Shuru
Apke Nagar Ki App…
सिवनी जिले के कुरई क्षेत्र अंतर्गत बकौड़ी गांव के ग्रामीणों का दर्द अब सीधे कलेक्टर दरबार तक पहुंच गया है। ग्रामीणों ने अत्यंत दुखी होकर अपनी व्यथा सुनाई है कि उन्हें जीते जी तो सड़क ने रुलाया ही है, लेकिन अब उनके अंतिम सफर में भी उन्हें कोई सहारा नहीं मिल पा रहा है। सड़क की इसी दयनीय और बदहाल स्थिति से परेशान होकर बकौड़ी के ग्रामीण अपनी गुहार लेकर कलेक्टर के समक्ष पहुंचे हैं।
सरवन वर्मा पत्रकार
सिवनी जिले के कुरई क्षेत्र अंतर्गत बकौड़ी गांव के ग्रामीणों का दर्द अब सीधे कलेक्टर दरबार तक पहुंच गया है। ग्रामीणों ने अत्यंत दुखी होकर अपनी व्यथा सुनाई है कि उन्हें जीते जी तो सड़क ने रुलाया ही है, लेकिन अब उनके अंतिम सफर में भी उन्हें कोई सहारा नहीं मिल पा रहा है। सड़क की इसी दयनीय और बदहाल स्थिति से परेशान होकर बकौड़ी के ग्रामीण अपनी गुहार लेकर कलेक्टर के समक्ष पहुंचे हैं।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- सिवनी जिले के कुरई क्षेत्र अंतर्गत बकौड़ी गांव के ग्रामीणों का दर्द अब सीधे कलेक्टर दरबार तक पहुंच गया है। ग्रामीणों ने अत्यंत दुखी होकर अपनी व्यथा सुनाई है कि उन्हें जीते जी तो सड़क ने रुलाया ही है, लेकिन अब उनके अंतिम सफर में भी उन्हें कोई सहारा नहीं मिल पा रहा है। सड़क की इसी दयनीय और बदहाल स्थिति से परेशान होकर बकौड़ी के ग्रामीण अपनी गुहार लेकर कलेक्टर के समक्ष पहुंचे हैं।1
- मध्य प्रदेश पटवारी संघ (भोपाल) के प्रादेशिक आह्वान पर वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सिवनी जिले सहित पूरे प्रदेश के पटवारी 15 जुलाई 2026 से तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। सिवनी जिला अध्यक्ष सुदेश सिंह ठाकुर के नेतृत्व में कुरई तहसील सहित जिले की सभी तहसीलों के पटवारियों ने एकजुट होकर माननीय मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को अपना अवकाश पत्र और ज्ञापन सौंपा है। पटवारियों का कहना है कि शासन-प्रशासन द्वारा लगातार की जा रही उपेक्षा के कारण पटवारी संवर्ग खुद को शोषित महसूस कर रहा है। पटवारी संघ की प्रमुख पांच सूत्रीय मांगों में शासन स्तर पर लंबित कैडर रिव्यू के प्रस्ताव को तत्काल लागू करना और तब तक अन्य विभागों की तरह पदोत्रति व समयमान वेतनमान का लाभ देना शामिल है। इसके अलावा, वर्ष 2018 के बाद से नायब तहसीलदार पद के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित न होने के कारण इसे शीघ्र कराने की मांग की गई है। राजस्व मामलों में केवल प्रतिवेदन सौंपने के बावजूद सीधे एफआईआर दर्ज होने से बचने के लिए पटवारियों को तहसीलदार और नायब तहसीलदार की तरह 'जज प्रोटेक्शन एक्ट' का संरक्षण देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। साथ ही, स्वामित्व योजना, कृषि संगणना, लघु सिंचाई संगणना और फार्मर आईडी कैंप जैसे शासकीय कार्यों के वर्षों से रुके हुए मानदेय के भुगतान तथा स्थानांतरण नीति 2026 के विपरीत किए गए पदाधिकारियों के दुर्भावनापूर्ण तबादलों को निरस्त करने की मांग की गई है। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 15 से 17 जुलाई 2026 तक का यह सामूहिक अवकाश केवल एक सांकेतिक आंदोलन है। यदि सरकार ने समय रहते इन न्यायोचित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आदेश जारी नहीं किए, तो आगामी दिनों में आंदोलन को उग्र और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। मध्य प्रदेश के समस्त पटवारी आगामी शासकीय योजनाओं और कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।1
- सिवनी में 8 पुलिस अफसरों को प्रमोशन मिला है। इस अवसर पर एसपी ने खुद पदोन्नत हुए इन अधिकारियों के कंधों पर नए स्टार सजाए।1
