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टकरेडा में शराब का ठेका खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध घुमारवीं। ग्राम पंचायत घुमारवीं के टकरेडा गांव में शराब का ठेका खोले जाने को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। टकरेडा और तरोतड़ा गांव के ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत प्रधान किशोरी लाल के नेतृत्व में ठेका खोलने का विरोध करते हुए एसडीएम घुमारवीं अभिषेक बरवाल को ज्ञापन सौंपा और ठेका बंद करवाने की मांग उठाई। इस दौरान महिलाओं सहित ग्रामीणों ने ठेकेदार और संबंधित विभाग के खिलाफ नारेबाजी भी की। ग्रामीणों का कहना है कि ठेका खोलने के लिए जारी अनुमति पत्र में नगर परिषद घुमारवीं के वार्ड नंबर आठ टिकरी में शराब का ठेका खोलने की अनुमति का उल्लेख है, जबकि ठेका घुमारवीं पंचायत क्षेत्र के टकरेडा में खोला जा रहा है। ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से मामले की जांच करने और ठेका बंद करवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।

1 hr ago
user_रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
Local News Reporter घुमारवीं, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
1 hr ago

टकरेडा में शराब का ठेका खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध घुमारवीं। ग्राम पंचायत घुमारवीं के टकरेडा गांव में शराब का ठेका खोले जाने को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। टकरेडा और तरोतड़ा गांव के ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत प्रधान किशोरी लाल के नेतृत्व में ठेका खोलने का विरोध करते हुए एसडीएम घुमारवीं अभिषेक बरवाल को ज्ञापन सौंपा और ठेका बंद करवाने की मांग उठाई। इस दौरान महिलाओं सहित ग्रामीणों ने ठेकेदार और संबंधित विभाग के खिलाफ नारेबाजी भी की। ग्रामीणों का कहना है कि ठेका खोलने के लिए जारी अनुमति पत्र में नगर परिषद घुमारवीं के वार्ड नंबर आठ टिकरी में शराब का ठेका खोलने की अनुमति का उल्लेख है, जबकि ठेका घुमारवीं पंचायत क्षेत्र के टकरेडा में खोला जा रहा है। ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से मामले की जांच करने और ठेका बंद करवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।

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  • टकरेडा में शराब का ठेका खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध घुमारवीं। ग्राम पंचायत घुमारवीं के टकरेडा गांव में शराब का ठेका खोले जाने को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। टकरेडा और तरोतड़ा गांव के ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत प्रधान किशोरी लाल के नेतृत्व में ठेका खोलने का विरोध करते हुए एसडीएम घुमारवीं अभिषेक बरवाल को ज्ञापन सौंपा और ठेका बंद करवाने की मांग उठाई। इस दौरान महिलाओं सहित ग्रामीणों ने ठेकेदार और संबंधित विभाग के खिलाफ नारेबाजी भी की। ग्रामीणों का कहना है कि ठेका खोलने के लिए जारी अनुमति पत्र में नगर परिषद घुमारवीं के वार्ड नंबर आठ टिकरी में शराब का ठेका खोलने की अनुमति का उल्लेख है, जबकि ठेका घुमारवीं पंचायत क्षेत्र के टकरेडा में खोला जा रहा है। ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से मामले की जांच करने और ठेका बंद करवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
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    टकरेडा में शराब का ठेका खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध

घुमारवीं। ग्राम पंचायत घुमारवीं के टकरेडा गांव में शराब का ठेका खोले जाने को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। टकरेडा और तरोतड़ा गांव के ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत प्रधान किशोरी लाल के नेतृत्व में ठेका खोलने का विरोध करते हुए एसडीएम घुमारवीं अभिषेक बरवाल को ज्ञापन सौंपा और ठेका बंद करवाने की मांग उठाई। इस दौरान महिलाओं सहित ग्रामीणों ने ठेकेदार और संबंधित विभाग के खिलाफ नारेबाजी भी की।
