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महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक के लिये नहीं खुला बुद्ध विहार का दरवाजा: युवाओं ने जताया शांतिपूर्ण विरोध लांजी। तहसील अंतर्गत आने वाले दखनीटोला स्थित बुद्ध विहार में 11 अप्रैल को बैठक के लिये अंदर प्रवेश नहीं मिलने से युवाओं मेें आक्रोश नजर आया, उनका कहना था कि वे बुद्ध विहार दखनीटोला में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक आयोजित कर रहे थे जिसके लिये उनके द्वारा सूचित किया गया था लेकिन ऐन वक्त पर बुद्ध विहार का गेट ही नहीं खोला गया, युवाओं में इस बात को लेकर आक्रोश भी नजर आया और इसका परिणाम रहा कि उनके द्वारा बुद्ध विहार के सामने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुये नारे भी लगाये गये, तो युवाओं के द्वारा यह भी कहा कि अगर समाज को एकसूत्र में पिरोकर रखना है तो युवाओं को भी साथ लेकर चलना होगा।

15 hrs ago
user_Ramanuj Tidke
Ramanuj Tidke
Local News Reporter लांजी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
15 hrs ago

महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक के लिये नहीं खुला बुद्ध विहार का दरवाजा: युवाओं ने जताया शांतिपूर्ण विरोध लांजी। तहसील अंतर्गत आने वाले दखनीटोला स्थित बुद्ध विहार में 11 अप्रैल को बैठक के लिये अंदर प्रवेश नहीं मिलने से युवाओं मेें आक्रोश नजर आया, उनका कहना था कि वे बुद्ध विहार दखनीटोला में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक आयोजित कर रहे थे जिसके लिये उनके द्वारा सूचित किया गया था लेकिन ऐन वक्त पर बुद्ध विहार का गेट ही नहीं खोला गया, युवाओं में इस बात को लेकर आक्रोश भी नजर आया और इसका परिणाम रहा कि उनके द्वारा बुद्ध विहार के सामने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुये नारे भी लगाये गये, तो युवाओं के द्वारा यह भी कहा कि अगर समाज को एकसूत्र में पिरोकर रखना है तो युवाओं को भी साथ लेकर चलना होगा।

  • user_User2640
    User2640
    Balaghat, Madhya Pradesh
    🙏
    14 hrs ago
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  • महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक के लिये नहीं खुला बुद्ध विहार का दरवाजा: युवाओं ने जताया शांतिपूर्ण विरोध लांजी। तहसील अंतर्गत आने वाले दखनीटोला स्थित बुद्ध विहार में 11 अप्रैल को बैठक के लिये अंदर प्रवेश नहीं मिलने से युवाओं मेें आक्रोश नजर आया, उनका कहना था कि वे बुद्ध विहार दखनीटोला में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक आयोजित कर रहे थे जिसके लिये उनके द्वारा सूचित किया गया था लेकिन ऐन वक्त पर बुद्ध विहार का गेट ही नहीं खोला गया, युवाओं में इस बात को लेकर आक्रोश भी नजर आया और इसका परिणाम रहा कि उनके द्वारा बुद्ध विहार के सामने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुये नारे भी लगाये गये, तो युवाओं के द्वारा यह भी कहा कि अगर समाज को एकसूत्र में पिरोकर रखना है तो युवाओं को भी साथ लेकर चलना होगा।
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    महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक के लिये नहीं खुला बुद्ध विहार का दरवाजा: युवाओं ने जताया शांतिपूर्ण विरोध
लांजी। तहसील अंतर्गत आने वाले दखनीटोला स्थित बुद्ध विहार में 11 अप्रैल को बैठक के लिये अंदर प्रवेश नहीं मिलने से युवाओं मेें आक्रोश नजर आया, उनका कहना था कि वे बुद्ध विहार दखनीटोला में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक आयोजित कर रहे थे जिसके लिये उनके द्वारा सूचित किया गया था लेकिन ऐन वक्त पर बुद्ध विहार का गेट ही नहीं खोला गया, युवाओं में इस बात को लेकर आक्रोश भी नजर आया और इसका परिणाम रहा कि उनके द्वारा बुद्ध विहार के सामने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुये नारे भी लगाये गये, तो युवाओं के द्वारा यह भी कहा कि अगर समाज को एकसूत्र में पिरोकर रखना है तो युवाओं को भी साथ लेकर चलना होगा।
    user_Ramanuj Tidke
    Ramanuj Tidke
