सेवढ़ा के सिंध नदी के भीकमपुरा घाट पर बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन का खेल सामने आया है, जहाँ रेत माफिया पनडुब्बी जैसी मशीनों और मोटर चालित उपकरणों का उपयोग करके नदी की गहराई से लगातार रेत निकाल रहे हैं। आरोप है कि इस अवैध गतिविधि के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, जिससे आसपास के ग्रामीणों और जलजीवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि अवैध खनन के चलते नदी के तल में 60 से 80 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। बरसात और सामान्य दिनों में इन गड्ढों का पता लगाना मुश्किल होता है, जिससे नदी किनारे जाने वाले ग्रामीण, पशुपालक और किसान हादसों का शिकार हो जाते हैं; पूर्व में कुछ किसानों की जान भी जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी से अत्यधिक रेत निकालने से जल प्रवाह और भूजल स्तर प्रभावित होता है, साथ ही नदी की पारिस्थितिकी को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। पनडुब्बियों और सक्शन मशीनों के उपयोग से मछलियों, कछुओं और अन्य जलजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं, जिससे उनकी जान जा रही है और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया दिन-रात इस काम में लगे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से भीकमपुरा घाट पर हो रहे इस अवैध रेत उत्खनन की निष्पक्ष जांच कराने, पनडुब्बियों और अन्य मशीनों के उपयोग पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो सिंध नदी का अस्तित्व और क्षेत्र का पर्यावरण खतरे में पड़ जाएगा।
सेवढ़ा के सिंध नदी के भीकमपुरा घाट पर बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन का खेल सामने आया है, जहाँ रेत माफिया पनडुब्बी जैसी मशीनों और मोटर चालित उपकरणों का उपयोग करके नदी की गहराई से लगातार रेत निकाल रहे हैं। आरोप है कि इस अवैध गतिविधि के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, जिससे आसपास के ग्रामीणों और जलजीवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि अवैध खनन के चलते नदी के तल में 60 से 80 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। बरसात और सामान्य दिनों में इन गड्ढों का पता लगाना मुश्किल होता है, जिससे नदी किनारे जाने वाले ग्रामीण, पशुपालक और किसान हादसों का शिकार हो जाते हैं; पूर्व में कुछ किसानों की जान भी जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी से अत्यधिक रेत निकालने से जल प्रवाह और भूजल स्तर प्रभावित होता है, साथ ही नदी की पारिस्थितिकी को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। पनडुब्बियों और सक्शन मशीनों के उपयोग से मछलियों, कछुओं और अन्य जलजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं, जिससे उनकी जान जा रही है और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया दिन-रात इस काम में लगे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से भीकमपुरा घाट पर हो रहे इस अवैध रेत उत्खनन की निष्पक्ष जांच कराने, पनडुब्बियों और अन्य मशीनों के उपयोग पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो सिंध नदी का अस्तित्व और क्षेत्र का पर्यावरण खतरे में पड़ जाएगा।
- सेवढ़ा के सिंध नदी के भीकमपुरा घाट पर बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन का खेल सामने आया है, जहाँ रेत माफिया पनडुब्बी जैसी मशीनों और मोटर चालित उपकरणों का उपयोग करके नदी की गहराई से लगातार रेत निकाल रहे हैं। आरोप है कि इस अवैध गतिविधि के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, जिससे आसपास के ग्रामीणों और जलजीवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि अवैध खनन के चलते नदी के तल में 60 से 80 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। बरसात और सामान्य दिनों में इन गड्ढों का पता लगाना मुश्किल होता है, जिससे नदी किनारे जाने वाले ग्रामीण, पशुपालक और किसान हादसों का शिकार हो जाते हैं; पूर्व में कुछ किसानों की जान भी जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी से अत्यधिक रेत निकालने से जल प्रवाह और भूजल स्तर प्रभावित होता है, साथ ही नदी की पारिस्थितिकी को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। पनडुब्बियों और सक्शन मशीनों के उपयोग से मछलियों, कछुओं और अन्य जलजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं, जिससे उनकी जान जा रही है और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया दिन-रात इस काम में लगे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से भीकमपुरा घाट पर हो रहे इस अवैध रेत उत्खनन की निष्पक्ष जांच कराने, पनडुब्बियों और अन्य मशीनों के उपयोग पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो सिंध नदी का अस्तित्व और क्षेत्र का पर्यावरण खतरे में पड़ जाएगा।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कोंच में एक आत्मनिर्भर बालिका शिविर का शुभारंभ किया गया है। इस शिविर के माध्यम से छात्राओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।1
