मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सिंधी समाज द्वारा दी गईं 200 चांदी की ईंटों को लेकर छिड़ा विवाद अब शांत हो गया है। दान देने वाले राजू मनवानी ने ट्रस्ट से पूरा हिसाब-किताब मिलने के बाद खुद पत्र लिखकर संतोष जताया है। उन्होंने साफ किया है कि उनकी दी हुई ईंटें पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिन्हें पिघलाकर स्टेट बैंक के लॉकर में रखवा दिया गया है। हालांकि, ईंटों का मामला सुलझने के बाद भी अयोध्या की जनता और मीडिया के मन में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब राजू मनवानी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल था और ईंटों के गायब होने की चर्चाएं गर्म थीं, तब से लेकर आज तक अयोध्या का स्थानीय सिंधी समाज चुप क्यों बैठा था? स्थानीय सिंधी समाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तर्क दिया कि दान हमेशा गुप्त होता है और उसका हिसाब मांगना महापाप है। इस पर जनता का कहना है कि देश-विदेश के सिंधी समाज से चंदा इकट्ठा कर दी गई ईंटें मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए थीं, इसलिए अपने सहयोग की जानकारी मांगना कोई गुनाह या पाप नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थानीय सिंधी समाज द्वारा बार-बार विपक्ष पर ठीकरा फोड़े जाने और राजू मनवानी को विपक्षी पार्टियों का मोहरा बताए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। जनता का मानना है कि स्थानीय समाज के कुछ लोगों के संबंध सीधे सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं से हैं और यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आस्था के नाते नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष की तरफ से की जा रही बैटिंग थी। आश्चर्य की बात यह है कि राम मंदिर परिसर में चढ़ावे, धन और आभूषणों की चोरी व हेराफेरी के जिस गंभीर मामले की जांच खुद विशेष जांच दल कर रहा है, उस पर बोलने के बजाय सिंधी समाज सिर्फ विपक्ष पर आरोप लगा रहा है। अयोध्या के बाजारों में चर्चा है कि सिंधी समाज मुख्य रूप से व्यापारियों का समाज है, इसलिए उन पर किसी सरकारी जांच, टैक्स या धंधे के नुकसान का कोई प्रशासनिक दबाव हो सकता है, जिसके डर से इतने दिनों के मौन के बाद अचानक यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर इस पूरे मामले में शामिल लोगों की कॉल डिटेल्स सार्वजनिक कर दी जाएं, तो सच पानी की तरह साफ हो जाएगा। इस पूरे मामले पर तंज कसते हुए लोग कह रहे हैं कि मर्यादा की नगरी में भी हर बात पर राजनीति शुरू हो गई है, लेकिन प्रभु श्री राम की नगरी में गलत काम करने वालों को ईश्वर के दरबार में सजा मिलकर ही रहेगी।
मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सिंधी समाज द्वारा दी गईं 200 चांदी की ईंटों को लेकर छिड़ा विवाद अब शांत हो गया है। दान देने वाले राजू मनवानी ने ट्रस्ट से पूरा हिसाब-किताब मिलने के बाद खुद पत्र लिखकर संतोष जताया है। उन्होंने साफ किया है कि उनकी दी हुई ईंटें पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिन्हें पिघलाकर स्टेट बैंक के लॉकर में रखवा दिया गया है। हालांकि, ईंटों का मामला सुलझने के बाद भी अयोध्या की जनता और मीडिया के मन में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब राजू मनवानी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल था और ईंटों के गायब होने की चर्चाएं गर्म थीं, तब से लेकर आज तक अयोध्या का स्थानीय सिंधी समाज चुप क्यों बैठा था? स्थानीय सिंधी समाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तर्क दिया कि दान हमेशा गुप्त होता है और उसका हिसाब मांगना महापाप है। इस पर जनता का कहना है कि देश-विदेश के सिंधी समाज से चंदा इकट्ठा कर दी गई ईंटें मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए