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दुर्ग में संभागीय न्यायिक सेमिनार संपन्न, 92 न्यायिक अधिकारियों ने लिया हिस्सा, 12 अप्रैल रविवार को दोपहर 3 बजे खैरागढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय दुर्ग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें दुर्ग संभाग के पाँच जिलों से कुल 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलन कर किया। सेमिनार में न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश ने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम बताते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के बढ़ते महत्व और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में विभिन्न विधिक विषयों जैसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138, सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान, ई साक्ष्य एवं निष्पादन प्रकरणों के त्वरित निपटारे पर चर्चा की गई। साथ ही “मध्यस्थता 2.0” प्रकाशन का विमोचन भी किया गया। स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग द्वारा दिया गया, वहीं अकादमी के निदेशक ने सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

2 hrs ago
user_गंगाराम पटेल  स्थानीय पत्रकार
गंगाराम पटेल स्थानीय पत्रकार
खैरागढ़, खैरगढ़ छुईखदान गंडई, छत्तीसगढ़•
2 hrs ago

दुर्ग में संभागीय न्यायिक सेमिनार संपन्न, 92 न्यायिक अधिकारियों ने लिया हिस्सा, 12 अप्रैल रविवार को दोपहर 3 बजे खैरागढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय दुर्ग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें दुर्ग संभाग के पाँच जिलों से कुल 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलन कर किया। सेमिनार में न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश ने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम बताते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के बढ़ते महत्व और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में विभिन्न विधिक विषयों जैसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138, सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान, ई साक्ष्य एवं निष्पादन प्रकरणों के त्वरित निपटारे पर चर्चा की गई। साथ ही “मध्यस्थता 2.0” प्रकाशन का विमोचन भी किया गया। स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग द्वारा दिया गया, वहीं अकादमी के निदेशक ने सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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  • दुर्ग में संभागीय न्यायिक सेमिनार संपन्न, 92 न्यायिक अधिकारियों ने लिया हिस्सा, 12 अप्रैल रविवार को दोपहर 3 बजे खैरागढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय दुर्ग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें दुर्ग संभाग के पाँच जिलों से कुल 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलन कर किया। सेमिनार में न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश ने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम बताते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के बढ़ते महत्व और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में विभिन्न विधिक विषयों जैसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138, सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान, ई साक्ष्य एवं निष्पादन प्रकरणों के त्वरित निपटारे पर चर्चा की गई। साथ ही “मध्यस्थता 2.0” प्रकाशन का विमोचन भी किया गया। स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग द्वारा दिया गया, वहीं अकादमी के निदेशक ने सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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    दुर्ग में संभागीय न्यायिक सेमिनार संपन्न, 92 न्यायिक अधिकारियों ने लिया हिस्सा,
12 अप्रैल रविवार को दोपहर 3 बजे खैरागढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय दुर्ग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें दुर्ग संभाग के पाँच जिलों से कुल 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलन कर किया।