    Local News Reporter लांजी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • दुर्ग में संभागीय न्यायिक सेमिनार संपन्न, 92 न्यायिक अधिकारियों ने लिया हिस्सा, 12 अप्रैल रविवार को दोपहर 3 बजे खैरागढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय दुर्ग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें दुर्ग संभाग के पाँच जिलों से कुल 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलन कर किया। सेमिनार में न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश ने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम बताते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के बढ़ते महत्व और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में विभिन्न विधिक विषयों जैसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138, सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान, ई साक्ष्य एवं निष्पादन प्रकरणों के त्वरित निपटारे पर चर्चा की गई। साथ ही “मध्यस्थता 2.0” प्रकाशन का विमोचन भी किया गया। स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग द्वारा दिया गया, वहीं अकादमी के निदेशक ने सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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    दुर्ग में संभागीय न्यायिक सेमिनार संपन्न, 92 न्यायिक अधिकारियों ने लिया हिस्सा,
12 अप्रैल रविवार को दोपहर 3 बजे खैरागढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय दुर्ग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें दुर्ग संभाग के पाँच जिलों से कुल 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलन कर किया।
सेमिनार में न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश ने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम बताते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के बढ़ते महत्व और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में विभिन्न विधिक विषयों जैसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138, सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान, ई साक्ष्य एवं निष्पादन प्रकरणों के त्वरित निपटारे पर चर्चा की गई। साथ ही “मध्यस्थता 2.0” प्रकाशन का विमोचन भी किया गया।
स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग द्वारा दिया गया, वहीं अकादमी के निदेशक ने सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
    user_गंगाराम पटेल  स्थानीय पत्रकार
    गंगाराम पटेल स्थानीय पत्रकार
    खैरागढ़, खैरगढ़ छुईखदान गंडई, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • Post by Samarpit sahu
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    Post by Samarpit sahu
    user_Samarpit sahu
    Samarpit sahu
    पत्रकार बालाघाट, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    12 min ago
  • वारासिवनी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ली जाने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में प्रदेश के शिक्षक संगठन खुल कर विरोध में आ गए हैं। उनके द्वारा चरणबद्ध तरीके से प्रदेश में आंदोलन किए जा रहे हैं। 11 अप्रैल 2026 को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में शिक्षकों ने वारासिवनी नगर में विशाल रैली निकाली और विधायक विवेक विक्की पटेल के कार्यालय में पहुंच कर उन्हें अपनी मांगो का ज्ञापन सौंपा।
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    वारासिवनी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ली जाने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में प्रदेश के शिक्षक संगठन खुल कर विरोध में आ गए हैं। उनके द्वारा चरणबद्ध तरीके से प्रदेश में आंदोलन किए जा रहे हैं। 11 अप्रैल 2026 को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में शिक्षकों ने वारासिवनी नगर में विशाल रैली निकाली और विधायक विवेक विक्की पटेल के कार्यालय में पहुंच कर उन्हें अपनी मांगो का ज्ञापन सौंपा।
    user_Aanand Verma
