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उत्तर प्रदेश के बरेली में माफियाओं, गैंगस्टरों और बदमाशों के खिलाफ पुलिस लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। इन निरंतर चल रहे अभियानों के संबंध में, बरेली के SSP ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जिसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध मुक्त माहौल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
SURAJ SAGAR
उत्तर प्रदेश के बरेली में माफियाओं, गैंगस्टरों और बदमाशों के खिलाफ पुलिस लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। इन निरंतर चल रहे अभियानों के संबंध में, बरेली के SSP ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जिसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध मुक्त माहौल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
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- बदायूँ में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने 23 जून को मालवीय आवास गृह कलेक्ट्रेट पर भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार (ट्रेड) डील का विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने काली पट्टी बाँधकर और तख्तियाँ लेकर अपना विरोध दर्ज कराया तथा राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सदर तहसीलदार और नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। भाकियू चढूनी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किए जा रहे या विचाराधीन व्यापार समझौते देश के किसानों के हितों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। जिलाध्यक्ष सतीश साहू ने पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि किसान पहले से ही बढ़ती लागत, फसलों के उचित मूल्य के अभाव, प्राकृतिक आपदाओं और कर्ज के बोझ जैसी समस्याओं से जूझते हुए आत्महत्या तक के कदम उठा रहे हैं। ऐसे में, यदि विदेशी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश दिया जाता है, तो इससे किसानों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने तर्क दिया कि भारत में खेती आजीविका है, जबकि विदेशों में यह व्यापार है, इसलिए सस्ते आयातित उत्पाद भारतीय किसानों की उपज की कीमतों को गिरा देंगे, जिससे उनकी आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, ट्रेड डील से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में निजीकरण और कॉर्पोरेट नियंत्रण बढ़ेगा, जो किसानों की स्वतंत्रता और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करेगा। इससे किसानों की आत्महत्याओं की संख्या बढ़ेगी, भारी संख्या में किसान मजदूरों में तब्दील होंगे और बेरोजगारी फैलेगी, जो देश हित में नहीं है। किसानों ने मांग की है कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और किसानों से जुड़े सहायक धंधों को किसी भी प्रकार के मुक्त व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए। साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाए और देश के किसानों के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। यादवेंद्र सिंह यादव उर्फ पप्पू ने भी किसानों को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यदि भारत सरकार किसानों के हितों को दाँव पर लगाकर समझौता करती है, तो ये ट्रेड डील/मुक्त व्यापार समझौते किसानों के लिए 'डेथ वारंट' माने जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का किसान इन समझौतों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा और उनके पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। इस मौके पर बीयीशु दास, यादवेंद्र यादव, भगवान दास शाक्य, अजय सैनी, रजनेश उपाध्याय, इरशाद खा, भगवानदास, शराफत, मुमताज, नूरुद्दीन, शरीफ अब्बासी, मोहोब्बे, अरशद खां, मुन्शी यादव सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।1
- बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग आर्य ने बारादरी थाना में पंजीकृत धोखाधड़ी के विभिन्न मामलों में वांछित अभियुक्त कन्हैया लाल गुलाटी पर ₹25,000 के पुरस्कार की घोषणा की है। यह कार्रवाई धोखाधड़ी के प्रकरणों में उसकी तलाश के संबंध में की गई है।1
- केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने बदायूं में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राम मंदिर चढ़ावा चोरी करने वालों को किसी भी कीमत पर न बख्शने की कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की गहन जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, किसी को भी राहत नहीं मिलेगी। अपने बयान में, मंत्री वर्मा ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला, यह कहते हुए कि अखिलेश यादव को राम मंदिर पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि सपा सरकार के दौरान कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं और राम मंदिर का विरोध किया गया था। केंद्रीय मंत्री ने यह भी जोर दिया कि योगी सरकार में अपराधियों को कोई माफी नहीं मिलती है, और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भाजपा सरकारें पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस दौरान उन्होंने बिहार के चर्चित एनकाउंटर मामले की जांच जारी होने का भी जिक्र किया। बीएल वर्मा ने आखिर में यह भी कहा कि ब्राह्मण समाज का आशीर्वाद हमेशा ही भाजपा के साथ रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने एक 12 वर्षीय मुस्लिम बच्चे से ज़बरन “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगवाकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने और मुसलमानों को फंसाने की साजिश का पर्दाफाश किया है। यह घटना हाफिजगंज थाना क्षेत्र के खाईखेड़ा गांव में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुई थी। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, गांव के ही इंद्रपाल और भुवनेश ने मुहर्रम का जुलूस निकलने के दौरान 12 वर्षीय मुस्लिम बच्चे को पकड़ा और उससे वीडियो में “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगवाए। इसके बाद उन्होंने जानबूझकर इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होते ही बच्चे और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी, जिससे माहौल गरमा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि इंद्रपाल और भुवनेश ने ही माहौल खराब करने की नीयत से बच्चे से जबरन नारे लगवाए थे। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण सांप्रदायिक तनाव फैलाने की यह साजिश विफल हो गई और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।1
- बरेली शहर में सिलेक्शन पॉइंट चौराहे के पास स्थित नवदुर्गा मंदिर पर शरबत का वितरण किया गया।1
- लखनऊ से एक बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ अपडेट सामने आई है, जहाँ एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई है। इस गंभीर घटना में 15 छात्रों की मौत की खबर मिल रही है। यह समाचार देश और दुनिया की सबसे बड़ी खबरों में शामिल है।1
- जनपद बरेली में विगत दो वर्षों में अपराधियों पर किए गए प्रहार के संबंध में SSP बरेली ने एक बाइट दी है। यह बाइट जनपद में अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से संबंधित है।1
- कानपुर में एक बड़ा हादसा टल गया जब चलती ट्रेन से उतरने के दौरान एक यात्री लड़खड़ा गया। आरपीएफ उप निरीक्षक अनिल कुमार गौतम ने अदम्य साहस और फुर्ती का परिचय देते हुए तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने समय रहते यात्री को ट्रेन के नीचे आने से खींचकर बचाया, जिससे उसकी जान बच गई।1
- बदायूं के बिनावर थाने में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी ने पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी 2023 का खुले तौर पर उल्लंघन करते हुए थाना परिसर में एक रील बनाई है। यह घटना एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश द्वारा 15 मई को जारी किए गए सख्त आदेशों की सीधी अवहेलना है, जिनमें सोशल मीडिया पॉलिसी तोड़ने वाले और रील बनाने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश था। महिला पुलिसकर्मी ने यह रील थाना परिसर में बने मिशन शक्ति केंद्र में बनाई थी। आदेशों के स्पष्ट निर्देश के बावजूद, इस मामले में केवल लिखित चेतावनी देकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया है। इस कार्रवाई पर यह सवाल उठाया गया है कि जब बड़े अधिकारी खुद सख्त आदेश जारी करते हैं और जमीनी स्तर पर उनकी अवहेलना होती है, तो अनुशासन कैसे बचेगा। पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि पुलिस वर्दी का सम्मान जनता का भरोसा बढ़ाता है, न कि रीलबाजी। इसे पुलिस के कदाचार और एडीजी के आदेश का उल्लंघन मानते हुए, पूछा गया है कि क्या इस लापरवाही पर अब भी कोई कार्रवाई नहीं होगी और ऐसे मामलों पर क्या कदम उठाए जाने चाहिए।1