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सिंगरौली जिले के वैढ़न स्थित अंबेडकर चौक पर दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई।
Amrendra Shukla पत्रकार
सिंगरौली जिले के वैढ़न स्थित अंबेडकर चौक पर दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई।
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- सिंगरौली जिले के वैढ़न स्थित अंबेडकर चौक पर दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई।1
- सिंगरौली जिले के वैढ़न स्थित अंबेडकर चौक पर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि उनके बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई। बीच सड़क हुए इस हंगामे के कारण पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और यह विवाद काफी देर तक चलता रहा, जिससे मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल इस पूरे विवाद के कारणों की जांच की जा रही है।1
- सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र की सलखन ग्राम पंचायत में रविवार सुबह एक व्यक्ति का शव घर से लगभग आधा किलोमीटर दूर बबूल के पेड़ पर लटका हुआ मिला। मृतक की पहचान 45 वर्षीय धर्मेंद्र उर्फ पौड़ी धइकार के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, पुलिस द्वारा आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है।1
- जनपद सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र में स्थित बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र की खैरटिया ग्राम पंचायत (गोंडवाना बस्ती) से एक गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीण महिलाओं ने एक पत्थर खदान के संचालन पर नाराजगी जताते हुए जिला मुख्यालय पर प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। हाथों में पत्थर लेकर प्रदर्शन करने पहुंची इन महिलाओं ने क्षेत्र में सुरक्षा और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खैरटिया टोला की आबादी के बेहद नजदीक मेसर्स डी.एस. माइनिंग खदान का संचालन हो रहा है। उनकी शिकायत के अनुसार, तीव्र ब्लास्टिंग के कारण पत्थर के टुकड़े उड़कर सीधे उनकी झोपड़ियों, खपरैल के मकानों और अस्थाई छावनियों तक पहुंच रहे हैं। विस्फोटों से होने वाले कंपन से आदिवासियों द्वारा जैसे-तैसे बनाए गए इन कच्चे-पक्के मकानों और छावनियों की दीवारों में दरारें आ रही हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर ये परिवार अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर पैंतीस किलोमीटर दूर से भाड़ा लगाकर जिला मुख्यालय पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश उपखनिज नियमावली 2021 के प्रावधानों के तहत, खनन पट्टा स्वीकृत करते समय यह अनुबंध होता है कि खनन संक्रियाओं से स्थानीय जनजीवन या उनके आवासों को कोई क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। साथ ही, पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी के लिए पट्टा क्षेत्र में 360 डिग्री कैमरा सेटअप अनिवार्य है। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि नियमों की अनदेखी हो रही है और वहां ऐसा कोई कैमरा क्रियाशील नहीं है। इसके विपरीत, पट्टा संचालक का समाचार पत्रों में पक्ष है कि वे नियमों के तहत ही काम कर रहे हैं और पत्थर पट्टा क्षेत्र से बाहर नहीं जा रहे। इन विरोधाभासी दावों के बीच, धरातल पर किसी निष्पक्ष जांच कमेटी द्वारा स्थिति स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है। इस घटनाक्रम और दोनों पक्षों के दावों की सत्यता जानने के लिए जब मीडिया ने जनपद के मुख्य खनन अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया, तो फोन पर उनसे बात नहीं हो सकी। उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से सुरक्षा संबंधी आरोपों पर ब्लास्टिंग रोकने, 'सिस्मीग्राफ' यंत्र से कंपन की वैज्ञानिक माप कराने, 360 डिग्री कैमरों की उपलब्धता पर विभाग की तकनीकी रिपोर्ट और कथित अमर्यादित बयानों पर विभाग की प्रतिक्रिया जैसे बिंदुवार सवाल भेजे गए। माइनिंग ऑफिसर द्वारा संदेश देखे जाने के बावजूद, इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने तक इन तकनीकी और प्रशासनिक सवालों पर उनकी तरफ से कोई आधिकारिक जवाब या स्पष्टीकरण नहीं आया। राज्य सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' और पारदर्शिता की नीति के बीच, खनन विभाग का यह मौन पीड़ित परिवारों की सुरक्षा और स्वीकृत खनन पट्टों के नियमों की वास्तविकता से जुड़े सवालों पर उनकी प्रशासनिक जवाबदेही को कटघरे में खड़ा करता है।1
- सोनभद्र के म्योरपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत आरंगपानी स्थित बरवा टोला चौराहे पर ग्रामीणों ने सोलर स्ट्रीट लाइट लगवाने की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह चौराहा चार गांवों को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है, जहाँ शाम 7 बजे के बाद घना अंधेरा छा जाता है, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह चौराहा चांगा, कुदरी, लिलासी, चैरी, आरंगपानी, फाटपखना और किरबिल सहित दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ता है, और यहाँ एक बस स्टैंड भी है, जिससे क्षेत्र में लोगों का आवागमन लगातार बना रहता है। ग्रामीणों ने इस स्थान के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि कुदरी गांव में विभिन्न विशिष्ट व्यक्तियों का भी आना-जाना लगा रहता है। ग्रामीणों ने जानकारी दी कि इस संबंध में उन्होंने पहले भी खंड विकास अधिकारी से स्ट्रीट लाइट लगवाने की मांग की थी, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस प्रदर्शन में युवा समाजसेवी राजू कुमार गुप्ता, पूर्व ग्राम प्रधान सुदर्शन प्रसाद, भगवान दास गुप्ता, डॉ. गणेश प्रसाद सोनी, रामजी सोनी, छबीश खरवार, उत्कर्ष गुप्ता, सीताराम आयाम सहित कई दर्जन ग्रामीण शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने तत्काल बरवा टोला चौराहे पर सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित करने की मांग की है, ताकि राहगीरों और स्थानीय लोगों को सुविधा मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग जल्द पूरी नहीं की गई, तो वे आगे भी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।2
- सोनभद्र जिले के बभनी क्षेत्र के एक युवक ने तहसीलदार दूधी पर भ्रामक सूचना प्रेषित करने और आरटीआई के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। युवक ने एक वीडियो के माध्यम से अपना बयान जारी किया, जिसमें उसने बताया कि उसने 4 दिसंबर 2025 को तहसीलदार दूधी के समक्ष एक आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था। युवक के अनुसार, उसके आवेदन पर समय पर सूचना नहीं दी गई और उसकी अनदेखी की गई। इस संबंध में उसने विभाग में शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन आरटीआई अधिनियम के स्पष्ट उल्लंघन के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।1
- सोनभद्र के ओबरा में ग्रामीणों ने डी.एस. माइनिंग पट्टे के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आबादी क्षेत्र के नजदीक हो रही ब्लास्टिंग के कारण उनके जान-माल को गंभीर खतरा है। इसी संबंध में, ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर खनन गतिविधियों को तत्काल बंद कराने और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों के इस विरोध ने यह महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजस्व बढ़ाने की होड़ में सुरक्षा मानकों और नियमों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे आम जनता की सुरक्षा सीधे तौर पर दांव पर लग रही है।1
- सिंहावल के भोरो गाँव में स्थित तालाब की हालत बेहद खराब है, जहाँ भारी गंदगी फैली हुई है। यह तालाब, जिसके पास एक मंदिर है और जहाँ मेले का भी आयोजन होता है, पूरी तरह से उपेक्षित है। तालाब की सफाई या सुधार के लिए कोई भी काम नहीं किया जा रहा है, और शिकायत है कि कोई भी संबंधित कर्मचारी या अधिकारी तालाब की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने तक नहीं आता।1