सेमिनार में न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश ने नव अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम बताते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के बढ़ते महत्व और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में विभिन्न विधिक विषयों जैसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138, सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधान, ई साक्ष्य एवं निष्पादन प्रकरणों के त्वरित निपटारे पर चर्चा की गई। साथ ही “मध्यस्थता 2.0” प्रकाशन का विमोचन भी किया गया।
स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग द्वारा दिया गया, वहीं अकादमी के निदेशक ने सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
    user_गंगाराम पटेल  स्थानीय पत्रकार
    गंगाराम पटेल स्थानीय पत्रकार
    खैरागढ़, खैरगढ़ छुईखदान गंडई, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • बस्तर में आज भी वस्तु विनिमय क्यों — मजबूरी या परंपरा? बस्तर के सुदूर गांवों में आज भी बिना पैसे के सामान खरीदा-बेचा जाता है। इसे वस्तु विनिमय/Barter System कहते हैं — इमली के बदले नमक, चावल के बदले साबुन, महुआ के बदले कपड़ा। ये 10 हज़ार साल पुरानी प्रथा है, पर सवाल ये है: आधुनिक युग में भी बस्तरिया लोग ऐसा करने को मजबूर क्यों हैं? 1. मजबूरी के 5 बड़े कारण •कारण..... कैसे मजबूर करता है,भौगोलिक अलगाव** कई गांव आज भी मुख्य सड़क से 20-30 किमी अंदर हैं। बारिश में 6 महीने संपर्क टूट जाता है। बैंक, ATM, बाजार पहुंच से बाहर **गरीबी और नकद की कमी** दैनिक मजदूरी 200-300 रु। फसल बेचने पर ही साल में 2-3 बार नकद आता है। रोज की जरूरत के लिए पैसे होते ही नही **बैंकिंग सुविधा नहीं** बस्तर के 70% से ज्यादा गांवों में बैंक ब्रांच नहीं। डिजिटल पेमेंट तो दूर, लोगों के पास खाता भी नहीं। UPI किसपर चलाएं **माओवादी समस्या** दशकों से अशांति के कारण विकास रुका। व्यापारी डर से अंदरूनी इलाकों में नहीं जाते। साप्ताहिक हाट ही एकमात्र बाजार है **शिक्षा और जागरूकता** "पैसा संभालना", "बचत", "ब्याज" जैसे कांसेप्ट पहुंचे ही नहीं। पुरखों से जो देखा वही चल रहा है 2. लेकिन ये सिर्फ मजबूरी नहीं, समझदारी भी है..... 1. *मुद्रास्फीति से बचे*: नोट का मूल्य घटता है, पर 1 किलो चावल हमेशा 1 किलो चावल रहेगा। बस्तरिया अर्थव्यवस्था नोट पर निर्भर नहीं। 2. *कर्ज से मुक्ति*: पैसे न होने पर शहर में लोग उधार लेते हैं। बस्तर में सामान-से-सामान बदलने से कोई कर्जदार नहीं बनता। 3. *जंगल आधारित जीवन*: तेंदूपत्ता, महुआ, इमली, लाख — ये जंगल से मुफ्त मिलते हैं। इन्हें बेचकर नमक-तेल ले आना सबसे आसान मॉडल है। 4. *सामुदायिक रिश्ते*: हाट सिर्फ बाजार नहीं, सामाजिक मेलजोल है। वस्तु विनिमय से आपसी विश्वास बना रहता है। *3. आधुनिक युग की टक्कर: क्या बदल रहा है, क्या नहीं बदलना चाहिए* *बदलाव जरूरी है*: - सड़क, स्कूल, अस्पताल पहुंचने चाहिए - MSP पर वनोपज खरीदी हो ताकि शोषण न हो - बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट हर पंचायत में हो *बदलाव जरूरी नहीं है*: वस्तु विनिमय को "पिछड़ापन" कहकर खत्म करना गलत होगा। ये *सतत/सस्टेनेबल इकोनॉमी* का सबसे पुराना मॉडल है। दुनिया आज "Cashless Society" की बात कर रही है, बस्तर तो 10 हज़ार साल से "Cashless" है। निष्कर्ष: बस्तरिया लोग मजबूर भी हैं क्योंकि सरकार की पहुंच नहीं है। पर साथ में उन्होंने अपनी ऐसी व्यवस्था बना ली है जो नोट-छापे बिना भी चलती है। असली जरूरत है — विकास आए, पर उनकी व्यवस्था टूटे नहीं। सड़क के साथ सम्मान भी आए। जय जोहार
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    बस्तर में आज भी वस्तु विनिमय क्यों — मजबूरी या परंपरा?
बस्तर के सुदूर गांवों में आज भी बिना पैसे के सामान खरीदा-बेचा जाता है। इसे वस्तु विनिमय/Barter System कहते हैं — इमली के बदले नमक, चावल के बदले साबुन, महुआ के बदले कपड़ा। ये 10 हज़ार साल पुरानी प्रथा है, पर सवाल ये है: आधुनिक युग में भी बस्तरिया लोग ऐसा करने को मजबूर क्यों हैं?
1. मजबूरी के 5 बड़े कारण
•कारण.....
