पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक पर अधूरी तैयारियां वर्ल्ड फेमस पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है… लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बदहाल रास्ते, जर्जर सुविधाएं और अधूरी तैयारियां अब प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। देखिए ये रिपोर्ट उत्तराखंड के प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स में शामिल पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। लेकिन इस बार ट्रेक खुलने के बाद भी हालात पूरी तरह दुरुस्त नहीं दिख रहे। ट्रैक पर बने शौचालय जर्जर हालत में हैं… कई जगह रास्ते टूटे और क्षतिग्रस्त पड़े हैं… जबकि विश्राम स्थल भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं।ऐसे में पर्यटकों को शुरुआती सफर से ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इन अव्यवस्थाओं का असर सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं है… स्थानीय गाइड और पोर्टर भी परेशान हैं।जहां प्रशासन ट्रेक शुरू होने का दावा कर रहा है… वहीं जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी साफ दिखाई दे रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल ट्रेक खुलने से पहले मरम्मत और सुधार कार्य पूरे किए जाते हैं… लेकिन इस बार तैयारियां अधूरी छोड़ दी गई हैं।फिलहाल प्रशासन जल्द व्यवस्था ठीक करने कि बात कर रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना पूरी तैयारी के ट्रेक खोलना… पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के साथ समझौता नहीं है?अगर जल्द व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं… तो इसका असर न सिर्फ पर्यटन पर पड़ेगा… बल्कि बागेश्वर जिले की छवि भी दांव पर लग सकती है।
पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक पर अधूरी तैयारियां वर्ल्ड फेमस पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है… लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बदहाल रास्ते, जर्जर सुविधाएं और अधूरी तैयारियां अब प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। देखिए ये रिपोर्ट उत्तराखंड के प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स में शामिल पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। लेकिन इस बार ट्रेक खुलने के बाद भी हालात पूरी तरह दुरुस्त नहीं दिख रहे। ट्रैक पर बने शौचालय जर्जर हालत में हैं… कई जगह रास्ते टूटे और क्षतिग्रस्त पड़े हैं… जबकि विश्राम स्थल भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं।ऐसे में पर्यटकों को शुरुआती सफर से ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इन अव्यवस्थाओं का असर सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं है… स्थानीय गाइड और पोर्टर भी परेशान हैं।जहां प्रशासन ट्रेक शुरू होने का दावा कर रहा है… वहीं जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी साफ दिखाई दे रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल ट्रेक खुलने से पहले मरम्मत और सुधार कार्य पूरे किए जाते हैं… लेकिन इस बार तैयारियां अधूरी छोड़ दी गई हैं।फिलहाल प्रशासन जल्द व्यवस्था ठीक करने कि बात कर रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना पूरी तैयारी के ट्रेक खोलना… पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के साथ समझौता नहीं है?अगर जल्द व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं… तो इसका असर न सिर्फ पर्यटन पर पड़ेगा… बल्कि बागेश्वर जिले की छवि भी दांव पर लग सकती है।
- गरुड़ के सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल में शिक्षा का स्तर देखकर कौन न वाह न कहे! एक वायरल वीडियो में कक्षा 1 का मात्र छह साल का बच्चा 'लव' अंग्रेजी को इतनी सहजता से पढ़ रहा है मानो कोई बड़ा विद्वान हो। यह दृश्य न केवल अभिभावकों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि क्षेत्रीय शिक्षा व्यवस्था की मजबूती को भी प्रमाणित करता है, जहां छोटे-छोटे बच्चे भाषा सीखने में इतनी आसानी हासिल कर रहे हैं।1
- Post by Uttarakhand BBP Media News1
- सफलता अंक नहीं होती और असफलता घातक नहीं होती है,1
- Post by Surendra Kumar1
- Post by Jagdish Ballabh Sharma4
- नैनीताल एस.एस.पी.ने मासिक अपराध समीक्षा बैठक के दौरान लंबित जांचों पर नाराजगी जाहिर करते हुए अपने जांच अधिकारियों को आबकारी और विद्युत चोरी समेत अन्य मामलों में तीन महीनों की जगह 15 दिनों में जांच रिपोर्ट जमा करने को कहा है। उन्होंने कहा की महिला और बच्चों को पेट पर लात मारने के बाद एसएसपी कार्यालय में धरने पर बैठने वालों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। नैनीताल की पुलिस लाइन में आज अयोजित मासिक अपराध समीक्षा बैठक में जिले के सभी एस.ओ., कोतवाल, सी.ओ., एस.पी.के साथ एस.एस.पी.मंजूनाथ टीसी ने बैठक की। इस बैठक में पुलिस के आचरण, पारदर्शिता और समयबद्ध विवेचना पर विशेष ध्यान दिया गया। जिले में चल रही जांचों में अधिकारियों की विवेचना में देरी को लेकर एस.एस.पी.नाराज हुए। उन्होंने, जांच के लिए 15 दिनों की समय सीमा निर्धारित करते हुए जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द जमा करने के एदेश दिए। कहा कि एस.ओ., कोतवाल और सी.ओ.को विद्युत और आबकारी एक्ट की शिकायतों की जांच जल्दी पूरी करनी है। इसके अलावा जब्त किया गया सभी माल ई-मालखाने में दाखिल होगा। उन्होंने, आगामी पर्यटन सीजन और मार्च महीने के अपराधों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में थाना प्रभारियों (SHO), फायर सर्विस, ट्रैफिक, पी.ए.सी.और होमगार्ड के अधिकारियों/कर्मचारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य रूप से पुलिस के आचरण एवं व्यवहार को प्राथमिकता देते हुए निर्देशित किया गया कि आमजन के साथ संवाद करते समय पुलिस कर्मियों का व्यवहार शालीन एवं संवेदनशील होना चाहिए। विशेष रूप से यह स्पष्ट किया गया कि ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार के नशे का सेवन कर जनता से दुर्व्यवहार करने वाले कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। पुलिस कप्तान ने आगामी पर्यटन सीजन के लिए पुलिस के आचरण और व्यवहार को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। पुलिस कर्मियों को भरोसा दिलाते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि ड्यूटी के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी समस्या या विवाद की स्थिति में पुलिस प्रशासन अपने कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। लेकिन, अनुशासनहीनता या नशे की स्थिति में दुर्व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जाएगा।1
- पिथौरागढ़: रामगंगा वा सरयू नदी में भारी मशीनों से खनन पर हाई कोर्ट की रोक1
- काफल, वो लाल-रसीले बेरी के दाने, बस एक चखते ही जीभ पर जादू बिखेर देते हैं—खट्टा-मीठा स्वाद इतना तीखा और लुभावना कि मन भटक जाए पहाड़ी जंगलों की ओर। अप्रैल-मई में पकने वाले ये छोटे-छोटे फल, कच्चे होने पर हल्की खटास के साथ चबने में क्रंची आनंद देते हैं, जबकि पके काफल का रस गले में उतरते ही मीठी ठंडक फैला देता है, मानो हिमालय की ठंडी हवा हो मुंह में घुली हुई। स्थानीय लोकगीतों में गाए जाने वाले इस फल की महक इतनी शानदार कि बच्चे-बूढ़े पहाड़ चढ़कर इकट्ठा करने को आतुर हो जाते हैं; एक मुट्ठी काफल खाकर लगता है जैसे प्रकृति ने खुद अपना अमृत भेजा हो, जो न सिर्फ तरोताजा करता है बल्कि कुमाऊँनी संस्कृति की सजीव याद दिला देता है। #kafal #काफल #himalyanbery1