- सिवनी जिले के ग्राम पलारी में आयोजित अखंड श्री सुंदरकांड पाठ के अवसर पर नर्मदा मिशन के संस्थापक संत दादा गुरु जी का आगमन हुआ, जहां उन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने जल, जंगल, जमीन, माटी और वृक्षों के संरक्षण को सबसे बड़ा कर्तव्य बताया। संत दादा गुरु जी ने पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए लोगों से पौधे लगाने और पानी बचाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति में गौसेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए वहां उपस्थित पूरे जनसमुदाय को प्रकृति संरक्षण का संकल्प दिलाया।1
- सिवनी में सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही वन विभाग पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे स्थानीय आदिवासी किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। आदिवासियों का आरोप है कि वन विभाग ने उनकी लकड़ी कटवा दी है और जब उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया, तो उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई। इस घटना के बाद जब पत्रकारों ने मौके पर पहुंचकर सवाल-जवाब करने की कोशिश की, तो वनकर्मी उनके सवालों से बचते नजर आए। वन विभाग के इस रवैये से नाराज आदिवासी किसानों में भारी आक्रोश है और उन्होंने अब निष्पक्ष सीमांकन की मांग उठाई है।1
- मध्य प्रदेश के बालाघाट स्थित कटंगी थाने में आरोप-प्रत्यारोप के बीच अलग-अलग ज्ञापन सौंपे गए हैं। इस दौरान विभिन्न पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए पुलिस को ये ज्ञापन सौंपे गए।1
- छिंदवाड़ा के चौरई क्षेत्र के चन्हियाखुर्द में एक 32 वर्षीय विवाहिता ने कथित रूप से जहरीला पदार्थ पीकर आत्महत्या कर ली। इस आत्मघाती कदम को उठाने से पहले महिला ने अपने हाथ और पैरों पर ही मेहंदी से सुसाइड नोट लिख डाला, जिसे पुलिस अब मामले का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मानकर जांच कर रही है। इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक महिला की पहचान चन्हियाखुर्द निवासी प्रीति के रूप में हुई है, जो लखन वर्मा की पत्नी थी। प्रीति ने शुक्रवार को जहरीले पदार्थ का सेवन किया था, जिसके बाद परिजन उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे एक निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। थाना प्रभारी आशीष धुर्वे ने बताया कि जांच के दौरान देखा गया कि महिला ने अपने हाथ और पैरों पर मेहंदी से वह बातें लिखी थीं, जो ससुराल वालों द्वारा विवाद की स्थिति निर्मित किए जाने को लेकर थीं। पुलिस ने साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए इस मेहंदी से लिखे संदेशों की बाकायदा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई है ताकि जांच में इसका उपयोग किया जा सके। बताया जा रहा है कि महिला की शादी करीब 13 वर्ष पहले हुई थी और कुछ समय पूर्व अपने बेटे की मृत्यु के बाद से वह गहरे सदमे में थी। हालांकि, आत्महत्या के वास्तविक कारणों का अंतिम खुलासा पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर संबंधित थाने को इसकी जानकारी भेज दी है और मामले की जांच जारी है। इस मामले में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।4
- सिवनी जिले के कुरई क्षेत्र में आदिम जाति सेवा सहकारी मोहगांव के किसान खाद की किल्लत से जूझते हुए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सोमवार को अपनी व्यथा बताते हुए किसानों ने कहा कि उन्हें यूरिया, डीएपी और पोटाश खाद के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा खाद के लिए लागू की गई ऑनलाइन टोकन व्यवस्था अब उनके लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। किसानों का आरोप है कि टोकन लेने के लिए जब वे निर्धारित केंद्र पर पहुंचते हैं, तो वहां से कर्मचारी अक्सर नदारद रहते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन सर्वर ठप रहने के कारण उन्हें दिन-रात चक्कर काटने पड़ रहे हैं और समय पर खाद नहीं मिल पा रही है।2