“जेल से अस्पताल तक… दर्द में तड़पता रहा कैदी, फिर खून से लाल हो गया हॉस्पिटल का फर्स !”आपकी जंग कल्याण की आधारवाड़ी जेल से आई एक घटना ने हर किसी को अंदर तक हिला कर रख दिया। पेट में तेज दर्द से तड़प रहे आरोपी अज्बिल अंसारी को पुलिस सुरक्षा के बीच उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल लाया गया। चेहरे पर दर्द, आंखों में बेचैनी और शरीर में कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी। डॉक्टरों ने जांच की, दवा दी और कुछ देर बाद उसे वापस जेल भेजने का फैसला सुना दिया। लेकिन शायद उस दर्द को कोई समझ नहीं पाया जो उसके शरीर से ज्यादा उसके मन में चल रहा था। आरोपी बार-बार अस्पताल में भर्ती रहने की गुहार लगाता रहा, मगर उसकी एक न सुनी गई। फिर अचानक अस्पताल के अंदर ऐसा मंजर बना जिसे देखकर हर कोई दहल उठा। दर्द, गुस्से और बेबसी में आरोपी ने केबिन नंबर 13 का शीशा अपने सिर से तोड़ दिया। कांच टूटने की तेज आवाज के साथ पूरा वार्ड कांप उठा। सिर से बहता खून, चीखती आवाजें और अस्पताल में मची अफरा-तफरी ने वहां मौजूद लोगों की रूह तक कंपा दी। कुछ लोग उसे “आरोपी” कह रहे थे… लेकिन उस पल वह सिर्फ एक दर्द से टूटा हुआ इंसान नजर आ रहा था। पुलिसकर्मी भी कुछ देर के लिए सकते में पड़ गए। अस्पताल का माहौल इतना भयावह हो गया कि मरीजों और उनके परिजनों की आंखों में डर साफ दिखाई देने लगा। यह घटना सिर्फ एक हंगामा नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल है — क्या दर्द में तड़प रहे इंसान की पुकार अब किसी को सुनाई नहीं देती? क्या जेल में बंद लोगों का दर्द दर्द नहीं होता? उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल का यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और हर कोई बस यही कह रहा है — “जब दर्द हद से गुजर जाता है, तब इंसान टूटता नहीं… बिखर जाता है।”
“जेल से अस्पताल तक… दर्द में तड़पता रहा कैदी, फिर खून से लाल हो गया हॉस्पिटल का फर्स !”आपकी जंग कल्याण की आधारवाड़ी जेल से आई एक घटना ने हर किसी को अंदर तक हिला कर रख दिया। पेट में तेज दर्द से तड़प रहे आरोपी अज्बिल अंसारी को पुलिस सुरक्षा के बीच उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल लाया गया। चेहरे पर दर्द, आंखों में बेचैनी और शरीर में कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी। डॉक्टरों ने जांच की, दवा दी और कुछ देर बाद उसे वापस जेल भेजने का फैसला सुना दिया। लेकिन शायद उस दर्द को कोई समझ नहीं पाया जो उसके शरीर से ज्यादा
उसके मन में चल रहा था। आरोपी बार-बार अस्पताल में भर्ती रहने की गुहार लगाता रहा, मगर उसकी एक न सुनी गई। फिर अचानक अस्पताल के अंदर ऐसा मंजर बना जिसे देखकर हर कोई दहल उठा। दर्द, गुस्से और बेबसी में आरोपी ने केबिन नंबर 13 का शीशा अपने सिर से तोड़ दिया। कांच टूटने की तेज आवाज के साथ पूरा वार्ड कांप उठा। सिर से बहता खून, चीखती आवाजें और अस्पताल में मची अफरा-तफरी ने वहां मौजूद लोगों की रूह तक कंपा दी। कुछ लोग उसे “आरोपी” कह रहे थे… लेकिन उस पल वह सिर्फ एक दर्द से टूटा हुआ इंसान नजर आ रहा था।
