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विधायक के निजी सुरक्षा गार्ड ने अत्यंत सादगी पूर्ण तरीके से मनाया अपना जन्मदिन चौहटन विधायक आदुराम मेघवाल के निजी सुरक्षा गार्ड जसराज पंवार ने अपने 28वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में पुण्य का कार्य कर एक अनोखी मिसाल पेश की । पंवार ने अपने जन्मदिन पर अलग अलग जगह पक्षियों के पानी पीने के लिए परिंडे लगाएं और कई जगह पौधारोपण भी किया । इसके तहत पंवार ने न्यू अम्बेडकर सर्कल राजकीय महाविद्यालय, महावीर नगर, अम्बेडकर कॉलोनी, सिटी सेंटर सहित कई जगह गर्मियों में पक्षियों के पानी पीने हेतु परिंडे लगाएं एवं न्यू अम्बेडकर सर्कल पर अपने साथियों के साथ पौधारोपण भी किया इसके चलते पंवार ने बताया कि जन्मदिन के अवसर पर पार्टी जैसे अन्य फिजूल का खर्चा न करके सेवा के कार्य करने चाहिए।

1 hr ago
user_Pukhraj soni
Pukhraj soni
पत्रकार पचपदरा, बाड़मेर, राजस्थान•
1 hr ago
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विधायक के निजी सुरक्षा गार्ड ने अत्यंत सादगी पूर्ण तरीके से मनाया अपना जन्मदिन चौहटन विधायक आदुराम मेघवाल के निजी सुरक्षा गार्ड जसराज पंवार ने अपने 28वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में पुण्य का कार्य कर एक अनोखी मिसाल पेश की । पंवार ने अपने जन्मदिन पर अलग अलग जगह पक्षियों के पानी पीने के लिए परिंडे लगाएं और कई जगह पौधारोपण भी किया । इसके तहत पंवार ने न्यू अम्बेडकर सर्कल राजकीय महाविद्यालय, महावीर नगर, अम्बेडकर कॉलोनी, सिटी सेंटर सहित कई जगह गर्मियों में पक्षियों के पानी पीने हेतु परिंडे लगाएं एवं न्यू अम्बेडकर सर्कल पर अपने साथियों के साथ पौधारोपण भी किया इसके चलते पंवार ने बताया कि जन्मदिन के अवसर पर पार्टी जैसे अन्य फिजूल का खर्चा न करके सेवा के कार्य करने चाहिए।

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  • बालोतरा जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर 3 में लगे ट्रांसफॉर्मर से लगातार चिंगारियां निकल रही हैं, जिससे कभी भी बड़े हादसे का खतरा है। विद्युत विभाग की घोर लापरवाही के कारण स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है।
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    बालोतरा जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर 3 में लगे ट्रांसफॉर्मर से लगातार चिंगारियां निकल रही हैं, जिससे कभी भी बड़े हादसे का खतरा है। विद्युत विभाग की घोर लापरवाही के कारण स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है।
    user_Pukhraj soni
    Pukhraj soni
    पत्रकार पचपदरा, बाड़मेर, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • वन्यजीव प्रेमियों ने बचाई नीलगाय के बच्चे की जान, कुतो के चंगुल से छुड़ा कर वन विभाग को किया सुपुर्द। वन्यजीव प्रेमी मदन सियाग बने प्रेणा के स्त्रोत।
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    वन्यजीव प्रेमियों ने बचाई नीलगाय के बच्चे की जान, कुतो के चंगुल से छुड़ा कर वन विभाग को किया सुपुर्द।
वन्यजीव प्रेमी मदन सियाग बने प्रेणा के स्त्रोत।
    user_विक्रमसिंह चौहान
    विक्रमसिंह चौहान
    Local News Reporter शेरगढ़, जोधपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • बायतू के भैराज की ढाणी में, दुर्गम रास्तों के बावजूद, अधिकारी ट्रैक्टर से पहुंचे और ग्रामीणों की पेयजल समस्या सुनी। उन्होंने मौके पर ही स्कूल परिसर के सार्वजनिक टांके में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करवाई, जिससे ग्रामीणों को तुरंत राहत मिली। अधिकारियों ने भविष्य में निर्बाध आपूर्ति के निर्देश दिए और ग्रामीणों ने त्वरित समाधान पर संतोष जताया।
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    बायतू के भैराज की ढाणी में, दुर्गम रास्तों के बावजूद, अधिकारी ट्रैक्टर से पहुंचे और ग्रामीणों की पेयजल समस्या सुनी। उन्होंने मौके पर ही स्कूल परिसर के सार्वजनिक टांके में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करवाई, जिससे ग्रामीणों को तुरंत राहत मिली। अधिकारियों ने भविष्य में निर्बाध आपूर्ति के निर्देश दिए और ग्रामीणों ने त्वरित समाधान पर संतोष जताया।
    user_Ghamanda Ram
    Ghamanda Ram
    पत्रकार बायतू, बाड़मेर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Post by राजेश कुमार
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    Post by राजेश कुमार
    user_राजेश कुमार
    राजेश कुमार
