कच्चे पुल से जनता को हो रही परेशानी बी आर ओ ने खड़े किए हाथ. बैजनाथ वैली ब्रिज: 10 सालों से अस्थायी पुल के सहारे जिंदगी, BRO बोला- 'फिलहाल नहीं बनेगा पक्का पुल' कच्चे पुल से जनता को हो रही परेशानी बी आर ओ ने खड़े किए हाथ. बैजनाथ वैली ब्रिज: 10 सालों से अस्थायी पुल के सहारे जिंदगी, BRO बोला- 'फिलहाल नहीं बनेगा पक्का पुल' बैजनाथ: बैजनाथ में बैली ब्रिज पर सफर करना अब आम जनता और वाहन चालकों के लिए हादसों को न्योता देने जैसा हो गया है। पिछले 10 वर्षों से यहाँ एक अस्थायी (टैम्परेरी) पुल बना हुआ है, जो अब स्थानीय निवासियों और यात्रियों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। पक्के निर्माण के इंतजार में एक दशक बीत गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। सर्दियों में फिसलते वाहन, रात भर ध्वनि प्रदूषण अस्थायी पुल की लोहे की प्लेटें घिस चुकी हैं। सर्दियों के मौसम में ओस और कोहरे के कारण इन प्लेटों पर गाड़ियाँ फिसलने लगती हैं, जिससे हर समय बड़े हादसे का डर बना रहता है। इसके अलावा, जब भी कोई भारी वाहन इस पुल से गुजरता है, तो लोहे के ढांचों की टकराने की तेज आवाज़ें पूरे इलाके में गूंजती हैं। रात के समय यह ध्वनि प्रदूषण आसपास रहने वाले लोगों की नींद हराम कर रहा है। शिक्षक सुरेन्द्र वर्मा की चेतावनी: "जागो विभाग!" स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए शिक्षक सुरेन्द्र वर्मा ने लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताया है। उन्होंने कहा: "जागो विभाग! आखिर क्यों किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? 10 साल का समय कम नहीं होता। जब तक कोई जान-माल का नुकसान नहीं होगा, तब तक क्या जिम्मेदार अधिकारी नींद से नहीं जागेंगे?" बीआरओ (BRO) का बयान: अभी और करना होगा इंतजार जनता की बढ़ती मांग और शिकायतों के बीच बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के रुख ने लोगों को और निराश कर दिया है। BRO के अनुसार, तकनीकी और बजटीय कारणों के चलते फिलहाल यहाँ पक्का पुल बनाने की कोई योजना नहीं है। इस बयान के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश और गहरा गया है। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण हर दिन हजारों लोग जान जोखिम में डालकर इस पुल को पार करने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि जनआक्रोश के बाद विभाग हरकत में आता है या जनता को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा। ऐसी ही निष्पक्ष और जमीनी खबरों के लिए हमारे चैनल 'स्वर स्वतंत्र' को सब्सक्राइब करें और हमसे जुड़ें!