ग्रामीणों का कहना है कि ठेका खोलने के लिए जारी अनुमति पत्र में नगर परिषद घुमारवीं के वार्ड नंबर आठ टिकरी में शराब का ठेका खोलने की अनुमति का उल्लेख है, जबकि ठेका घुमारवीं पंचायत क्षेत्र के टकरेडा में खोला जा रहा है। ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से मामले की जांच करने और ठेका बंद करवाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
    user_रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
    रिपोर्टर राकेशशर्मा पंजाबकेसरी
    Local News Reporter घुमारवीं, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश•
    1 hr ago
  • वेस्टीज भारत का नंबर वन डायरेक्ट सेलिंग सिस्टम दोस्तों हर घर में दे रहा है रोजगार महिलाएं हो रही है आत्मनिर्भर दोस्तों आज ही शानदार प्लेटफार्म को घर बैठे फुल टाइम पार्ट टाइम कोई भी आसानी से इस बिजनेस में स्टार्टअप लेकर बहुत बड़ा सफलता हासिल कर सकता है आज ही घर बैठे रोजगार पाए और मुझे कॉल करें 9816133991 आपका बिजनेस कोच राजकुमार बिलासपुर हिमाचल प्रदेश
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    user_RAJ KUMAR CROWN HB Power
    RAJ KUMAR CROWN HB Power
    Health and beauty shop Jhanduta, Bilaspur•
    23 min ago
  • माजरा के लोगों को आश्वासन या समाधान? शिवालिक प्लांट पर जनता के सवालों का हिसाब कौन देगा? आज DK News Nalagarh किसी नेता की चमचागिरी करने नहीं आया है, किसी अधिकारी की तारीफ करने नहीं आया है और न ही किसी कंपनी का पक्ष लेने आया है। आज हम बात कर रहे हैं गांव माजरा, तहसील नालागढ़ के उन ग्रामीणों की, जो शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं। 18 मई 2026 को गांव वासी अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के गेट पर धरने पर बैठे। ग्रामीणों का कहना था कि प्लांट से निकलने वाली हवा और पानी दूषित हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण और गांववासियों को गम्भीर बिमारियो का सामना करना पड रहा है । इन्हीं समस्याओं और शिकायतों को लेकर गांववासियों ने 18 मई को प्लांट के गेट पर धरना दिया। जनता अपनी समस्या लेकर गेट पर बैठी थी और सवाल था कि आखिर उनकी शिकायतों का समाधान कौन करेगा? इसके बाद 23 मई 2026 को बाबा हरदीप जी और एसडीएम मौके पर पहुंचे। इसके बाद अंदर जाकर कंपनी के साथ बातचीत हुई। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंदर क्या बातचीत हुई, क्या फैसला हुआ और ग्रामीणों की मांगों पर क्या तय किया गया—इसकी पूरी जानकारी गांववासियों को आखिर क्यों नहीं दी गई? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें आश्वासन देकर धरना उठवा दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब उनकी समस्या का समाधान होगा। लेकिन धरना उठने के बाद क्या हुआ? आश्वासन पर आश्वासन। एक आश्वासन मिला, फिर दूसरा आश्वासन मिला, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ग्राउंड लेवल पर स्थायी समाधान आज भी दिखाई नहीं दे रहा। और यही सवाल आज DK News Nalagarh पूछ रहा है— अगर 23 मई को बातचीत के बाद कोई ठोस फैसला हुआ था, तो वह फैसला जमीन पर कहां है? अगर ग्रामीणों को कोई लिखित समाधान दिया गया था तो वह जनता के सामने क्यों नहीं रखा गया? अगर कंपनी ने कोई जिम्मेदारी ली थी तो उसका पालन कितना हुआ? और अगर प्रशासन ने कोई समयसीमा तय की थी तो उस समयसीमा में क्या कार्रवाई हुई? जनता को सिर्फ भरोसा नहीं चाहिए, जनता को हिसाब चाहिए। आज सवाल उस गंदे पानी का भी है जिसे ग्रामीण दूषित बता रहे हैं। सवाल उस दुर्गंध का है जिसकी शिकायत ग्रामीण कर रहे हैं। सवाल यहां आने वाले hazardous और chemical waste को लेकर उठ रही चिंताओं का है। ग्रामीणों का दावा है कि इलाके में लोगों को अस्थमा, एलर्जी और किडनी से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है। लेकिन इस मुद्दे पर भी हमारा सवाल बिल्कुल साफ है— सरकार स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच क्यों नहीं करवाती? पानी की जांच करवाइए। मिट्टी की जांच करवाइए। हवा की जांच करवाइए। रिपोर्ट जनता के सामने रखिए। अगर पानी साफ है तो जनता को बताइए कि पानी साफ है। अगर पानी दूषित है तो जिम्मेदारी तय कीजिए। और अगर इन स्वास्थ्य समस्याओं का प्लांट या पानी से कोई संबंध नहीं है तो वह भी वैज्ञानिक रिपोर्ट से साफ होना चाहिए। क्योंकि DK News Nalagarh हवा में तीर नहीं चलाएगा। हम दस्तावेज के साथ सवाल पूछेंगे और मौके के वीडियो के साथ सवाल पूछेंगे। 