असोथर में मौरम माफिया का तांडव: यमुना की कोख चीर रही भारी मशीनें, प्रशासन की 'मौन' सहमति से कस्बे की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे डंपर *भारत दिवस न्यूज़ समाचार* *रिपोर्टर धर्मराज निषाद* फतेहपुर जनपद के असोथर क्षेत्र में इन दिनों मौरम माफियाओं ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर आतंक मचा रखा है। बांदा मार्का खंड संख्या 03 और 04 में अवैध खनन का खेल अब अपनी सारी सीमाएं लांघ चुका है। यहाँ यमुना नदी की जलधारा के बीचों-बीच भारी-भरकम पोकलैंड और बम मशीनों को उतारकर नदी का सीना छलनी किया जा रहा है। एनजीटी के सख्त निर्देशों और खनन विभाग के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए माफिया यमुना के जलस्तर के नीचे गहराई तक खुदाई कर रहे हैं, जिससे न केवल जलीय पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है, बल्कि नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी पूरी तरह बिगड़ चुका है। हैरत की बात यह है कि दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक मशीनों की गड़गड़ाहट गूंजती रहती है, लेकिन जिम्मेदार विभागों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण और सफेदपोशों की 'मौन' सहमति के इतना बड़ा अवैध कारोबार संचालित होना असंभव है। इस अवैध कारोबार का सबसे डरावना चेहरा असोथर कस्बे की सड़कों पर देखने को मिल रहा है, जहाँ मौरम से लदे ओवरलोड डंपर और ट्रैक्टर-ट्रालियां अब 'यमदूत' बनकर फर्राटा भर रहे हैं। कस्बे के मुख्य बाजार और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों से गुजरते इन भारी वाहनों ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। स्कूली बच्चे हों या बुजुर्ग, हर समय किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से सहमे रहते हैं। ओवरलोडिंग के कारण कस्बे की चमचमाती सड़कें अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं और इन वाहनों से उड़ती मौरम की महीन धूल ने पूरे इलाके को प्रदूषण की चपेट में ले लिया है, जिससे लोगों को सांस संबंधी बीमारियां घेर रही हैं। सड़कों पर डंपरों का इस कदर कब्जा है कि आम राहगीरों को निकलने तक की जगह नहीं बचती, लेकिन स्थानीय पुलिस और प्रशासन चेकिंग के नाम पर केवल खानापूरी कर माफियाओं को गलियारा प्रदान कर रहे हैं। क्षेत्रीय जनता में इस प्रशासनिक उदासीनता को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खंड 3 और 4 में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक खनन किया जा रहा है और बिना वैध परमिट के मौरम की खेप लगातार बाहर भेजी जा रही है। हर नाके और चेकपॉइंट को धता बताकर निकलते ये वाहन प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। लोग अब सीधे तौर पर सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर इन मौरम माफियाओं को खुली छूट दी गई है और क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है। यदि समय रहते इन अवैध खनन पट्टों और सड़कों पर दौड़ते मौत के सौदागरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो असोथर की जनता बड़े आंदोलन के लिए विवश होगी।
असोथर में मौरम माफिया का तांडव: यमुना की कोख चीर रही भारी मशीनें, प्रशासन की 'मौन' सहमति से कस्बे की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे डंपर *भारत दिवस न्यूज़ समाचार* *रिपोर्टर धर्मराज निषाद* फतेहपुर जनपद के असोथर क्षेत्र में इन दिनों मौरम माफियाओं ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर आतंक मचा रखा है। बांदा मार्का खंड संख्या 03 और 04 में अवैध खनन का खेल अब अपनी सारी सीमाएं लांघ चुका है। यहाँ यमुना नदी की जलधारा के बीचों-बीच भारी-भरकम पोकलैंड और बम मशीनों को उतारकर नदी का सीना छलनी किया जा रहा है। एनजीटी के सख्त निर्देशों और खनन विभाग के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए माफिया यमुना के जलस्तर के नीचे गहराई तक खुदाई कर रहे हैं, जिससे न केवल जलीय पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है, बल्कि नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी पूरी तरह बिगड़ चुका है। हैरत की बात यह है कि दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक मशीनों की गड़गड़ाहट गूंजती रहती है, लेकिन जिम्मेदार विभागों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण और सफेदपोशों की 'मौन' सहमति के इतना बड़ा अवैध कारोबार संचालित होना असंभव है। इस अवैध कारोबार का सबसे डरावना चेहरा असोथर कस्बे की सड़कों पर देखने को मिल रहा है, जहाँ मौरम से लदे ओवरलोड डंपर और ट्रैक्टर-ट्रालियां अब 'यमदूत' बनकर फर्राटा भर रहे हैं। कस्बे के मुख्य बाजार और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों से गुजरते इन भारी वाहनों ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। स्कूली बच्चे