कच्चे पुल से जनता को हो रही परेशानी बी आर ओ ने खड़े किए हाथ. बैजनाथ वैली ब्रिज: 10 सालों से अस्थायी पुल के सहारे जिंदगी, BRO बोला- 'फिलहाल नहीं बनेगा पक्का पुल' कच्चे पुल से जनता को हो रही परेशानी बी आर ओ ने खड़े किए हाथ. बैजनाथ वैली ब्रिज: 10 सालों से अस्थायी पुल के सहारे जिंदगी, BRO बोला- 'फिलहाल नहीं बनेगा पक्का पुल' बैजनाथ: बैजनाथ में बैली ब्रिज पर सफर करना अब आम जनता और वाहन चालकों के लिए हादसों को न्योता देने जैसा हो गया है। पिछले 10 वर्षों से यहाँ एक अस्थायी (टैम्परेरी) पुल बना हुआ है, जो अब स्थानीय निवासियों और यात्रियों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। पक्के निर्माण के इंतजार में एक दशक बीत गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। सर्दियों में फिसलते वाहन, रात भर ध्वनि प्रदूषण अस्थायी पुल की लोहे की प्लेटें घिस चुकी हैं। सर्दियों के मौसम में ओस और कोहरे के कारण इन प्लेटों पर गाड़ियाँ फिसलने लगती हैं, जिससे हर समय बड़े हादसे का डर बना रहता है। इसके अलावा, जब भी कोई भारी वाहन इस पुल से गुजरता है, तो लोहे के ढांचों की टकराने की तेज आवाज़ें पूरे इलाके में गूंजती हैं। रात के समय यह ध्वनि प्रदूषण आसपास रहने वाले लोगों की नींद हराम कर रहा है। शिक्षक सुरेन्द्र वर्मा की चेतावनी: "जागो विभाग!" स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए शिक्षक सुरेन्द्र वर्मा ने लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताया है। उन्होंने कहा: "जागो विभाग! आखिर क्यों किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? 10 साल का समय कम नहीं होता। जब तक कोई जान-माल का नुकसान नहीं होगा, तब तक क्या जिम्मेदार अधिकारी नींद से नहीं जागेंगे?" बीआरओ (BRO) का बयान: अभी और करना होगा इंतजार जनता की बढ़ती मांग और शिकायतों के बीच बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के रुख ने लोगों को और निराश कर दिया है। BRO के अनुसार, तकनीकी और बजटीय कारणों के चलते फिलहाल यहाँ पक्का पुल बनाने की कोई योजना नहीं है। इस बयान के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश और गहरा गया है। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण हर दिन हजारों लोग जान जोखिम में डालकर इस पुल को पार करने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि जनआक्रोश के बाद विभाग हरकत में आता है या जनता को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा। ऐसी ही निष्पक्ष और जमीनी खबरों के लिए हमारे चैनल 'स्वर स्वतंत्र' को सब्सक्राइब करें और हमसे जुड़ें!
- लखमारा गांव में दो दिनों से भूस्खलन, ग्रामीण दहशत में. कपकोट: लखमारा गांव में दो दिनों से भूस्खलन, ग्रामीण दहशत में. कपकोट के लखमारा गांव की पहाड़ी पर दो दिनों से लगातार भूस्खलन हो रहा है जिससे गांववाले दहशत में हैं। पहाड़ी से मलबा, बड़े-बड़े बोल्डर और पेड़ गिरकर लखमारा गधेरे में आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई बड़ा बोल्डर गधेरे में गिरकर पानी के बहाव को रोक दे तो वहीं तालाब बन सकता है और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। बारिश होने पर पहाड़ी में दरारें पड़ने लगी हैं और कई स्थानों पर जमीन फटती दिख रही है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय किसानों ने बताया कि भूस्खलन की चपेट में आने से उनके खेत मलबे में दब गए हैं; शंकर सिंह, मोहन सिंह, जयत सिंह, अजब सिंह, उमा देवी, किशन सिंह और पौन सिंह समेत कई परिवारों की कृषि भूमि प्रभावित हुई है। ग्राम प्रधान गीता देवी ने बताया कि गैर-खेत लखमारा सड़क बनने के कारण भी भूस्खलन की स्थिति उत्पन्न हुई है और प्रताप राम के मकान पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल निरीक्षण और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।1
