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ललितपुर के मड़ावरा क्षेत्र में शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह हुई झमाझम बारिश से लोगों को उमस से काफी राहत मिली है और मौसम सुहावना हो गया है। यह बारिश खेतों में खड़ी खरीफ सीजन की फसलों के लिए अमृत की तरह साबित हुई है। इस बारिश से स्थानीय किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई है। किसानों ने अपनी प्रसन्नता साझा करते हुए बताया कि बीते 15 दिनों से बारिश नहीं होने और तेज गर्मी की वजह से उर्द और सोयाबीन की फसलें मुरझाने लगी थीं। इसके साथ ही पानी के अभाव में खेतों में तेजी से बढ़ रही खरपतवार पर खरपतवारनाशक का छिड़काव भी नहीं हो पा रहा था, जिसमें अब इस बारिश से बड़ी राहत मिलेगी।
IMRAN KHAN
ललितपुर के मड़ावरा क्षेत्र में शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह हुई झमाझम बारिश से लोगों को उमस से काफी राहत मिली है और मौसम सुहावना हो गया है। यह बारिश खेतों में खड़ी खरीफ सीजन की फसलों के लिए अमृत की तरह साबित हुई है। इस बारिश से स्थानीय किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई है। किसानों ने अपनी प्रसन्नता साझा करते हुए बताया कि बीते 15 दिनों से बारिश नहीं होने और तेज गर्मी की वजह से उर्द और सोयाबीन की फसलें मुरझाने लगी थीं। इसके साथ ही पानी के अभाव में खेतों में तेजी से बढ़ रही खरपतवार पर खरपतवारनाशक का छिड़काव भी नहीं हो पा रहा था, जिसमें अब इस बारिश से बड़ी राहत मिलेगी।
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- ललितपुर जनपद के मड़ावरा कस्बे में स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक द्वारा आईटीआई के एक छात्र के खाते से निकासी पर रोक लगा दी गई है। इसके चलते पीड़ित छात्र अपनी छात्रवृत्ति का पैसा नहीं निकाल पा रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई बाधित हो रही है। तहसील क्षेत्र के ग्राम लिधौरा निवासी छात्र ब्रजेश (पुत्र परमसिंह) ने इस संबंध में मड़ावरा के उपजिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। ब्रजेश का कस्बा स्थित बैंक शाखा में बचत खाता संचालित है, जिसमें शासन द्वारा उसकी छात्रवृत्ति भेजी गई थी, लेकिन बैंक प्रबंधन ने उसकी निकासी रोक दी। जब पीड़ित छात्र ने इस मामले में बैंक अधिकारियों से बात की, तो उसे बताया गया कि उसके पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से कर्ज लिया हुआ है, इसलिए उसकी छात्रवृत्ति का पैसा उस कर्ज की अदायगी में समायोजित किया जाएगा। पीड़ित छात्र का कहना है कि बैंक खाते से पैसा नहीं निकलने के कारण वह अपनी ट्यूशन फीस और जरूरी किताबें नहीं खरीद पा रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।3
- मध्य प्रदेश के सागर जिले की शाहगढ़ तहसील के ग्राम दलपतपुर में सागर-कानपुर हाईवे रोड पर बने ब्रिज (पुल) के नीचे पानी भर जाता है। इसके कारण यहाँ से गुजरने वाले राहगीरों को निकलने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पुल के नीचे पानी जमा होने से दो पहिया वाहनों को निकलने में और भी ज्यादा दिक्कत हो रही है।1
- टीकमगढ़ वन मण्डल के सब रेंज दिगौडा के अंतर्गत आने वाले बिजरावन, कौंडिया और बरेठी बीट में वन विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में वन विभाग की टीम ने यह सफलता हासिल की। इस वन भूमि पर कुछ अतिक्रमणकारियों द्वारा रात के अंधेरे में चोरी-छिपे जुताई करके अवैध रूप से फसल बो दी गई थी। मामले की जानकारी मिलने पर कार्रवाई करते हुए वन विभाग की टीम ने जेसीबी मशीन की सहायता से बारी बागड़ को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इसके बाद विभाग द्वारा उक्त खेत में कटीली प्रजाति के बीजों की बुवाई कर दी गई है। विभाग ने वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले सुखराम, लक्ष्मन, प्रभु, कनई, खरगा, गनेश, गोकुल और सुरेश के विरुद्ध कार्रवाई की है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली वन विभाग की टीम में डिप्टी रेंजर मनोहर सिंह घोष और शहीद खान सहित अन्य वनकर्मी मुख्य रूप से शामिल रहे।1
- ललितपुर के मड़ावरा क्षेत्र में शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह हुई झमाझम बारिश से लोगों को उमस से काफी राहत मिली है और मौसम सुहावना हो गया है। यह बारिश खेतों में खड़ी खरीफ सीजन की फसलों के लिए अमृत की तरह साबित हुई है। इस बारिश से स्थानीय किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई है। किसानों ने अपनी प्रसन्नता साझा करते हुए बताया कि बीते 15 दिनों से बारिश नहीं होने और तेज गर्मी की वजह से उर्द और सोयाबीन की फसलें मुरझाने लगी थीं। इसके साथ ही पानी के अभाव में खेतों में तेजी से बढ़ रही खरपतवार पर खरपतवारनाशक का छिड़काव भी नहीं हो पा रहा था, जिसमें अब इस बारिश से बड़ी राहत मिलेगी।2
- छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बमनोरा में ₹25 लाख की लागत से बन रहे सामुदायिक भवन के निर्माण में भारी लापरवाही और अनियमितताएं सामने आई हैं। निर्माण स्थल पर मजदूरों की जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा है। यहां काम करने वाले मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और सुरक्षा जूतों के ही ऊंचाई पर काम करने को मजबूर हैं। निर्माण कार्य के लिए बांस-बल्ली के कामचलाऊ और बेहद असुरक्षित मचान का उपयोग किया जा रहा है, जो कभी भी गिर सकता है। इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भवन निर्माण में बेहद घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और चिनाई भी टेढ़ी-मेढ़ी हो रही है। आरोप है कि टेंडर में स्वीकृत रेट की जगह बेहद घटिया स्तर के मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और टिकाऊपन खतरे में पड़ गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे निर्माण के दौरान जिम्मेदार तकनीकी अमला और ठेकेदार मौके से नदारद हैं, जिससे पूरा काम बिना किसी जांच और निगरानी के पूरी तरह 'भगवान भरोसे' चल रहा है। इस बदहाली को लेकर ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से पुरजोर मांग की है कि तत्काल इस साइट का निरीक्षण कर निर्माण कार्य को रुकवाया जाए। इसके साथ ही, निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल, माप पुस्तिका और अब तक हुए भुगतान का कड़ाई से परीक्षण कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने मजदूरों को अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है।4