23 मई 2026 की बैठक के लिखित दस्तावेज में ग्रामीणों की कई चिंताओं का उल्लेख है। इसमें प्लांट का निरीक्षण, वीडियोग्राफी, hazardous waste के उचित निस्तारण, untreated waste, दुर्गंध और waste management से जुड़े मुद्दों पर चर्चा दर्ज है। तो फिर सवाल यह है कि कागज पर बातें दर्ज होने के बाद जमीन पर बदलाव कितना हुआ? और हमें शर्म आती है उन नेताओं पर जो जनता के बीच आकर बार-बार आश्वासन देते हैं, लोगों को तसल्ली देते हैं, लेकिन जब ग्राउंड लेवल पर काम की बात आती है तो नतीजा दिखाई नहीं देता। नेताओं के पास तीज-त्योहारों में जाने का समय है। शादी समारोहों में पहुंचने का समय है। कार्यक्रमों में जाने का समय है। फोटो खिंचवाने और भाषण देने का समय है। लेकिन इन ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए समय क्यों नहीं है? क्या जनता सिर्फ वोट देने के समय याद आती है? चुनाव के समय नेता उन घरों तक पहुंच जाते हैं जहां पैदल रास्ता भी मुश्किल होता है। बीमार व्यक्ति के घर तक वोट मांगने पहुंचने का रास्ता निकाल लिया जाता है। लेकिन जब वही जनता अपनी समस्या लेकर धरने पर बैठती है तो उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का समय क्यों नहीं मिलता? और यहां सवाल वर्तमान विधायक से भी है— अगर आश्वासन दिए गए हैं तो अब उसका हिसाब दीजिए। कितने आश्वासन दिए गए? कब तक समाधान होना था? अब तक क्या कार्रवाई हुई? कौन-सा विभाग जिम्मेदार है? और सबसे जरूरी— माजरा के लोगों की समस्या का अंतिम समाधान आखिर कब होगा? क्योंकि ग्रामीणों को अब मीठी गोली नहीं चाहिए। झूठी तसल्ली नहीं चाहिए। सिर्फ बैठक नहीं चाहिए। सिर्फ बयान नहीं चाहिए। सिर्फ फोटो नहीं चाहिए। जनता को चाहिए— साफ पानी। साफ हवा। सुरक्षित वातावरण। वैज्ञानिक जांच। जिम्मेदारी तय होना। और सबसे बढ़कर—स्थायी समाधान। अगर ग्रामीणों के आरोप गलत हैं तो सरकार और संबंधित विभाग सामने आएं और जांच करवाकर सच जनता को बताएं। अगर आरोपों में सच्चाई है तो फिर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इस मुद्दे को बार-बार आश्वासन देकर दबा देना समाधान नहीं है। 18 मई को जनता दूषित हवा, दूषित पानी और पर्यावरण व गांववासियों को हो रहे नुकसान के खिलाफ धरने पर बैठी। 23 मई को बातचीत हुई। धरना आश्वासन के बाद उठा। उसके बाद भी आश्वासन चलते रहे। अब सवाल है— आखिर आश्वासन की यह कहानी कब खत्म होगी और समाधान की शुरुआत कब होगी? DK News Nalagarh किसी राजनीतिक पार्टी का प्रवक्ता नहीं है। हम सिर्फ इतना पूछ रहे हैं— माजरा के लोगों की आवाज कब सुनी जाएगी? उनके पानी की जांच कब होगी? उनकी शिकायतों पर अंतिम फैसला कब होगा? और जो वादे किए गए, उनका हिसाब जनता को कब मिलेगा? क्योंकि लोकतंत्र में नेता जनता से बड़े नहीं होते। नेता जनता के वोट से बनते हैं और जनता को जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है। और अगर इस समस्या का समाधान समय रहते नहीं निकला, तो आने वाले चुनाव में जनता अपने वोट से जवाब देना अच्छी तरह जानती है। DK News Nalagarh शम्मी राजपूत सवाल पूछता रहेगा—बिना डर, बिना दबाव और बिना किसी की चमचागिरी के। क्योंकि यह सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है। यह सवाल माजरा के लोगों की जिंदगी, उनके पानी और उनके भविष्य का है।
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    माजरा के लोगों को आश्वासन या समाधान? शिवालिक प्लांट पर जनता के सवालों का हिसाब कौन देगा?


