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उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को लगभग 10:30 बजे सुलतानपुर के लंभुआ रेलवे स्टेशन पहुंचीं। वह बेगमपुरा एक्सप्रेस से यहां आईं। ट्रेन लंभुआ स्टेशन पर कुछ देर रुकी और उसके बाद बनारस के लिए रवाना हो गई। राज्यपाल के आगमन को देखते हुए स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे स्टेशन परिसर को छावनी में बदल दिया गया था। जिस समय राज्यपाल की ट्रेन यहां पहुंची बारिश हो रही थी। ऐसे में एसडीएम समेत अधिकारी छाता लगाकर ड्यूटी करते देखे गए। सुरक्षा व्यवस्था में उप जिलाधिकारी लंभुआ प्रीति जैन, सीओ ऋतिक कपूर, थाना प्रभारी निरीक्षक लम्भुआ, जीआरपी लम्भुआ और आरपीएफ के अधिकारी व जवान भारी संख्या में तैनात रहे। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। राज्यपाल के आगमन के दौरान पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा।
Navbharat Times
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को लगभग 10:30 बजे सुलतानपुर के लंभुआ रेलवे स्टेशन पहुंचीं। वह बेगमपुरा एक्सप्रेस से यहां आईं। ट्रेन लंभुआ स्टेशन पर कुछ देर रुकी और उसके बाद बनारस के लिए रवाना हो गई। राज्यपाल के आगमन को देखते हुए स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे स्टेशन परिसर को छावनी में बदल दिया गया था। जिस समय राज्यपाल की ट्रेन यहां पहुंची बारिश हो रही थी। ऐसे में एसडीएम समेत अधिकारी छाता लगाकर ड्यूटी करते देखे गए। सुरक्षा व्यवस्था में उप जिलाधिकारी लंभुआ प्रीति जैन, सीओ ऋतिक कपूर, थाना प्रभारी निरीक्षक लम्भुआ, जीआरपी लम्भुआ और आरपीएफ के अधिकारी व जवान भारी संख्या में तैनात रहे। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। राज्यपाल के आगमन के दौरान पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा।
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- श्री प्रल्हाद जोशी को भारत का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति राष्ट्रीय स्तर पर की गई है और इसका प्रभाव पूरे देश में पड़ेगा। श्री जोशी के पास एक समृद्ध राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव है, जिससे उम्मीद है कि वे शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार लाएंगे। उनकी नियुक्ति से देश के शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन की उम्मीद है। श्री जोशी के नेतृत्व में, शिक्षा क्षेत्र में नई नीतियों और कार्यक्रमों की घोषणा की जा सकती है, जो छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए लाभदायक होंगे।1
- जनपद सुल्तानपुर के भदैया ब्लॉक के मिश्रपुर पुरैना गांव में ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम सभा की जमीन पर कब्जा करने का मामला सामने आया है। ग्राम सभा में एक गाटा संख्या 167 नंबर है, जिसमें ग्राम प्रधान ने खेल का मैदान बनवाया था। खेल के मैदान का पूरा रकबा 28 विस्वा था, लेकिन ग्राम प्रधान ने कूटरचित तरीके से सिर्फ 24 विस्वा में ही खेल का मैदान बनवाया और बाकी चार विस्वा जमीन को अपने उपयोग के लिए छोड़ दिया। कुछ समय बाद जब ग्राम प्रधान को सरकार द्वारा प्रशासक बनाया गया, तो उन्होंने उसी जमीन पर निर्माण करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी मिली, तो वे मौके पर पहुंचे और पूछताछ की। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि ने बताया कि खेल के मैदान की बाउंड्री बनाई जा रही है, जबकि कुछ लोगों को बताया गया कि गांव के लिए बरात गृह बनाया जा रहा है। ग्रामीणों को जब ग्राम प्रधान की बातों में भिन्नता लगी, तो उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया। तहसील के लेखपाल और ब्लॉक के सेक्रेटरी को जब फोन किया गया, तो पता चला कि उन्हें इस निर्माण के बारे में कोई जानकारी नहीं है। ग्राम विकास अधिकारी से बात करने पर पता चला कि ग्राम प्रधान खेल के मैदान के अंदर नल की बोरिंग का निर्माण करवा रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। ग्राम प्रधान द्वारा खेल के मैदान के बाहर नल की बोरिंग हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान अपने लाभ के लिए निर्माण कर रहे थे। इससे काफी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्रित हो गए और ग्राम