कैसे मजबूर करता है,भौगोलिक अलगाव**	
कई गांव आज भी मुख्य सड़क से 20-30 किमी अंदर हैं। बारिश में 6 महीने संपर्क टूट जाता है। बैंक, ATM, बाजार पहुंच से बाहर
**गरीबी और नकद की कमी**
दैनिक मजदूरी 200-300 रु। फसल बेचने पर ही साल में 2-3 बार नकद आता है। रोज की जरूरत के लिए पैसे होते ही नही
**बैंकिंग सुविधा नहीं**	
बस्तर के 70% से ज्यादा गांवों में बैंक ब्रांच नहीं। डिजिटल पेमेंट तो दूर, लोगों के पास खाता भी नहीं। UPI किसपर चलाएं
**माओवादी समस्या**	
दशकों से अशांति के कारण विकास रुका। व्यापारी डर से अंदरूनी इलाकों में नहीं जाते। साप्ताहिक हाट ही एकमात्र बाजार है
**शिक्षा और जागरूकता**	
"पैसा संभालना", "बचत", "ब्याज" जैसे कांसेप्ट पहुंचे ही नहीं। पुरखों से जो देखा वही चल रहा है
2. लेकिन ये सिर्फ मजबूरी नहीं, समझदारी भी है.....
1. *मुद्रास्फीति से बचे*: 
नोट का मूल्य घटता है, पर 1 किलो चावल हमेशा 1 किलो चावल रहेगा। बस्तरिया अर्थव्यवस्था नोट पर निर्भर नहीं।
2. *कर्ज से मुक्ति*:
पैसे न होने पर शहर में लोग उधार लेते हैं। बस्तर में सामान-से-सामान बदलने से कोई कर्जदार नहीं बनता।
3. *जंगल आधारित जीवन*: 
तेंदूपत्ता, महुआ, इमली, लाख — ये जंगल से मुफ्त मिलते हैं। इन्हें बेचकर नमक-तेल ले आना सबसे आसान मॉडल है।
4. *सामुदायिक रिश्ते*: 
हाट सिर्फ बाजार नहीं, सामाजिक मेलजोल है। वस्तु विनिमय से आपसी विश्वास बना रहता है।
*3. आधुनिक युग की टक्कर: क्या बदल रहा है, क्या नहीं बदलना चाहिए*
*बदलाव जरूरी है*: 
- सड़क, स्कूल, अस्पताल पहुंचने चाहिए
- MSP पर वनोपज खरीदी हो ताकि शोषण न हो
- बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट हर पंचायत में हो
*बदलाव जरूरी नहीं है*: 
वस्तु विनिमय को "पिछड़ापन" कहकर खत्म करना गलत होगा। ये *सतत/सस्टेनेबल इकोनॉमी* का सबसे पुराना मॉडल है। दुनिया आज "Cashless Society" की बात कर रही है, बस्तर तो 10 हज़ार साल से "Cashless" है।
निष्कर्ष: बस्तरिया लोग मजबूर भी हैं क्योंकि सरकार की पहुंच नहीं है। पर साथ में उन्होंने अपनी ऐसी व्यवस्था बना ली है जो नोट-छापे बिना भी चलती है। असली जरूरत है — विकास आए, पर उनकी व्यवस्था टूटे नहीं। सड़क के साथ सम्मान भी आए।
जय जोहार
    user_छ्ग राज्य न्यूज
    छ्ग राज्य न्यूज
    Classified ads newspaper publisher धमधा, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • ये पूरा मामला एक 5 साल कि बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उस बच्ची को एक बोरी मे डालकर बाँध कर उसे फेक दिया बाद मे पुरे गाँव मे अफरा तफरी मच गईं और बहुत ढूंढ़ने पर कुछ लोगो ने बोरी मे कुछ हरकत देख बोरी को खोलते हि सब आश्चर्य चकित हो देखते रहे और तुरंत फिर बच्ची को हॉस्पिटल लेके भागे....
