*धरमजयगढ़ में प्रस्तावित खनन परियोजना पर गंभीर आपत्तियां ! दस्तावेजों में भारी खामियां उजागर* ! रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान परियोजना से जुड़े अभिलेखों में कई महत्वपूर्ण कमियां पाई गई हैं, जिसके चलते संबंधित कंपनी के पी सी एल से विस्तृत जानकारी एवं संशोधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में सबसे बड़ी आपत्ति प्रतिपूरक वृक्षारोपण को लेकर सामने आई है। नई व्यवस्था के अनुसार वन भूमि के उपयोग के बदले वृक्षारोपण हेतु गैर वन भूमि का स्पष्ट विवरण देना अनिवार्य है, लेकिन यह जानकारी अधूरी पाई गई है। इसके अलावा परियोजना की पूरी समयावधि का विवरण, वृक्षारोपण संबंधी लिखित आश्वासन तथा सर्वेक्षण कार्य से संबंधित अद्यतन प्रतिवेदन भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। बोरिंग कार्य की समापन रिपोर्ट के साथ संबंधित वन अधिकारी की टिप्पणी भी मांगी गई है, जो अभी तक उपलब्ध नहीं है। राजस्व वन भूमि के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र को भी अस्पष्ट बताया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। वहीं भूमि मापन की रिपोर्ट को लेकर भी आपत्ति जताई गई है और स्पष्ट किया गया है कि सर्वेक्षण अधिकृत संस्था से ही कराया जाना चाहिए। प्रस्तावित वन भूमि के नक्शे में भी गंभीर खामियां पाई गई हैं। सुरक्षा क्षेत्र को अलग रंग में दर्शाने तथा अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ नक्शा पुनः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। खनन योजना के अनुसार घटकवार विवरण, मानचित्र संबंधी अभिलेखों में खसरा क्रमांक, क्षेत्रफल तथा वन एवं गैर वन भूमि की स्पष्ट सीमांकन जानकारी भी अधूरी पाई गई है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी इन त्रुटियों को सुधारने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक सुधार नहीं किया गया, जिसे गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। परियोजना से जुड़े विधिक पहलुओं पर भी स्पष्टता नहीं है। यह जानकारी मांगी गई है कि क्या इस भूमि अथवा परियोजना को लेकर कोई न्यायालयीन प्रकरण लंबित है या नहीं, साथ ही संबंधित वन अधिकारी की राय भी अनिवार्य बताई गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परियोजना के कुल क्षेत्रफल 540 हेक्टेयर के विवरण में भी त्रुटि पाई गई है, जिसे पहले सुधारने के लिए कहा गया था, लेकिन अब तक सही नहीं किया गया। कुल मिलाकर, परियोजना को अभी अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है और यह मामला कई गंभीर कमियों के कारण अटका हुआ है। अब यह देखना होगा कि संबंधित कंपनी इन आपत्तियों का निराकरण कब तक करती है और क्या इस परियोजना को आगे बढ़ने की अनुमति मिल पाती है।
*धरमजयगढ़ में प्रस्तावित खनन परियोजना पर गंभीर आपत्तियां ! दस्तावेजों में भारी खामियां उजागर* ! रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान परियोजना से जुड़े अभिलेखों में कई महत्वपूर्ण कमियां पाई गई हैं, जिसके चलते संबंधित कंपनी के पी सी एल से विस्तृत जानकारी एवं संशोधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में सबसे बड़ी आपत्ति प्रतिपूरक वृक्षारोपण को लेकर सामने आई है। नई व्यवस्था के अनुसार वन भूमि के उपयोग के बदले वृक्षारोपण हेतु गैर वन भूमि का स्पष्ट विवरण देना अनिवार्य है, लेकिन यह जानकारी अधूरी पाई गई है। इसके अलावा परियोजना की पूरी समयावधि का