अयोध्या में एक प्रेस वार्ता के दौरान कृषि मंत्री तीखे सवालों पर बिदक गए, जिससे लोकतंत्र में जनता के सवालों और मीडिया की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए। लगभग 15 मिनट तक बंद कमरे में देश-प्रदेश के विकास की कागजी उपलब्धियां गिनाने के बाद, जैसे ही पत्रकारों ने जमीनी हकीकत पर सवाल दागने शुरू किए, मंत्री जी के तेवर बदल गए। ऐसा प्रतीत हुआ कि मंत्री प्रेस से संवाद करने नहीं, बल्कि सिर्फ अपना एकतरफा भाषण सुनाने आए थे, जहाँ पत्रकारों से केवल ताली बजाने और सरकारी पर्चा छापने की अपेक्षा की जा रही थी। पत्रकारों द्वारा किसानों से जुड़े 'खेत बचाओ अभियान', अधिकारियों को जमीन पर उतारने और उनकी लापरवाही पर कार्रवाई करने, यश पेपर मिल के मुद्दे, तथा पिछले 7 सालों में कृषि क्षेत्र में की गई चौपालों की वास्तविक संख्या का हिसाब जैसे तीखे सवाल पूछने पर मंत्री जी या तो बगलें झांकते नजर आए, चुप्पी साध गए, या बात को टाल गए। इतना ही नहीं, कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं में से कई को यह तक मालूम नहीं था कि वे वहाँ किसलिए बुलाई गई थीं, कुछ ने कैमरे पर स्वीकार किया कि उन्हें केवल 'भीड़ का हिस्सा बनने के लिए' लाया गया था। यह घटना बिना किसी जमीनी काम के, सिर्फ कुर्सियाँ भरने वाली 'हवा-हवाई राजनीति' का स्पष्ट संकेत देती है। लेखक के अनुसार, एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री सरकार की साख बचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वहीं कृषि मंत्री पूरी तरह अधिकारी तंत्र के भरोसे बैठे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे इस बात के गवाह हैं कि जनता और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का क्या अंजाम होता है। यदि मंत्री जी ने अभी भी 'हवा-हवाई दौरों' को छोड़कर अपने असली कार्यकर्ताओं, जमीनी मंडल अध्यक्षों और बूथ स्तर के लोगों के साथ बैठकें शुरू नहीं कीं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर फिर से करारी शिकस्त झेलनी पड़ सकती है। लेखक ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त एक्शन नहीं लिया गया, और पत्रकारों के सवालों को गंभीरता से नहीं सुना गया, तो आने वाला वक्त सत्ताधारी दल के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है।
अयोध्या में एक प्रेस वार्ता के दौरान कृषि मंत्री तीखे सवालों पर बिदक गए, जिससे लोकतंत्र में जनता के सवालों और मीडिया की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए। लगभग 15 मिनट तक बंद कमरे में देश-प्रदेश के विकास की कागजी उपलब्धियां गिनाने के बाद, जैसे ही पत्रकारों ने जमीनी हकीकत पर सवाल दागने शुरू किए, मंत्री जी के तेवर बदल गए। ऐसा प्रतीत हुआ कि मंत्री प्रेस से संवाद करने नहीं, बल्कि सिर्फ अपना एकतरफा भाषण सुनाने आए थे, जहाँ पत्रकारों से केवल ताली बजाने और सरकारी पर्चा छापने की अपेक्षा की जा रही थी। पत्रकारों द्वारा किसानों से जुड़े 'खेत बचाओ अभियान', अधिकारियों को जमीन पर उतारने और उनकी लापरवाही पर कार्रवाई करने, यश पेपर मिल के मुद्दे, तथा पिछले 7 सालों में कृषि क्षेत्र में की गई चौपालों की वास्तविक संख्या का हिसाब जैसे तीखे सवाल पूछने पर मंत्री जी या तो बगलें झांकते नजर आए, चुप्पी साध गए, या बात को टाल गए। इतना ही नहीं, कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं में से कई को यह तक मालूम नहीं था कि वे वहाँ किसलिए बुलाई गई थीं, कुछ ने कैमरे पर स्वीकार किया कि उन्हें केवल 'भीड़ का हिस्सा बनने के लिए' लाया गया था। यह घटना बिना किसी जमीनी काम के, सिर्फ कुर्सियाँ भरने वाली 'हवा-हवाई राजनीति' का स्पष्ट संकेत देती है। लेखक के अनुसार, एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री सरकार की साख बचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वहीं कृषि मंत्री पूरी तरह अधिकारी तंत्र के भरोसे बैठे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे इस बात के गवाह हैं कि जनता और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का क्या अंजाम होता है। यदि मंत्री जी ने अभी भी 'हवा-हवाई दौरों' को छोड़कर अपने असली कार्यकर्ताओं, जमीनी मंडल अध्यक्षों और बूथ स्तर के लोगों के साथ बैठकें शुरू नहीं कीं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर फिर से करारी शिकस्त झेलनी पड़ सकती है। लेखक ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त एक्शन नहीं लिया गया, और पत्रकारों के सवालों को गंभीरता से नहीं सुना गया, तो आने वाला वक्त सत्ताधारी दल के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है।