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    ये पूरा मामला एक 5 साल कि बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उस बच्ची को एक बोरी मे डालकर बाँध कर उसे फेक दिया बाद मे पुरे गाँव मे अफरा तफरी मच गईं और बहुत ढूंढ़ने पर कुछ लोगो ने बोरी मे कुछ हरकत देख बोरी को खोलते हि सब आश्चर्य चकित हो देखते रहे और तुरंत फिर बच्ची को हॉस्पिटल लेके भागे....
    user_Pradeep Singh Rajput 🇮🇳D.N.
    Pradeep Singh Rajput 🇮🇳D.N.
    Voice of people दुर्ग, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • धमधा में फिर भड़की आग: ट्रांसफॉर्मर की चिंगारी से लाखों का नुकसान, फायर ब्रिगेड न पहुंचने पर ग्रामीणों में आक्रोश लोकेशन - धमधा रिपोर्टर -हेमंत उमरे धमधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डीहपारा में एक बार फिर भीषण आगजनी की घटना ने हड़कंप मचा दिया। जानकारी के अनुसार, डॉ. जोहन वर्मा के खेत में लगे ट्रांसफॉर्मर से निकली चिंगारी देखते ही देखते भयंकर आग का रूप ले लिया, जिसने सगोन पेड़ की बॉडी ,ड्रिप पाइप सहित लगभग 5 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति को जलाकर राख कर दिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पास में स्थित स्व.टी एस चांतारे शिक्षक के पैरावट तक पहुंच गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के खेतों की पलारी भी इसकी चपेट में आ गई। घटना के दौरान ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए ट्रैक्टर के माध्यम से पानी लाकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग पर काबू पाना आसान नहीं था। हैरानी की बात यह रही कि फायर ब्रिगेड को सूचना देने के बावजूद टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। लगातार धमधा क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय किया जाए, ताकि समय रहते नुकसान को कम किया जा सके।
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    धमधा में फिर भड़की आग: ट्रांसफॉर्मर की चिंगारी से लाखों का नुकसान, फायर ब्रिगेड न पहुंचने पर ग्रामीणों में आक्रोश
लोकेशन - धमधा 
रिपोर्टर -हेमंत उमरे 
धमधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डीहपारा में एक बार फिर भीषण आगजनी की घटना ने हड़कंप मचा दिया। जानकारी के अनुसार, डॉ. जोहन वर्मा के खेत में लगे ट्रांसफॉर्मर से निकली चिंगारी देखते ही देखते भयंकर आग का रूप ले लिया, जिसने सगोन पेड़ की बॉडी ,ड्रिप पाइप सहित लगभग 5 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति को जलाकर राख कर दिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पास में स्थित स्व.टी एस चांतारे शिक्षक के पैरावट 
तक पहुंच गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के खेतों की पलारी भी इसकी चपेट में आ गई। घटना के दौरान ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए ट्रैक्टर के माध्यम से पानी लाकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग पर काबू पाना आसान नहीं था। हैरानी की बात यह रही कि फायर ब्रिगेड को सूचना देने के बावजूद टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। लगातार धमधा क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय किया जाए, ताकि समय रहते नुकसान को कम किया जा सके।
    user_हेमंत उमरे
    हेमंत उमरे