- भिंड के कलेक्ट्रेट कार्यालय सभागार में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर ने जनसामान्य की शिकायतों को सुना और संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित, समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए निर्देश दिए। इस दौरान जिला पंचायत भिंड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अपर कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर ने भी आवेदकों की समस्याओं पर सुनवाई की। कार्यक्रम में कुल 84 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर संबंधितों को कार्यवाही के निर्देश जारी किए गए। जनसुनवाई के दौरान ग्राम भारौली का पुरा निवासी रामबहादुर पुत्र हरदयाल ने ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर कलेक्टर ने तत्काल कार्यवाही करते हुए सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए, जिसके फलस्वरूप आवेदक श्री रामबहादुर को ट्राइसाइकिल तुरंत उपलब्ध कराई गई। कलेक्टर ने जनसुनवाई कार्यक्रम में गंभीर बीमारी से संबंधित इलाज, विद्युत बिलों में सुधार, हैंडपंपों के संधारण, पेंशन, सड़क दुर्घटना सहायता, हितग्राही मूलक योजनाओं, बीपीएल राशन कार्ड और जमीन पर कब्जा से संबंधित आवेदनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आवेदकों को की गई कार्यवाही से अवगत कराया जाए।1
- भिंड में कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे कलेक्ट्रेट कक्ष में जनसुनवाई आयोजित की। इस दौरान उन्होंने आम जनता की शिकायतें सुनीं और उनके त्वरित, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, अपर कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर ने भी आवेदकों की समस्याओं पर सुनवाई की। कुल 84 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश भेजे गए। एक विशेष मामले में, ग्राम भारौली का पुरा निवासी रामबहादुर पुत्र श्री हरदयाल ने ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर कलेक्टर ने तत्काल सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर श्री रामबहादुर को ट्राइसाइकिल उपलब्ध करवाई। कलेक्टर ने गंभीर बीमारी के इलाज, विद्युत बिलों में सुधार, हैण्डपंपों के संधारण, पेंशन, सड़क दुर्घटना सहायता, हितग्राही मूलक योजनाओं, बीपीएल राशन कार्ड और जमीन पर कब्जे से संबंधित आवेदनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, आवेदकों को की गई कार्रवाई से अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए।1
- तहसील न्यायालय आपके द्वार अभियान के तहत दिनांक 23 जून को भाण्डेर तहसील के ग्राम बिन्डवा में एक राजस्व शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में तहसीलदार श्री सुनील भदौरिया के मार्गदर्शन में राजस्व संबंधी विभिन्न प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया गया, जिससे ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान हो सका। शिविर के दौरान बीपीएल संबंधी 02 आवेदन प्राप्त हुए और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का 01 प्रकरण संतोषजनक ढंग से सुलझाकर बंद किया गया। इसके अतिरिक्त, 04 फौती नामांतरण प्रकरणों का निराकरण हुआ, 05 रजिस्ट्रियों पर नामांतरण की कार्यवाही की गई, 01 बंटवारा प्रकरण का समाधान किया गया, 05 नवीन किसान आईडी का पंजीकरण हुआ और 100 से अधिक एफ.आर. नंबर जोड़ने का काम भी पूरा किया गया। शिविर संपन्न होने के बाद, तहसीलदार श्री सुनील भदौरिया ने ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव के श्मशान घाट का निरीक्षण किया और आवश्यक व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। इस शिविर में राजस्व निरीक्षक, तहसील रीडर, पटवारीगण और अन्य राजस्व कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर ग्रामीणों की समस्याओं को हल करने में मदद की। इस सफल आयोजन से ग्रामीणों को राजस्व संबंधी सेवाएं उनके गांव में ही मिल गईं, जिससे उन्हें अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली।1
