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Arvind Tiwari
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- आज श्री बिहारी जी मंदिर में मलमास महीने के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर, संध्या के समय श्री बिहारी जी को 56 प्रकार का भोग अर्पित किया जाएगा। भोग अर्पण के उपरांत, मंदिर परिसर में भजन कीर्तन का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन उत्सव में दर्शन कर सौभाग्य प्राप्त करने का आग्रह किया है।1
- Post by Arvind Tiwari1
- दतिया से एक चौंकाने वाली जमीनी हकीकत सामने आई है, जो विकास के बड़े-बड़े दावों पर सवाल खड़ा करती है। जानकारी के अनुसार, दतिया के जिला अस्पताल में नौ माह की एक गर्भवती महिला को स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो पाया। इस घटना ने क्षेत्र में कथित तौर पर विकास की उड़ान भरती जमीनी हकीकत की पोल खोल दी है।1
- छतरपुर जिले की तहसील नोगांव के अंतर्गत रगौली ग्राम पंचायत में पिछले 15 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा श्री विष्णु महायज्ञ, बजरंग आश्रम पर आज पूर्ण हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। इस वर्ष के कार्यक्रम का आरंभ 31 मई, रविवार को कलश यात्रा के साथ हुआ था, जिसका समापन आज 7 जून, रविवार को पूर्ण आहुति और भंडारे के साथ किया गया। महायज्ञ के साथ ही रामलीला का भी आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक बजरंग बली जी महाराज बताए गए हैं, जिसमें स्व. श्री फट्टी बाबा, श्री स्वामी रामानंद जी महाराज रगौली और केशव दास राजपूत का भी उल्लेख है। मुख्य यजमान श्रीमती वीना अनूप तिवारी थीं, जबकि यज्ञाचार्य पं. श्री प्रेमनारायण चतुर्वेदी जी थे। पत्तल राजा, भाजपा किसान मोर्चा के जिला प्रभारी आईटी सोशल मीडिया छतरपुर, रामप्रसाद कुशवाहा भी इस कार्यक्रम के प्रमुख व्यक्तियों में शामिल थे। इस श्री विष्णु महायज्ञ को सफल बनाने में कार्यक्रम कमेटी के अध्यक्ष जयसिंह राजपूत, रुपसिंह राजपूत, रगौली के सरपंच विनोद राजपूत, भागसिंह यादव और डॉ. रामकृपाल श्रीवास (जिन्होंने निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान की) का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह पूरा आयोजन सभी ग्राम वासियों के सहयोग से संपन्न हुआ।1
- मध्य प्रदेश के डबरा (ग्वालियर) में 4 जून को काली माता रेस्टोरेंट में रावत समाज के दो पक्षों के बीच हुए झगड़े के मामले में अब सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद घटनाक्रम ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस फुटेज के सामने आने के बाद अरुण रावत पर मारपीट को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। रेस्टोरेंट में लगे कैमरों की फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि विवाद की शुरुआत अजय रावत और पुष्पेंद्र रावत ने गोलू रावत के साथ मारपीट करके की थी। इसी झगड़े के बाद मामला बढ़ता गया और स्थिति बेकाबू हो गई। वीडियो में अरुण रावत घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं दिखाई दे रहे हैं, जिससे उनके खिलाफ लगे आरोप निराधार प्रतीत हो रहे हैं। अरुण रावत के परिजनों और समर्थकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस मामले में जानबूझकर निशाना बनाया गया है। उनका यह भी कहना है कि 4 जून को पुलिस थाने की दहलीज पर अरुण रावत पर जानलेवा हमला हुआ था।2
- दतिया जिले की बड़ौनी तहसील में तहसीलदार सुनील प्रभास पर आम लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करने और उन्हें कार्यालय से बाहर निकालने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। जानकारी के अनुसार, कुछ ग्रामीण अपनी जमीन और राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए तहसील कार्यालय पहुँचे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें दफ्तर से चले जाने को कहा। उनका कहना है कि वे कई दिनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा था, और जब उन्होंने अपनी परेशानी बताने की कोशिश की, तो उन्हें अपमानित कर कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि सरकारी अधिकारियों का आचरण जनता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। वहीं, प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यदि मामले की जाँच होती है, तो वायरल वीडियो और घटना के समय मौजूद लोगों के बयान अहम भूमिका निभा सकते हैं।1
- दतिया ईटीआई के प्राचार्य अमित वर्मा ने आईटीआई में प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है।1
- दतिया जिले के प्रसिद्ध पीताम्बरा पीठ मंदिर में मोबाइल फोन के उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद भी श्रद्धालु और अन्य लोग लगातार रील बनाते देखे जा रहे हैं। एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति मंदिर परिसर में प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाती है, जहां आदेश के बाद भी मोबाइल से वीडियो बनाने का सिलसिला जारी है।1