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झारखंड में आदिवासी संगठनों ने परिसीमन के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण ऐलान किया है। उन्होंने इस घोषणा के माध्यम से आरक्षित सीटों में की जाने वाली किसी भी कटौती का स्पष्ट रूप से विरोध दर्ज कराया है।
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झारखंड में आदिवासी संगठनों ने परिसीमन के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण ऐलान किया है। उन्होंने इस घोषणा के माध्यम से आरक्षित सीटों में की जाने वाली किसी भी कटौती का स्पष्ट रूप से विरोध दर्ज कराया है।
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- झारखंड में 'नगर यात्रा 4.0' नामक एक अनोखी पहल शुरू की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य 100 गांवों के 3000 बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना है। यह कार्यक्रम गिरिडीह और जमशेदपुर जैसे झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इस पहल के संदर्भ में बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और मुख्यमंत्री, बिहार का भी उल्लेख किया गया है।1
- जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त श्री हेमन्त सती ने आज, 3 जुलाई को, जिले में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान, उपायुक्त ने संबंधित बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से गणना प्रपत्रों के वितरण की स्थिति की जानकारी प्राप्त की और बीएलओ द्वारा भरे जा रहे गणना प्रपत्रों की प्रविष्टियों का गहनता से निरीक्षण किया। उन्होंने बीएलओ को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह कार्य निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व है। इसलिए, गणना प्रपत्रों के वितरण और उन्हें भरवाने का कार्य पूरी गंभीरता, शुद्धता एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए, ताकि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम का सफल एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित हो सके। श्री सती ने राजकीय मध्य विद्यालय, कूद और राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सिरसी (कटकमदाग) स्थित मतदान केंद्रों का भी निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक पात्र मतदाता तक पहुंच सुनिश्चित की जाए, सभी प्रपत्रों का समय पर संकलन एवं सत्यापन किया जाए, और किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे। इस निरीक्षण के दौरान उप निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती वेदवंती कुमारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी भी उपस्थित थे।1
- हजारीबाग के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त हेमंत सती ने शुक्रवार को जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत विभिन्न मतदान केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से गणना प्रपत्रों के वितरण और उनमें की गई प्रविष्टियों से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की और उनके कार्यों की गहन समीक्षा की। उपायुक्त ने राजकीय मध्य विद्यालय, कूद और राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सिरसी (कटकमदाग) स्थित मतदान केंद्रों का भी निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि गणना प्रपत्रों के वितरण, उन्हें भरवाने, संकलन और सत्यापन से जुड़े सभी कार्य पूरी गंभीरता, शुद्धता और निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही पूर्ण किए जाने चाहिए। इस निरीक्षण अभियान के दौरान उप निर्वाचन पदाधिकारी वेदवंती कुमारी सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।1
- रामगढ़ जिले के मांडू गाँव में केवा आयुर्वेद और ग्लोबल ह्यूमन राइट्स वेलफेयर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में एक केवा आयुर्वेदिक केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अधिवक्ता शहादत अंसारी रहे। इस अवसर पर हेल्थ ट्रेनर अविनाश भारती के साथ शिव सिंह, इलियास अंसारी, नौशाद अंसारी, सोनू, एमडी मोबीन, लक्ष्मी देवी, मीना देवी, उषा देवी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान मांडू क्षेत्र के 200 से अधिक ग्रामीणों ने एक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान में भाग लिया। विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के महत्व, स्वस्थ जीवनशैली के लाभों और प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में जानकारी प्रदान की। उपस्थित लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और इस पहल की सराहना की। केवा आयुर्वेदिक केंद्र के संचालक रवि राम ने सभी अतिथियों और ग्रामीणों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य आयुर्वेद को जन-जन तक पहुँचाना और लोगों को स्वस्थ जीवन के प्रति जागरूक करना है। संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनका लक्ष्य पूरे भारत में, हर पंचायत, गाँव, प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर केवा आयुर्वेद के आयुर्वेदिक क्लिनिक और सप्लाई सेंटर स्थापित करना है। इस विस्तार के माध्यम से 'स्वस्थ भारत मिशन' को गति देने के साथ-साथ अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल है। कार्यक्रम के अंत में, अतिथियों ने संस्था के इस प्रयास की सराहना की और ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रम सुना और आयुर्वेद को अपनाने का संकल्प लिया।1
- हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले चावल की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग उठाई गई है। स्थानीय लोगों ने इस संबंध में उपायुक्त से हस्तक्षेप करने और मामले की उचित जांच सुनिश्चित करने की अपील की है।1
- हजारीबाग नगर निगम का बुलडोजर मंगलवार को एक बार फिर गरीबों की रोजी-रोटी पर चला, जब सहायक नगर आयुक्त अनिल पांडेय के नेतृत्व में जिला परिषद चौक और उसके आसपास के इलाकों से अतिक्रमण हटाया गया। इस अचानक हुई कार्रवाई में सब्जी, फल, चाय-नाश्ता, मोची और सैलून चलाने वाले दर्जनों फुटपाथ दुकानदारों को हटा दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। इस कार्रवाई के बाद फुटपाथ दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि गांधी मैदान के बाहर नगर निगम कर्मियों की मिलीभगत से 'जुहू चौपाटी' जैसी स्थिति बना दी गई है, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों ठेले लगते हैं और लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में कभी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं होती क्योंकि निगम के कुछ कर्मचारी प्रतिदिन ठेला संचालकों से वसूली करते हैं, और इसी वजह से उस इलाके को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है। दुकानदारों का कहना है कि वे अतिक्रमण हटाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर जिला परिषद चौक से अतिक्रमण हटाया जा सकता है, तो गांधी मैदान के बाहर वर्षों से सड़क घेरकर बैठे लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। दुकानदारों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या नगर निगम का बुलडोजर सिर्फ कमजोर और गरीबों के लिए ही है, जबकि कथित संरक्षण वाले अतिक्रमण पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ती।1
- हजारीबाग शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने गुरुवार को सीसीआर कंट्रोल रूम से डिस्ट्रिक्ट मोड़ चौक तक एक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। सहायक नगर आयुक्त अनिल पांडे के नेतृत्व में चले इस अभियान के तहत, फुटपाथ पर लगी सब्जी, फल और नाई सहित अन्य छोटे कारोबारियों की कई अस्थायी दुकानों को जेसीबी की मदद से हटा दिया गया। इस कार्रवाई के कारण कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित दुकानदारों ने नगर निगम पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम बार-बार केवल गरीबों की दुकानों पर ही कार्रवाई करता है। उनका कहना है कि शहर में कई ऐसे स्थायी प्रतिष्ठान हैं जिन्होंने वर्षों से सड़कों तक अतिक्रमण किया हुआ है, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। दुकानदारों ने यह भी बताया कि पिछले छह महीनों में यह तीसरी या चौथी बार है जब उनकी दुकानें हटाई गई हैं, जिससे उनका रोजगार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहीं, सहायक नगर आयुक्त अनिल पांडे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह अभियान सिर्फ यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चलाया जा रहा है और इसमें किसी व्यक्ति या वर्ग के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में जहाँ भी अतिक्रमण होगा, वहाँ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। हालाँकि, अब लोगों की नज़र इस बात पर टिकी है कि क्या नगर निगम बड़े अतिक्रमणकारियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई करेगा।4
- झारखंड में आदिवासी संगठनों ने परिसीमन के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण ऐलान किया है। उन्होंने इस घोषणा के माध्यम से आरक्षित सीटों में की जाने वाली किसी भी कटौती का स्पष्ट रूप से विरोध दर्ज कराया है।1