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नागौर, डेह चौराहे पर सरे आम धारदार हथियार से हमला, एक गंभीर घायल नागौर,,नागौर के कोतवाली थाना क्षेत्र के डेह चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास हूई धारदार हथियार से दो गुटों के बीच में झगड़ा। घटना की सूचना पर कोतवाली थाना का जाब्ता पहुंचा मौके पर। नागौर के डेह चौराहे पर छोटे से विवाद को लेकर एक गुट ने धारदार हथियार से दो-तीन व्यक्तियों पर हमला कर दिया जिससे धारूराम बन्ना जो कि वहां पर प्रॉपर्टी का कार्य करता है उसके साथ एवं अन्य दो-तीन व्यक्तियों के साथ में भी धारदार हथियारों से मारपीट की गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायल व्यक्ति को राजकीय चिकित्सालय पहुंचकर करवाया इलाज शुरू, घायल व्यक्ति से बयान लेकर पुलिस करेगी आगे की जांच।
प्रदीप कुमार डागा
नागौर, डेह चौराहे पर सरे आम धारदार हथियार से हमला, एक गंभीर घायल नागौर,,नागौर के कोतवाली थाना क्षेत्र के डेह चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास हूई धारदार हथियार से दो गुटों के बीच में झगड़ा। घटना की सूचना पर कोतवाली थाना का जाब्ता पहुंचा मौके पर। नागौर के डेह चौराहे पर छोटे से विवाद को लेकर एक गुट ने धारदार हथियार से दो-तीन व्यक्तियों पर हमला कर दिया जिससे धारूराम बन्ना जो कि वहां पर प्रॉपर्टी का कार्य करता है उसके साथ एवं अन्य दो-तीन व्यक्तियों के साथ में भी धारदार हथियारों से मारपीट की गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायल व्यक्ति को राजकीय चिकित्सालय पहुंचकर करवाया इलाज शुरू, घायल व्यक्ति से बयान लेकर पुलिस करेगी आगे की जांच।
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- बोरूंदा मे आरती का लाईव असलम खिलजी,,,श्री बालाजी महाराज मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य चातुर्मास समारोह में संत गोविन्द गोपाल महाराज। लाईव असलम खिलजी1
- ग्राम बड़ायली में शैतान सिंह की होटल के पास सोमवार को 11 हजार केवी विद्युत लाइन में फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब आधे घंटे से करंट फैल रहा है। फॉल्ट वाले स्थान पर बिजली के तार तारबंदी (फेंसिंग) के तारों से सटे हुए हैं, जिससे पूरी तारबंदी में करंट फैलने का खतरा बढ़ गया है। घटना के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, जिससे जमीन गीली होने के कारण करंट फैलने का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तारबंदी के संपर्क में आता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए, ग्रामीणों ने आसपास के लोगों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारियों को फोन पर दी गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। इस देरी पर ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की मांग की है। उन्होंने तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर फॉल्ट को शीघ्र ठीक कराने का भी आग्रह किया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जनहानि या पशुहानि जैसी गंभीर घटना हो सकती है। ग्राम बड़ायली में शैतान सिंह की होटल के पास सोमवार को 11 हजार केवी विद्युत लाइन में फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब आधे घंटे से करंट फैल रहा है। फॉल्ट वाले स्थान पर बिजली के तार तारबंदी (फेंसिंग) के तारों से सटे हुए हैं, जिससे पूरी तारबंदी में करंट फैलने का खतरा बढ़ गया है। घटना के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, जिससे जमीन गीली होने के कारण करंट फैलने का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तारबंदी के संपर्क में आता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए, ग्रामीणों ने आसपास के लोगों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारियों को फोन पर दी गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। इस देरी पर ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की मांग की है। उन्होंने तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर फॉल्ट को शीघ्र ठीक कराने का भी आग्रह किया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जनहानि या पशुहानि जैसी गंभीर घटना हो सकती है।1
- पीबीएम के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में मिल रही अत्याधुनिक गैस्ट्रो सर्जरी की सुविधा, अब बीकानेर में ही होगा जटिल बीमारियों का उपचार बीकानेर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीबीएम के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी) में पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए अत्याधुनिक गैस्ट्रो सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के माध्यम से मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी जागरूकता वीडियो में चिकित्सा अधीक्षक एवं चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. बी.सी. घिया तथा सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुनील डांगी ने सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में उपलब्ध गैस्ट्रो सर्जरी सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यहां भोजन नली, पेट, आंत, लिवर, पित्ताशय, अग्न्याशय सहित पाचन तंत्र से संबंधित अनेक जटिल रोगों की उन्नत सर्जरी और विशेषज्ञ उपचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के शुरू होने से बीकानेर सहित श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और आसपास के जिलों के मरीजों को अब बेहतर इलाज के लिए जयपुर, जोधपुर या अन्य बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में आधुनिक उपकरणों के साथ गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि जरूरतमंद मरीज समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा का लाभ उठा सकें और गंभीर बीमारियों का उपचार अपने ही संभाग में करवा सकें।1
