रीवा जिले के गुढ़ नगर परिषद में अध्यक्ष और पार्षदों के बीच छिड़ी राजनीतिक जंग अब और तेज हो गई है। नगर परिषद के 15 में से 13 पार्षदों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्षदों ने मीडिया के सामने आकर अध्यक्ष के आरोपों को गलत ठहराया और कहा कि वह अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह को जिम्मेदार ठहरा रही हैं तथा उन्हें बदनाम करने का षड्यंत्र रच रही हैं। गौरतलब है कि नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह, जो कभी विधायक नागेंद्र सिंह की बेहद करीबी मानी जाती थीं, वर्तमान में उनके खिलाफ उतर आई हैं। बीते कई महीनों से 13 पार्षद अध्यक्ष के खिलाफ थे और उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव तक पेश किया था। इसके बाद अध्यक्ष अर्चना सिंह ने इसे विधायक नागेंद्र सिंह और उनके निज सचिव बाबूलाल यादव का षड्यंत्र बताते हुए चेतावनी दी थी। हालांकि, हालिया वार्ता के दौरान पार्षदों द्वारा एक पत्र भी पढ़कर सुनाया गया, जिसे लेकर अब यह चर्चा जोरों पर है कि यह पत्र कहां से आया और इसकी स्क्रिप्ट किसने लिखी। पार्षदों ने विधायक को इस मामले में पूरी तरह पाक-साफ बताया है। अध्यक्ष और पार्षदों के बीच जारी इस खींचतान में गुढ़ की जनता पिस रही है। एक तरफ अध्यक्ष सीधे विधायक और उनके करीबियों पर हमलावर हैं, तो दूसरी तरफ 13 पार्षद एकजुट होकर अध्यक्ष को पद से हटाने और उनके आरोपों को बेबुनियाद साबित करने में जुटे हैं। स्थानीय निकाय की यह जंग अब क्षेत्रीय राजनीति को भी गहराई से प्रभावित करती नजर आ रही है।
रीवा जिले के गुढ़ नगर परिषद में अध्यक्ष और पार्षदों के बीच छिड़ी राजनीतिक जंग अब और तेज हो गई है। नगर परिषद के 15 में से 13 पार्षदों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्षदों ने मीडिया के सामने आकर अध्यक्ष के आरोपों को गलत ठहराया और कहा कि वह अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह को जिम्मेदार ठहरा रही हैं तथा उन्हें बदनाम करने का षड्यंत्र रच रही हैं। गौरतलब है कि नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह, जो कभी विधायक नागेंद्र सिंह की बेहद करीबी मानी जाती थीं, वर्तमान में उनके खिलाफ उतर आई हैं। बीते कई महीनों से 13 पार्षद अध्यक्ष के खिलाफ थे और उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव तक पेश किया था। इसके बाद अध्यक्ष अर्चना सिंह ने इसे विधायक नागेंद्र सिंह और उनके निज सचिव बाबूलाल यादव का षड्यंत्र बताते हुए चेतावनी दी थी। हालांकि, हालिया वार्ता के दौरान पार्षदों द्वारा एक पत्र भी पढ़कर सुनाया गया, जिसे लेकर अब यह चर्चा जोरों पर है कि यह पत्र कहां से आया और इसकी स्क्रिप्ट किसने लिखी। पार्षदों ने विधायक को इस मामले में पूरी तरह पाक-साफ बताया है। अध्यक्ष और पार्षदों के बीच जारी इस खींचतान में गुढ़ की जनता पिस रही है। एक तरफ अध्यक्ष सीधे विधायक और उनके करीबियों पर हमलावर हैं, तो दूसरी तरफ 13 पार्षद एकजुट होकर अध्यक्ष को पद से हटाने और उनके आरोपों को बेबुनियाद साबित करने में जुटे हैं। स्थानीय निकाय की यह जंग अब क्षेत्रीय राजनीति को भी गहराई से प्रभावित करती नजर आ रही है।
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले की गुढ़ नगर परिषद में सियासी घमासान चरम पर पहुँच गया है, जहाँ 13 पार्षदों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्षदों ने अध्यक्ष के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने विधायक नागेन्द्र सिंह पर अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था। पार्षदों का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव उनका स्वतंत्र और लोकतांत्रिक निर्णय था। पार्षदों ने अध्यक्ष और तत्कालीन सीएमओ की कथित मिलीभगत से करोड़ों रुपये की गड़बड़ी का दावा किया है। इन आरोपों में फर्जी नियुक्तियाँ, लगभग ₹10 लाख का डीजल भुगतान, अमृत 2.0 योजना में करीब ₹73 लाख का कथित फर्जी भुगतान, बिना कार्य हुए लगभग ₹50 लाख का भुगतान और घटिया निर्माण कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही पार्षदों ने अध्यक्ष की शैक्षणिक डिग्री की जांच, उनके पति से जुड़े व्यापम प्रकरण की जांच और चुनाव के दौरान हुए कथित गोलीकांड की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी रखी है। परिषद की बैठकें समय पर न बुलाने, बजट पारित न कराने और ठेकेदारों से कथित कमीशनखोरी की शिकायतों को उजागर करते हुए पार्षदों ने अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार तत्काल समाप्त करने और पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल इस संयुक्त बयान पर नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और मामला अब प्रशासनिक व कानूनी जांच की मांग तक पहुँच गया है।1