विवरण, वृक्षारोपण संबंधी लिखित आश्वासन तथा सर्वेक्षण कार्य से संबंधित अद्यतन प्रतिवेदन भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। बोरिंग कार्य की समापन रिपोर्ट के साथ संबंधित वन अधिकारी की टिप्पणी भी मांगी गई है, जो अभी तक उपलब्ध नहीं है। राजस्व वन भूमि के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र को भी अस्पष्ट बताया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। वहीं भूमि मापन की रिपोर्ट को लेकर भी आपत्ति जताई गई है और स्पष्ट किया गया है कि सर्वेक्षण अधिकृत संस्था से ही कराया जाना चाहिए। प्रस्तावित वन भूमि के नक्शे में भी गंभीर खामियां पाई गई हैं। सुरक्षा क्षेत्र को अलग रंग में दर्शाने तथा अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ नक्शा पुनः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। खनन योजना के अनुसार घटकवार विवरण, मानचित्र संबंधी अभिलेखों में खसरा क्रमांक, क्षेत्रफल तथा वन एवं गैर वन भूमि की स्पष्ट सीमांकन जानकारी भी अधूरी पाई गई है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी इन त्रुटियों को सुधारने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक सुधार नहीं किया गया, जिसे गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। परियोजना से जुड़े विधिक पहलुओं पर भी स्पष्टता नहीं है। यह जानकारी मांगी गई है कि क्या इस भूमि अथवा परियोजना को लेकर कोई न्यायालयीन प्रकरण लंबित है या नहीं, साथ ही संबंधित वन अधिकारी की राय भी अनिवार्य बताई गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परियोजना के कुल क्षेत्रफल 540 हेक्टेयर के विवरण में भी त्रुटि पाई गई है, जिसे पहले सुधारने के लिए कहा गया था, लेकिन अब तक सही नहीं किया गया। कुल मिलाकर, परियोजना को अभी अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है और यह मामला कई गंभीर कमियों के कारण अटका हुआ है। अब यह देखना होगा कि संबंधित कंपनी इन आपत्तियों का निराकरण कब तक करती है और क्या इस परियोजना को आगे बढ़ने की अनुमति मिल पाती है।
- Post by Pooja Jaiswal Journalist1
- जिला सक्ती में जनगणना 2027 फील्ड ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न।1
- साइबर ठगी का बड़ा खुलासा बैंक खातों की खरीद फरोख्त करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार...... डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा के दिशा निर्देशन मे थाना गांधीनगर पुलिस टीम द्वारा मामले मे आरोपियों के विरुद्ध की गई सख्त वैधानिक कार्यवाही। आरोपीगण मामले मे शामिल अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फ्रॉड के रकम लेन देन हेतु बैंक खाता की खरीद विक्री कर घटना कर रहे थे कारित। आरोपियों द्वारा प्रार्थी के एकाउंट मे अपराध/साइबर ठगी से सम्बंधित रकम कुल 48500/- रुपये का ट्रांजेक्शन करवाकर रकम निकलावकर कारित की गई थी घटना। मामले मे शामिल अन्य आरोपियों का पता तलाश किया जा रहा है, फरार आरोपियों कों शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जायगा। मामले का संछिप्त विवरण इस प्रकार है कि प्रार्थी शौर्य प्रताप साकिन गांधीनगर हनुमान मंदिर के पास थाना गांधीनगर द्वारा दिनांक 29/03/26 को थाना गांधीनगर आकर रिपोर्ट दर्ज कराया कि प्रार्थी का ऋत्विक सिंह निवासी सब्जी मार्केट के पीछे गांधीनगर से बहुत पहले से परिचय है जो दुध डेयरी और चाय दुकान का संचालन करता था। इस दौरान दिसम्बर 