प्रधान के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हालात को देखते हुए ग्राम प्रधान ने देहात कोतवाली की पुलिस को बुलाया। पुलिस ने ग्रामीणों की नाराजगी देखकर काम को रुकवा दिया। इस प्रकरण के संबंध में आज ग्राम सभा के कुछ लोगों द्वारा एसडीएम लंभुआ को आवेदन दिया गया। समस्त ग्रामवासी चाहते हैं कि या तो प्रस्ताव कराकर किसी सार्वजनिक कार्य के लिए जमीन अधिकृत की जाए या बंजार ही जमीन पड़ी रहे। एसडीएम ने आश्वस्त किया कि उस पर कोई निर्माण नहीं कराया जाएगा और ग्राम सभा का ही कब्जा रहेगा। आवेदन देने वालों में भीम, राम केवल वर्मा, शिव शंकर यादव, शैलेंद्र वर्मा, लालता प्रसाद वर्मा, मेवालाल, राम सजीवन, अरुण कुमार एवं समस्त ग्रामवासी मौजूद थे।3
- उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र स्थित गुलाबगंज चौराहे से एक वीडियो सामने आया है, जिसने खाकी की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में ड्यूटी पर तैनात एक सिपाही नो-एंट्री का डर दिखाकर ट्रक चालक से कथित तौर पर 'सुविधा शुल्क' (रिश्वत) लेता नजर आ रहा है। यदि यह वीडियो सच है, तो यह न सिर्फ पुलिस महकमे की साख को बट्टा लगाता है, बल्कि कानून व्यवस्था के दावों की पोल भी खोलता है। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर अब इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी सिपाही के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है, ताकि खाकी पर लगा यह दाग धोया जा सके।1
- समाजवादी अल्पसंख्यक सभा जिला अमेठी ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय रामपुर के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को ज्ञापन सौंपा है। सभा के जिलाध्यक्ष सैय्यद मुजीब के नेतृत्व में 27 जुलाई को भेजे गए ज्ञापन में कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों के भविष्य से जुड़ी है। किसी भी प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई को संविधान, कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। यदि निर्माण के नक्शे या भूमि को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान विधिसम्मत प्रक्रिया से किया जाए ताकि शिक्षा और छात्रों का अहित न हो। सपा नेताओं का आरोप है कि रामपुर में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से स्थापित जौहर यूनिवर्सिटी को सत्तारूढ़ पार्टी राजनीतिक द्वेष भावना से ग्रस्त होकर निशाना बना रही है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यूनिवर्सिटी का निर्माण ग्राम सींगनखेड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र में हुआ था और उस समय उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 के तहत निर्माण अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। सपा अल्पसंख्यक सभा ने मांग की है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकी जाए और मामले का निष्पक्ष समाधान निकाला जाए। महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष गुंजन सिंह मनीराम वर्मा सहित दर्जनों लोग थे। सपा ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई रोकने की मांग की।2
- महामहिम राज्यपाल का लम्भुआ स्टेशन पर आगमन होते ही तेज बारिश की झड़ी लग गई और इस दौरान ट्रेन रुकी रही। स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तमाम अफसरान काफी संजीदा दिखाई दिए। राज्यपाल के आगमन को लेकर क्षेत्राधिकारी, उपजिलाधिकारी समेत चिकित्सा विभाग के सभी अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पूरी तरह मुस्तैद रहे।3
- सुलतानपुर में निषाद पार्टी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सीताराम वर्मा के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय सचिव केस कुमारी निषाद के नेतृत्व में पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने आरक्षण की मांग को लेकर विधायक को एक ज्ञापन सौंपा। यह अभियान निषाद समाज के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। निषाद पार्टी की राष्ट्रीय सचिव ने बताया कि डॉ. संजय कुमार निषाद के निर्देशानुसार, प्रदेश के सभी 75 जिलों में यह अभियान चलाया जा रहा है। इसका लक्ष्य निषाद समाज (जिसमें बिंद, माझी, मझवार, केवट, मल्लाह आदि शामिल हैं) को आरक्षण दिलाना है। पार्टी पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों को ज्ञापन सौंप रही है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानमंडल सत्र के दौरान सभी विधायक निषाद समाज के आरक्षण के मुद्दे पर सदन में अपनी आवाज उठाएं। पार्टी चाहती है कि विधायक इस विषय पर कम से कम दो शब्द बोलकर सरकार को इस दिशा में निर्णय लेने के लिए प्रेरित करें। पार्टी नेता ने चेतावनी दी कि यदि आरक्षण की मांगें पूरी नहीं की जाती हैं, तो निषाद पार्टी उग्र धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। सुलतानपुर में, निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने सदर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सीताराम वर्मा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक को अपनी मांगों और मुद्दों से संबंधित एक ज्ञापन पत्र सौंपा। इस दौरान निषाद पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक पारंपरिक लाल टोपी और पार्टी का झंडा लिए मौजूद थे। कार्यकर्ताओं ने निषाद समाज और पार्टी से जुड़े विभिन्न विषयों तथा स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की और विधायक से उन पर उचित कार्रवाई का अनुरोध किया। इस अवसर पर बृजलाल वर्मा (प्रदेश सचिव), रामलाल निषाद (प्रदेश सचिव), महेश निषाद (प्रदेश सचिव), राजेश निषाद (जिला अध्यक्ष), रमेश निषाद (संगठन जिला अध्यक्ष), डॉ. अमरबहादुर निषाद (युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष), आनंद निषाद (जिला महासचिव), जगदीश निषाद (विधानसभा अध्यक्ष), हरीराम निषाद (विधानसभा अध्यक्ष), प्रियंका निषाद, उमा देवी निषाद और शिव बहादुर निषाद सहित कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।2
- सुल्तानपुर की अमहट मंडी में यातायात व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। मंडी के गेट नंबर 2 से गेट नंबर 3 तक प्रतिदिन भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे व्यापारियों, किसानों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि सड़क पर हर समय धक्का-मुक्की और रेंगते वाहनों का नजारा देखने को मिलता है। व्यापारियों का आरोप है कि जाम की समस्या दूर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रही है। मंडी में सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम होने के कारण यातायात नियंत्रण प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। कभी-कभार गश्त बढ़ाने या औपचारिक कार्रवाई करने से स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं आता और जाम जस का तस बना रहता है। मंडी के व्यापारियों ने मांग की है कि वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लें तथा सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि जब तक उच्च अधिकारियों की नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समस्या से निजात मिलना मुश्किल है। व्यापारियों ने चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो मंडी में व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।1
- पेपर लीक के खिलाफ आज नया बिल लाया जा रहा है। दूसरी ओर, राहुल ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर पैलेट गन किसके आदेश पर चलाई गई थी। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के लिए 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का ऐलान किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश में मानसून के विकराल रूप के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका बन गई है। बलिया में सरयू नदी के तेज कटान से एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय देखते ही देखते नदी में समा गया। वहीं कई स्थानों पर नहर टूटने के कारण सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है, जबकि एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से की सड़क धंसने से आवागमन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी समेत कई शहरों में सुबह से बादल छाए रहे और कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई। बारिश और बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से जलभराव व बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है, वहीं लगातार हो रही वर्षा से किसानों की फसलों पर भी संकट गहरा गया है।1