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डॉ मोहित मेहरा ने झांसी में प्रेस वार्ता करते हुए कई विशेषज्ञों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
Pramendra singh
डॉ मोहित मेहरा ने झांसी में प्रेस वार्ता करते हुए कई विशेषज्ञों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
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- डॉ मोहित मेहरा ने झांसी में प्रेस वार्ता करते हुए कई विशेषज्ञों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।1
- झाँसी के करगुवाँ जी स्थित शिवाय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में सिटी मजिस्ट्रेट और ACMO द्वारा की गई जाँच में कई गंभीर अनियमितताएँ उजागर हुई हैं। जाँच दल को अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला, बल्कि इसे अनट्रेंड स्टाफ द्वारा चलाया जा रहा था। इसके अतिरिक्त, अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर भी बिना किसी डॉक्टर या फार्मासिस्ट के चल रहा था। इस मेडिकल स्टोर में एक्सपायरी डेट की दवाएं भी पाई गईं, जिससे अस्पताल के 24 घंटे सेवाएं देने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।1
- झाँसी में “द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया” के तत्वावधान में एक स्थानीय होटल में एमएसएमई महोत्सव 2026 कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य विषय “एक दिन एम.एस.एम.ई. के साथ, सी.ए. करेंगे प्रगति की बात” था। इस कार्यक्रम में झाँसी के गणमान्य व्यक्ति और सभी चार्टर्ड एकाउंटेंट उपस्थित रहे, जिनमें आईसीएआई, झाँसी के प्रेसिडेंट सीए जयंत मणि जैन भी शामिल थे।2
- मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित आतरी गांव में आज अपने आप आग लगने की घटना सामने आई है। इस अनजान रहस्य को फिलहाल कोई भी समझ नहीं पा रहा है।1
- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पात्रता प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है। वर्तमान में, योजना के अंतर्गत भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे मुख्य चिंता यह है कि कोई भी पात्र हितग्राही इस योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।1
- झाँसी के सीपरी बाजार क्षेत्र में स्थित दीनदयाल नगर में एक धार्मिक स्थल, माता मंदिर, मौजूद है।1
- झाँसी जिला अस्पताल में एक अमानवीय घटना सामने आई है, जहाँ आज दिनांक 27 जून 2026 को शाम पौने पाँच बजे दो बेटियाँ अपनी माँ के जीवन के लिए जद्दोजहद करते हुए उनका स्ट्रेचर धकेलने पर मजबूर थीं। इस दृश्य को देखकर एक टैक्सी चालक भी स्ट्रेचर में धक्का लगाने के लिए आगे आया और उनकी मदद की। इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सरकार से जनता की सेवा के नाम पर तनख्वाह लेने वाले अस्पताल के कर्मचारी भीषण गर्मी में ऐसी कमरे से बाहर नहीं निकले, जिससे उनके अंदर दया भावना का अभाव साफ तौर पर दिखा। वीडियो में सवाल उठाया गया है कि यदि सेवाएँ सटीक मिलती हैं तो इस तरह के वीडियो कहाँ से आते हैं, और यह भी कि आखिर शासन और जिला प्रशासन के निरीक्षण में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का यह कैसा हाल है।1