थीं, इसलिए अपने सहयोग की जानकारी मांगना कोई गुनाह या पाप नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थानीय सिंधी समाज द्वारा बार-बार विपक्ष पर ठीकरा फोड़े जाने और राजू मनवानी को विपक्षी पार्टियों का मोहरा बताए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। जनता का मानना है कि स्थानीय समाज के कुछ लोगों के संबंध सीधे सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं से हैं और यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आस्था के नाते नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष की तरफ से की जा रही बैटिंग थी। आश्चर्य की बात यह है कि राम मंदिर परिसर में चढ़ावे, धन और आभूषणों की चोरी व हेराफेरी के जिस गंभीर मामले की जांच खुद विशेष जांच दल कर रहा है, उस पर बोलने के बजाय सिंधी समाज सिर्फ विपक्ष पर आरोप लगा रहा है। अयोध्या के बाजारों में चर्चा है कि सिंधी समाज मुख्य रूप से व्यापारियों का समाज है, इसलिए उन पर किसी सरकारी जांच, टैक्स या धंधे के नुकसान का कोई प्रशासनिक दबाव हो सकता है, जिसके डर से इतने दिनों के मौन के बाद अचानक यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर इस पूरे मामले में शामिल लोगों की कॉल डिटेल्स सार्वजनिक कर दी जाएं, तो सच पानी की तरह साफ हो जाएगा। इस पूरे मामले पर तंज कसते हुए लोग कह रहे हैं कि मर्यादा की नगरी में भी हर बात पर राजनीति शुरू हो गई है, लेकिन प्रभु श्री राम की नगरी में गलत काम करने वालों को ईश्वर के दरबार में सजा मिलकर ही रहेगी।
- अयोध्या में जिला समाजवादी पार्टी कार्यालय पर जन-जन के नायक, लोहियावादी और मजबूर दलित शोषण के मसीहा पूर्व सांसद स्वर्गीय बाबू मित्र सेन यादव की 93वीं भावपूर्ण श्रद्धांजलि जयंती मनाई गई। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष पारसनाथ यादव जी, शिक्षक सभा के जिला अध्यक्ष दान बहादुर सिंह जी, इंद्रपाल यादव जी, बाबूराम गौड जी, अधिवक्ता सभा के जिला अध्यक्ष रामकरन यादव जी, जिला उपाध्यक्ष ओरौनी प्रसाद पासवान जी, जिला उपाध्यक्ष आकिब खान जी, विद्या भूषण पासी जी, प्रदेश सचिव पवन यादव जी, पूर्व पार्षद राम अजोर यादव जी, बृजेश सिंह चौहान जी, जिला सचिव अंसार अहमद जी, बलराम यादव जी, जिला सचिव सीताराम यादव जी, जिला सचिव असलम जी, पूजा वर्मा जी, पूर्व मंत्री अमृत राजपाल जी, एडवोकेट राकेश कुमार जी, शिवदयाल जी, एडवोकेट विजय प्रताप यादव जी, युवा नेता रमन यादव जी, एडवोकेट विपिन यादव जी और युवा नेता जितेंद्र यादव आदि उपस्थित रहे।2
- अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संभावित पुनर्गठन को लेकर सनातन रक्षक संघ ने एक बड़ा बयान जारी किया है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकुंद माधव त्रिपाठी ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपनी मांगें भेजी हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए। मुकुंद माधव त्रिपाठी ने मांग की है कि यदि ट्रस्ट में कोई भी बदलाव होता है, तो उसमें बाहरी लोगों के बजाय अयोध्या के ही प्रतिष्ठित स्थानीय संतों-महंतों और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े परिवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से रंगमहल के महंत रामशरण दास, महंत वासुदेवाचार्य स्वामी विद्या भास्कर और राम बल्लभ कुंज के अधिकारी राजकुमार दास जैसे संतों को ट्रस्ट में शामिल करने की वकालत की है। इसके साथ ही, उन्होंने उन परिवारों को भी प्रतिनिधित्व देने की बात कही है जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान अपने परिजनों का बलिदान दिया था। सनातन रक्षक संघ का मानना है कि ट्रस्ट की पूरी व्यवस्था रामानंदाचार्य परंपरा से जुड़े संतों के हाथों में ही सौंपी जानी चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान त्रिपाठी ने कुछ संतों और राजनीतिक व्यक्तियों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें ट्रस्ट से दूर रखने की भी मांग की। संघ का यह सीधा संदेश है कि भगवान राम का मंदिर राम के लोगों द्वारा ही चलाया जाना चाहिए ताकि इसमें अयोध्या की आत्मा बसी रहे।1