- जनपद जालौन की ग्राम पंचायत लहचूरा कोरीपुरा में कुलदीप पाल पुत्र श्री मलखान पाल द्वारा अपने खेत में लगाई गई आग अनियंत्रित होकर फैल गई। इस घटना से पड़ोसी किसान नरेंद्र पाल सिंह पुत्र राजा भैया के खेत तक आग पहुंच गई, जिससे उनके लगभग 40 पाइप जलकर नष्ट हो गए। इस आगजनी के कारण नरेंद्र पाल सिंह को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय निवासियों ने तत्काल 112 पुलिस सेवा और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जिससे उसे और अधिक फैलने से रोका जा सका। पीड़ित किसान नरेंद्र पाल सिंह पुत्र राजा भैया ने हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस मामले की जांच पूरी होने के बाद, संबंधित नियमों के अनुसार नुकसान का आकलन कर उचित कार्रवाई किए जाने की संभावना है।1
- मध्य प्रदेश के दतिया जिले के सेवढ़ा विकासखंड क्षेत्र स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय नया कसेरूआ में भीषण गर्मी के बीच अव्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विद्यालय में 50 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन पीने के स्वच्छ पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके चलते बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए विद्यालय परिसर से बाहर जाकर पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, विद्यालय में न तो नियमित पेयजल की सुविधा है और न ही बच्चों के लिए पर्याप्त जल भंडारण की व्यवस्था की गई है। लगातार बढ़ते तापमान के इस मौसम में छोटे बच्चों का बाहर जाकर पानी लाना उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। पेयजल के अलावा, विद्यालय में शौचालय की व्यवस्था भी बदहाल बताई जा रही है, जिससे छात्रों को उसके उपयोग में परेशानी होती है। पानी की कमी के कारण शौचालयों का उपयोग भी प्रभावित हो रहा है, जिससे स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। अभिभावकों ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं पर जोर दे रही है, फिर भी यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर नकारात्मक असर डाल रहा है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से जल्द समस्या के समाधान की मांग की है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन को याद दिलाया है कि पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो बच्चों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। विद्यालय प्रभारी मंजू शर्मा ने बताया कि वे लंबे समय से इस समस्या से परेशान हैं और संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र भी लिख चुकी हैं, लेकिन अभी तक पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। वहीं, पीएचई विभाग के एसडीओ रितेश राव ने आश्वासन दिया है कि 15 दिन के भीतर स्कूल में पानी की व्यवस्था करवा दी जाएगी। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारी इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और विद्यालय के बच्चों को कब तक राहत मिल पाती है।1
- इंदरगढ़ क्षेत्र में ग्वालियर रोड पर स्थित राजीव नगर मोड़ के आगे सड़क पर फैली गिट्टी और रेत लोगों की जान के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। यह स्थिति पिछले लगभग एक सप्ताह से बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभाग ने इसे हटाने या इस ओर ध्यान देने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। गोराघाट और उचाड़ की दिशा से आने वाले दोपहिया वाहन चालकों को रोजाना इस गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सड़क के मोड़ पर बिखरी इस गिट्टी और रेत के कारण बाइक सवारों का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कई लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। दुर्घटनाग्रस्त लोगों का स्पष्ट कहना है कि यही कारण है कि उनके वाहन असंतुलित हो रहे हैं और लगातार हादसे हो रहे हैं। इस समस्या से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल सड़क से गिट्टी और रेत को हटाने की मांग की है, ताकि किसी बड़े और गंभीर हादसे को होने से रोका जा सके। फिलहाल, यह सवाल जस का तस बना हुआ है कि प्रशासन इस जानलेवा समस्या पर कब ध्यान देगा और लोगों को इस खतरे से कब मुक्ति मिलेगी।1