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यह भगवान कृष्ण जी से संबंधित उत्तर प्रदेश (यूपी) का एक दृश्य है, जहाँ उनकी पूजा बड़े ही धूमधाम से की जा रही है।
Bihari bhai
यह भगवान कृष्ण जी से संबंधित उत्तर प्रदेश (यूपी) का एक दृश्य है, जहाँ उनकी पूजा बड़े ही धूमधाम से की जा रही है।
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- यह भगवान कृष्ण जी से संबंधित उत्तर प्रदेश (यूपी) का एक दृश्य है, जहाँ उनकी पूजा बड़े ही धूमधाम से की जा रही है।1
- एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें एक शराबी युवक ने एक पिता के सामने ही उनकी बेटी का हाथ पकड़ लिया। इस आपत्तिजनक हरकत के बाद उस शराबी युवक का जो 'हाल' हुआ है, वह पूरा घटनाक्रम इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है।1
- Yadav jee@@@@@@@@###@###@@@@@@@@@№###№⅚----------------- 💢 madhepura.3
- Post by Krishan yadav br 431
- मधेपुरा जिले के चर्चित बीएल इंटर विद्यालय, मुरलीगंज की प्रभारी प्रधानाध्यापिका कविता नंदिनी सरकार पर फर्जी B.Ed डिग्री के सहारे वर्षों तक सरकारी वेतन लेने का गंभीर आरोप लगा है। कटिहार निवासी मुन्ना कुमार की शिकायत के बाद इस मामले ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है और अब पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आरोप है कि कविता नंदिनी सरकार ने अमान्य घोषित आरए बीएड कॉलेज, कुंजौरी आलमनगर से B.Ed की डिग्री प्राप्त कर प्रशिक्षित शिक्षक का वेतनमान हासिल किया, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि इस संस्थान की मान्यता संदिग्ध रही है। इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह सामने आया कि माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक संजीव कुमार ने 5 मार्च 2026 को ही जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेजकर आरोप पत्र गठित करने और विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था। हालांकि, आरोप है कि इस संबंधित फाइल को लंबे समय तक दबाकर रखा गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बाद में, शिकायतकर्ता ने सीधे जिला पदाधिकारी (डीएम) से न्याय की गुहार लगाई, जिसके हस्तक्षेप के बाद पूरे मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया। मधेपुरा के डीएम के हस्तक्षेप के बाद दबाई गई फाइल खुली और जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने प्रभारी प्रधानाध्यापिका के खिलाफ परपत्र ‘क’ गठित कर विभाग को भेज दिया। डीईओ संजय कुमार ने यह भी स्वीकार किया है कि फर्जी महाविद्यालय की डिग्री के आधार पर प्रशिक्षित वेतन लेने का आरोप लगा है और अब विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन आरोपों पर कैमरे के सामने कविता नंदिनी सरकार ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। फिलहाल, यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जानना चाहते हैं कि क्या शिक्षा विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा या यह चर्चित फाइल एक बार फिर ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी। आम जनता इस बात का भी इंतजार कर रही है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो सरकारी राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई कब तक की जाएगी।4
- यह पोस्ट उपयोगकर्ताओं से पूछती है कि सिक्किम में क्या बोलते हैं, और उनसे कमेंट करके यह जानकारी साझा करने का आग्रह करती है। इसके अतिरिक्त, पोस्ट अपने प्रोफाइल को देखने का भी सुझाव देती है।1
- सौर बाजार प्रखंड कार्यालय परिसर के सामने बना यात्री शेड समय से पहले ही जर्जर होकर ध्वस्त होने के कगार पर पहुँच गया है, जिससे लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि इस यात्री शेड के नाम पर सरकारी राशि का जमकर बंदरबांट किया गया है। कई लोगों ने बताया कि यह यात्री शेड ईंट और सीमेंट की बजाय स्टील की चादरों और खूंटों से बनाया गया है, यही वजह है कि यह कुछ ही महीनों में टूट गया है और अब बैठने लायक नहीं बचा है। लोगों का कहना है कि यदि इसका निर्माण स्थायी सामग्री से होता तो यह अधिक समय तक चलता। इसके अतिरिक्त, प्रखंड कार्यालय में दिन भर सैकड़ों लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन परिसर में न तो पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था है और न ही कोई उपयोग लायक शौचालय भवन। यह स्थिति लोगों के लिए भारी परेशानी का कारण बनती है। हालाँकि, परिसर में दर्जनों शौचालय भवन बनाए गए हैं, पर उनमें से एक भी इस्तेमाल में नहीं है, जिससे साफ जाहिर होता है कि सौर बाजार प्रखंड कार्यालय परिसर में योजनाओं के नाम पर सरकारी धन का बड़े पैमाने पर बंदरबांट कर लिया गया है।1
- मधेपुरा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और इंडियन डेंटल एसोसिएशन (IDA) की एक संयुक्त बैठक उस समय गरमा गई, जब जिले के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार के खिलाफ डॉक्टरों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया। आईएमए भवन में आयोजित इस बैठक में जिले भर से लगभग 50 डॉक्टर शामिल हुए, जिसकी अध्यक्षता आईएमए जिलाध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने की। बैठक में डॉक्टरों ने सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे निजी क्लीनिक और अस्पताल संचालकों को लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बिना किसी ठोस कारण के निजी अस्पतालों पर जाकर अभद्र व्यवहार किया जाता है और चिकित्सकों को मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार यादव ने सिविल सर्जन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके व्यवहार को बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं बताया, यहां तक कि उन्होंने इसे मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति का व्यवहार बताया। आईएमए सचिव डॉ. अमित आनंद ने भी सिविल सर्जन के व्यवहार को अशोभनीय बताते हुए उनकी 'मानसिक गरीबी' का जिक्र किया। डॉक्टरों ने एक प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार से मांग की कि राज्य स्तर पर एक समिति गठित कर सिविल सर्जन की मानसिक जांच कराई जाए और उचित कार्रवाई की जाए। आईडीए के डॉ. प्रमोद कुमार ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का हवाला देते हुए बताया कि 40 बेड से कम क्षमता वाले अस्पतालों के लिए रजिस्ट्रेशन का कोई स्पष्ट नियम नहीं है, फिर भी सिविल सर्जन नियमों की आड़ में डॉक्टरों के साथ बदतमीजी करते हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि सिविल सर्जन ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो आगे आंदोलन और सख्त कार्रवाई की रणनीति बनाई जाएगी। इस बैठक में डॉ. नायडू कुमारी, डॉ. गंगेश गुंजन, डॉ. बीएन भारती सहित कई अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।4