    Aanand Verma
    वारासिवनी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • बस्तर में आज भी वस्तु विनिमय क्यों — मजबूरी या परंपरा? बस्तर के सुदूर गांवों में आज भी बिना पैसे के सामान खरीदा-बेचा जाता है। इसे वस्तु विनिमय/Barter System कहते हैं — इमली के बदले नमक, चावल के बदले साबुन, महुआ के बदले कपड़ा। ये 10 हज़ार साल पुरानी प्रथा है, पर सवाल ये है: आधुनिक युग में भी बस्तरिया लोग ऐसा करने को मजबूर क्यों हैं? 1. मजबूरी के 5 बड़े कारण •कारण..... कैसे मजबूर करता है,भौगोलिक अलगाव** कई गांव आज भी मुख्य सड़क से 20-30 किमी अंदर हैं। बारिश में 6 महीने संपर्क टूट जाता है। बैंक, ATM, बाजार पहुंच से बाहर **गरीबी और नकद की कमी** दैनिक मजदूरी 200-300 रु। फसल बेचने पर ही साल में 2-3 बार नकद आता है। रोज की जरूरत के लिए पैसे होते ही नही **बैंकिंग सुविधा नहीं** बस्तर के 70% से ज्यादा गांवों में बैंक ब्रांच नहीं। डिजिटल पेमेंट तो दूर, लोगों के पास खाता भी नहीं। UPI किसपर चलाएं **माओवादी समस्या** दशकों से अशांति के कारण विकास रुका। व्यापारी डर से अंदरूनी इलाकों में नहीं जाते। साप्ताहिक हाट ही एकमात्र बाजार है **शिक्षा और जागरूकता** "पैसा संभालना", "बचत", "ब्याज" जैसे कांसेप्ट पहुंचे ही नहीं। पुरखों से जो देखा वही चल रहा है 2. लेकिन ये सिर्फ मजबूरी नहीं, समझदारी भी है..... 1. *मुद्रास्फीति से बचे*: नोट का मूल्य घटता है, पर 1 किलो चावल हमेशा 1 किलो चावल रहेगा। बस्तरिया अर्थव्यवस्था नोट पर निर्भर नहीं। 2. *कर्ज से मुक्ति*: पैसे न होने पर शहर में लोग उधार लेते हैं। बस्तर में सामान-से-सामान बदलने से कोई कर्जदार नहीं बनता। 3. *जंगल आधारित जीवन*: तेंदूपत्ता, महुआ, इमली, लाख — ये जंगल से मुफ्त मिलते हैं। इन्हें बेचकर नमक-तेल ले आना सबसे आसान मॉडल है। 4. *सामुदायिक रिश्ते*: हाट सिर्फ बाजार नहीं, सामाजिक मेलजोल है। वस्तु विनिमय से आपसी विश्वास बना रहता है। *3. आधुनिक युग की टक्कर: क्या बदल रहा है, क्या नहीं बदलना चाहिए* *बदलाव जरूरी है*: - सड़क, स्कूल, अस्पताल पहुंचने चाहिए - MSP पर वनोपज खरीदी हो ताकि शोषण न हो - बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट हर पंचायत में हो *बदलाव जरूरी नहीं है*: वस्तु विनिमय को "पिछड़ापन" कहकर खत्म करना गलत होगा। ये *सतत/सस्टेनेबल इकोनॉमी* का सबसे पुराना मॉडल है। दुनिया आज "Cashless Society" की बात कर रही है, बस्तर तो 10 हज़ार साल से "Cashless" है। निष्कर्ष: बस्तरिया लोग मजबूर भी हैं क्योंकि सरकार की पहुंच नहीं है। पर साथ में उन्होंने अपनी ऐसी व्यवस्था बना ली है जो नोट-छापे बिना भी चलती है। असली जरूरत है — विकास आए, पर उनकी व्यवस्था टूटे नहीं। सड़क के साथ सम्मान भी आए। जय जोहार
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    बस्तर में आज भी वस्तु विनिमय क्यों — मजबूरी या परंपरा?
बस्तर के सुदूर गांवों में आज भी बिना पैसे के सामान खरीदा-बेचा जाता है। इसे वस्तु विनिमय/Barter System कहते हैं — इमली के बदले नमक, चावल के बदले साबुन, महुआ के बदले कपड़ा। ये 10 हज़ार साल पुरानी प्रथा है, पर सवाल ये है: आधुनिक युग में भी बस्तरिया लोग ऐसा करने को मजबूर क्यों हैं?
1. मजबूरी के 5 बड़े कारण
•कारण.....
कैसे मजबूर करता है,भौगोलिक अलगाव**	
कई गांव आज भी मुख्य सड़क से 20-30 किमी अंदर हैं। बारिश में 6 महीने संपर्क टूट जाता है। बैंक, ATM, बाजार पहुंच से बाहर
**गरीबी और नकद की कमी**
दैनिक मजदूरी 200-300 रु। फसल बेचने पर ही साल में 2-3 बार नकद आता है। रोज की जरूरत के लिए पैसे होते ही नही
**बैंकिंग सुविधा नहीं**	
बस्तर के 70% से ज्यादा गांवों में बैंक ब्रांच नहीं। डिजिटल पेमेंट तो दूर, लोगों के पास खाता भी नहीं। UPI किसपर चलाएं
**माओवादी समस्या**	
दशकों से अशांति के कारण विकास रुका। व्यापारी डर से अंदरूनी इलाकों में नहीं जाते। साप्ताहिक हाट ही एकमात्र बाजार है
**शिक्षा और जागरूकता**	
"पैसा संभालना", "बचत", "ब्याज" जैसे कांसेप्ट पहुंचे ही नहीं। पुरखों से जो देखा वही चल रहा है
2. लेकिन ये सिर्फ मजबूरी नहीं, समझदारी भी है.....
