सरकारी जमीन पर सोना उगाया और चुपचाप काट लिया फसल कटान पर प्रधान घिरे लाखों के बंदर बाट केआरोप हरदोई (टोडरपुर)। विकासखंड टोडरपुर की ग्राम पंचायत हैदरपुर (मजरा खुमारी पुर) में सरकारी भूमि पर खड़ी गेहूं की फसल और यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकारी जमीन पर खड़ी फसल को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कटवाकर लाखों रुपये का बंदरबांट किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि जिस भूमि पर यह फसल खड़ी थी, उसका पट्टा वर्षों पहले कुछ लोगों के नाम आवंटित हुआ था, लेकिन बाद में शासन द्वारा वह पट्टा निरस्त कर दिया गया। ऐसे में जमीन पुनः सरकारी श्रेणी में आ गई थी। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में खड़ी फसल का निस्तारण पारदर्शी प्रक्रिया—जैसे सार्वजनिक नीलामी—के माध्यम से किया जाना चाहिए था, ताकि राजस्व सीधे सरकारी खाते में जाए। प्रधान का पक्ष: इस पूरे मामले पर ग्राम प्रधान ने सफाई देते हुए कहा कि “करीब 15-20 साल पहले कुछ लोगों के नाम इस जमीन का पट्टा हुआ था, जिसे अब सरकार ने निरस्त कर दिया है। फसल एक बार के लिए काटी गई है, सवालों के घेरे में प्रक्रिया: प्रधान के इस बयान के बाद भी कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं— जब भूमि सरकारी घोषित हो चुकी थी, तो फसल की नीलामी क्यों नहीं कराई गई? कटान की प्रक्रिया किसके आदेश से और किसकी निगरानी में हुई? यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई से प्राप्त लकड़ी का हिसाब किसके पास है? क्या ग्राम पंचायत या राजस्व विभाग को इसकी सूचना दी गई थी? प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल: स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में लाखों रुपये के गड़बड़झाले की आशंका जताई जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी संपत्ति की हानि का मामला है, बल्कि पंचायत स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ग्रामीणों की मांग: ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करना सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। निष्कर्ष: यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेकर जांच करता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।
सरकारी जमीन पर सोना उगाया और चुपचाप काट लिया फसल कटान पर प्रधान घिरे लाखों के बंदर बाट केआरोप हरदोई (टोडरपुर)। विकासखंड टोडरपुर की ग्राम पंचायत हैदरपुर (मजरा खुमारी पुर) में सरकारी भूमि पर खड़ी गेहूं की फसल और यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकारी जमीन पर खड़ी फसल को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कटवाकर लाखों रुपये का बंदरबांट किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि जिस भूमि पर यह फसल खड़ी थी, उसका पट्टा वर्षों पहले कुछ लोगों के नाम आवंटित हुआ था, लेकिन बाद में शासन द्वारा वह पट्टा निरस्त कर दिया गया। ऐसे में जमीन पुनः सरकारी श्रेणी में आ गई थी। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में खड़ी फसल का निस्तारण पारदर्शी प्रक्रिया—जैसे सार्वजनिक नीलामी—के माध्यम से किया जाना चाहिए था, ताकि राजस्व सीधे सरकारी खाते में जाए। प्रधान का पक्ष: इस पूरे मामले पर ग्राम प्रधान ने सफाई देते हुए कहा कि “करीब 15-20 साल पहले कुछ लोगों के नाम इस जमीन का पट्टा हुआ था, जिसे अब सरकार ने निरस्त कर दिया है। फसल एक बार के लिए काटी गई है, सवालों के घेरे में प्रक्रिया: प्रधान के
इस बयान के बाद भी कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं— जब भूमि सरकारी घोषित हो चुकी थी, तो फसल की नीलामी क्यों नहीं कराई गई? कटान की प्रक्रिया किसके आदेश से और किसकी निगरानी में हुई? यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई से प्राप्त लकड़ी का हिसाब किसके पास है? क्या ग्राम पंचायत या राजस्व विभाग को इसकी सूचना दी गई थी? प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल: स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में लाखों रुपये के गड़बड़झाले की आशंका जताई जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी संपत्ति की हानि का मामला है, बल्कि पंचायत स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ग्रामीणों की मांग: ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करना सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। निष्कर्ष: यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेकर जांच करता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।
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- हरदोई (टोडरपुर)। विकासखंड टोडरपुर की ग्राम पंचायत हैदरपुर (मजरा खुमारी पुर) में सरकारी भूमि पर खड़ी गेहूं की फसल और यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकारी जमीन पर खड़ी फसल को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कटवाकर लाखों रुपये का बंदरबांट किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि जिस भूमि पर यह फसल खड़ी थी, उसका पट्टा वर्षों पहले कुछ लोगों के नाम आवंटित हुआ था, लेकिन बाद में शासन द्वारा वह पट्टा निरस्त कर दिया गया। ऐसे में जमीन पुनः सरकारी श्रेणी में आ गई थी। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में खड़ी फसल का निस्तारण पारदर्शी प्रक्रिया—जैसे सार्वजनिक नीलामी—के माध्यम से किया जाना चाहिए था, ताकि राजस्व सीधे सरकारी खाते में जाए। प्रधान का पक्ष: इस पूरे मामले पर ग्राम प्रधान ने सफाई देते हुए कहा कि “करीब 15-20 साल पहले कुछ लोगों के नाम इस जमीन का पट्टा हुआ था, जिसे अब सरकार ने निरस्त कर दिया है। फसल एक बार के लिए काटी गई है, सवालों के घेरे में प्रक्रिया: प्रधान के इस बयान के बाद भी कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं— जब भूमि सरकारी घोषित हो चुकी थी, तो फसल की नीलामी क्यों नहीं कराई गई? कटान की प्रक्रिया किसके आदेश से और किसकी निगरानी में हुई? यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई से प्राप्त लकड़ी का हिसाब किसके पास है? क्या ग्राम पंचायत या राजस्व विभाग को इसकी सूचना दी गई थी? प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल: स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में लाखों रुपये के गड़बड़झाले की आशंका जताई जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी संपत्ति की हानि का मामला है, बल्कि पंचायत स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ग्रामीणों की मांग: ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करना सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। निष्कर्ष: यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेकर जांच करता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।2