- सावन के पहले सोमवार पर कोलायत के बारह ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब सावन के पहले सोमवार पर कोलायत के बारह ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब कपिल सरोवर से पवित्र जल लेकर कावड़ियों ने किया भगवान शिव का जलाभिषेक श्रीकोलायत। देवों के देव महादेव को समर्पित सावन मास के पहले सोमवार को धर्मनगरी श्रीकोलायत शिवमय नजर आई। बारह ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर में भगवान शिव के दर्शन, पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए। पूरे मंदिर परिसर में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। सावन के पहले सोमवार पर बीकानेर शहर सहित कोलायत क्षेत्र और दूर-दराज के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कावड़िये श्रीकोलायत पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पवित्र कपिल सरोवर से जल भरकर बारह ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों में भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, फल-फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान भोलेनाथ की आराधना की तथा परिवार, समाज, प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं उत्तम वर्षा की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रही। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन करते हुए मंदिर पहुंचे, जिससे धार्मिक उल्लास और अधिक बढ़ गया। सावन के पहले सोमवार के अवसर पर कोलायत का धार्मिक स्वरूप देखते ही बन रहा था। कपिल सरोवर पर भी श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ रही, जहां लोगों ने पवित्र जल भरकर कांवड़ के माध्यम से शिवालयों तक पहुंचाया। दिनभर श्रद्धालुओं का मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन मास में भगवान शिव की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा-अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के चलते हर वर्ष सावन के सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु कोलायत पहुंचकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।1
- कर्णप्रताप सिंह के नेतृत्व में बीकानेर से बड़ी संख्या में लोग जयपुर पहुंचे यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर जयपुर में आयोजित प्रदर्शन में बीकानेर से कर्णप्रताप सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शन में प्रदेशभर से आए लोगों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। जयपुर में प्रदर्शन स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी और प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। कर्णप्रताप सिंह के नेतृत्व में बीकानेर से बड़ी संख्या में लोग जयपुर पहुंचे यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर जयपुर में आयोजित प्रदर्शन में बीकानेर से कर्णप्रताप सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शन में प्रदेशभर से आए लोगों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। जयपुर में प्रदर्शन स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी और प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।1
- अवैध लाईम स्टोन खनन पर नागौर पुलिस का बड़ा प्रहार: पांचौड़ी पुलिस ने एलएनटी मशीन और ट्रैक्टर-ट्रॉली को किया डिटेन एएसपी आशाराम चौधरी के निर्देशन में हुई कार्रवाई; अग्रिम कानूनी कार्रवाई हेतु खनिज विभाग को दी गई सूचना पांचौड़ी(नागौर):अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) नागौर श्री आशा राम चौधरी (आर.पी.एस.) के निर्देशन में अवैध लाईम स्टोन खनन के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पांचौड़ी थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध खनन और परिवहन में प्रयुक्त 01 एलएनटी (LNT) मशीन तथा पत्थर से भरी 01 ट्रैक्टर-ट्रॉली को डिटेन (जब्त) किया है। घटना का विवरण: सहायक पुलिस अधीक्षक (वृत्त नागौर) श्री जतिन जैन (आई.पी.एस.) के निकटतम सुपरविजन में पांचौड़ी थानाधिकारी उर्जा राम (उप निरीक्षक) मय पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त पर थे। सरहद भेड़ से एलएनटी मशीन जब्त: गश्त के दौरान मौजा भेड़ स्थित खेत खसरा नंबर 2283/2275 के अंदर अवैध रूप से खनन करने में प्रयुक्त एलएनटी मशीन (चेसिस नंबर RSB-J-2-19 5859) खेत से लगभग 300 मीटर दूरी पर खड़ी पाई गई। वाहन मालिक धुन्धियाडी निवासी ओमप्रकाश जाट को मोबाइल के जरिए मौके पर बुलाने पर वह नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने एलएनटी मशीन को डिटेन कर सुरक्षार्थ थाना परिसर में खड़ा करवा दिया। भुंडेल-निम्बोला मार्ग पर अवैध पत्थर से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी: तत्पश्चात थानाधिकारी मय टीम मौजा भेड़ से रवाना होकर भुंडेल पहुंचे। भुंडेल एवं निम्बोला के बीच पत्थरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रुकवाकर चालक से पूछताछ की गई। चालक ने अपना नाम चेनाराम पुत्र अनाराम जाति जाट (निवासी जीवणबेरा) बताया। ट्रॉली में भरे लाईम स्टोन पत्थरों के संबंध में वैध रवाना या दस्तावेज मांगने पर चालक कोई कागजात पेश नहीं कर सका। पुलिस ने ट्रैक्टर (नंबर RJ 21 RN 5398) को मय ट्रॉली जब्त कर लिया। खनिज विभाग को सौंपी जाएगी अग्रिम कार्रवाई: पांचौड़ी पुलिस ने जब्ती की संपूर्ण जानकारी खनिज विभाग नागौर के अभियंताओं को फोन के माध्यम से दे दी है। जब्त किए गए दोनों वाहनों को थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा करवाया गया है और खनिज विभाग द्वारा मामले में अग्रिम नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।2
- बोरूंदा मे श्री बालाजी महाराज मंदिर में भव्य चातुर्मास समारोह में सत्संग करते संत गोविन्द गोपाल महाराज लाईव असलम खिलजी।1
- तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।1
- UGC रोल बैक पर जयपुर की सड़कों पर जनसैलाब! बैरिकेड्स उखाड़ कलेक्ट्रेट पहुंचे करणी सेना कार्यकर्ता1