उमरिया जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पठारी में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहाँ निर्माणाधीन ओवरब्रिज पर मजदूरों से लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर बिना सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है। मामले का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कई मजदूर बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के इतनी ऊंचाई पर काम करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे मामूली चूक भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि निर्माण कार्य कर रही कंपनी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। नियमानुसार ऊंचाई पर कार्य करने वाले प्रत्येक मजदूर को सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है, लेकिन मौके पर सुरक्षा मानकों का पालन होता नहीं दिख रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन पर भी इस गंभीर मामले में अपेक्षित कार्रवाई न करने के आरोप लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों पर फिलहाल संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सुरक्षा इंतजामों के अभाव में कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? चूंकि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
उमरिया जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पठारी में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहाँ निर्माणाधीन ओवरब्रिज पर मजदूरों से लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर बिना सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है। मामले का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कई मजदूर बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के इतनी ऊंचाई पर काम करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे मामूली चूक भी किसी बड़े
हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि निर्माण कार्य कर रही कंपनी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। नियमानुसार ऊंचाई पर कार्य करने वाले प्रत्येक मजदूर को सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है, लेकिन मौके पर सुरक्षा मानकों का पालन होता नहीं दिख रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन पर भी इस गंभीर
मामले में अपेक्षित कार्रवाई न करने के आरोप लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों पर फिलहाल संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सुरक्षा इंतजामों के अभाव में कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? चूंकि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
- शहडोल जिले में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने दूर-दराज के क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं। उन्होंने इन समस्याओं के निराकरण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। इस जनसुनवाई में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शिवम प्रजापति सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।1
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढ़ार में 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' का संदेश दिया गया है।4
- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर कांग्रेस के रवैये को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर विषय, चाहे वह यूसीसी का मुद्दा हो या भोजशाला का, उसे केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। 14 जुलाई की सुबह विधानसभा पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कैलाश जोशी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जहां सभी धर्मों के नागरिकों ने यूसीसी पर खुलकर अपने विचार रखे हैं, वहीं कांग्रेस ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इससे पहले, 13 जुलाई को समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपना अंतिम प्रतिवेदन सौंपा, जिसके लिए मुख्यमंत्री ने समिति के अध्यक्ष और सदस्यों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित थे। मुख्यमंत्री को सौंपा गया यह प्रतिवेदन तीन खंडों में संकलित है। पहले खंड में 10 अध्यायों के तहत अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य के विभिन्न कानूनों व प्रथाओं का विश्लेषण कर अनुशंसाएं की गई हैं। प्रतिवेदन का दूसरा खंड विधेयक के प्रारूप के रूप में है, जिसे मध्यप्रदेश में लागू नियमों के अनुसार तैयार किया गया है और इसमें 4 भाग, 404 धाराएं व 7 अनुसूचियां शामिल हैं। तीसरे खंड में व्यापक जन परामर्श का विवरण है, जिसके तहत जिला, राज्य और वेबसाइट के माध्यम से 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण किया गया है। विशेष रूप से, समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की महत्वपूर्ण अनुशंसा की है।1
- अनूपपुर के पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले के बाद अब नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधायक ने मांग की है कि ट्रस्ट को मिलने वाली राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी पूरी पारदर्शिता जनता के सामने आनी चाहिए। विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने सवाल उठाया है कि यदि ट्रस्ट के पास पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, तो अमरकंटक में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का अब भी इतना अभाव क्यों बना हुआ है। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि क्या ट्रस्ट का कार्य केवल नर्मदा जयंती के आयोजन और दिखावे की रंगाई-पुताई करने तक ही सीमित है, या फिर विकास कार्यों पर भी प्रभावी ढंग से कोई राशि खर्च की जा रही है? विधायक ने नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की आय-व्यय का सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी करने और एक पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। विधायक के इस बयान के बाद अमरकंटक के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है और अब सभी की नजरें ट्रस्ट प्रबंधन की ओर से आने वाले जवाब पर टिकी हुई हैं।1
- कटनी के एक ग्राम पंचायत में 4 महीने तक लगातार कार्य करने के बाद भी वेतन न मिलने का एक गंभीर मामला सामने आया है। अपनी मेहनत का मेहनताना न मिलने से परेशान होकर पीड़ित शिकायतकर्ता ने आखिरकार प्रशासन के पास जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायतकर्ता ने जनसुनवाई में अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए जल्द से जल्द बकाया वेतन दिलाने की मांग की है।1
- उमरिया के जिला चिकित्सालय में एक दिवसीय निशुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। शहडोल जिले के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल शहडोल और जिला अस्पताल उमरिया के संयुक्त तत्वावधान में इस शिविर का आयोजन किया गया था। यह स्वास्थ्य कार्यक्रम 13 जुलाई को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक आयोजित किया गया था, जहां मरीजों को निशुल्क जांच और उपचार की सुविधा प्रदान की गई। इस शिविर में विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मरीजों का इलाज किया। डॉक्टर शिवेंद्र सिंह तिवारी (एमबीबीएस, एमएस) ने ब्रेन, स्पाइन, लकवा, मिर्गी, सिर दर्द और नसों के रोगों का संपूर्ण उपचार और जानकारी प्रदान की। डॉक्टर श्रुति सिंह (एमबीबीएस, डीएनडी, ओबीजी) ने बीपी, शुगर, थायराइड, बुखार, सर्दी, खांसी और सामान्य रोगों का उपचार किया। इसके अलावा शिविर में डॉ अमित वर्मा (एमडी, मेडिसिन, जनरल मेडिसिन) और डॉ विवेक शर्मा (एमबीबीएस, एमएस) ने भी पहुंचकर मरीजों की जांच की और उनका इलाज किया।4
- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने मंगलवार को अपने अनूपपुर प्रवास के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत गुलमोहर का पौधा रोपित किया। उन्होंने इस दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य का संदेश देते हुए कहा कि पौधारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। इसके साथ ही उन्होंने सभी नागरिकों से अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।1
- शहडोल जिले में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं। लोगों की समस्याओं को सुनने के बाद कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को इनके त्वरित निराकरण के आवश्यक निर्देश दिए हैं। इस जनसुनवाई कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शिवम प्रजापति सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे।1
- शहडोल जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के रामपुर में चिकन शॉप संचालक रज्जन कहार की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद मृतक के परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने श्रीवास्तव तिराहा स्थित नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई घंटों तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। उग्र प्रदर्शनकारी पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि यदि पुलिस पहले से ही अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती तो इस वारदात को टाला जा सकता था। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है।4