- रीवा के अत्यंत व्यस्त पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में यातायात थाना के ठीक सामने संचालित शराब दुकान और उसके समीप स्थित "KGN न्यू जायका" रेस्टोरेंट को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आपत्ति जताई है। लोगों का आरोप है कि शराब दुकान से शराब खरीदने के बाद बड़ी संख्या में लोग दुकान के बाहर और रेस्टोरेंट के आसपास खुलेआम बैठकर शराब का सेवन करते हैं, जिससे प्रतिदिन जमावड़ा लगा रहता है। इसके अलावा रेस्टोरेंट के बाहर "Veg & Non-Veg" का बोर्ड लगाकर खुले रूप से मांसाहारी खाद्य सामग्री का विक्रय किया जा रहा है, जिससे राहगीरों, विद्यार्थियों और धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों की भावनाएं प्रभावित हो रही हैं। नागरिकों का कहना है कि यह शहर का सबसे व्यस्त मार्ग है, जहां से प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और प्रयागराज व वाराणसी जाने वाले यात्री गुजरते हैं। शराब पीने वालों को पास में ही बैठने और खान-पान की सुविधा दिए जाने से देर रात तक असामाजिक गतिविधियों जैसी स्थिति बनी रहती है। आक्रोशित नागरिकों ने सवाल उठाया कि इस मार्ग से प्रतिदिन प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। नागरिकों ने खाद्य सुरक्षा विभाग से रेस्टोरेंट के वैधानिक व स्वच्छता संबंधी मानकों की जांच करने और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।2
- 26 जुलाई का दिन भारतीय इतिहास में एक विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1999 में इसी दिन भारत ने कारगिल युद्ध में ऐतिहासिक विजय हासिल की थी, जिसके उपलक्ष्य में हर साल इस गौरवपूर्ण दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके साथ ही 26 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है। वैश्विक इतिहास की बात करें तो वर्ष 1856 में महान नाटककार और साहित्यकार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का जन्म इसी दिन हुआ था। वहीं, 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पॉट्सडैम घोषणा पत्र जारी कर जापान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की मांग की गई थी। इसके अलावा वर्ष 1953 में फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा के मोनकाडा बैरक पर हमला किया था, जिसने क्यूबा की क्रांति की नींव रखने का काम किया। देश की हालिया घटनाओं में वर्ष 2005 में आज ही के दिन मुंबई में हुई रिकॉर्ड बारिश का दौर भी शामिल है, जिससे वहां का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया था। इतिहास की ये तमाम घटनाएं हमें अतीत से सीख लेकर अपने भविष्य को संवारने का संदेश देती हैं।1
- सतना जिले के बेला में NEET और CBSE परीक्षा परिणामों में हुई व्यापक अनियमितताओं तथा प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। शनिवार, 25 जुलाई 2026 को आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के तहत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर कैंडल लाइट मार्च निकाला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर ब्लॉक अध्यक्ष शिवशंकर गौटिया के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता जेपी मोड़ स्थित ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय में एकत्र हुए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने जेपी मोड़ से गोविंदगढ़ मोड़ तक हाथों में मोमबत्तियां और तख्तियां लेकर मार्च निकाला। इस दौरान "छात्र विरोधी सरकार मुर्दाबाद" और "शिक्षा में भ्रष्टाचार बंद करो" जैसे नारों के साथ सरकार को घेरा गया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि NEET में पेपर लीक और CBSE नतीजों में गड़बड़ी की वजह से देश के लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है। न्याय मांग रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करके लोकतंत्र की हत्या की गई है। कांग्रेस ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। इस विरोध मार्च में शिवशंकर गौटिया के साथ डॉ. राजेश पांडे, बसंत मिश्रा, ओमकार प्यासी, युवा अध्यक्ष संदीप सिंह, जय प्रकाश, शोभनाथ सिंह, बाबूलाल गुप्ता साकेत, अरविंद साकेत, कमलाकांत मिश्रा, सोहनलाल कोल, मंगलेश्वर पटेल, दिनेश कोल सहित कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत मांगें नहीं मानीं तो पार्टी पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करेगी।4