2024 मे ऋत्विक सिंह प्रार्थी के घर आकर उसका खाता काम नहीं करने की बात बोलकर झांसे मे लेकर 48500/- रुपये डेयरी का रकम बोलकर मंगा लिया एवं एटीएम लेकर उक्त रकम निकाल लिया, उसके कुछ दिन बाद प्रार्थी का खाता होल्ड हो गया था। खाता के सम्बन्ध मे अग्रिम जानकारी लेने पर अपराध/साइबर ठगी से सम्बंधित रकम लेंन देन करने पर खाता होल्ड होने की जानकारी प्रार्थी को प्राप्त हुई है, इसी दौरान प्रार्थी को जानकारी मिला कि रित्विक सिंह अपने दोस्त अमन गुप्ता निवासी देवीगंज रोड अम्बिकापुर के साथ मिलकर इसी प्रकार से कई लोगों के खाता में रूपये मंगाये है। मामले मे प्रार्थी कि रिपोर्ट पर थाना गांधीनगर मे अपराध क्रमांक 168/26 धारा 318(4),3(5) बी. एन. एस. का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया गया। मामले को संज्ञान मे लेकर डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा श्री राजेश कुमार अग्रवाल (भा.पु.से.) द्वारा थाना गांधीनगर पुलिस टीम को मामले मे सख़्ती से कार्यवाही कर प्रकरण मे शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किये जाने के दिशा निर्देश दिए गए थे, इसी क्रम मे थाना गांधीनगर पुलिस टीम द्वारा दौरान विवेचना प्रार्थी व गवाहों का कथन दर्ज किया गया, खाता में ट्रांसफर रकम के संबंध में ऑनलाईन पोर्टल पर चेक किये जाने पर शिकायत दर्ज होना पाया गया, विवेचना दौरान आरोपी ऋत्विक सिंह और अमन गुप्ता को हिरासत में लेकर पुछताछ किया गया जो आरोपियों द्वारा अपना नाम (01) ऋत्विक सिंह आत्मज नरेन्द्र कुमार सिंह उम्र 25 वर्ष निवासी गांधीनगर हाई स्कूल के पिछे थाना गांधीनगर (02)अमन कुमार गुप्ता आत्मज स्व० चंद्रशेखर गुप्ता उम्र 24 वर्ष निवासी देवीगंज रोड, थाना कोतवाली अंबिकापुर का होना बताये, आरोपियों से पूछताछ किये जाने पर बताये कि आरोपीगण मामले मे शामिल अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फ्रॉड के रकम लेन देन हेतु बैंक खाता की खरीद विक्री किया करते थे। आरोपी रित्विक सिंह के द्वारा अपना तीन खाता एवं प्रार्थी का खाता और अमन गुप्ता के द्वारा अपना एक करेंट अकाउंट मय सीम के मामले मे शामिल अन्य आरोपी को दिया गया है। जिन खातों में ऑनलाईन फ्रॉड के माध्यम से रकम ट्रांसफर होना पाया गया। इसके अलावा पियुष तिवारी के खाता में भी रूपये ट्रांसफर कराकर नगदी आहरण कर नगदी प्राप्त कर सीडीएम मशीन के माध्यम से ट्रांसफर करना बताया गया, मामले मे शामिल आरोपी पियुष तिवारी को तलब कर पुछताछ किया गया जो आरोपी द्वारा अपना नाम (03) पियुष तिवारी आत्मज कृपा शंकर तिवारी उम्र 25 वर्ष निवासी सत्तीपारा थाना अम्बिकापुर* का होना बताया, आरोपी से घटना के सम्बन्ध मे पूछताछ किये जाने पर अपराध घटित करना स्वीकार किया गया, पियुश कुमार तिवारी के खाता में कई ऑनलाईन शिकायतो का रकम ट्रांसफर होना पाया गया। आरोपीगण एक साथ मिलकर फ्रॉड से संबंधित रकम को प्राप्त करने हेतु अपने और अन्य लोगों के बैंक खाता का उपयोग किये है। जो प्रकरण में धारा 317(4) बी.एन.एस. जोड़ा गया, आरोपियों के मोबाईल से खाता एवं रकम लेन देन का डाटा संधारित कर मय मोबाईल के जप्त किया गया। आरोपियों के विरूद्ध अपराध सबूत पाये जाने से प्रकरण मे आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जाता है। सम्पूर्ण कार्यवाही मे थाना गांधीनगर से उप निरीक्षक दिलीप दुबे, साइबर सेल प्रभारी सहायक उप निरीक्षक अजीत मिश्रा, प्रधान आरक्षक जयदीप सिंह, प्रधान आरक्षक विकास सिन्हा, आरक्षक वीरेंद्र पैकरा, लालदेव, अशोक यादव, घनश्याम देवांगन, राहुल केरकेट्टा, अमन पुरी, विकास मिश्रा, रमेश राजवाड़े सक्रिय रहे।1
