31.7.2026 अलौली खगड़िया बिहार *उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का 146 वां जयंती मनाया गया, किया कोटि-कोटि नमन - याद* *मुंशी प्रेमचंद सच्चे अर्थों में उपन्यास सम्राट, स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी चिंतक, प्रखर साहित्यकार, युगद्रष्टा, आदर्शवादी यथार्थवादी प्रगतिशील लेखक, शिल्पकार थे - किरण देव यादव* अलौली। देश बचाओ अभियान, ऑल इंडिया मिशन आर्टिस्ट एसोसिएशन एवं सामाजिक संगठन फरकिया मिशन के तत्वाधान में श्री युवक प्रखंड पुस्तकालय के सभागार में मुंशी प्रेमचंद का 146 वां जयंती मनाया गया। इस अवसर पर उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण पुष्पांजलि समर्पित कर कोटि-कोटि नमन एवं याद किया गया तथा आज के साहित्यकारों पत्रकारों से उनके जीवनी व्यक्तित्व कृतित्व से सीख लेने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ऐमा - मिशन के अध्यक्ष किरण देव यादव ने किया। उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी चिंतक, उपन्यासकार, कहानीकार, प्रगतिशील लेखक, पत्रकार साहित्यकार एवं उपन्यास सम्राट तथा साहित्य के अमर शिल्पकार, युगद्रष्टा थे। श्री यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गाँव में हुआ था तथा 8 अक्टूबर 1936 में निधन हुआ था। उनका नाम धनपत राय श्रीवास्तव उर्फ प्रेमचंद था। माता आनंदी देवी और पिता मुंशी अजायबराय (डाकमुंशी) थे। उनका पहला विवाह कम उम्र में हुआ जो असफल रहा; 1906 में बाल विधवा शिवरानी देवी से दूसरा विवाह हुआ। वे पहले शिक्षक व बाद में स्कूल इंस्पेक्टर बने। 1921 में गांधी जी के असहयोग आंदोलन पर नौकरी छोड़ दी। उनका प्रमुख उपन्यास गोदान, गवन, निर्मला, सेवा सदन, कर्मभूमि, रंगभूमि, प्रेम आश्रम तथा उनका प्रमुख कहानी 'मानसरोवर' में लगभग 300 कहानियाँ जैसे पूस की रात, कफन, ईदगाह, नमक का दरोगा, पंच परमेश्वर, आदि है। उन्होंने हंस', 'मर्यादा', 'माधुरी' और 'जागरण' पत्रिकाओं का संपादन किया। उनके लेखन में उस दौर के समाज सुधार आन्दोलनों, स्वाधीनता संग्राम तथा प्रगतिवादी आन्दोलनों के सामाजिक प्रभावों का स्पष्ट चित्रण है। उनमें दहेज, अनमेल विवाह, पराधीनता, लगान, छूआछूत, जाति भेद, विधवा विवाह, आधुनिकता, स्त्री-पुरुष समानता, आदि उस दौर की सभी प्रमुख समस्याओं का चित्रण मिलता है। आदर्श उन्मुख यथार्थवाद उनके साहित्य की मुख्य विशेषता है। उक्त कालखण्ड को प्रेमचन्द युग' कहा जाता है। कार्यक्रम में दानवीर यादव सरवन कुमार शशिकांत पासवान अनुज कुमार बृजेंद्र महेश्वरी दिनेश उमेश विष्णु देव आदि ने भाग लिया।
31.7.2026 अलौली खगड़िया बिहार *उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का 146 वां जयंती मनाया गया, किया कोटि-कोटि नमन - याद* *मुंशी प्रेमचंद सच्चे अर्थों में उपन्यास सम्राट, स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी चिंतक, प्रखर साहित्यकार, युगद्रष्टा, आदर्शवादी यथार्थवादी प्रगतिशील लेखक, शिल्पकार थे - किरण देव यादव* अलौली। देश बचाओ अभियान, ऑल इंडिया मिशन आर्टिस्ट एसोसिएशन एवं सामाजिक संगठन फरकिया मिशन के तत्वाधान में श्री युवक प्रखंड पुस्तकालय के सभागार में मुंशी प्रेमचंद का 146 वां जयंती मनाया गया। इस अवसर पर उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण पुष्पांजलि समर्पित कर कोटि-कोटि नमन एवं याद किया गया तथा आज के साहित्यकारों पत्रकारों से उनके जीवनी व्यक्तित्व कृतित्व से सीख लेने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ऐमा - मिशन के अध्यक्ष किरण देव यादव ने किया। उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी चिंतक, उपन्यासकार, कहानीकार, प्रगतिशील लेखक, पत्रकार साहित्यकार एवं उपन्यास सम्राट तथा साहित्य के अमर शिल्पकार, युगद्रष्टा थे। श्री यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गाँव में हुआ था तथा 8 अक्टूबर 1936 में निधन हुआ था। उनका नाम धनपत राय श्रीवास्तव उर्फ प्रेमचंद था। माता आनंदी देवी और पिता मुंशी अजायबराय (डाकमुंशी) थे। उनका पहला विवाह कम उम्र में हुआ जो असफल रहा; 1906 में बाल विधवा शिवरानी देवी से दूसरा विवाह हुआ। वे पहले शिक्षक व बाद में स्कूल इंस्पेक्टर बने। 1921 में गांधी जी के असहयोग आंदोलन पर नौकरी छोड़ दी। उनका प्रमुख उपन्यास गोदान, गवन, निर्मला, सेवा सदन, कर्मभूमि, रंगभूमि, प्रेम आश्रम तथा उनका प्रमुख कहानी 'मानसरोवर' में लगभग 300 कहानियाँ जैसे पूस की रात, कफन, ईदगाह, नमक का दरोगा, पंच परमेश्वर, आदि है। उन्होंने हंस', 'मर्यादा', 'माधुरी' और 'जागरण' पत्रिकाओं का संपादन किया। उनके लेखन में उस दौर के समाज सुधार आन्दोलनों, स्वाधीनता संग्राम तथा प्रगतिवादी आन्दोलनों के सामाजिक प्रभावों का स्पष्ट चित्रण है। उनमें दहेज, अनमेल विवाह, पराधीनता, लगान, छूआछूत, जाति भेद, विधवा विवाह, आधुनिकता, स्त्री-पुरुष समानता, आदि उस दौर की सभी प्रमुख समस्याओं का चित्रण मिलता है। आदर्श उन्मुख यथार्थवाद उनके साहित्य की मुख्य विशेषता है। उक्त कालखण्ड को प्रेमचन्द युग' कहा जाता है। कार्यक्रम में दानवीर यादव सरवन कुमार शशिकांत पासवान अनुज कुमार बृजेंद्र महेश्वरी दिनेश उमेश विष्णु देव आदि ने भाग लिया।