आज DK News Nalagarh किसी नेता की चमचागिरी करने नहीं आया है, किसी अधिकारी की तारीफ करने नहीं आया है और न ही किसी कंपनी का पक्ष लेने आया है। आज हम बात कर रहे हैं गांव माजरा, तहसील नालागढ़ के उन ग्रामीणों की, जो शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं।
18 मई 2026 को गांव वासी अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के गेट पर धरने पर बैठे। ग्रामीणों का कहना था कि प्लांट से निकलने वाली हवा और पानी दूषित हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण और गांववासियों को गम्भीर बिमारियो का सामना करना पड रहा है । इन्हीं समस्याओं और शिकायतों को लेकर गांववासियों ने 18 मई को प्लांट के गेट पर धरना दिया। जनता अपनी समस्या लेकर गेट पर बैठी थी और सवाल था कि आखिर उनकी शिकायतों का समाधान कौन करेगा?
इसके बाद 23 मई 2026 को बाबा हरदीप जी और एसडीएम मौके पर पहुंचे। इसके बाद अंदर जाकर कंपनी के साथ बातचीत हुई। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंदर क्या बातचीत हुई, क्या फैसला हुआ और ग्रामीणों की मांगों पर क्या तय किया गया—इसकी पूरी जानकारी गांववासियों को आखिर क्यों नहीं दी गई?
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें आश्वासन देकर धरना उठवा दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब उनकी समस्या का समाधान होगा। लेकिन धरना उठने के बाद क्या हुआ?
आश्वासन पर आश्वासन।
एक आश्वासन मिला, फिर दूसरा आश्वासन मिला, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ग्राउंड लेवल पर स्थायी समाधान आज भी दिखाई नहीं दे रहा।
और यही सवाल आज DK News Nalagarh पूछ रहा है—
अगर 23 मई को बातचीत के बाद कोई ठोस फैसला हुआ था, तो वह फैसला जमीन पर कहां है?
अगर ग्रामीणों को कोई लिखित समाधान दिया गया था तो वह जनता के सामने क्यों नहीं रखा गया?
अगर कंपनी ने कोई जिम्मेदारी ली थी तो उसका पालन कितना हुआ?
और अगर प्रशासन ने कोई समयसीमा तय की थी तो उस समयसीमा में क्या कार्रवाई हुई?
जनता को सिर्फ भरोसा नहीं चाहिए, जनता को हिसाब चाहिए।
आज सवाल उस गंदे पानी का भी है जिसे ग्रामीण दूषित बता रहे हैं। सवाल उस दुर्गंध का है जिसकी शिकायत ग्रामीण कर रहे हैं। सवाल यहां आने वाले hazardous और chemical waste को लेकर उठ रही चिंताओं का है। ग्रामीणों का दावा है कि इलाके में लोगों को अस्थमा, एलर्जी और किडनी से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
लेकिन इस मुद्दे पर भी हमारा सवाल बिल्कुल साफ है—
सरकार स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच क्यों नहीं करवाती?