    Shergarh, Jodhpur•
    9 hrs ago
  • रेगिस्तान प्यासा, मंच पर भाषणों की बरसात… पानी पर राजनीति कब होगी बंद?” जैसलमेर के फलसूंड की रात्रि चौपाल में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का बेहद आक्रामक अंदाज देखने को मिला। मंच से भ्रष्टाचार पर गरजते हुए उन्होंने साफ कहा कि “जो पानी के पैसे में चोरी करेगा, उसका हाल महेश जोशी जैसा होगा।” बयान जोरदार था, तालियां भी खूब बजीं, लेकिन रेगिस्तान की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर इतने सालों से पानी की इस लूट का जिम्मेदार कौन है? क्योंकि सच यह है कि जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर के हजारों गांव आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कहीं जल जीवन मिशन की पाइपलाइन अधूरी पड़ी है, कहीं नल लगे हैं लेकिन पानी नहीं आता, कहीं टंकियां बनकर खड़ी हैं लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो कहीं पूरा सिस्टम सिर्फ टैंकरों के भरोसे चल रहा है। गांवों में आज भी तपती गर्मी में कई किलोमीटर दूर से महंगे दामों में टैंकरों से पानी आ रहा हैं और दूसरी तरफ मंचों पर करोड़ों की योजनाओं के भाषण दिए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कटाक्ष तो यही है कि हर सरकार आते ही पिछली सरकार को पानी चोर बता देती है, लेकिन जनता की प्यास कभी खत्म नहीं होती। एक सरकार कहती है पिछली सरकार ने लूट की… दूसरी कहती है पहले वालों ने फाइलों में विकास कर दिया… लेकिन गांव का आदमी आज भी पूछ रहा है — “साहब, हमारे घर पानी कब आएगा?” रात्रि चौपाल में मंत्री ने PHED व्यवस्था को “पूरी तरह कोलैप्स” बताया। सवाल यह है कि अगर सिस्टम इतना ही ध्वस्त है तो वर्षों से बैठे अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या किसी बड़े अफसर पर कार्रवाई हुई? क्या किसी बड़े ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया? या फिर हमेशा की तरह छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर मामला शांत कर दिया जाएगा? जनता यह भी पूछ रही है कि जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ खर्च होने के बाद भी आखिर टैंकर माफिया इतने ताकतवर कैसे हो गए? अगर हर घर तक पानी पहुंच चुका है जैसा रिपोर्टों में दिखाया गया, तो फिर हर गर्मी में टैंकरों की राजनीति क्यों शुरू हो जाती है? क्यों हर गांव में पानी “किसकी सिफारिश है” देखकर बांटा जाता है? असल में रेगिस्तान की सबसे बड़ी त्रासदी सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि पानी पर राजनीति है। यहां हर चुनाव में पानी मुद्दा बनता है, हर नेता पानी पर भाषण देता है, हर अधिकारी मीटिंग करता है, हर योजना का उद्घाटन होता है… लेकिन गर्मी आते ही वही पुरानी तस्वीर सामने आ जाती है — सूखी टंकियां, खाली नल और परेशान जनता। बिजली को लेकर भी मंच से बड़े दावे किए गए। कांग्रेस पर झूठे आंकड़े भेजने के आरोप लगे। मगर गांवों में लोग आज भी घंटों बिजली कटौती झेल रहे हैं। जनता कह रही है कि सरकारें बदलती रहीं, बयान बदलते रहे, लेकिन हालात ज्यादा नहीं बदले। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब जनता सवाल पूछती है तो नेता कहते हैं “पिछली सरकार जिम्मेदार है”… और जब वही नेता सत्ता में आ जाते हैं तो अधिकारी जिम्मेदार हो जाते हैं। लेकिन कभी किसी ने यह नहीं बताया कि आखिर जनता की बदहाली की जिम्मेदारी लेने वाला कौन है? आज जरूरत भाषणों की नहीं, ईमानदार कार्रवाई की है। जरूरत उन फाइलों को खोलने की है जिनमें “हर घर जल” का सपना पूरा दिखाया गया। जरूरत उन ठेकेदारों पर कार्रवाई की है जिन्होंने रेगिस्तान की प्यास पर करोड़ों कमाए। और जरूरत उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की है जिनकी रिपोर्टों में सबकुछ “संतोषजनक” चलता रहता है। क्योंकि रेगिस्तान की जनता अब सिर्फ भाषण नहीं सुनना चाहती… उसे अपने घर के नल में पानी चाहिए।
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    रेगिस्तान प्यासा, मंच पर भाषणों की बरसात… पानी पर राजनीति कब होगी बंद?”
जैसलमेर के फलसूंड की रात्रि चौपाल में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का बेहद आक्रामक अंदाज देखने को मिला। मंच से भ्रष्टाचार पर गरजते हुए उन्होंने साफ कहा कि “जो पानी के पैसे में चोरी करेगा, उसका हाल महेश जोशी जैसा होगा।”
बयान जोरदार था, तालियां भी खूब बजीं, लेकिन रेगिस्तान की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर इतने सालों से पानी की इस लूट का जिम्मेदार कौन है?