    पत्रकार दुर्ग, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक के लिये नहीं खुला बुद्ध विहार का दरवाजा: युवाओं ने जताया शांतिपूर्ण विरोध लांजी। तहसील अंतर्गत आने वाले दखनीटोला स्थित बुद्ध विहार में 11 अप्रैल को बैठक के लिये अंदर प्रवेश नहीं मिलने से युवाओं मेें आक्रोश नजर आया, उनका कहना था कि वे बुद्ध विहार दखनीटोला में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक आयोजित कर रहे थे जिसके लिये उनके द्वारा सूचित किया गया था लेकिन ऐन वक्त पर बुद्ध विहार का गेट ही नहीं खोला गया, युवाओं में इस बात को लेकर आक्रोश भी नजर आया और इसका परिणाम रहा कि उनके द्वारा बुद्ध विहार के सामने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुये नारे भी लगाये गये, तो युवाओं के द्वारा यह भी कहा कि अगर समाज को एकसूत्र में पिरोकर रखना है तो युवाओं को भी साथ लेकर चलना होगा।
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    महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक के लिये नहीं खुला बुद्ध विहार का दरवाजा: युवाओं ने जताया शांतिपूर्ण विरोध
लांजी। तहसील अंतर्गत आने वाले दखनीटोला स्थित बुद्ध विहार में 11 अप्रैल को बैठक के लिये अंदर प्रवेश नहीं मिलने से युवाओं मेें आक्रोश नजर आया, उनका कहना था कि वे बुद्ध विहार दखनीटोला में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती और महासंगम बैठक आयोजित कर रहे थे जिसके लिये उनके द्वारा सूचित किया गया था लेकिन ऐन वक्त पर बुद्ध विहार का गेट ही नहीं खोला गया, युवाओं में इस बात को लेकर आक्रोश भी नजर आया और इसका परिणाम रहा कि उनके द्वारा बुद्ध विहार के सामने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते हुये नारे भी लगाये गये, तो युवाओं के द्वारा यह भी कहा कि अगर समाज को एकसूत्र में पिरोकर रखना है तो युवाओं को भी साथ लेकर चलना होगा।
    user_Ramanuj Tidke
    Ramanuj Tidke
    Local News Reporter लांजी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • थाना गोबरा नवापारा में फर्जी सिम जारी कर धोखाधड़ी करने वाला आरोपी गिरफ्तार गोबरा नवापारा, पुलिस अधीक्षक रायपुर के माध्यम से पुलिस महानिरीक्षक तकनीकी सेवाएं पुलिस मुख्यालय (छः ग) सेक्टर 19 अटल नगर नवा रायपुर के पत्र क्रमांक/पुमु/तक/से./ सायबर/सी 10- 8/424/2025 दिनांक 08/07/2025 के माध्यम से फर्जी सिम जारी करने वाले प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) की सूची साझा कर वैधानिक कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया। कुल 25 मोबाइल नंबर की पहचान संबंधी दस्तावेज की जांच क्रम में मोबाइल नंबर के पीड़ितों से पूछताछ कर कथन लेख किया जो अपने अपने कथन में उनके जानकारी के बिना आरोपी दर्शनदीप जैन संचालक आगम टेलीकाम सदर रोड़ चौधरी काम्प्लेक्स नवापारा द्वारा इनके दस्तावेजो का गलत उपयोग कर उक्त 25 मोबाइल नम्बरों को अन्य किसी को बिक्री करके संचालित किया जा रहा है एवं दस्तावेजो का गलत उपयोग किया जा रहा है। पीड़ितों द्वारा कभी भी उक्त मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं करना बताये न ही उक्त सीम कभी प्राप्त नही करना बताये जांच पर पाया गया की पोस्ट आईडी 43891995 दर्शन आगम टेलीकॉम नवापारा के द्वारा अन्य लोगों का पहचान एवं फोटो का छल कपट पूर्वक बेईमानी से उपयोग कर उक्त 25 मोबाइल नंबरों का ईशू किया गया है। जो अपराध सदर का घटित करना पाये जाने से अपराध क्रमांक -448/2025 धारा - 318(4) BNS,का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। दौरान विवेचना के आरोपी द्वारा जिन लोगों के नाम के आधार कार्ड से सिम जारी किया गया था उन लोगों का कथन लेख किया गया। विवेचना दौरान आरोपी दर्शनदीप जैन की पता तालाश किया गया जो जबलपुर(म०प्र) में मिलने पर हिरासत में लेकर थाना लाकर घटना के संबंध में पूछताछ किया जो घटना दिनांक को अपराध करना स्वीकार किया एवं आरोपी को गिरफ्तार कर थाना लाकर न्यायिक रिमांड पर रायपुर न्यायालय भेजा गया। गिरफ्तार आरोपी का नाम (01) - दर्शनदीप जैन पिता स्व० अशोक कुमार जैन उम्र 30वर्ष साकिन अभाना थाना नोहेता जिला दमोह (म.प्र) बताया जा रहा है.