- 🛑 ब्रेकिंग न्यूज़ | अंबिकापुर 🛑 ग्राम पंचायत लबजी के आंगनबाड़ी केंद्र की जर्जर हालत, किराए के कच्चे मकान में चल रहा संचालन अंबिकापुर जनपद के ग्राम पंचायत लबजी में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र बदहाली के आंसू रो रहा है। केंद्र की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि बच्चों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र को मजबूरी में पास ही एक किराए के कच्चे मकान में संचालित किया जा रहा है। नया भवन निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है, जिसके कारण न तो बच्चों को सही सुविधाएं मिल पा रही हैं और न ही कार्यकर्ता एवं सहायिका को उचित कार्यस्थल। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरपंच, सचिव और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार शिकायत के बावजूद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नए भवन का निर्माण कार्य पूरा कराया जाए और आंगनबाड़ी केंद्र को सुरक्षित एवं व्यवस्थित स्थान पर संचालित किया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके। 📢 रिपोर्टर: हिमांशु राज md news Vice Bureau, Ambikapur (छत्तीसगढ़) 📞 78058380764
- जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कलेक्टर महोदय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में दिनांक 30.03.2026 को प्रेसवार्ता रखी गई जिसमें खाद्य अधिकारी व जनसम्पर्क अधिकारी उपस्थित थे। खाद्य अधिकारी के द्वारा बताया गया कि जिले में कुल 10 गैस एजेंसी संचालित है इन गैस एजेंसियों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा इनके माध्यम से उपभोक्ताओं को LPG गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है किसी भी नागरिक या उपभोक्ता को घबराने या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। इसी प्रकार जिले में कुल 32 पेट्रोल पम्प स्थापित है जिसमें पर्याप्त मात्रा में डीजल/पेट्रोल भंडारित है इन पेट्रोल पम्प में पेट्रोल की मात्रा 3,33,385 लीटर एवं डीजल की मात्रा 4,06,714 लीटर उपलब्ध है। जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति एवं भंडारण पर नियंत्रण हेतु डिप्टी कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति व तहसीलदार की अध्यक्षता में विकासखण्ड स्तरीय दल द्वारा मॉनिटरिंग किया जा रहा है व आवश्यक वस्तुओं का दुरूपयोग व कालाबाजारी करने पर लगातार कार्यवाही किया जा रहा है। कार्यालय कलेक्टर के खाद्य-शाखा के कक्ष क्रमांक 22 को कंट्रोल रूम के रूप में स्थापित किया गया है तथा राज्य सरकार के द्वारा शिकायत एवं सुझाव के लिए कॉल सेंटर नंबर 1800 233 3663 जारी किया गया है। जिले के सभी विकासखण्ड में तहसीलदार, सहायक खाद्य अधिकारी का जांच दल गठन किया गया है, जिनके द्वारा गैस की जमाखोरी व दुरूपयोग पर नियंत्रण रखने के लिए लगातार कार्यवाही किया जा रहा है। अब तक 05 प्रकरण दर्ज कर कुल 16 नग एल.पी.जी. सिलेंडर जप्त किया गया है तथा लगातार कार्यवाही किया जा रहा है।1
- Post by हमर जशपुर1
- *✰डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल✰* *भाग -2* अवश्य देखिए हमारी स्पेशल वीडियो सिर्फ *Factfull Debates* Youtube Channel पर1
- मूलभूत सुविधाओं का अभाव — सरपंच-सचिव नदारद, ग्रामीणों में भारी आक्रोश1