- “वक्त कम है, जोर लगा दो!” गैरसैंण की आवाज़ दिल्ली तक पहुंचा दो! 🔥 🏥 ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में AIIMS चाहिए! अबकी बार सिर्फ वादे नहीं, इलाज का अधिकार चाहिए! 📢 एक आवाज़, एक मांग... AIIMS बनेगा, तभी वोट मिलेगा हमारा! 👉 इस संदेश को इतना शेयर करो कि गैरसैंण की आवाज़ दिल्ली तक सुनाई दे! #गैरसैंण_में_AIIMS_चाहिए #AIIMS_दो_तभी_वोट_लो #गैरसैंण_की_आवाज1
- GDP ग्रोथ को लेकर सियायत में भी उफान आ गया है । सुबह पीएम मोदी ने वीडियो जारी किया तो शाम को कांग्रेस ने वीडियो जारी कर दिया। एक बड़ी लहर हर नाव को ऊपर उठा देती है - ग्रोथ ठीक यही काम करती है ▪️तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी निशानी शेयर बाज़ार में उछाल होता है, लोग ज़्यादा समृद्ध होते हैं, उनकी खरीदने की क्षमता बढ़ती है, नौकरियों का सृजन होता है, ज़्यादा और निवेश होता है ▪️ग्रोथ पेड़ों पर तो लटकती नहीं कि लोग उसे देख लें - विकास लोगों के रोज़मर्रा की ज़िंदगी में महसूस होता है ▪️इसलिए जब प्रधानमंत्री और BJP GDP Growth मतलब विकास का ढोल पीटते हैं, तो सवाल उठता है - किसका विकास? ▪️इस विकास का लाभ कौन उठा रहा है? इससे किसे फायदा हो रहा है? कौन बढ़ रहा है, कौन समृद्ध हो रहा है? ▪️साफ़ है कि आम भारतीय तो हैं नहीं - जो भीषण महँगाई, कर्ज़ और बेरोज़गारी से जूझ रहे हैं 🚨पर समस्या कम विकास या कम GDP की नहीं है - समस्या GDP के आंकड़ों पर उठ रहे सवालों की है. समस्या एक चौपट अर्थव्यवस्था को किसी तरह शानदार पेश करने की नाकाम कोशिशें की है 🚨भारत के डेटा पर अब तक कोई विवाद नहीं हुआ है - लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं 🚨 विशेषज्ञ कहते हैं कि GDP के बेस वर्ष को 2023-24 में बदलने से विकास के आँकड़े बढ़ गए हैं, लेकिन ज़्यादातर ने इस आँकड़े की गणना पर चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि असल ग्रोथ रेट काफी कम है 🔹 GDP ग्रोथ रेट nominal GDP ग्रोथ रेट में से महंगाई घटाकर निकाली जाती है 🔹 पहली तिमाही में nominal GDP ग्रोथ रेट 10.3% रहा और सरकार के अपने डिफ्लेटर ने महंगाई को सिर्फ़ 2.5% आँका 🔹जिसके चलते पहली तिमाही की GDP विकास दर 7.8% आई 🔹लेकिन हर भारतीय यह मानेगा कि महंगाई से मासिक बजट बिगड़ गया है. खाने-पीने से लेकर पेट्रोल, डीजल, CNG , आवागमन और शिक्षा सब कुछ तेज़ी से महँगा हुआ है 🔹इसलिए 2.5% इन्फ्लेशन ज़मीनी हकीकत से बिल्कुल अलग है - खासकर जब उसी दौरान में retail महंगाई 3.9% और थोक महंगाई 9.4% रही 🔹उस दौरान में अर्थव्यवस्था की असल महंगाई m वास्तव में 5.7% थी, जिससे GDP ग्रोथ रेट घटकर सिर्फ़ 4.4% रह जाती है 🔹दिलचस्प बात यह है कि GDP डिफ्लेटर और इफेक्टिव मतलब प्रभावी महंगाई के बीच का अंतर आमतौर पर 1.2 से 1.3% के बीच रहता है 🔹लेकिन पहली तिमाही में GDP डिफ्लेटर और प्रभावी महंगाई के बीच का अंतर 3.4% रहा - जो संभवतः इतिहास में पहली बार हुआ 🔹अगर यह मान कर चलिए तो GDP ग्रोथ रेट सिर्फ़ 6.3% है, जो उस 7.8% के आँकड़े से काफ़ी कम है जिसके बल पर BJP और ख़ुद मोदी बेवकूफ़ी से छाती ठोक रहे हैं ▪️अगर भारत में सच में इतनी ज़्यादा ग्रोथ हो रही होती तो: • युवाओं को नौकरियों का संकट नहीं झेलना पड़ता. 