- गुढ़ के तमरा हल्का पटवारी रवि नारायण वर्मा का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने के बाद से क्षेत्र के किसान लगातार उनकी काली करतूतों की पोल खोल रहे हैं। इसी कड़ी में पटवारी की प्रताड़ना से तंग आकर एक महिला किसान ने रो-रोकर अपनी आपबीती सुनाई। पटवारी रवि नारायण वर्मा की कार्यशैली से साफ अंदेशा लगाया जा सकता है कि उनके लिए पैसों के आगे किसी भी किसान के जीवन का कोई महत्व नहीं है। इस मामले में जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये से परेशान होकर उमेश त्रिपाठी पिडिहा ने मोर्चा खोल दिया है। वे मंगलवार से तमरा में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे।1
- मऊगंज जिले की ग्राम पंचायत दुवगमा दुवान में अचानक जमीनी विवाद काफी बढ़ गया। यहाँ सरहंगों द्वारा जबरदस्ती दूसरे की जमीन पर अतिक्रमण करते हुए निर्माण कार्य कराया जा रहा था। सूचना मिलने पर पहुँची डायल 112 की टीम के मना करने के बावजूद ये लोग मानने को तैयार नहीं हुए और जबरन निर्माण कार्य जारी रखा। इसके बाद मऊगंज प्रशासन ने खुद मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायज़ा लिया और सरहंगों द्वारा किए जा रहे इस अतिक्रमण व निर्माण कार्य को तुरंत बंद करवा दिया।2
- मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व स्थित धमोखर बफर क्षेत्र के जंगल में 60 से अधिक सदस्यों की टीम ने 4 प्रशिक्षित हाथियों की मदद से एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस अभियान के तहत टीम ने बाघिन का खराब 'रेडियो कॉलर' सुरक्षित रूप से हटा दिया है। कॉलर हटाने के बाद बाघिन का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और तत्पश्चात उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।1
- रीवा जिले की गुढ़ नगर परिषद में प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान के बीच पार्षदों ने नीर मैरिज गार्डेन में एक संयुक्त पत्रकार वार्ता आयोजित कर नगर परिषद अध्यक्ष पर तीखे आरोप लगाए हैं। पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद में विकास कार्य लंबे समय से ठप पड़े हैं, जिससे आम जनता को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और प्रशासनिक बाधाओं के कारण नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है। पत्रकार वार्ता के दौरान पार्षदों ने नगर परिषद अध्यक्ष को विकास में बाधा डालने का जिम्मेदार ठहराया। पार्षदों ने कहा कि अध्यक्ष द्वारा क्षेत्रीय विधायक नागेंद्र सिंह पर लगाए गए आरोप पूरी तरह तथ्यहीन और निराधार हैं, जबकि मंडल अध्यक्ष अनंत कुमार गुप्ता एवं बाबूलाल यादव पर लगाए गए आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि विधायक हमेशा नगर के विकास और जनहित के कार्यों के पक्षधर रहे हैं, और अध्यक्ष केवल वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर परिषद अध्यक्ष ने उन्हें कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार में सहयोग के लिए कई तरह के प्रस्ताव और प्रलोभन दिए थे, जिन्हें उन्होंने जनहित और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए ठुकरा दिया। पार्षदों ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक द्वेष का नतीजा नहीं, बल्कि नगर के विकास और जनहित की रक्षा के लिए उठाया गया कदम है। उन्होंने घोषणा की कि नगर की नागरिक सुविधाओं और विकास के लिए वे एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले की गुढ़ नगर परिषद में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सियासत गरमा गई है। नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देने के लिए 13 पार्षद एकजुट होकर सामने आए हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अध्यक्ष के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए पलटवार किया है। पार्षदों ने अध्यक्ष के राजनीतिक दबाव और साजिश संबंधी सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्षदों का कहना है कि यह अविश्वास प्रस्ताव किसी दबाव में नहीं, बल्कि जनता के हित में लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिषद के अधिकांश वार्ड विकास कार्यों से वंचित रहे हैं, जबकि केवल एक वार्ड में काम कराया गया। पार्षदों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी विधायक या संगठन के दबाव में नहीं, बल्कि अपने विवेक से अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया है। इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपनाई गई है और इस फैसले को राजनीतिक रंग देना तथ्यों से परे है।1