पानी की जांच करवाइए।
मिट्टी की जांच करवाइए।
हवा की जांच करवाइए।
रिपोर्ट जनता के सामने रखिए।
अगर पानी साफ है तो जनता को बताइए कि पानी साफ है। अगर पानी दूषित है तो जिम्मेदारी तय कीजिए। और अगर इन स्वास्थ्य समस्याओं का प्लांट या पानी से कोई संबंध नहीं है तो वह भी वैज्ञानिक रिपोर्ट से साफ होना चाहिए।
क्योंकि DK News Nalagarh हवा में तीर नहीं चलाएगा। हम दस्तावेज के साथ सवाल पूछेंगे और मौके के वीडियो के साथ सवाल पूछेंगे।
23 मई 2026 की बैठक के लिखित दस्तावेज में ग्रामीणों की कई चिंताओं का उल्लेख है। इसमें प्लांट का निरीक्षण, वीडियोग्राफी, hazardous waste के उचित निस्तारण, untreated waste, दुर्गंध और waste management से जुड़े मुद्दों पर चर्चा दर्ज है।
तो फिर सवाल यह है कि कागज पर बातें दर्ज होने के बाद जमीन पर बदलाव कितना हुआ?
और हमें शर्म आती है उन नेताओं पर जो जनता के बीच आकर बार-बार आश्वासन देते हैं, लोगों को तसल्ली देते हैं, लेकिन जब ग्राउंड लेवल पर काम की बात आती है तो नतीजा दिखाई नहीं देता।
नेताओं के पास तीज-त्योहारों में जाने का समय है।
शादी समारोहों में पहुंचने का समय है।
कार्यक्रमों में जाने का समय है।
फोटो खिंचवाने और भाषण देने का समय है।
लेकिन इन ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए समय क्यों नहीं है?
क्या जनता सिर्फ वोट देने के समय याद आती है?
चुनाव के समय नेता उन घरों तक पहुंच जाते हैं जहां पैदल रास्ता भी मुश्किल होता है। बीमार व्यक्ति के घर तक वोट मांगने पहुंचने का रास्ता निकाल लिया जाता है। लेकिन जब वही जनता अपनी समस्या लेकर धरने पर बैठती है तो उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का समय क्यों नहीं मिलता?
और यहां सवाल वर्तमान विधायक से भी है—
अगर आश्वासन दिए गए हैं तो अब उसका हिसाब दीजिए।
कितने आश्वासन दिए गए?
कब तक समाधान होना था?
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
कौन-सा विभाग जिम्मेदार है?
और सबसे जरूरी—
माजरा के लोगों की समस्या का अंतिम समाधान आखिर कब होगा?
क्योंकि ग्रामीणों को अब मीठी गोली नहीं चाहिए।
झूठी तसल्ली नहीं चाहिए।
सिर्फ बैठक नहीं चाहिए।
सिर्फ बयान नहीं चाहिए।
सिर्फ फोटो नहीं चाहिए।
जनता को चाहिए—
साफ पानी।
साफ हवा।
सुरक्षित वातावरण।
वैज्ञानिक जांच।
जिम्मेदारी तय होना।
और सबसे बढ़कर—स्थायी समाधान।
अगर ग्रामीणों के आरोप गलत हैं तो सरकार और संबंधित विभाग सामने आएं और जांच करवाकर सच जनता को बताएं।
अगर आरोपों में सच्चाई है तो फिर कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन इस मुद्दे को बार-बार आश्वासन देकर दबा देना समाधान नहीं है।
18 मई को जनता दूषित हवा, दूषित पानी और पर्यावरण व गांववासियों को हो रहे नुकसान के खिलाफ धरने पर बैठी।
23 मई को बातचीत हुई।
धरना आश्वासन के बाद उठा।
उसके बाद भी आश्वासन चलते रहे।
अब सवाल है—
आखिर आश्वासन की यह कहानी कब खत्म होगी और समाधान की शुरुआत कब होगी?
DK News Nalagarh किसी राजनीतिक पार्टी का प्रवक्ता नहीं है।
हम सिर्फ इतना पूछ रहे हैं—
माजरा के लोगों की आवाज कब सुनी जाएगी?
उनके पानी की जांच कब होगी?