8.7 करोड़ युवा न काम कर रहे हैं, न पढ़ाई कर रहे हैं और न कोई skill सीख रहे हैं • कृषि मात्र 3.6% की दर से नहीं बढ़ रही होती • GFCF (निजी निवेश) सिर्फ़ 11.9% की दर से नहीं बढ़ रहा होता • विदेशी निवेशकों ने 1 जनवरी से 31 अगस्त के बीच भारतीय शेयरों में करीब ₹2.24 लाख करोड़ न बेचे होते - जो पूरे साल 2025 में लगभग ₹1.66 लाख करोड़ के हुए आउटफ्लो से भी ज़्यादा है • रुपया निरंतर गिरता नहीं, जबकि RBI ने रुपए को संभालने के लिए क़रीब 150 अरब डॉलर से ज़्यादा / लगभग 14.23 लाख करोड़ रुपये झोंक दिए • भारत का कर्ज़ बढ़कर 228 लाख करोड़ रुपये नहीं पहुँच जाता 👉👉ऊँची GDP ग्रोथ रेट के लिए सरकार को प्लान बनाना होगा, सिर्फ़ अख़बारों और टीवी छानने की हैडलाइन मैनेज करने और फ्रंट कैमरा पर वीडियो बनाने से काम नहीं चलेगा 👉👉और अगर सब कुछ इतना ठीक ही है - तो फिर लोगों को यहाँ वहाँ न जाने की, सोना ना ख़रीदने की, शादी ब्याह कैसे किया जाये जैसी चीज़ों की सलाह आप नहीं देते मोदी जी. क्योंकि आप भी यह जानते हैं कि इकॉनमी कुम्हलाता खस्ताहाल है - और आपके पास कोई प्लान नहीं है1
- बनबसा में शहीद स्मारक और विशाल तिरंगे का लोकार्पण, सीएम धामी ने वीरों को किया नमन। बनबसा में शहीद स्मारक और विशाल तिरंगे का लोकार्पण, सीएम धामी ने वीरों को किया नमन चम्पावत। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के सीमांत क्षेत्र बनबसा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सैनिक स्मारक एवं झंडा पार्क का विधिवत पूजा-अर्चना के साथ लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्मित शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। एसएसबी जवानों द्वारा बिगुल वादन के बीच मुख्यमंत्री सहित उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों को नमन किया। कार्यक्रम में सीमांत क्षेत्र में विशाल राष्ट्रध्वज तिरंगा भी फहराया गया। मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक को देश सेवा, त्याग और बलिदान का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को हमेशा याद दिलाएगा कि देश के वीर जवान कठिन और विषम परिस्थितियों में भी राष्ट्र की रक्षा के लिए डटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थल युवाओं को देश सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा। “मैं सैनिक परिवार से आता हूं, सैनिकों से मेरा गहरा जुड़ाव” मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं एक सैनिक के पुत्र हैं, इसलिए सैनिकों के सम्मान से जुड़े इस कार्य में सहभागी बनना उनके लिए गर्व और भावुकता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सैनिकों तथा उनके परिवारों के कल्याण को दी जा रही प्राथमिकता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले देश के अंतिम गांव कहे जाने वाले सीमावर्ती क्षेत्रों को अब भारत के ‘पहले क्षेत्र’ के रूप में देखा जा रहा है। उत्तराखंड को वीर सैनिकों की भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्धसैनिक बलों के माध्यम से राष्ट्र की सुरक्षा में योगदान दे रहा है। वीर नारियों और वीरता पदक विजेता सम्मानित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वीर नारियों और वीरता पदक विजेताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में वीर नारी सरस्वती देवी, लक्ष्मी देवी, कमला देवी, खीमा देवी, माया चन्द, सरस्वती देवी, ललिता चन्द, गीता देवी और पिंकी रैसवाल शामिल रहीं। इसके अलावा वीर माता लक्ष्मी देवी, माता स्व. नायक खीम सिंह तथा वीरता पदक विजेता सूबेदार गोपाल दत्त शर्मा (सेना मेडल) को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने वीर नारियों एवं भूतपूर्व सैनिकों से संवाद किया तथा एसएसबी जवानों के साथ फोटो खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा में सैनिकों का योगदान सर्वोपरि है और राज्य सरकार सैनिकों एवं उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर जिलाधिकारी मनीष कुमार, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल उमेद सिंह (से.नि.), एसएसबी कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम सहित अन्य अधिकारी, सेवानिवृत्त सैनिक, वीर माताएं एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।4