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- ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र अब एक वर्ष तक रहेगा मान्य, छात्रों के लिए छात्रावास की भी तैयारी : राजकुमार सिंह मुंगेर। उच्च जातियों के लिए आयोग (सवर्ण आयोग) के सदस्य राजकुमार सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का प्रमाण पत्र अब निर्गत होने की तिथि से पूरे एक वर्ष तक मान्य रहेगा। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार प्रमाण पत्र बनवाने की परेशानी से राहत मिलेगी और विभिन्न भर्ती एवं शैक्षणिक प्रक्रियाओं में सुविधा होगी। शुक्रवार को मुंगेर पहुंचे राजकुमार सिंह ने सबसे पहले एक नंबर ट्रैफिक चौक स्थित बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद जिला अतिथि गृह में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने सरकार की ओर से ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल ही में संपन्न 19,800 से अधिक सिपाही भर्ती में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 1,983 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। वहीं संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में भी ईडब्ल्यूएस वर्ग के 26 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सर्वेक्षण के अनुसार सवर्ण समाज के करीब 52 प्रतिशत लोग ईडब्ल्यूएस के दायरे में आते हैं। राजकुमार सिंह ने कहा कि आयोग का प्रयास है कि अन्य आरक्षण प्राप्त वर्गों की तरह ईडब्ल्यूएस श्रेणी के विद्यार्थियों को भी शिक्षा, छात्रावास और अन्य सरकारी सुविधाओं का समान लाभ मिले। उन्होंने बताया कि ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों के लिए प्रमंडल स्तर पर छात्रावास निर्माण तथा बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आयोग आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण परिवारों के बच्चों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रेस वार्ता के दौरान आयोग की विभिन्न योजनाओं और सरकार की पहलों की भी जानकारी दी गई। ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र अब एक वर्ष तक रहेगा मान्य, छात्रों के लिए छात्रावास की भी तैयारी : राजकुमार सिंह मुंगेर। उच्च जातियों के लिए आयोग (सवर्ण आयोग) के सदस्य राजकुमार सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का प्रमाण पत्र अब निर्गत होने की तिथि से पूरे एक वर्ष तक मान्य रहेगा। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार प्रमाण पत्र बनवाने की परेशानी से राहत मिलेगी और विभिन्न भर्ती एवं शैक्षणिक प्रक्रियाओं में सुविधा होगी। शुक्रवार को मुंगेर पहुंचे राजकुमार सिंह ने सबसे पहले एक नंबर ट्रैफिक चौक स्थित बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद जिला अतिथि गृह में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने सरकार की ओर से ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल ही में संपन्न 19,800 से अधिक सिपाही भर्ती में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 1,983 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। वहीं संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में भी ईडब्ल्यूएस वर्ग के 26 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सर्वेक्षण के अनुसार सवर्ण समाज के करीब 52 प्रतिशत लोग ईडब्ल्यूएस के दायरे में आते हैं। राजकुमार सिंह ने कहा कि आयोग का प्रयास है कि अन्य आरक्षण प्राप्त वर्गों की तरह ईडब्ल्यूएस श्रेणी के विद्यार्थियों को भी शिक्षा, छात्रावास और अन्य सरकारी सुविधाओं का समान लाभ मिले। उन्होंने बताया कि ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों के लिए प्रमंडल स्तर पर छात्रावास निर्माण तथा बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आयोग आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण परिवारों के बच्चों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रेस वार्ता के दौरान आयोग की विभिन्न योजनाओं और सरकार की पहलों की भी जानकारी दी गई।1