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- Post by Deepak Pandey संवाददाता1
- शाहाबाद बस अड्डे पर ऑटो चालक की दबंगई, सवारियों से मारपीट का वीडियो वायरल— ओवरस्पीड व ओवरलोडिंग से बढ़ रहा खतरा, पुलिस पर उठे सवाल तहसील संवाददाता हरदोई/शाहाबाद: शाहाबाद कस्बे के बस अड्डे पर ऑटो चालक की दबंगई का मामला सामने आया है, जहां सवारियों के साथ मारपीट किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना ने जहां कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं क्षेत्र में चल रहे थ्री व्हीलर ऑटो के अनियंत्रित संचालन की गंभीर समस्या को भी उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार, ऑटो संख्या UP 30BT 9532 में सवार यात्रियों ने चालक से वाहन धीमी गति से चलाने को कहा। आरोप है कि इससे नाराज होकर चालक ने बस अड्डे पर ऑटो रोककर सवारियों को उतार दिया और अपने साथियों के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूरी घटना के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन हस्तक्षेप करने के बजाय मूकदर्शक बनी रही। इससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी के साथ स्थानीय लोगों ने एक और बड़ी समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। शाहाबाद बस स्टैंड से हरदोई की ओर जाने वाले थ्री व्हीलर ऑटो में ओवरलोडिंग और ओवरस्पीड आम बात हो गई है। कई ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारियां बैठाते हैं और तेज रफ्तार में वाहन दौड़ाते हैं, जिससे रोजाना दुर्घटनाएं होते-होते बचती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “हादसे अब बस होने ही वाले हैं,” हालात इतने खराब हो चुके हैं। यात्रियों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मनमाना किराया वसूलना, अभद्र व्यवहार करना और विरोध करने पर धमकी देना—ये सब अब आम हो गया है। कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस अराजकता पर लगाम लगाने में असमर्थ है? बस अड्डे जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी अगर यात्री सुरक्षित नहीं हैं, तो आम रास्तों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि दोषी ऑटो चालक पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ पूरे रूट पर चलने वाले थ्री व्हीलर वाहनों की जांच की जाए, ओवरलोडिंग और ओवरस्पीड पर सख्ती से रोक लगाई जाए और बस अड्डों पर पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।1
- शिल्पी हत्याकांड पर सियासी घमासान तेज शिल्पी हत्याकांड पर गरमाई राजनीति, पूर्व मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उठाए सवाल हरदोई जिले के मल्लावां क्षेत्र के गढ़ी रसूलपुर गांव में हुए चर्चित शिल्पी हत्याकांड ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। घटना के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। करीब 45 मिनट तक चली बातचीत के दौरान उन्होंने मृतका को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को ढांढस बंधाया। इस दौरान परिवार ने मामले की CBI जांच, दोषियों को फांसी की सजा और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग दोहराई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना से पहले कई बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे आरोपियों के हौसले बढ़े और यह घटना घटित हो गई। हालांकि पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन परिजन इससे संतुष्ट नहीं हैं। परिवार का कहना है कि जब अन्य मामलों में “ऑपरेशन लंगड़ा” और बुलडोजर जैसी कार्रवाई होती है, तो इस मामले में वैसी सख्ती क्यों नहीं दिखाई जा रही। उनका कहना है कि उन्हें केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि कठोर और उदाहरण पेश करने वाली सजा चाहिए। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है और न्याय दिलाने का आश्वासन भी दिया गया है। इस कदम के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में पीड़ित परिवार को निष्पक्ष और त्वरित न्याय मिल पाएगा या फिर यह मामला भी सियासी बहस तक ही सीमित रह जाएगा।3
- पुवायां मोहम्मदी भीषण सड़क हादसों से पति-पत्नी दो बच्चों सहित दर्दनाक मौत पोस्टमार्टम के बाद करीब 10:00 बजे रात घर पहुंचे शव परिवार में बच्चा कोहराम निगोही शाहजहांपुर - निगोही के रहने वाले एक परिवार के चार लोग भीषण सड़क हादसे में बाइक चार पहिया वाहन की आपस में टक्कर के बाद अरुण धोबी का पूरा परिवार मोहल्ला रामनगर बगिया निगोही मौके पर ही अरुण, दीक्षा व नैतिक की मौत हो गई । जबकि घायल सीमा को सीएचसी ले जाया गया । जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था । अरुण उर्फ कन्हैया अपनी ससुराल से अपने घर को सुबह वापस परिवार सहित निगोही आ रहे थे। तभी 9:00 बजे भीषण हादसे का शिकार हो जाने के बाद काल के मुंह में परिवार सहित समा गया । अरुण कुमार उर्फ कन्हैया की 11 वर्षीय बेटी घर पर रही रो रो कर अपना दर्द वया कर रही थी । परिवार मोहल्ले के लोग इकट्ठा थे , सबके आंखों में आंसू और एक ही बात कह रहे थे । परिवार को एक साथ नहीं जाना चाहिए .......1
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