मुसहरी टोला अग्निकांड: 10 अप्रैल की तबाही के बाद संस्था बनी सहारा, राहत से जगी उम्मीद बैरिया प्रखंड अंतर्गत लौकरिया पंचायत के मुसहरी टोला में 10 अप्रैल, शुक्रवार को शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग ने दलित वर्ग के सैकड़ों परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी। आग इतनी भयावह थी कि देखते ही देखते घर, खाने का अनाज, कपड़े, दर्जनों बकरियां और चार मोटरसाइकिल तक जलकर राख हो गए। इस घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया और पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हो गए। इस आपदा की घड़ी में सामाजिक संस्थाओं ने आगे बढ़कर मानवता की मिसाल पेश की। बेतिया की मारवाड़ी महिला समिति के सौजन्य से अग्नि पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया। संस्था के प्रयास से पीड़ित परिवारों को साड़ी, थाली, ग्लास, चिवड़ा और गुड़ जैसे जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिल सके। राहत वितरण कार्यक्रम में मारवाड़ी महिला समिति की प्रांतीय सशक्तिकरण प्रमुख श्रीमती रानी झुनझुनवाला, प्रांतीय महिला समिति अध्यक्ष मीना तोदी, तारा सोमानी, मंजू काया और शुभम सहित कई सदस्य सक्रिय रूप से मौजूद रहे। साथ ही बिहार राज्य किसान सभा के उपाध्यक्ष प्रभुराज नारायण राव के नेतृत्व में स्थानीय स्तर पर राहत कार्य को मजबूती मिली। इस दौरान वरिष्ठ किसान नेता चांदसी प्रसाद यादव, अधिवक्ता प्रकाश कुमार वर्मा, म. हनीफ, सरपंच प्रमोद सिंह, सुनील कुमार यादव, पंचायत समिति सदस्य अभय कुमार राव, संजय राव, काशी साह, विवेक कुमार, विक्की कुमार और राम विनोद सहित कई लोग मौजूद रहे। हालांकि, इस भीषण अग्निकांड के बाद भी सरकारी राहत व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि बिहार सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से अब तक संतोषजनक सहायता नहीं मिल पाई है। जबकि आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण साह इसी नौतन विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, ऐसे में राहत कार्य की धीमी रफ्तार लोगों में नाराजगी का कारण बन रही है। मुसहरी टोला के पीड़ित आज भी अपने उजड़े आशियाने के बीच जिंदगी को फिर से संवारने की कोशिश कर रहे हैं। इस कठिन समय में सामाजिक संस्था का सहयोग उनके लिए उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर सामने आया है, लेकिन अब जरूरत है कि प्रशासन भी तेजी से कदम उठाकर इन परिवारों को स्थायी राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराए।
मुसहरी टोला अग्निकांड: 10 अप्रैल की तबाही के बाद संस्था बनी सहारा, राहत से जगी उम्मीद बैरिया प्रखंड अंतर्गत लौकरिया पंचायत के मुसहरी टोला में 10 अप्रैल, शुक्रवार को शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग ने दलित वर्ग के सैकड़ों परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी। आग इतनी भयावह थी कि देखते ही देखते घर, खाने का अनाज, कपड़े, दर्जनों बकरियां और चार मोटरसाइकिल तक जलकर राख हो गए। इस घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया और पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हो गए। इस आपदा की घड़ी में सामाजिक संस्थाओं ने आगे बढ़कर मानवता की मिसाल पेश की। बेतिया की मारवाड़ी महिला समिति के सौजन्य से अग्नि पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया। संस्था के प्रयास से पीड़ित परिवारों को साड़ी, थाली, ग्लास, चिवड़ा और गुड़ जैसे जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिल सके। राहत वितरण कार्यक्रम में मारवाड़ी महिला समिति की प्रांतीय सशक्तिकरण प्रमुख श्रीमती रानी झुनझुनवाला, प्रांतीय महिला समिति अध्यक्ष मीना तोदी, तारा सोमानी, मंजू काया और शुभम सहित कई सदस्य सक्रिय रूप से मौजूद रहे। साथ ही बिहार राज्य किसान सभा के उपाध्यक्ष प्रभुराज नारायण राव के नेतृत्व में स्थानीय स्तर पर राहत कार्य को मजबूती मिली। इस दौरान वरिष्ठ किसान नेता चांदसी प्रसाद यादव, अधिवक्ता प्रकाश कुमार वर्मा, म. हनीफ, सरपंच प्रमोद सिंह, सुनील कुमार यादव, पंचायत समिति सदस्य अभय कुमार राव, संजय राव, काशी साह, विवेक कुमार, विक्की कुमार और राम विनोद सहित कई लोग मौजूद रहे। हालांकि, इस भीषण अग्निकांड के बाद भी सरकारी राहत व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि बिहार सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से अब तक संतोषजनक सहायता नहीं मिल पाई है। जबकि आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण साह इसी नौतन विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, ऐसे में राहत कार्य की धीमी रफ्तार लोगों में नाराजगी का कारण बन रही है। मुसहरी टोला के पीड़ित आज भी अपने उजड़े आशियाने के बीच जिंदगी को फिर से संवारने की कोशिश कर रहे हैं। इस कठिन समय में सामाजिक संस्था का सहयोग उनके लिए उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर सामने आया है, लेकिन अब जरूरत है कि प्रशासन भी तेजी से कदम उठाकर इन परिवारों को स्थायी राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराए।
