मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर कांग्रेस के रवैये को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर विषय, चाहे वह यूसीसी का मुद्दा हो या भोजशाला का, उसे केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। 14 जुलाई की सुबह विधानसभा पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कैलाश जोशी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जहां सभी धर्मों के नागरिकों ने यूसीसी पर खुलकर अपने विचार रखे हैं, वहीं कांग्रेस ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इससे पहले, 13 जुलाई को समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपना अंतिम प्रतिवेदन सौंपा, जिसके लिए मुख्यमंत्री ने समिति के अध्यक्ष और सदस्यों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित थे। मुख्यमंत्री को सौंपा गया यह प्रतिवेदन तीन खंडों में संकलित है। पहले खंड में 10 अध्यायों के तहत अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य के विभिन्न कानूनों व प्रथाओं का विश्लेषण कर अनुशंसाएं की गई हैं। प्रतिवेदन का दूसरा खंड विधेयक के प्रारूप के रूप में है, जिसे मध्यप्रदेश में लागू नियमों के अनुसार तैयार किया गया है और इसमें 4 भाग, 404 धाराएं व 7 अनुसूचियां शामिल हैं। तीसरे खंड में व्यापक जन परामर्श का विवरण है, जिसके तहत जिला, राज्य और वेबसाइट के माध्यम से 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण किया गया है। विशेष रूप से, समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की महत्वपूर्ण अनुशंसा की है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर कांग्रेस के रवैये को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर विषय, चाहे वह यूसीसी का मुद्दा हो या भोजशाला का, उसे केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। 14 जुलाई की सुबह विधानसभा पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कैलाश जोशी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जहां सभी धर्मों के नागरिकों ने यूसीसी पर खुलकर अपने विचार रखे हैं, वहीं कांग्रेस ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इससे पहले, 13 जुलाई को समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपना अंतिम प्रतिवेदन सौंपा, जिसके लिए मुख्यमंत्री ने समिति के अध्यक्ष और सदस्यों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित थे। मुख्यमंत्री को सौंपा गया यह प्रतिवेदन तीन खंडों में संकलित है। पहले खंड में 10 अध्यायों के तहत अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य के विभिन्न कानूनों व प्रथाओं का विश्लेषण कर अनुशंसाएं की गई हैं। प्रतिवेदन का दूसरा खंड विधेयक के प्रारूप के रूप में है, जिसे मध्यप्रदेश में लागू नियमों के अनुसार तैयार किया गया है और इसमें 4 भाग, 404 धाराएं व 7 अनुसूचियां शामिल हैं। तीसरे खंड में व्यापक जन परामर्श का विवरण है, जिसके तहत जिला, राज्य और वेबसाइट के माध्यम से 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण किया गया है। विशेष रूप से, समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की महत्वपूर्ण अनुशंसा की है।
- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर कांग्रेस के रवैये को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर विषय, चाहे वह यूसीसी का मुद्दा हो या भोजशाला का, उसे केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। 14 जुलाई की सुबह विधानसभा पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कैलाश जोशी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जहां सभी धर्मों के नागरिकों ने यूसीसी पर खुलकर अपने विचार रखे हैं, वहीं कांग्रेस ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इससे पहले, 13 जुलाई को समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपना अंतिम प्रतिवेदन सौंपा, जिसके लिए मुख्यमंत्री ने समिति के अध्यक्ष और सदस्यों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित थे। मुख्यमंत्री को सौंपा गया यह प्रतिवेदन तीन खंडों में संकलित है। पहले खंड में 10 अध्यायों के तहत अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य के विभिन्न कानूनों व प्रथाओं का विश्लेषण कर अनुशंसाएं की गई हैं। प्रतिवेदन का दूसरा खंड विधेयक के प्रारूप के रूप में है, जिसे मध्यप्रदेश में लागू नियमों के अनुसार तैयार किया गया है और इसमें 4 भाग, 404 धाराएं व 7 अनुसूचियां शामिल हैं। तीसरे खंड में व्यापक जन परामर्श का विवरण है, जिसके तहत जिला, राज्य और वेबसाइट के माध्यम से 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण किया गया है। विशेष रूप से, समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की महत्वपूर्ण अनुशंसा की है।1
- मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं, जिसके तहत मध्यप्रदेश में सेमिकॉन्डक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही इंदौर के सुपर कॉरिडोर और भोपाल में अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा।1
- उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक मनमोहक नजारा सामने आया है, जहां प्रसिद्ध पनीहाई बाघिन अपने शावक के साथ पानी में मस्ती करती कैमरे में कैद हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में शावक पानी के बीच आराम से बैठा नजर आ रहा है, जबकि पनीहाई बाघिन पानी के किनारे सतर्क मुद्रा में बैठी दिखाई दे रही है। मां और शावक का यह प्राकृतिक व्यवहार वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहा है। गाइडों के अनुसार, करीब सात वर्ष की इस बाघिन ने पनपथा बफर के पचपेड़ी क्षेत्र में अपनी स्थायी टेरिटरी बना रखी है। शांत और सहज स्वभाव के कारण पर्यटकों की पसंदीदा मानी जाने वाली यह बाघिन शिकार के समय बेहद फुर्तीली और खतरनाक साबित होती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्म और उमस भरे मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और शिकार पर नजर रखने के लिए बाघ अक्सर पानी का सहारा लेते हैं। बांधवगढ़ का कोर जोन मानसून के कारण 1 जुलाई से 30 सितंबर तक बंद है, लेकिन बफर जोन में सफारी जारी है, जहां पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, हिरण और भालू जैसे वन्यजीवों के दर्शन हो रहे हैं। इस बीच वन विभाग ने पर्यटकों से निर्धारित नियमों का पालन करने और वन्यजीवों की सुरक्षा व जंगल का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है।1
- शहडोल के बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत चंगेरा में खसरा नंबर 28/1 की शासकीय जमीन पर जबरदस्ती कब्जा किया जा रहा है। पंचायत की ओर से नोटिस दिए जाने के बावजूद भी यहां अवैध रूप से मकानों का निर्माण जारी है। इस मामले को लेकर तहसील में भी आवेदन दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सभी ग्रामवासी चाहते हैं कि इस शासकीय जमीन को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए, क्योंकि इस पर पहले कभी किसी का कब्जा नहीं रहा है। भविष्य में यदि कोई सरकारी योजना आती है, तो हाई स्कूल, हॉस्पिटल या हॉस्टल जैसे बड़े सरकारी कार्यों के लिए यह जमीन सबसे उपयुक्त है। ग्रामीणों ने मांग की है कि अतिक्रमणकारियों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर इस अवैध निर्माण को तुरंत रुकवाया जाए और जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।1
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढ़ार में 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' का संदेश दिया गया है।4
- शहडोल जिले के अमलाई थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर गांव में सोमवार रात करीब 10 बजे पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात बदमाशों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान भूपेंद्र कहार उर्फ रज्जन कहार के रूप में हुई है। वारदात के तुरंत बाद परिजन और स्थानीय लोग घायल भूपेंद्र को गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय अनूपपुर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही अमलाई थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर अपनी जांच शुरू कर दी। फिलहाल हत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपियों की पहचान के लिए आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद ले रही है। इस देर रात हुई वारदात के बाद से रामपुर गांव समेत पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है, वहीं पुलिस जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है।1
- अनूपपुर के पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले के बाद अब नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधायक ने मांग की है कि ट्रस्ट को मिलने वाली राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी पूरी पारदर्शिता जनता के सामने आनी चाहिए। विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने सवाल उठाया है कि यदि ट्रस्ट के पास पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, तो अमरकंटक में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का अब भी इतना अभाव क्यों बना हुआ है। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि क्या ट्रस्ट का कार्य केवल नर्मदा जयंती के आयोजन और दिखावे की रंगाई-पुताई करने तक ही सीमित है, या फिर विकास कार्यों पर भी प्रभावी ढंग से कोई राशि खर्च की जा रही है? विधायक ने नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की आय-व्यय का सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी करने और एक पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। विधायक के इस बयान के बाद अमरकंटक के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है और अब सभी की नजरें ट्रस्ट प्रबंधन की ओर से आने वाले जवाब पर टिकी हुई हैं।1
- उमरिया जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पठारी में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहाँ निर्माणाधीन ओवरब्रिज पर मजदूरों से लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर बिना सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है। मामले का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कई मजदूर बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के इतनी ऊंचाई पर काम करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे मामूली चूक भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि निर्माण कार्य कर रही कंपनी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। नियमानुसार ऊंचाई पर कार्य करने वाले प्रत्येक मजदूर को सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है, लेकिन मौके पर सुरक्षा मानकों का पालन होता नहीं दिख रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन पर भी इस गंभीर मामले में अपेक्षित कार्रवाई न करने के आरोप लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों पर फिलहाल संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सुरक्षा इंतजामों के अभाव में कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? चूंकि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।3