उनकी शिकायतों पर अंतिम फैसला कब होगा?
और जो वादे किए गए, उनका हिसाब जनता को कब मिलेगा?
क्योंकि लोकतंत्र में नेता जनता से बड़े नहीं होते।
नेता जनता के वोट से बनते हैं और जनता को जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है।
और अगर इस समस्या का समाधान समय रहते नहीं निकला, तो आने वाले चुनाव में जनता अपने वोट से जवाब देना अच्छी तरह जानती है।
DK News Nalagarh शम्मी राजपूत सवाल पूछता रहेगा—बिना डर, बिना दबाव और बिना किसी की चमचागिरी के।
क्योंकि यह सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है।
यह सवाल माजरा के लोगों की जिंदगी, उनके पानी और उनके भविष्य का है।
    user_Dk News Nalagarh
    Dk News Nalagarh
    Local News Reporter पंजेहरा, सोलन, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
  • नगडा, तेल से बड़ा टैंकर मकान में घुसा ,फिलहाल पुलिस मौके पर
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    नगडा, तेल से बड़ा टैंकर मकान में घुसा ,फिलहाल पुलिस मौके पर
    user_Himachal Punjab News
    Himachal Punjab News
    Local News Reporter मेहटपुर, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    7 hrs ago
  • स्मार्ट मीटर ना लगवाने पर विद्युत बोर्ड ने शहर में काटे कई लोगों के कनेक्शन, जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाने पर भड़के लोग, बोर्ड और मीटर लगाने वाली कंपनी पर लगाया डराने धमकाने का आरोप एसपी के पास दी शिकायत, धरना प्रदर्शन कर विद्युत बोर्ड के अधिकारियों का घेराव करने का दिया अल्टीमेटम हमीरपुर स्मार्ट मीटर लगाने का मामला हमीरपुर शहर में भी अब तूल पकड़ गया है । हमीरपुर शहर के गौड़ा इलाके में कुछ उपभोक्ताओं ने जब स्मार्ट मीटर लगाने से मना कर दिया तो पहले विभाग ने उन्हें नोटिस देकर उनका विद्युत कनेक्शन काट दिया गया जिसे लेकर लोग भड़क गए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि विद्युत बोर्ड और स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी उन्हें डरा धमका रही है इसे लेकर वीरवार को उपभोक्ता कल्याण मंच के साथ लोगों ने एसपी हमीरपुर के पास पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके विद्युत कनेक्शन पुनः स्थापित नहीं किए गए तो वह इसके खिलाफ विद्युत बोर्ड के अधिकारियों का घेरावकरेंगे और कार्यलय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे । उपभोक्ता कल्याण मंच के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने बताया कि उपभोक्ताओं के इनकार के बावजूद स्मार्ट मीटर जबरदस्ती और गैर कानूनी तरीके से लगाने का काम किया जा रहा है। जब लोग इसका विरोध कर रहे हैं तो उनका संवैधानिक हक छीन कर उनके कनेक्शन काटकर उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है । उन्होंने बताया कि हमीरपुर शहर के एक इलाके में भी के उपभोक्ताओं के कलेक्शन काटकर उन्हें अंधेरा दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि एक परिवार को एक महीने तक बिना बिजली के रहना पड़ गया है और कोर्ट के दखल के बाद उनकी सप्लाई को बहाल किया गया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने निर्णय दिया है कि विभाग जबरदस्ती स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले में सरकार और विद्युत बोर्ड को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ेगा । ठाकुर ने बताया कि पुलिस अधीक्षक से विद्युत बोर्ड और स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करके उन पर कार्रवाई की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और विभाग नही माना तो हर गांव में लोगो के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी । बाइट सुरेश ठाकुर अध्यक्ष उपभोक्ता कल्याण मंच गौडा इलाके के सुमित प्रकाश गौतम ने बताया कि उनके चार कनेक्शन स्मार्ट मीटर न लगाने को लेकर काट दिए गए हैं जिसके कारण उन्हें समस्या हो रही है । उन्होंने बताया कि आज पुलिस अधीक्षक से मिलकर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर न लगाने पर बिजली कनेक्शन काटने वालो के खिलाफ शिकयत कर कार्यवाही की मांग की है । बाइट प्रकाश गौतम पुरुषोत्तम प्रकाश ने बताया कि जब लोग स्मार्ट मीटर लगाना ही नहीं चाहते हैं तो जबरदस्ती इन्हें क्यों लगाया जा रहा है इनकी रीडिंग ठीक नहीं आती है पुराने मी ही ठीक है और उन्हें ही रहने दिया जाए।