पुलिसकर्मी भी कुछ देर के लिए सकते में पड़ गए। अस्पताल का माहौल इतना भयावह हो गया कि मरीजों और उनके परिजनों की आंखों में डर साफ दिखाई देने लगा। यह घटना सिर्फ एक हंगामा नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल है — क्या दर्द में तड़प रहे इंसान की पुकार अब किसी को सुनाई नहीं देती? क्या जेल में बंद लोगों का दर्द दर्द नहीं होता? उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल का यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और हर कोई बस यही कह रहा है — “जब दर्द हद से गुजर जाता है, तब इंसान टूटता नहीं… बिखर जाता है।”
- “जेल से अस्पताल तक… दर्द में तड़पता रहा कैदी, फिर खून से लाल हो गया हॉस्पिटल का फर्स !”आपकी जंग कल्याण की आधारवाड़ी जेल से आई एक घटना ने हर किसी को अंदर तक हिला कर रख दिया। पेट में तेज दर्द से तड़प रहे आरोपी अज्बिल अंसारी को पुलिस सुरक्षा के बीच उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल लाया गया। चेहरे पर दर्द, आंखों में बेचैनी और शरीर में कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी। डॉक्टरों ने जांच की, दवा दी और कुछ देर बाद उसे वापस जेल भेजने का फैसला सुना दिया। लेकिन शायद उस दर्द को कोई समझ नहीं पाया जो उसके शरीर से ज्यादा उसके मन में चल रहा था। आरोपी बार-बार अस्पताल में भर्ती रहने की गुहार लगाता रहा, मगर उसकी एक न सुनी गई। फिर अचानक अस्पताल के अंदर ऐसा मंजर बना जिसे देखकर हर कोई दहल उठा। दर्द, गुस्से और बेबसी में आरोपी ने केबिन नंबर 13 का शीशा अपने सिर से तोड़ दिया। कांच टूटने की तेज आवाज के साथ पूरा वार्ड कांप उठा। सिर से बहता खून, चीखती आवाजें और अस्पताल में मची अफरा-तफरी ने वहां मौजूद लोगों की रूह तक कंपा दी। कुछ लोग उसे “आरोपी” कह रहे थे… लेकिन उस पल वह सिर्फ एक दर्द से टूटा हुआ इंसान नजर आ रहा था। पुलिसकर्मी भी कुछ देर के लिए सकते में पड़ गए। अस्पताल का माहौल इतना भयावह हो गया कि मरीजों और उनके परिजनों की आंखों में डर साफ दिखाई देने लगा। यह घटना सिर्फ एक हंगामा नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल है — क्या दर्द में तड़प रहे इंसान की पुकार अब किसी को सुनाई नहीं देती? क्या जेल में बंद लोगों का दर्द दर्द नहीं होता? उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल का यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और हर कोई बस यही कह रहा है — “जब दर्द हद से गुजर जाता है, तब इंसान टूटता नहीं… बिखर जाता है।”3
- দার্জিলিংয়ে গত ৯ মাস ধরে নিখোঁজ নাবালক ইশান গুরুং-এর জন্য ন্যায় চেয়ে সাংবাদিক সম্মেলন করেছে মাটোকো মায়া। সংস্থাটি ইশানের দ্রুত খোঁজ ও দোষীদের শাস্তির দাবি জানিয়েছে।1
- পশ্চিমবঙ্গে সিন্ডিকেট রাজের বিরুদ্ধে কড়া পদক্ষেপ নিল বিজেপি। শিলিগুড়ির দার্জিলিং মোড়ে ট্যাক্সি স্ট্যান্ডের সিন্ডিকেট ভাঙতে মাঠে নামেন কর্মীরা, যেখানে অতিরিক্ত ভাড়া আদায়ের অভিযোগ ছিল। সাধারণ মানুষ এই উদ্যোগকে স্বাগত জানিয়েছেন; বিজেপি জানিয়েছে, রাজ্যজুড়ে এই অভিযান অব্যাহত থাকবে।1
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- শিলিগুড়িতে মর্মান্তিক হিট অ্যান্ড রান দুর্ঘটনায় পুত্র শংকর ছেত্রীর মৃত্যুর পর তাঁর মা দार्जিলিংয়ের সাংসদ রাজু বিষ্টার কাছে বিচার চেয়েছেন। আঁখিজলে তিনি দ্রুত দোষীদের গ্রেপ্তার ও কঠোর শাস্তির দাবি জানান। সাংসদ বিষ্টা ঘটনাটির ন্যায্য তদন্ত ও দোষীদের বিরুদ্ধে পদক্ষেপের আশ্বাস দিয়েছেন।1