1. *मुद्रास्फीति से बचे*: 
नोट का मूल्य घटता है, पर 1 किलो चावल हमेशा 1 किलो चावल रहेगा। बस्तरिया अर्थव्यवस्था नोट पर निर्भर नहीं।
2. *कर्ज से मुक्ति*:
पैसे न होने पर शहर में लोग उधार लेते हैं। बस्तर में सामान-से-सामान बदलने से कोई कर्जदार नहीं बनता।
3. *जंगल आधारित जीवन*: 
तेंदूपत्ता, महुआ, इमली, लाख — ये जंगल से मुफ्त मिलते हैं। इन्हें बेचकर नमक-तेल ले आना सबसे आसान मॉडल है।
4. *सामुदायिक रिश्ते*: 
हाट सिर्फ बाजार नहीं, सामाजिक मेलजोल है। वस्तु विनिमय से आपसी विश्वास बना रहता है।
*3. आधुनिक युग की टक्कर: क्या बदल रहा है, क्या नहीं बदलना चाहिए*
*बदलाव जरूरी है*: 
- सड़क, स्कूल, अस्पताल पहुंचने चाहिए
- MSP पर वनोपज खरीदी हो ताकि शोषण न हो
- बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट हर पंचायत में हो
*बदलाव जरूरी नहीं है*: 
वस्तु विनिमय को "पिछड़ापन" कहकर खत्म करना गलत होगा। ये *सतत/सस्टेनेबल इकोनॉमी* का सबसे पुराना मॉडल है। दुनिया आज "Cashless Society" की बात कर रही है, बस्तर तो 10 हज़ार साल से "Cashless" है।
निष्कर्ष: बस्तरिया लोग मजबूर भी हैं क्योंकि सरकार की पहुंच नहीं है। पर साथ में उन्होंने अपनी ऐसी व्यवस्था बना ली है जो नोट-छापे बिना भी चलती है। असली जरूरत है — विकास आए, पर उनकी व्यवस्था टूटे नहीं। सड़क के साथ सम्मान भी आए।
जय जोहार
    user_छ्ग राज्य न्यूज
    छ्ग राज्य न्यूज
    Classified ads newspaper publisher धमधा, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • ये पूरा मामला एक 5 साल कि बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उस बच्ची को एक बोरी मे डालकर बाँध कर उसे फेक दिया बाद मे पुरे गाँव मे अफरा तफरी मच गईं और बहुत ढूंढ़ने पर कुछ लोगो ने बोरी मे कुछ हरकत देख बोरी को खोलते हि सब आश्चर्य चकित हो देखते रहे और तुरंत फिर बच्ची को हॉस्पिटल लेके भागे....
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    ये पूरा मामला एक 5 साल कि बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उस बच्ची को एक बोरी मे डालकर बाँध कर उसे फेक दिया बाद मे पुरे गाँव मे अफरा तफरी मच गईं और बहुत ढूंढ़ने पर कुछ लोगो ने बोरी मे कुछ हरकत देख बोरी को खोलते हि सब आश्चर्य चकित हो देखते रहे और तुरंत फिर बच्ची को हॉस्पिटल लेके भागे....
    user_Pradeep Singh Rajput 🇮🇳D.N.
    Pradeep Singh Rajput 🇮🇳D.N.
    Voice of people दुर्ग, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • Post by Dev Anand
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    Post by Dev Anand
    user_Dev Anand
    Dev Anand
    कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • जिला अस्पताल में चल रहा उपचार पुलिस ने दर्ज किए छात्रा के बयान
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    जिला अस्पताल में चल रहा उपचार पुलिस ने दर्ज किए छात्रा के बयान
    user_Samarpit sahu
    Samarpit sahu
    पत्रकार बालाघाट, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    16 min ago
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