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    थाना गोबरा नवापारा में फर्जी सिम जारी कर धोखाधड़ी करने वाला आरोपी गिरफ्तार
गोबरा नवापारा, पुलिस अधीक्षक रायपुर के माध्यम से पुलिस महानिरीक्षक तकनीकी सेवाएं पुलिस मुख्यालय (छः ग) सेक्टर 19 अटल नगर नवा रायपुर के पत्र क्रमांक/पुमु/तक/से./ सायबर/सी 10- 8/424/2025 दिनांक 08/07/2025 के माध्यम से फर्जी सिम जारी करने वाले प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) की सूची साझा कर वैधानिक कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया। कुल 25 मोबाइल नंबर की पहचान संबंधी दस्तावेज की जांच क्रम में मोबाइल नंबर के पीड़ितों से पूछताछ कर कथन लेख किया जो अपने अपने कथन में उनके जानकारी के बिना आरोपी दर्शनदीप जैन संचालक आगम टेलीकाम सदर रोड़ चौधरी काम्प्लेक्स नवापारा द्वारा इनके दस्तावेजो का गलत उपयोग कर उक्त 25 मोबाइल नम्बरों को अन्य किसी को बिक्री करके संचालित किया जा रहा है एवं दस्तावेजो का गलत उपयोग किया जा रहा है। पीड़ितों द्वारा कभी भी उक्त मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं करना बताये न ही उक्त सीम कभी प्राप्त नही करना बताये जांच पर पाया गया की पोस्ट आईडी 43891995 दर्शन आगम टेलीकॉम नवापारा के द्वारा अन्य लोगों का पहचान एवं फोटो का छल कपट पूर्वक बेईमानी से उपयोग कर उक्त 25 मोबाइल नंबरों का ईशू किया गया है। जो अपराध सदर का घटित करना पाये जाने से अपराध क्रमांक -448/2025 धारा - 318(4) BNS,का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। दौरान विवेचना के आरोपी द्वारा जिन लोगों के नाम के आधार कार्ड से सिम जारी किया गया था उन लोगों का कथन लेख किया गया। विवेचना दौरान आरोपी दर्शनदीप जैन की पता तालाश किया गया जो जबलपुर(म०प्र) में मिलने पर हिरासत में लेकर थाना लाकर घटना के संबंध में पूछताछ किया जो घटना दिनांक को अपराध करना स्वीकार किया एवं आरोपी को गिरफ्तार कर थाना लाकर न्यायिक रिमांड पर रायपुर न्यायालय भेजा गया। 
गिरफ्तार आरोपी का नाम
(01) - दर्शनदीप जैन पिता स्व० अशोक कुमार जैन उम्र 30वर्ष साकिन अभाना थाना नोहेता जिला दमोह (म.प्र) बताया जा रहा है.
    user_तुकाराम कंसारी नवापारा राजिम
    तुकाराम कंसारी नवापारा राजिम
    Artist औदगी, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    39 min ago
  • *RAJ TALKIES RAIPUR* ☎️- 0771-2229223 *_Book Online Ticket from Book My Show_* https://in.bookmyshow.com/cinemas/raipur/raj-talkies-raipur/buytickets/RTSR/20251207 *_हमारे व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए नीचे दिए लिंक में क्लिक करे। किसी और को जोड़ने के लिए यह लिंक उन्हें भेजे🙏_* https://chat.whatsapp.com/BPpMQLgJrtjDsPO4VHm0i8?mode=hqrt3
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    *RAJ TALKIES RAIPUR*
☎️- 0771-2229223
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    user_Raj Talkies Raipur
    Raj Talkies Raipur