- अयोध्या धाम के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 15 जून को 'यात्री सुविधा दिवस' का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस विशेष दिन को यात्रियों की सुविधा, सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता को केंद्र में रखकर विभिन्न कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। कार्यक्रम की शुरुआत अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों के पारंपरिक स्वागत के साथ होगी, जिसमें उनका तिलक लगाकर अभिनंदन किया जाएगा। इसके बाद एयरपोर्ट के अधिकारी और कर्मचारी मिलकर 'वंदे मातरम्' का सामूहिक गायन करेंगे। पर्यावरण संरक्षण के तहत यात्रियों को पौधे वितरित किए जाएंगे और यात्रियों व कर्मचारियों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए एयरपोर्ट परिसर में एक आकर्षक सेल्फी प्वाइंट भी तैयार किया जा रहा है। अवध की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को स्थानीय संस्कृति की झलक मिल सकेगी। जनजागरूकता अभियानों के तहत प्लास्टिक मुक्त वातावरण और सुरक्षा संबंधी विषयों पर नुक्कड़ नाटक भी मंचित किए जाएंगे। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए एयरपोर्ट पर कार्यरत महिला कर्मचारियों का विशेष सम्मान समारोह आयोजित कर उनके योगदान को सराहा जाएगा। एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, इस 'यात्री सेवा दिवस' का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सरोकारों के प्रति लोगों को प्रेरित करना है। यह आयोजन अयोध्या आने वाले सभी श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए एक विशेष और यादगार अनुभव साबित होगा।2
- अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के डायरेक्टर धीरेंद्र सिंह ने एक प्रेस वार्ता कर जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 15 जून को 'यात्री सुविधा दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर पर हवाई अड्डे पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। एयरपोर्ट के प्रबंधक धीरेंद्र सिंह ने बताया कि 15 जून को हवाई अड्डे पर आने वाले सभी यात्रियों का टीका लगाकर स्वागत किया जाएगा। इस दौरान यात्री, सीआईएसएफ, एएआई और एयरलाइन स्टाफ द्वारा वंदे मातरम का गायन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों के लिए एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन भी होगा। कार्यक्रमों की सूची में कॉलेजों में वृक्षारोपण, हाउसकीपिंग स्टाफ का सम्मान, सेल्फी पॉइंट, पेंटिंग, क्विज और ड्राइंग प्रतियोगिताएं, करियर काउंसलिंग, तथा प्लास्टिक मुक्त वातावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए नुक्कड़ नाटक शामिल हैं। सुरक्षा संबंधी विषयों पर भी नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे और एयरपोर्ट पर कार्यरत महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा। इन सबके अलावा भी कई अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।1
- अयोध्या में एक जन चौपाल का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ पूर्व सांसद लल्लू सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर जनसुनवाई करेंगे। यह कार्यक्रम 13 जून, शनिवार को शाम 6:00 बजे वार्ड नम्बर 6, नासिरपुर मूसी में राकेश पांडेय 'राना' चेयरमैन के आवास पर आयोजित होगा। इस जन चौपाल में तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी बीकापुर, अयोध्या ने इस कार्यक्रम का निवेदन किया है।1
- धार्मिक नगरी अयोध्या और आस-पास के इलाकों में आज मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। दोपहर होते-होते आसमान में घने काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। इस झमाझम बारिश ने जहाँ पिछले कई दिनों से पड़ रही उमस और भीषण गर्मी से लोगों को बड़ी राहत दी है, वहीं शहर के कई हिस्सों में व्यवस्थाओं की पोल खोलते हुए जलभराव से मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।1
- अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े दान चोरी के कथित मामले को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता तेज नारायण पाण्डेय ने एक बयान दिया है।1
- राम जगत वर्मा ने 'खेत बचाओ अभियान' की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं, इसे केवल हवाई भाषण बताते हुए कहा है कि इसका जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। वर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि अभियान का प्रभाव धरातल पर न दिखना इसकी सार्थकता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।1
- सुल्तानपुर जिले में मौसम ने अचानक करवट ली है, जिससे भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली है। तेज धूल भरी आंधी के बाद झमाझम बारिश शुरू हुई, जिसके चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। आंधी के दौरान धूल का गुबार छाने से कुछ देर के लिए जनजीवन भी प्रभावित रहा। बारिश शुरू होते ही बच्चे, युवा और किसान काफी उत्साहित नजर आए। स्थानीय किसानों ने बताया कि यह बारिश खरीफ फसलों की तैयारी के लिए फायदेमंद साबित होगी। मौसम में अचानक आए इस बदलाव से पूरे जिले में सुहावना माहौल बन गया है और गर्मी का असर काफी कम हो गया है।2
- धार्मिक नगरी अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। दोपहर होते-होते आसमान में घने काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस बारिश से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से काफी राहत मिली।1