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स्कूल में लगा टाला । बच्चे स्कूल परिसर के बाहर किताब लेकर पड़ने बाठे
Deepesh Jangde
स्कूल में लगा टाला । बच्चे स्कूल परिसर के बाहर किताब लेकर पड़ने बाठे
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- सिमगा में भंयकर सड़क हादसा।। ट्रक ने पिछे से बस को मारी टक्कर बड़ी दुर्घटना सिमगा दरचुरा पास बस को मारी ट्रक ने ठोकर 5 की मौत 29 लोग घायल1
- कवर्धा के बोड़ला वन क्षेत्र से लगे चोरभट्टी RF-62 में हरे-भरे कीमती वृक्षों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कटाई किसी दूरस्थ जंगल में नहीं बल्कि नेशनल हाईवे-30 से महज करीब चार फीट की दूरी पर की गई है, फिर भी वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। जानकारी के अनुसार अज्ञात लोगों ने चार से पांच हरे-भरे और कीमती वृक्षों को काट दिया, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वन विभाग के कर्मचारी नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण करते तो इतनी खुली जगह पर इस तरह की अवैध कटाई संभव ही नहीं थी। मामले में जब विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो डिप्टी रेंजर का बयान बेहद चौंकाने वाला रहा। उन्होंने कहा कि “जंगल खुला है तो अवैध कटाई होगी ही”। इस बयान से विभाग की जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं रेंजर आकाश यादव इस पूरे मामले को दबाने में लगे नजर आए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने इस विषय को ज्यादा उजागर न करने और मामले को गोपनीय रखने की बात कही, जिससे विभाग की भूमिका को लेकर संदेह और गहरा गया है। इधर इस मामले में डीएफओ से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया। कॉल करने से पहले ही उन्हें कटे हुए वृक्षों की फोटो और वीडियो भी भेजे गए थे, इसके बावजूद उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नेशनल हाईवे के किनारे खुलेआम वृक्ष काटे जा रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से बच रहे हैं, तो आखिर वन संपदा की सुरक्षा कैसे होगी। अब देखना होगा कि वन विभाग इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला1
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- 6 मार्च शुक्रवार को शाम 4 बजे मिली जानकारी अनुसार खैरागढ़ विकासखंड के ग्राम खमतराई की राधा बाई वर्मा जैविक खेती और विविध आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर क्षेत्र में “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना चुकी हैं। वर्ष 2 हजार 17 में ओम सांई स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने जैविक खेती अपनाई और सब्जी उत्पादन, धान की खेती, मछली पालन तथा जैविक कीटनाशक निर्माण शुरू किया। इसके साथ ही कृषि सखी और मास्टर ट्रेनर के रूप में किसानों को प्रशिक्षण भी दे रही हैं। इन गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय लगभग 5 लाख 16 हजार रुपये तक पहुंच गई है। जैविक खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए 9 नवम्बर 2 हजार 25 को राजभवन रायपुर में उन्हें 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली।1
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