अजमेर के रामसर गांव में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। यहां के निवासी अमन मिन्हाज द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जलापूर्ति रिकॉर्ड ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर उजागर कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, जब भी राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) पर पेयजल समस्या की शिकायत दर्ज की जाती है, तो विभागीय अधिकारी अक्सर यह जवाब देकर शिकायत का निस्तारण कर देते हैं कि गांव में 96 से 120 घंटे के अंतराल पर नियमित जलापूर्ति की जा रही है। हालांकि, RTI से प्राप्त दस्तावेजों से पता चला है कि गांव के कई जलापूर्ति स्रोतों पर पूरे महीने में मात्र 3 से 4 बार ही पानी की सप्लाई दर्ज की गई है, जिससे विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हालात इतने बदतर हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय शिकायतों को केवल कागजी जवाब देकर बंद किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। गौरतलब है कि रामसर में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीण पूर्व में भी सड़क जाम कर आंदोलन कर चुके हैं, जिसके बाद प्रशासन और विभाग ने स्थिति सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित एवं पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई और विभागीय दावों तथा वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो गांववासी पुनः लोकतांत्रिक तरीके से एक बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर पूर्व की भांति सड़क जाम सहित अन्य कानूनी एवं जनआंदोलनात्मक कदम उठाने की भी बात कही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने, राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दिए गए जवाबों एवं वास्तविक जलापूर्ति रिकॉर्ड का मिलान करने तथा रामसर के प्रत्येक नागरिक को नियमित एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
अजमेर के रामसर गांव में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। यहां के निवासी अमन मिन्हाज द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जलापूर्ति रिकॉर्ड ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर उजागर कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, जब भी राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) पर पेयजल समस्या की शिकायत दर्ज की जाती है, तो विभागीय अधिकारी अक्सर यह जवाब देकर शिकायत का निस्तारण कर देते हैं कि गांव में 96 से 120 घंटे के अंतराल पर नियमित जलापूर्ति की जा रही है। हालांकि, RTI से प्राप्त दस्तावेजों से पता चला है कि गांव के कई जलापूर्ति स्रोतों पर पूरे महीने में मात्र 3 से 4 बार ही पानी की सप्लाई दर्ज की गई है, जिससे विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हालात इतने बदतर हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय शिकायतों को केवल कागजी जवाब देकर बंद किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। गौरतलब है कि रामसर में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीण पूर्व में भी सड़क जाम कर आंदोलन कर चुके हैं, जिसके बाद प्रशासन और विभाग ने स्थिति सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित एवं पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई और विभागीय दावों तथा वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो गांववासी पुनः लोकतांत्रिक तरीके से एक बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर पूर्व की भांति सड़क जाम सहित अन्य कानूनी एवं जनआंदोलनात्मक कदम उठाने की भी बात कही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने, राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दिए गए जवाबों एवं वास्तविक जलापूर्ति रिकॉर्ड का मिलान करने तथा रामसर के प्रत्येक नागरिक को नियमित एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
- नसीराबाद में शिव प्रकाश गुर्जर ने अपने जन्मदिन के अवसर पर शक्ति प्रदर्शन करते हुए विभिन्न सेवा कार्य आयोजित किए। इस दौरान एक रक्तदान शिविर में भारी संख्या में लोगों (जनसैलाब) का जमावड़ा देखा गया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गौसेवा और वृक्षारोपण जैसे कार्य भी किए, जिसके माध्यम से समाज में सामाजिक सरोकारों का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।1
- अजमेर के रामसर गांव में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। यहां के निवासी अमन मिन्हाज द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जलापूर्ति रिकॉर्ड ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा अंतर उजागर कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, जब भी राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) पर पेयजल समस्या की शिकायत दर्ज की जाती है, तो विभागीय अधिकारी अक्सर यह जवाब देकर शिकायत का निस्तारण कर देते हैं कि गांव में 96 से 120 घंटे के अंतराल पर नियमित जलापूर्ति की जा रही है। हालांकि, RTI से प्राप्त दस्तावेजों से पता चला है कि गांव के कई जलापूर्ति स्रोतों पर पूरे महीने में मात्र 3 से 4 बार ही पानी की सप्लाई दर्ज की गई है, जिससे विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हालात इतने बदतर हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय शिकायतों को केवल कागजी जवाब देकर बंद किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। गौरतलब है कि रामसर में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीण पूर्व में भी सड़क जाम कर आंदोलन कर चुके हैं, जिसके बाद प्रशासन और विभाग ने स्थिति सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित एवं पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई और विभागीय दावों तथा वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो गांववासी पुनः लोकतांत्रिक तरीके से एक बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर पूर्व की भांति सड़क जाम सहित अन्य कानूनी एवं जनआंदोलनात्मक कदम उठाने की भी बात कही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने, राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दिए गए जवाबों एवं वास्तविक जलापूर्ति रिकॉर्ड का मिलान करने तथा रामसर के प्रत्येक नागरिक को नियमित एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।1
- अजमेर, राजस्थान में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पानी की गंभीर समस्या को लेकर आज जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मटका फोड़कर भाजपा सरकार के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया और पेयजल संकट के तत्काल समाधान की मांग की। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहर में प्रदर्शन करते हुए आमजन को हो रही पानी की किल्लत का मुद्दा उठाया, जिसके बाद जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार, नियमित पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और इस स्थिति के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि भीषण गर्मी के बावजूद आम जनता पानी की कमी से जूझ रही है, लेकिन प्रशासन और सरकार इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं। इसी उदासीनता के विरोध में कांग्रेस ने यह मटका फोड़ प्रदर्शन किया, जिसका उद्देश्य सरकार का ध्यान इस गंभीर जल संकट की ओर आकर्षित करना था।1
- एक हैरान कर देने वाली घटना में, एक अजगर ट्रक में लदे हुए पाइपों के बीच से बाहर निकला। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हो गए, जिन्होंने इस दृश्य को एक 'चमत्कार' बताया।1
- ब्यावर में हिंदू समाज ने 'लव जिहाद' के विरोध में एक विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान, हिंदू समाज के सदस्यों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा।1
- कांग्रेस के सदस्यों ने पानी की समस्या को लेकर एक रैली का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने मटके फोड़कर अपना विरोध दर्ज कराया।1
- नसीराबाद जीनगर समाज ने डिम्पल खत्री हत्याकांड में शामिल दोषी को फाँसी की सज़ा देने की ज़ोरदार माँग उठाई है।1
- अजमेर की चौपाटी लिंक रोड पर आज सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यह दुर्घटना तब हुई जब एक तेज रफ्तार वाहन ने कार को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन के कई हिस्से टूटकर सड़क पर बिखर गए। राहत की बात यह रही कि कार में सवार लोगों ने सीट बेल्ट पहन रखी थी, जिसकी वजह से बड़े हादसे के बावजूद उनकी जान बच गई। घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए क्रेन की मदद ली गई। चौपाटी लिंक रोड पर लगातार हो रहे इन सड़क हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा मानकों और तेज रफ्तार वाहनों के चलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1