“क्या प्रशासन ने निर्दोषों की जमीन पर चला दिया बुलडोजर? या सच में था अतिक्रमण? रामपुरिया गांव में सच्चाई क्या है—देखिए इस रिपोर्ट में!” बूंदी जिले के तालेड़ा उपखंड के रामपुरिया गांव में इन दिनों ज़मीन और प्रशासन को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। मामला इतना गरमा गया है कि अब यह सिर्फ गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। “अतिक्रमण हटाओ” अभियान बना विवाद की जड़ कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) की टीम रामपुरिया गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने हद पार कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ सरकारी जमीन ही नहीं, बल्कि उनकी खाते की निजी भूमि को भी अतिक्रमण बताकर तोड़फोड़ कर दी गई। “दिखाए कागज़, फिर भी नहीं सुनी” ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने मौके पर ही खाते की नकल और नक्शे दिखाए, लेकिन अधिकारियों ने एक भी नहीं सुनी। आरोप है कि KDA टीम ने “मनमानी और दबंगई” करते हुए पक्के कमरे और पत्थरों से बनी बाउंड्री वॉल तक तोड़ दी। पुलिस की एंट्री और बढ़ा तनाव मामला तब और बिगड़ गया जब विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस का दबाव बनाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, उनके तीन युवकों को पुलिस पकड़कर ले गई, जिन्हें बाद में जमानत पर छुड़ाना पड़ा। इस कार्रवाई ने गांव में आक्रोश और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का अल्टीमेटम अब रामपुरिया के लोग खुलकर चेतावनी दे रहे हैं, अगर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला कलेक्टर कार्यालय पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। साथ ही राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग तक शिकायत भेजने की तैयारी भी चल रही है। गांव में गूंज रहा एक ही सवाल क्या प्रशासन ने जल्दबाज़ी में निर्दोषों पर कार्रवाई कर दी? या फिर सच में अतिक्रमण के नाम पर बड़ी गलती हुई है? फिलहाल, रामपुरिया गांव में खाते की भूमि को अतिक्रमण बताकर हटाने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और सभी की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। वही कोटा विकास पुराधिकरण आयुक्त बचनेश अग्रवाल ने बताया केवल KDA की भूमि से अतिक्रमण हटाया गया हैं, ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर रखा था उसी कोर हटाया गया है ग्रामीणों के आरोप निराधार है
“क्या प्रशासन ने निर्दोषों की जमीन पर चला दिया बुलडोजर? या सच में था अतिक्रमण? रामपुरिया गांव में सच्चाई क्या है—देखिए इस रिपोर्ट में!” बूंदी जिले के तालेड़ा उपखंड के रामपुरिया गांव में इन दिनों ज़मीन और प्रशासन को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। मामला इतना गरमा गया है कि अब यह सिर्फ गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। “अतिक्रमण हटाओ” अभियान बना विवाद की जड़ कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) की टीम रामपुरिया गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने हद पार कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ सरकारी जमीन ही नहीं, बल्कि उनकी खाते की निजी भूमि को भी अतिक्रमण बताकर तोड़फोड़ कर दी गई। “दिखाए कागज़, फिर भी नहीं सुनी” ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने मौके पर ही खाते की नकल और नक्शे दिखाए, लेकिन अधिकारियों ने एक भी नहीं सुनी। आरोप है कि KDA टीम ने “मनमानी और दबंगई” करते हुए पक्के कमरे और पत्थरों से बनी बाउंड्री वॉल तक तोड़ दी। पुलिस की एंट्री
और बढ़ा तनाव मामला तब और बिगड़ गया जब विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस का दबाव बनाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, उनके तीन युवकों को पुलिस पकड़कर ले गई, जिन्हें बाद में जमानत पर छुड़ाना पड़ा। इस कार्रवाई ने गांव में आक्रोश और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का अल्टीमेटम अब रामपुरिया के लोग खुलकर चेतावनी दे रहे हैं, अगर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला कलेक्टर कार्यालय पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। साथ ही राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग तक शिकायत भेजने की तैयारी भी चल रही है। गांव में गूंज रहा एक ही सवाल क्या प्रशासन ने जल्दबाज़ी में निर्दोषों पर कार्रवाई कर दी? या फिर सच में अतिक्रमण के नाम पर बड़ी गलती हुई है? फिलहाल, रामपुरिया गांव में खाते की भूमि को अतिक्रमण बताकर हटाने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और सभी की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। वही कोटा विकास पुराधिकरण आयुक्त बचनेश अग्रवाल ने बताया केवल KDA की भूमि से अतिक्रमण हटाया गया हैं, ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर रखा था उसी कोर हटाया गया है ग्रामीणों के आरोप निराधार है