- गृह मंत्री की अनुपस्थिति का उठा मुद्दा, पप्पू यादव ने साधू वेश में चंदा चोरी का उठाया मुद्दा गृह मंत्री की अनुपस्थिति का उठा मुद्दा, पप्पू यादव ने साधू वेश में चंदा चोरी का उठाया मुद्दा1
- मध्य विद्यालय राटन के समीप वार्ड नंबर 8 में बनाए गए यात्री प्रतिक्षालय करीब 15 लाख से बनाया गया नगर परिषद गोगरी जमालपुर के द्वारा छः महीने में देखिए क्या हाल है यात्री प्रतिक्षालय का Samrat Choudhary Information & Public Relations Department, Government of Bihar Urban Development & Housing Dept, Govt. of Bihar Nitish Mishra District Administration, Khagaria - Bihar #zerotolerancepolicy #Corruption Nagar Parishad Gogri Jamalpur1
- गोगरी अनुमंडलीय अस्पताल में 12 महिलाओं का सफल बंध्याकरण, पुरुष नसबंदी के लिए जागरूकता अभियान तेज गोगरी अनुमंडल अस्पताल में शुक्रवार को परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत बंध्याकरण शिविर का आयोजन किया गया। वहीं दूसरी ओर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्र प्रकाश के निर्देश पर क्षेत्र में आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं द्वारा परिवार नियोजन को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। शिविर में महिला चिकित्सक डॉ. शोभा रानी ने कुल 12 महिलाओं का सफल बंध्याकरण ऑपरेशन किया। सभी महिलाओं का ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से संपन्न कराया गया तथा उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल भी उपलब्ध कराई गई। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्र प्रकाश ने शुक्रवार की शाम छह बजे बताया कि सरकार के निर्देशानुसार परिवार नियोजन कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि पुरुषों को भी नसबंदी के प्रति प्रेरित और जागरूक किया जा रहा है, ताकि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी दोनों की सहभागिता से पूरी हो सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि छोटे एवं स्वस्थ परिवार के निर्माण के लिए सरकार द्वारा संचालित परिवार नियोजन कार्यक्रम का लाभ उठाएं तथा आवश्यक जानकारी के लिए अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आशा कार्यकर्ता से संपर्क करें।1
- बेगूसराय में# बरौनी एक युवक रेलवे ट्रेक नमो भारत व सवारी ट्रेन. #मचा ह्ड़कंप. लोगों ने कहा युवक है विक्षिप्त.,,,1
- सोनबरसा प्रखंड अंतर्गत महुआ उत्तरवारी से आस्था और श्रद्धा से जुड़ी एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। सहरसा जिले के सोनबरसा प्रखंड अंतर्गत से आस्था और श्रद्धा से जुड़ी एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। महुआ उत्तरवारी पंचायत स्थित बजरंगबली मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नर्मदेश्वर शिवलिंग और भगवान शिव परिवार की प्रतिमाओं की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस धार्मिक आयोजन में उस समय श्रद्धालुओं की आस्था और बढ़ गई, जब प्रतिमा झांकी की पालकी पर एक नाग दिखाई देने की चर्चा फैल गई। महुआ उत्तरवारी पंचायत स्थित बजरंगबली मंदिर परिसर में बुधवार को भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नर्मदेश्वर शिवलिंग एवं भगवान शिव परिवार की प्रतिमाओं की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस अवसर पर 251 कुंवारी कन्याओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा मंदिर परिसर से सुरसर नदी पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरकर यज्ञ स्थल पर कलश स्थापित किए। पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठान के बाद 48 घंटे के अखंड रामधुनी का शुभारंभ हुआ। इस दौरान प्रतिमा झांकी की पालकी पर एक नाग दिखाई देने की बात सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर विशेष चर्चा रही। कई श्रद्धालुओं ने इसे नाग देवता का आशीर्वाद मानते हुए अपनी धार्मिक आस्था से जोड़ा। हालांकि, इस घटना को श्रद्धालु अपनी-अपनी आस्था के अनुसार देख रहे हैं। मंदिर के पुजारी पूज्य बाबा विनोद जी के मार्गदर्शन में युवा कला परिषद एवं आयोजन समिति ने पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष सोनू सरकार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रद्धालु और युवा कार्यकर्ता इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयघोष से गूंजता रहा। आस्था, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर इस धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया।1
- बोलबम के नारे के साथ कांवड़ यात्रा पर निकले नौनीहालों ने शिव मंदिर में किया जलाभिषेक बोलबम के नारे के साथ कांवड़ यात्रा पर निकले नौनीहालों ने शिव मंदिर में किया जलाभिषेक1