोक्ताओं को पारदर्शिता, छूट, समय की बचत और बेहतर नियंत्रण जैसे कई फायदे मिल रहे हैं। विभाग अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहा है और अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहा है।1
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