- दिनांक 1 मई 2026 को गुर्जर गोड ब्राह्मण समाज का पहला आदर्श निशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन सिलोर रोड स्थित एक निजी रिसोर्ट में आयोजित हुआ। जिसमें 35 जोड़े पाणिग्रहण संस्कार के माध्यम से परिणय सूत्र में बंधें । पहले 36 जोड़े थे लेकिन कुछ कारणों के कारण एक जोड़ा कैंसिल हो गया। सम्मेलन में वर वधु एवं परिजनों के लिए बेहतरीन इंतजाम किए गए। छाया, पानी और पार्किंग से लेकर आपातकालीन सेवाओं तक के विशेष प्रबंध किए। आपात स्थिति से निपटने के लिए चिकित्सा और पुलिस कर्मियों की टीम अलर्ट मोड पर रखी गई। संयोजक राजेंद्र पंचोली ने बताया कि महर्षि गौतम की पूजा अर्चना और झंडा रोहण से कार्यक्रम से शुरुआत करी। इसके बाद गणेश स्थापना, हल्दी, मेहंदी की रस्म मंगल कलश और रात्रि में महिला संगीत व भजन संध्या का आयोजन हुआ। सांवरिया सेठ के प्रसिद्ध भजन गायक प्रेम शंकर जाट की प्रस्तुतियों पर समाज के महिला - पुरुष झूमते रहे। विवाह सम्मेलन अध्यक्ष सत्यप्रकाश शर्मा बांसी और संतों ने अपने विचार व्यक्त किये । कई लोगों को कहते हुए सुना सम्मेलन में की ऐसी शादी तो घर पर भी नहीं होती है जैसा इस सम्मेलन में हुई है व्यवस्थाएं बहुत अच्छी है। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक हरि मोहन शर्मा, सत्येश शर्मा, संजय शर्मा, विष्णु कलावड़िया शुभम शर्मा मोजुद रहे1
- *फर्जी अधिकारी की 'साहबगिरी' निकली धरी की धरी! ग्रामीणों ने चटाया जूता, देखें LIVE वीडियो*1
- बूंदी जिले के तालेड़ा उपखंड के रामपुरिया गांव में इन दिनों ज़मीन और प्रशासन को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। मामला इतना गरमा गया है कि अब यह सिर्फ गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। “अतिक्रमण हटाओ” अभियान बना विवाद की जड़ कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) की टीम रामपुरिया गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने हद पार कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ सरकारी जमीन ही नहीं, बल्कि उनकी खाते की निजी भूमि को भी अतिक्रमण बताकर तोड़फोड़ कर दी गई। “दिखाए कागज़, फिर भी नहीं सुनी” ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने मौके पर ही खाते की नकल और नक्शे दिखाए, लेकिन अधिकारियों ने एक भी नहीं सुनी। आरोप है कि KDA टीम ने “मनमानी और दबंगई” करते हुए पक्के कमरे और पत्थरों से बनी बाउंड्री वॉल तक तोड़ दी। पुलिस की एंट्री और बढ़ा तनाव मामला तब और बिगड़ गया जब विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस का दबाव बनाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, उनके तीन युवकों को पुलिस पकड़कर ले गई, जिन्हें बाद में जमानत पर छुड़ाना पड़ा। इस कार्रवाई ने गांव में आक्रोश और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का अल्टीमेटम अब रामपुरिया के लोग खुलकर चेतावनी दे रहे हैं, अगर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला कलेक्टर कार्यालय पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। साथ ही राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग तक शिकायत भेजने की तैयारी भी चल रही है। गांव में गूंज रहा एक ही सवाल क्या प्रशासन ने जल्दबाज़ी में निर्दोषों पर कार्रवाई कर दी? या फिर सच में अतिक्रमण के नाम पर बड़ी गलती हुई है? फिलहाल, रामपुरिया गांव में खाते की भूमि को अतिक्रमण बताकर हटाने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और सभी की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। वही कोटा विकास पुराधिकरण आयुक्त बचनेश अग्रवाल ने बताया केवल KDA की भूमि से अतिक्रमण हटाया गया हैं, ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर रखा था उसी कोर हटाया गया है ग्रामीणों के आरोप निराधार है2
- कोटा: राजस्थान के कोचिंग हब कोटा से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा से ठीक एक दिन पहले एक कोचिंग छात्र ने हॉस्टल की छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। इस दुखद घटना का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें छात्र 3 मई को इमारत से गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। पुलिस ने मौके से एक सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें छात्र का पढ़ाई के दबाव को लेकर दर्द झलका है। सुसाइड नोट में भावुक संदेश छात्र ने अपने आखिरी शब्दों में परिवार और दोस्तों के नाम एक भावुक संदेश छोड़ा है। सुसाइड नोट के अनुसार: परिवार से माफी: छात्र ने लिखा, "मैं परिवार की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया। ऐसी पढ़ाई नहीं कर पाया, जिससे नीट में सिलेक्ट हो सकूं। मम्मी-पापा सॉरी है।" दोस्तों का आभार: उसने अपने मित्रों को याद करते हुए लिखा, "दोस्तों, सहयोग करने के लिए धन्यवाद।" कोटा स्टोरीलाइन: बढ़ता दबाव और चिंता का विषय कोटा में छात्रों द्वारा उठाए जा रहे इस तरह के आत्मघाती कदम प्रशासन और अभिभावकों के लिए एक बड़ी चिंता बन गए हैं। परीक्षा के ऐन वक्त पहले हुई इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगिता के बोझ और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। मदद के लिए संपर्क करें: अगर आप या आपका कोई परिचित किसी भी तरह के मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया हेल्पलाइन नंबरों या विशेषज्ञों से बात करें। जीवन अनमोल है। रिपोर्ट: कोटा स्टोर1
- Post by Sher1
- कोटा। प्राचीन हनुमान मंदिर जो सड़क के किनारे और एयरपोर्ट के सामने स्थित है उसे प्रशासन हटाने पर आमादा है जिससे आमजन में क्रोध व्याप्त है।1
- अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर 1 मई को रैली निकालते हुए सीटू कार्यालय पर झंडा फहराने के लिए जाते जेके फैक्ट्री के मजदूर...1
- खाकी के संग खेल की जंग! दबलाना में पुलिस और जनता के बीच दिखा विश्वास का मैच। अलोद येलो टीम ने मारी बाजी। 🏆1