क्योंकि सच यह है कि जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर के हजारों गांव आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कहीं जल जीवन मिशन की पाइपलाइन अधूरी पड़ी है, कहीं नल लगे हैं लेकिन पानी नहीं आता, कहीं टंकियां बनकर खड़ी हैं लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो कहीं पूरा सिस्टम सिर्फ टैंकरों के भरोसे चल रहा है।
गांवों में आज भी तपती गर्मी में कई किलोमीटर दूर से महंगे दामों में टैंकरों से पानी आ रहा हैं और दूसरी तरफ मंचों पर करोड़ों की योजनाओं के भाषण दिए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा कटाक्ष तो यही है कि हर सरकार आते ही पिछली सरकार को पानी चोर बता देती है, लेकिन जनता की प्यास कभी खत्म नहीं होती।
एक सरकार कहती है पिछली सरकार ने लूट की… दूसरी कहती है पहले वालों ने फाइलों में विकास कर दिया… लेकिन गांव का आदमी आज भी पूछ रहा है — “साहब, हमारे घर पानी कब आएगा?”
रात्रि चौपाल में मंत्री ने PHED व्यवस्था को “पूरी तरह कोलैप्स” बताया। सवाल यह है कि अगर सिस्टम इतना ही ध्वस्त है तो वर्षों से बैठे अधिकारी क्या कर रहे थे?
क्या किसी बड़े अफसर पर कार्रवाई हुई?
क्या किसी बड़े ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया?
या फिर हमेशा की तरह छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर मामला शांत कर दिया जाएगा?
जनता यह भी पूछ रही है कि जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ खर्च होने के बाद भी आखिर टैंकर माफिया इतने ताकतवर कैसे हो गए?
अगर हर घर तक पानी पहुंच चुका है जैसा रिपोर्टों में दिखाया गया, तो फिर हर गर्मी में टैंकरों की राजनीति क्यों शुरू हो जाती है?
क्यों हर गांव में पानी “किसकी सिफारिश है” देखकर बांटा जाता है?
असल में रेगिस्तान की सबसे बड़ी त्रासदी सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि पानी पर राजनीति है।
यहां हर चुनाव में पानी मुद्दा बनता है, हर नेता पानी पर भाषण देता है, हर अधिकारी मीटिंग करता है, हर योजना का उद्घाटन होता है… लेकिन गर्मी आते ही वही पुरानी तस्वीर सामने आ जाती है — सूखी टंकियां, खाली नल और परेशान जनता।
बिजली को लेकर भी मंच से बड़े दावे किए गए। कांग्रेस पर झूठे आंकड़े भेजने के आरोप लगे। मगर गांवों में लोग आज भी घंटों बिजली कटौती झेल रहे हैं।
जनता कह रही है कि सरकारें बदलती रहीं, बयान बदलते रहे, लेकिन हालात ज्यादा नहीं बदले।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब जनता सवाल पूछती है तो नेता कहते हैं “पिछली सरकार जिम्मेदार है”… और जब वही नेता सत्ता में आ जाते हैं तो अधिकारी जिम्मेदार हो जाते हैं।
लेकिन कभी किसी ने यह नहीं बताया कि आखिर जनता की बदहाली की जिम्मेदारी लेने वाला कौन है?
आज जरूरत भाषणों की नहीं, ईमानदार कार्रवाई की है।
जरूरत उन फाइलों को खोलने की है जिनमें “हर घर जल” का सपना पूरा दिखाया गया।
जरूरत उन ठेकेदारों पर कार्रवाई की है जिन्होंने रेगिस्तान की प्यास पर करोड़ों कमाए।
और जरूरत उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की है जिनकी रिपोर्टों में सबकुछ “संतोषजनक” चलता रहता है।
क्योंकि रेगिस्तान की जनता अब सिर्फ भाषण नहीं सुनना चाहती…
उसे अपने घर के नल में पानी चाहिए।
    user_Gopal singh jodha
    Gopal singh jodha
    Local News Reporter फलसूंड, जैसलमेर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • Post by लाबु सिंह
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    Post by लाबु सिंह
    user_लाबु सिंह
    लाबु सिंह
    Farmer जालोर, जालोर, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • Post by मंगलाराम राजपुरोहित
    1
    Post by मंगलाराम राजपुरोहित
    user_मंगलाराम राजपुरोहित
    मंगलाराम राजपुरोहित
    जालोर, जालोर, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • सोइन्तरा में खारा पानी बना जी का जंजाल, 800 टीडीएस तक पानी पीने को मजबूर ग्रामीण। 2020 के बाद कभी नही भरा उच्च जलाशय। सरकारे आई,सरकारे गई पर समस्या जस की तस। क्योंकि नेताओं नही है जनता से सरोकार।
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    सोइन्तरा में खारा पानी बना जी का जंजाल, 800 टीडीएस तक पानी पीने को मजबूर ग्रामीण। 2020 के बाद कभी नही भरा उच्च जलाशय। सरकारे आई,सरकारे गई पर समस्या जस की तस। क्योंकि नेताओं नही है जनता से सरोकार।
    user_विक्रमसिंह चौहान
    विक्रमसिंह चौहान
    Local News Reporter शेरगढ़, जोधपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
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