- अयोध्या के फैजाबाद में आश्रम विवाद में एक नया मोड़ आया है, जहां स्थानीय निवासियों ने खुद सामने आकर इस पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में केवल तथ्यहीन बातों के जरिए लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के गोण्डा में चैरिटेबल संस्था के रूप में देवीपाटन मंडल में सक्रिय खून की अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले एक अन्तर्जनपदीय गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। थाना कोतवाली नगर पुलिस ने गिरोह के 8 अभियुक्तों को चाँदमारी पुलिया घोसियाना के पास से गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान मुख्तार, शिवम शुक्ला, विजय, साहबे आलम, ऋषिकेश अवस्थी, बृजेश कुमार शुक्ला, अभिषेक सिंह और सौरभ श्रीवास्तव के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से 253 कूटरचित ब्लड बैंक कार्ड, 10 अदद डिस्पोजल सिरिन्ज और 9 अदद मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस गिरोह की काली करतूतों का पर्दाफाश तब हुआ जब थाना खरगूपुर के ग्राम परसा निवासी वली मोहम्मद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, 4 जुलाई 2026 को उनकी पत्नी अस्पताल में भर्ती थीं और डॉक्टरों ने रक्त की आवश्यकता बताई थी। इसी दौरान अस्पताल के बाहर ऋषिकेश अवस्थी ने उन्हें ₹12,500 में रक्त उपलब्ध कराया, जिसके लिए पीड़ित ने ₹10,000 ऑनलाइन और ₹2,500 नकद दिए। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उस रक्त को संदिग्ध और अनुपयुक्त बताते हुए चढ़ाने से मना कर दिया। आरोपी ने न तो दूसरा रक्त दिया और न ही पीड़ित के पैसे वापस किए, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। इसके अलावा, गिरोह के खिलाफ एक और अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। कोतवाली नगर क्षेत्र के अंतर्गत एक महिला ने पुलिस को सूचना दी कि उसकी 9 वर्षीय बेटी के इलाज के दौरान आरोपियों ने एक्सपायरी (समयावधि समाप्त) रक्त उपलब्ध कराया, जिसे चढ़ाने से उसकी पुत्री की मृत्यु हो गई। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी अभिषेक और सौरभ बलरामपुर में एक ब्लड बैंक का संचालन करते हैं, जबकि उनके बाकी साथी अस्पतालों के बाहर जरूरतमंद मरीजों के तीमारदारों को अपना शिकार बनाकर खून का अवैध कारोबार चलाते थे। पुलिस ने सभी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय रवाना कर दिया है।3
- अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के पैसों में कथित हेराफेरी के मामले पर राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना को अपने आप में बेहद शर्मनाक करार देते हुए कहा कि इससे सभी रामभक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। नृपेंद्र मिश्रा ने इस घटना पर गहरी शर्मिंदगी जताते हुए कहा कि राम मंदिर में ऐसी घटना का होना सिर्फ अफसोस की बात नहीं है, बल्कि यह शर्म और कलंक की बात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सीधे तौर पर सिस्टम से जुड़ा हुआ मामला है। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि जल्द ही पूरी व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की दोबारा पुनरावृत्ति न हो सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने संकेत दिया कि मंदिर व्यवस्था में जल्द ही कड़े सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इन व्यवस्थागत सुधारों का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत बनाए रखना है, ताकि मंदिर की पारदर्शिता और पवित्रता पर भविष्य में कोई भी सवाल खड़ा न हो सके।1