- बैरिया अंचल क्षेत्र की लौकरिया पंचायत अंतर्गत मुशहरी गांव (वार्ड संख्या-05) में 10 अप्रैल 2026 को हुई भीषण अग्निकांड की घटना के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित पहल करते हुए प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा दी है। आग लगने की इस घटना में कुल 127 ग्रामीण परिवारों के आवासीय घर क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए थे। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन द्वारा राहत एवं पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ किया गया। प्रभारी पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन श्रीमती नगमा तबस्सुम ने बताया कि प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए तत्काल सामुदायिक किचेन संचालित किया गया। 11 एवं 12 अप्रैल को कुल 127 परिवारों के 511 लोगों को सुबह एवं शाम भोजन उपलब्ध कराया गया, ताकि आपदा की घड़ी में किसी भी परिवार को भोजन की समस्या न हो। राहत सामग्री वितरण के तहत प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों के बीच 198 प्लास्टिक शीट उपलब्ध कराई गईं, जिससे अग्निपीड़ित परिवार अस्थायी रूप से रहने की व्यवस्था कर सके। इसी क्रम में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की बहाली सुनिश्चित करते हुए विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, बेतिया द्वारा प्रभावित घरों में बिजली आपूर्ति पुनः शुरू कर दी गई। वहीं लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल द्वारा चापाकलों की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति को भी सुचारू किया गया। जिला आपदा प्रबंधन शाखा की ओर से अग्निकांड प्रभावित परिवारों को सहायता अनुदान के रूप में कुल 25 लाख 40 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई। बैरिया अंचल कार्यालय द्वारा राशि की निकासी कर आरटीजीएस के माध्यम से सीधे लाभुकों के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी गई है। प्रशासन द्वारा प्रत्येक प्रभावित परिवार को निम्न मदों में सहायता राशि प्रदान की गई— 7,000 रुपये नगद सहायता (जीआर मद) 8,000 रुपये क्षतिग्रस्त झोपड़ी मद 5,000 रुपये बर्तन एवं वस्त्र मद जिला प्रशासन ने बताया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों की सतत निगरानी की जा रही है तथा सभी प्रभावित परिवारों को हरसंभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से अग्निकांड पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है और पुनर्वास प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ रही है।1
- तो आप देख सकते हैं जैसे कि हमारे स्टेशन पर ट्रेन का टाइम ग्यारह बजकर बीस मिनट पर है। गाज़ियाबाद से काठगोदाम को जाने वाली ट्रेन रुद्रपुर स्टेशन के दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी है। और हमारी गाड़ी बाघ एक्सप्रेस है जो प्लेटफार्म नंबर एक पर आएगी।जो इसी जगह दोनों गाड़ियों का क्रॉसिंग होगा।जो काठगोदाम से गोरखपुर होते हुए हावड़ा जंक्शन तक जाएगी।1
- मणिपुर में हिंसा और प्रदर्शन जारी है देर रात लोग सड़कों पर थे। मणिपुर वासियों को न्याय कब मिलेगा? यह दृश्य किसी ईरान या अमेरिका जैसे देश का नहीं भारत के एक सूबे का है। हमारी हुकूमत एक शब्द बोलने को तैयार नहीं🩷🩷1
- कुशीनगर जनपद के Vishunpura Thana क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत वंसगांव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ज़मीनी विवाद को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। इस दौरान फरसा से वार कर जानलेवा हमला कि बताया जा रहा है कि पुरानी रंजिश और ज़मीन के विवाद को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। हमले के दौरान आरोपियों ने फरसा से ताबड़तोड़ वार कर पीड़ित को गंभीर रूप से घायल कर दिया। आइए सुनते हैं पीड़ित ने अपने बयान में क्या कह घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। घायल को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।1
- बिहार राज्य के नागरिक आज (17.04.2026) से लेकर 01.05.2026 तक स्व- गणना में भाग लेकर देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। स्व- गणना पोर्टल1
- आज बेतिया द्वारा शहर में मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा हेतु व्यापक निरीक्षण किया गया। 17.04.2026.1
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- पश्चिम चम्पारण के बेतिया में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब देर रात जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मंडल कारा का औचक निरीक्षण एवं छापेमारी की। बिना किसी पूर्व सूचना के पहुंचे अधिकारियों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों की स्थिति और अंदरूनी गतिविधियों का गहन जायजा लिया। इस अचानक कार्रवाई से कारा प्रशासन में हड़कंप मच गया और हर स्तर पर सख्ती साफ नजर आई। निरीक्षण के दौरान डीएम और एसपी ने जेल परिसर के विभिन्न वार्डों, सुरक्षा इंतजामों और व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। छापेमारी के बाद अधिकारियों ने संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जेल के भीतर किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सुरक्षा को और पुख्ता करने, निगरानी बढ़ाने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस कार्रवाई के दौरान मंडल कारा बेतिया के अधीक्षक, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, सदर-1 अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी समेत कई पुलिसकर्मी और कारा कर्मी मौजूद रहे। प्रशासन की इस सख्त पहल को कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और जेल के अंदर पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।1