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    स्मार्ट मीटर ना लगवाने पर विद्युत बोर्ड ने शहर में काटे कई लोगों के कनेक्शन, जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाने पर भड़के लोग, बोर्ड और मीटर लगाने वाली कंपनी पर लगाया डराने धमकाने का आरोप एसपी के पास दी शिकायत, धरना प्रदर्शन कर विद्युत बोर्ड के अधिकारियों का घेराव करने का दिया अल्टीमेटम
हमीरपुर
स्मार्ट मीटर लगाने का मामला हमीरपुर शहर में भी अब तूल पकड़ गया है । हमीरपुर शहर के गौड़ा इलाके में कुछ उपभोक्ताओं ने जब स्मार्ट मीटर लगाने से मना कर दिया तो पहले विभाग ने उन्हें नोटिस देकर उनका विद्युत कनेक्शन काट दिया गया जिसे लेकर लोग भड़क गए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि विद्युत बोर्ड और स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी उन्हें डरा धमका रही है इसे लेकर वीरवार को उपभोक्ता कल्याण मंच के साथ लोगों ने एसपी हमीरपुर के पास पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके विद्युत कनेक्शन पुनः स्थापित नहीं किए गए तो वह इसके खिलाफ विद्युत बोर्ड के अधिकारियों का घेरावकरेंगे और कार्यलय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे ।
उपभोक्ता कल्याण मंच के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने बताया कि उपभोक्ताओं के इनकार के बावजूद स्मार्ट मीटर जबरदस्ती और गैर कानूनी तरीके से लगाने का काम किया जा रहा है। जब लोग इसका विरोध कर रहे हैं तो उनका संवैधानिक हक छीन कर उनके कनेक्शन काटकर उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है । उन्होंने बताया कि हमीरपुर शहर के एक इलाके में भी के उपभोक्ताओं के कलेक्शन काटकर उन्हें अंधेरा दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि एक परिवार को एक महीने तक बिना बिजली के रहना पड़ गया है और कोर्ट के दखल के बाद उनकी सप्लाई को बहाल किया गया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने निर्णय दिया है कि विभाग जबरदस्ती स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले में सरकार और विद्युत बोर्ड को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ेगा । ठाकुर ने बताया कि पुलिस अधीक्षक से विद्युत बोर्ड और स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करके उन पर कार्रवाई की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और विभाग नही माना तो हर गांव में लोगो के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी ।
बाइट सुरेश ठाकुर
अध्यक्ष उपभोक्ता कल्याण मंच
गौडा इलाके के सुमित प्रकाश गौतम ने बताया कि उनके चार कनेक्शन स्मार्ट मीटर न लगाने को लेकर काट दिए गए हैं जिसके कारण उन्हें समस्या हो रही है । उन्होंने बताया कि आज पुलिस अधीक्षक से मिलकर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर न लगाने पर बिजली कनेक्शन काटने वालो के खिलाफ शिकयत कर कार्यवाही की मांग की है ।
बाइट प्रकाश गौतम
पुरुषोत्तम प्रकाश ने बताया कि जब लोग स्मार्ट मीटर लगाना ही नहीं चाहते हैं तो जबरदस्ती इन्हें क्यों लगाया जा रहा है इनकी रीडिंग ठीक नहीं आती है पुराने मी ही ठीक है और उन्हें ही रहने दिया जाए।
    user_खबरी लाल
    खबरी लाल
    रिपोर्टर हमीरपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    8 hrs ago
  • स्मार्ट मीटर का विरोध पड़ा भारी! बिजली कनेक्शन कटा, SP हमीरपुर से शिकायत | Himachal News स्मार्ट मीटर का विरोध पड़ा भारी! बिजली कनेक्शन कटा, SP हमीरपुर से शिकायत | Himachal News
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    स्मार्ट मीटर का विरोध पड़ा भारी! बिजली कनेक्शन कटा, SP हमीरपुर से शिकायत | Himachal News
स्मार्ट मीटर का विरोध पड़ा भारी! बिजली कनेक्शन कटा, SP हमीरपुर से शिकायत | Himachal News
    user_BHK News Himachal
    BHK News Himachal
    Local News Reporter Una, Himachal Pradesh•
    4 hrs ago
  • पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने प्रदेश सरकार पर साधा निशाना, कांग्रेस सरकार ने जनता से किया छल, महिलाओं को फिर गुमराह करने की कोशश भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि कांग्रेस ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं को बिना किसी शर्त के 1500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। इसके बावजूद सत्ता में आने के बाद इस वादे को पूरा करने में सरकार ने कई तरह की शर्तें लगा दीं। वीरवार को जिला मुख्यालय के सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव और उपचुनावों के दौरान एक बार फिर महिलाओं से फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन पात्र महिलाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। पूर्व मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए दावा किया कि सरकार ने पांच लाख महिलाओं को करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से लाभ देने की बात कही थी, जबकि वास्तविकता में केवल 35,687 महिलाओं को ही इसका लाभ मिल सका। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं को सिर्फ एक किस्त मिली, जबकि कुछ मामलों में राशि वापस भी करवाई गई। वीरेंद्र कंवर ने 'मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना' और इसमें जोड़ी गई नई शर्तों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि वर्ष 2024 में महिलाओं से भरवाए गए फॉर्मों में से कितने स्वीकृत हुए, कितने रद्द किए गए और कितनी महिलाओं को पेंशन का लाभ मिला, इसका स्पष्ट आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2022 में झूठे वादों के सहारे सत्ता हासिल की थी, लेकिन अब प्रदेश की जनता और मातृशक्ति जागरूक हो चुकी है। आगामी चुनाव में जनता अपने मत के माध्यम से कांग्रेस सरकार को उसके वादों और कार्यप्रणाली का जवाब देगी।
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    पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने प्रदेश सरकार पर साधा निशाना, कांग्रेस सरकार ने जनता से किया छल, महिलाओं को फिर गुमराह करने की कोशश
भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि कांग्रेस ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं को बिना किसी शर्त के 1500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। इसके बावजूद सत्ता में आने के बाद इस वादे को पूरा करने में सरकार ने कई तरह की शर्तें लगा दीं। वीरवार को जिला मुख्यालय के सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव और उपचुनावों के दौरान एक बार फिर महिलाओं से फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन पात्र महिलाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। पूर्व मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए दावा किया कि सरकार ने पांच लाख महिलाओं को करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से लाभ देने की बात कही थी, जबकि वास्तविकता में केवल 35,687 महिलाओं को ही इसका लाभ मिल सका। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं को सिर्फ एक किस्त मिली, जबकि कुछ मामलों में राशि वापस भी करवाई गई। वीरेंद्र कंवर ने 'मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना' और इसमें जोड़ी गई नई शर्तों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि वर्ष 2024 में महिलाओं से भरवाए गए फॉर्मों में से कितने स्वीकृत हुए, कितने रद्द किए गए और कितनी महिलाओं को पेंशन का लाभ मिला, इसका स्पष्ट आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2022 में झूठे वादों के सहारे सत्ता हासिल की थी, लेकिन अब प्रदेश की जनता और मातृशक्ति जागरूक हो चुकी है। आगामी चुनाव में जनता अपने मत के माध्यम से कांग्रेस सरकार को उसके वादों और कार्यप्रणाली का जवाब देगी।
    user_ऊना की खबर
    ऊना की खबर
    Local News Reporter ऊना, ऊना, हिमाचल प्रदेश•
    11 hrs ago
  • Nepal men badh se mahapralay dil dahla dene bali kuchh tasveeren
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    Nepal men badh se mahapralay dil dahla dene bali kuchh tasveeren
    user_Hem Singh Chauhan
    Hem Singh Chauhan
    Engineer Balh, Mandi•
    1 hr ago
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