    Cinema औदगी, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ी भाषा — पहचान, खासियत और आगे क्या होना चाहिए 🇮🇳 1. अभी तक छत्तीसगढ़ी की पहचान और खासियत क्या है? भाषाई पहचान: 1. लिपि: देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। पहले "ओड़िया लिपि" का भी असर था, पर अब हिंदी जैसी देवनागरी ही मान्य है। 2. परिवार: पूर्वी हिंदी की बोली मानी जाती है। अवधी और बघेली की करीबी बहन है। 3. बोलने वाले: 2026 में अनुमानित 2 करोड़+ लोग। छत्तीसगढ़ की 55%+ आबादी की मातृभाषा। 4. राजकीय दर्जा: 2007 में छत्तीसगढ़ राजभाषा अधिनियम के तहत हिंदी के साथ द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला। सरकारी कामकाज में उपयोग की अनुमति है। सांस्कृतिक खासियत: 1. सरलता और मिठास: "कैसे हस", "का करत हस", "बढ़िया हवय" जैसे वाक्य। "हस", "हवय", "ग" का प्रयोग इसे अलग बनाता है। 2. साहित्य: लोकराम यादव, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, डॉ. विनय कुमार पाठक जैसे साहित्यकार। "मोर संग चलव", "छत्तीसगढ़ी गीत" लोक में बहुत लोकप्रिय। 3. उपबोलियां: लरिया, खल्टाही, सदरी, बिलासपुरी — इलाके के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा बदलाव। 4. लोक कला से जुड़ाव: पंडवानी, भरथरी, राउत नाचा, सुआ गीत सब छत्तीसगढ़ी में ही हैं। भाषा = संस्कृति। संवैधानिक स्थिति: अभी तक 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार के स्तर पर आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं मिला। 2. जनगणना 2026 में "छत्तीसगढ़ी" लिखवाना क्यों जरूरी है? जनगणना में भाषा का कॉलम सबसे बड़ा सबूत होता है। सरकार उसी आधार पर तय करती है कि: 1. 8वीं अनुसूची में शामिल करना है या नहीं— 1 करोड़ से ज्यादा बोलने वाले होने पर दावा मजबूत होता है। 2. स्कूल में पढ़ाई, नौकरी में आरक्षण, अनुवाद आदि सुविधाएं मिलेंगी या नहीं। 3. भविष्य का बजट — भाषा विकास बोर्ड, अकादमी, साहित्य पुरस्कार के लिए। अगर लोग "हिंदी" लिखवा देंगे तो छत्तीसगढ़ी बोलने वालों की संख्या कम दिखेगी और मान्यता का केस कमजोर होगा। 3. अभी क्या कमी है और क्या होना चाहिए? अभी स्थिति** क्या होना चाहिए** 8वीं अनुसूची में नहीं है संसद में बिल पास करके 8वीं अनुसूची में शामिल हो। भोजपुरी, राजस्थानी के साथ इसकी भी मांग है स्कूलों में पढ़ाई नहीं प्राथमिक स्तर पर छत्तीसगढ़ी मीडियम/विषय के रूप में विकल्प मिले। NCERT जैसी किताबें बनें मानक व्याकरण/शब्दकोश कम छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा मानक व्याकरण, शब्दकोश, कीबोर्ड तैयार हो सरकारी कामकाज में कम उपयोग कलेक्टर कार्यालय, पंचायत के नोटिस, फॉर्म छत्तीसगढ़ी में भी छपें युवाओं में हीनभावना "गंवई भाषा" का टैग हटे। IAS-IPS अफसर छत्तीसगढ़ी में भाषण दें तो गर्व बढ़ेगा आप क्या कर सकते हैं: 1. जनगणना में: मातृभाषा वाले कॉलम में "छत्तीसगढ़ी/Chhattisgarhi" ही लिखवाएं। "हिंदी" बिल्कुल न लिखें। 2. परिवार में: बच्चों से घर में छत्तीसगढ़ी बोलें। भाषा तभी बचेगी। 3. मांग करें: अपने विधायक-सांसद से 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए आवाज़ उठाएं। एक लाइन में: छत्तीसगढ़ी सिर्फ बोली नहीं, छत्तीसगढ़ की पहचान, अस्मिता और संस्कृति की रीढ़ है। जनगणना इसे "भाषा" का दर्जा दिलाने का सबसे बड़ा मौका है। जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ 🙏
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    छत्तीसगढ़ी भाषा — पहचान, खासियत और आगे क्या होना चाहिए 🇮🇳
1. अभी तक छत्तीसगढ़ी की पहचान और खासियत क्या है?