हों या बुजुर्ग, हर समय किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से सहमे रहते हैं। ओवरलोडिंग के कारण कस्बे की चमचमाती सड़कें अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं और इन वाहनों से उड़ती मौरम की महीन धूल ने पूरे इलाके को प्रदूषण की चपेट में ले लिया है, जिससे लोगों को सांस संबंधी बीमारियां घेर रही हैं। सड़कों पर डंपरों का इस कदर कब्जा है कि आम राहगीरों को निकलने तक की जगह नहीं बचती, लेकिन स्थानीय पुलिस और प्रशासन चेकिंग के नाम पर केवल खानापूरी कर माफियाओं को गलियारा प्रदान कर रहे हैं। क्षेत्रीय जनता में इस प्रशासनिक उदासीनता को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खंड 3 और 4 में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक खनन किया जा रहा है और बिना वैध परमिट के मौरम की खेप लगातार बाहर भेजी जा रही है। हर नाके और चेकपॉइंट को धता बताकर निकलते ये वाहन प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। लोग अब सीधे तौर पर सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर इन मौरम माफियाओं को खुली छूट दी गई है और क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है। यदि समय रहते इन अवैध खनन पट्टों और सड़कों पर दौड़ते मौत के सौदागरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो असोथर की जनता बड़े आंदोलन के लिए विवश होगी।
- Post by रिपोर्टर-धर्मराज निषाद1
- Post by कौशाम्बी एक्सप्रेस न्यूज1
- Post by प्रदुम कुमार मीडिया कौशाम्बी1
- रायबरेली जिले के सिंचाई विभाग में एक अवर अभियंता पर पेड़ बेचने के गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों के बाद रविवार को चार सदस्यीय जांच टीम ने ऊँचाहार कोतवाली क्षेत्र स्थित मनीरामपुर शारदा सहायक नहर कार्यालय का निरीक्षण किया। यह मामला अवर अभियंता मिथुन कुमार से जुड़ा है। जिन्होंने मानकों के इतर कथित तौर पर पेड़ों की नीलामी करवा दी। शारदा सहायक नहर कार्यालय में तैनात सींचपाल संतोष मिश्रा ने बताया कि यहां 82 यूकेलिप्टस के पेड़ थे, जिनकी उम्र 50 साल से अधिक थी। विभाग ने केवल 20 पेड़ों को काटने का आदेश दिया था। आरोप है कि अवर अभियंता ने एक ठेकेदार से सांठगांठ कर सभी 82 पेड़ कटवा दिए, जिनकी अनुमानित कीमत 35 से 40 लाख रुपये है। जांच टीम में एसडीओ नमन कुमार मिश्रा (अध्यक्ष), डीआरओ अखिलेश कुमार पाण्डेय, अवर अभियंता आदर्श कुमार सिंह और धर्मेंद्र कुमार शामिल थे। टीम ने मौके पर पहुंचकर 82 पेड़ों की निशानदेही की और गहनता से जांच की। जांच टीम के अध्यक्ष एसडीओ नमन कुमार मिश्रा ने बताया कि उन्हें अवैध रूप से पेड़ काटे जाने की शिकायत मिली थी। उन्होंने कहा कि संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया है और इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। एसडीओ मिश्रा ने आगे बताया कि मौके पर पहले से पड़ी नंबरिंग के अनुसार लगभग 75 पेड़ थे, लेकिन निरीक्षण के दौरान एक भी पेड़ नहीं मिला। जड़ों को छिपाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में मिट्टी फैली हुई है और कुछ जड़ें सख्त मिट्टी के नीचे मिल सकती हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में आगे की प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। वहीं जिलेदार कृष्ण कुमार के बयान की बात की जाए तो उनका कहना है कि कुल 82 पेड़ो के कटान की शिकायत उच्चाधिकारियों से गई है। जिसमें मौके पर खड़े 20 पेड़ो की नंबरिंग नहीं थी। नंबरिंग करते समय 20 पेड़ काफी पतले थे इसलिए उसकी नंबरिंग नहीं की गई। जबकि 82 पेड़ो की नंबरिंग की गई है। उन्हीं के काटने की शिकायत की गई है।1
- दिनांक 03/04/2026 को जिला पंचायत ऊंचाहार तृतीय क्षेत्र #viral #reels #trending #instagood #fyp #ucr #rbl #viral #reels #trending --------------*****--------- #up #viral #reels #trending #newpost #PetCelebration #fishfryfriday #fridayevent #fridaynightout #friday #fridayvibes #swadisht #foodlover #localeats #localfood #foodie #goodvibes #fridayfun #fridaynightevent #foodevent1
- समाजवादी पार्टी में प्रदेश महासचिव के रूप में जगनायक यादव का स्वागत पार्टी कार्यालय फतेहपुर में हुआ1
- कौशांबी...थाना चरवा अन्तर्गत जंगल/खेतों में एक लड़की का शव पेड़ पर लटके होने की सूचना पर स्थानीय पुलिस व फील्ड यूनिट की टीम द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है। शव का पंचायतनामा भर पोस्टमार्टम हेतु मॉर्चरी भेजा गया है। प्राप्त तहरीर के आधार पर अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही अमल में लायी जा रही है। इस सम्बन्ध में सत्यनारायण पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी ने दी जानकारी। ब्यूरो रिपोर्ट सुनील साहू वैधयत ख़बर हिन्दी दैनिक PRIME 18 NEWS1
- Post by रिपोर्टर-धर्मराज निषाद1