- अयोध्या के समाजवादी पार्टी महानगर कार्यालय में जन-जन के नायक और पूर्व सांसद स्वर्गीय बाबू मित्रसेन यादव की जयंती मनायी गयी। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश सचिव राम अचल यादव, महानगर महासचिव हामिद जाफर मीसम और उपाध्यक्ष चौधरी श्रीचंद यादव ने अन्य पदाधिकारियों के साथ उनके चित्र पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में नेताओं ने उनके संघर्षों को याद किया। महानगर महासचिव हामिद जाफर मीसम ने कहा कि बाबूजी के नाम से लोकप्रिय स्वर्गीय मित्रसेन यादव गरीब, शोषित और पीड़ित समाज के मसीहा थे, जिन्होंने हमेशा गरीबों के हक के लिए आवाज उठाई। महानगर उपाध्यक्ष चौधरी श्रीचंद यादव ने कहा कि राजनीति में एक लंबा समय बिताने वाले बाबूजी हमेशा गरीबों, किसानों, मजदूरों और शोषितों के साथ खड़े रहे। गरीबों की इस लड़ाई को अपनी लड़ाई समझकर लड़ने के कारण उनके ऊपर आपराधिक मुकदमों की झड़ी लग गई, लेकिन उनके कदम कभी पीछे नहीं हटे। वहीं, प्रदेश सचिव राम अचल यादव ने कहा कि उन्होंने हमेशा सत्य और न्याय का साथ दिया और कभी भी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया, यही वजह थी कि समाज के हर जाति, धर्म और संप्रदाय के लोग उनके साथ थे। महानगर प्रवक्ता राकेश यादव एडवोकेट ने बताया कि इस मौके पर शिक्षक सभा जिला अध्यक्ष श्री दान बहादुर सिंह, रियाज अहमद, चौधरी बलराम यादव, राम अजोर यादव, विद्या भूषण पासी, महिला महानगर अध्यक्ष अपर्णा जयसवाल, अमृत राजपाल, इंद्रपाल यादव, वीरेंद्र गौतम, जगन्नाथ यादव, केशवराम कोरी, सईद खान, जितेंद्र यादव और सगीर सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।4
- अयोध्या के फैजाबाद से लगभग 100 वर्ष के बुजुर्ग संत भरत दास जी का एक बड़ा बयान सामने आया है। बुजुर्ग संत भरत दास जी ने सीधे तौर पर कहा है कि विवाद करने वाला आदमी गलत है।1
- तेज गति से गाड़ी न चलाने और सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की तुरंत मदद करने की अपील की गई है। सड़क मार्ग पर किसी हादसे के शिकार व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा के नियमों का सही तरीके से पालन करने और राहगीरों की मदद करने के लिए लोगों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने वाले मददगारों को प्रोत्साहित किया जाता है और इसके लिए उन्हें प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया जाता है। जीवन को एक अनमोल धरोहर बताते हुए सभी से दूसरों के दुख-दर्द को समझने और सड़क हादसों से बचने की जिम्मेदारी निभाने की बात कही गई है। आज सुबह टाइम्स टीम की ओर से लखनऊ से लाल चंद सोनी ने इस संबंध में विशेष रिपोर्ट साझा की है।1
- वियतनाम में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक स्पीडबोट पलट गई। हनोई में भारतीय दूतावास ने बताया कि यह दुर्घटना वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास हुई है। इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। भारतीय मिशन ने हादसे की जानकारी देने और सहायता के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए हैं। दक्षिणी वियतनाम के अधिकारियों के अनुसार, जब यह नाव फु क्वोक के पास स्थित 'होन मे रुट न्गोई' द्वीप के पास पलटी, तो उस पर कुल 32 भारतीय पर्यटक और चार क्रू मेंबर सवार थे। हादसे के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए 21 लोगों को सुरक्षित बचाकर अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से दो की हालत काफी गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों ने बताया कि हादसे का शिकार हुए सभी 15 मृतकों के शवों को भी किनारे पर लाया जा चुका है।1