भाषाई पहचान:
1. लिपि: देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। पहले "ओड़िया लिपि" का भी असर था, पर अब हिंदी जैसी देवनागरी ही मान्य है।
2. परिवार: पूर्वी हिंदी की बोली मानी जाती है। अवधी और बघेली की करीबी बहन है।
3. बोलने वाले: 2026 में अनुमानित 2 करोड़+ लोग। छत्तीसगढ़ की 55%+ आबादी की मातृभाषा।
4. राजकीय दर्जा: 2007 में छत्तीसगढ़ राजभाषा अधिनियम के तहत हिंदी के साथ द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला। सरकारी कामकाज में उपयोग की अनुमति है।
सांस्कृतिक खासियत:
1. सरलता और मिठास: "कैसे हस", "का करत हस", "बढ़िया हवय" जैसे वाक्य। "हस", "हवय", "ग" का प्रयोग इसे अलग बनाता है।
2. साहित्य: लोकराम यादव, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, डॉ. विनय कुमार पाठक जैसे साहित्यकार। "मोर संग चलव", "छत्तीसगढ़ी गीत" लोक में बहुत लोकप्रिय।
3. उपबोलियां: लरिया, खल्टाही, सदरी, बिलासपुरी — इलाके के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा बदलाव।
4. लोक कला से जुड़ाव: पंडवानी, भरथरी, राउत नाचा, सुआ गीत सब छत्तीसगढ़ी में ही हैं। भाषा = संस्कृति।
संवैधानिक स्थिति:
अभी तक 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार के स्तर पर आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं मिला।
2. जनगणना 2026 में "छत्तीसगढ़ी" लिखवाना क्यों जरूरी है?
जनगणना में भाषा का कॉलम सबसे बड़ा सबूत होता है। सरकार उसी आधार पर तय करती है कि:
1. 8वीं अनुसूची में शामिल करना है या नहीं— 1 करोड़ से ज्यादा बोलने वाले होने पर दावा मजबूत होता है।
2. स्कूल में पढ़ाई, नौकरी में आरक्षण, अनुवाद आदि सुविधाएं मिलेंगी या नहीं।
3. भविष्य का बजट — भाषा विकास बोर्ड, अकादमी, साहित्य पुरस्कार के लिए।
अगर लोग "हिंदी" लिखवा देंगे तो छत्तीसगढ़ी बोलने वालों की संख्या कम दिखेगी और मान्यता का केस कमजोर होगा।
3. अभी क्या कमी है और क्या होना चाहिए?
अभी स्थिति**	क्या होना चाहिए**
8वीं अनुसूची में नहीं है	संसद में बिल पास करके 8वीं अनुसूची में शामिल हो। भोजपुरी, राजस्थानी के साथ इसकी भी मांग है
स्कूलों में पढ़ाई नहीं	प्राथमिक स्तर पर छत्तीसगढ़ी मीडियम/विषय के रूप में विकल्प मिले। NCERT जैसी किताबें बनें
मानक व्याकरण/शब्दकोश कम	छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा मानक व्याकरण, शब्दकोश, कीबोर्ड तैयार हो
सरकारी कामकाज में कम उपयोग	कलेक्टर कार्यालय, पंचायत के नोटिस, फॉर्म छत्तीसगढ़ी में भी छपें
युवाओं में हीनभावना	"गंवई भाषा" का टैग हटे। IAS-IPS अफसर छत्तीसगढ़ी में भाषण दें तो गर्व बढ़ेगा
आप क्या कर सकते हैं:
1. जनगणना में: मातृभाषा वाले कॉलम में "छत्तीसगढ़ी/Chhattisgarhi" ही लिखवाएं। "हिंदी" बिल्कुल न लिखें।
2. परिवार में: बच्चों से घर में छत्तीसगढ़ी बोलें। भाषा तभी बचेगी।
3. मांग करें: अपने विधायक-सांसद से 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए आवाज़ उठाएं।
एक लाइन में: छत्तीसगढ़ी सिर्फ बोली नहीं, छत्तीसगढ़ की पहचान, अस्मिता और संस्कृति की रीढ़ है। जनगणना इसे "भाषा" का दर्जा दिलाने का सबसे बड़ा मौका है।
जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ 🙏
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    Classified ads newspaper publisher धमधा, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
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