- चम्पावत: में खेल महाकुंभ-2026 का धमाकेदार आगाज, CM धामी ने खिलाड़ियों को दी बड़ी सौगात!चम्पावत: में खेल महाकुंभ-2026 का धमाकेदार आगाज, CM धामी ने खिलाड़ियों को दी बड़ी सौगात! चम्पावत: में खेल महाकुंभ-2026 का धमाकेदार आगाज, CM धामी ने खिलाड़ियों को दी बड़ी सौगात!1
- शुद्धिकरण मामले में विधायक सुमित हृदयेश पहुंचे SSP कार्यालय, भारी पुलिस फोर्स तैनात1
- पहाड़ों से बोल्डर व मलुवा गिरने से 11 सड़कें बंद बागेश्वर में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित,पहाड़ों से बोल्डर व मलुवा गिरने से 11 मोटरमार्ग बंद. बागेश्वर जिले में कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाओं में वृद्धि हो गई है, जिले के अलग—अलग स्थानों पर मलवा तथा बोल्डर आने से कुल 11 मोटरमार्ग पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे वाहनों का आना—जाना ठप हो गया है। प्रभावित मार्गों पर संपर्क टूटने के कारण कई ग्रामीणों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ रहा है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर राहत व बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। जिला प्रशासन ने कहा है कि जिस—जिस स्थान से सड़कों के बंद होने की सूचना मिल रही है, वहां विभागीय जेसीबी मशीनें और संसाधन भेजे जा रहे हैं तथा मार्गों को खोलने का कार्य जारी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार आगे भी बरसात जारी रहने की संभावना है, इसलिए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। बागेश्वर पुलिस और आपदा प्रबंधन टीम लगातार निगरानी कर रही है और किसी भी आपात स्थिति के लिए आपात कक्ष सक्रिय रखा गया है।1
- भारी वर्षा के दृष्टिगत प्रशासन अलर्ट, एसडीएम हल्द्वानी और तहसीलदार ने किया विभिन्न क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण* *भारी वर्षा के दृष्टिगत प्रशासन अलर्ट, एसडीएम हल्द्वानी और तहसीलदार ने किया विभिन्न क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण* लगातार हो रही भारी वर्षा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए उप जिलाधिकारी हल्द्वानी मोनिका एवं तहसीलदार कुलदीप पांडे द्वारा मंगलवार को तहसील हल्द्वानी अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने गौला पुल, फतेहपुर, दमुवाढूंगा, राजपुरा, कुसुमखेड़ा सहित नगर के विभिन्न जलभराव संभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गौला नदी के जलस्तर का जायजा लिया और नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी। इस दौरान उन्होंने आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों पर पहुंचकर यातायात एवं आवागमन को सुचारू बनाए रखने के निर्देश भी दिए।एहतियात के तौर पर स्थानीय लोगों को जागरूक किया और अपील की कि अनावश्यक रूप से नदी-नालों के किनारे न जाएं तथा बच्चों को नदी-नालों से दूर रखें। संबंधित विभागों को जल निकासी एवं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए। उप जिलाधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य किया जाएगा। उन्होंने जनता से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।2
- अल्मोड़ा में बारिश का कहर : मलवे में दबा मकान महिला समेत दो बच्चों की मौतअल्मोड़ा में बारिश का कहर : मलवे में दबा मकान महिला समेत दो बच्चों की मौत अल्मोड़ा में बारिश का कहर : मलवे में दबा मकान महिला समेत दो बच्चों की मौत1