रामनगर मैहर - बैंक एक विश्वास का आधार है। जहां हर कोई अपनी भविष्य निधि सुरक्षित बैंक पर रखता है। बैंक प्रबंधन द्वारा केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह से फ्राड पर खाताधारक अब किस पर भरोसा करेगा। समस्या निदान के लिए बैंक मैनेजर द्वारा अपशब्द का प्रयोग किया जाना कहा तक जायज है। भारत सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड केसीसी लोन किसानों को कम व्याजदर पर उपलब्ध कराया जाता है। जहां निर्धारित समय सीमा से पूर्व खाताधारक द्वारा पैसे जमा करने पर व्याजदर पर छूट का भी प्रावधान है। अन्नदाता किसानो को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना पर ऋण दिया जाता है। लेकिन जब इसी केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी फ्राडपन की शिकायत सामने आए और अपनी समस्या लेकर बैंक पहुंचने वाले खाताधारक को अपमानित और अभद्रता का सामना करना पड़े, तो बैंकिंग व्यवस्था सवालो के घेरे पर होती है। रामनगर विकासखंड के मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई शाखा से जुड़ा है मामला। खाताधारक ने अपने केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी होने का आरोप कथित और लिखित दोनों रूपो पर किया है। खाताधारक के मुताबिक, खाते से संबंधित समस्या *मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई मे केसीसी लोन खाताधारक से फ्राड, बैंक प्रबंधन पर सबाल, मैनेजर द्वारा अभद्रता भाषा का प्रयोग।* रामनगर मैहर - बैंक एक विश्वास का आधार है। जहां हर कोई अपनी भविष्य निधि सुरक्षित बैंक पर रखता है। बैंक प्रबंधन द्वारा केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह से फ्राड पर खाताधारक अब किस पर भरोसा करेगा। समस्या निदान के लिए बैंक मैनेजर द्वारा अपशब्द का प्रयोग किया जाना कहा तक जायज है। भारत सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड केसीसी लोन किसानों को कम व्याजदर पर उपलब्ध कराया जाता है। जहां निर्धारित समय सीमा से पूर्व खाताधारक द्वारा पैसे जमा करने पर व्याजदर पर छूट का भी प्रावधान है। अन्नदाता किसानो को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना पर ऋण दिया जाता है। लेकिन जब इसी केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी फ्राडपन की शिकायत सामने आए और अपनी समस्या लेकर बैंक पहुंचने वाले खाताधारक को अपमानित और अभद्रता का सामना करना पड़े, तो बैंकिंग व्यवस्था सवालो के घेरे पर होती है। रामनगर विकासखंड के मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई शाखा से जुड़ा है मामला। खाताधारक ने अपने केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी होने का आरोप कथित और लिखित दोनों रूपो पर किया है। खाताधारक के मुताबिक, खाते से संबंधित समस्या को लेकर जब बैंक मैनेजर के समक्ष अपनी बात रखी गई, तो समाधान करने के बजह अपशब्दों का प्रयोग किया गया। केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह और उनके पिता अरूण सिंह द्वारा निर्धारित समय अवधि दौरान केसीसी का पैसा जमा कर दिया जाता था। एक लाख रूपए का केसीसी ऋण खाता को क्लोज के लिए जब प्रनत पाल सिंह के पिता अरुण सिंह जमा करने गये तो उन्हें एक लाख ॠण लोन पर दो लाख सत्रह हजार रुपए की राशि जमा करना बताया, सुनते ही उनके चेस्ट पर दर्द उठा जैसे तुरंत ही हार्टअटैक हृदयगति रूक जाएगी। उस स्थिति को बयान करना मतलब पैर के नीचे से जमीन खिसकने वाली स्थिति निर्मित थी। खाताधारक अपने धन वित्तीय लेन-देन जानकारी पाने का हकदार है। ख़ासतौर पर किसान केसीसी खाते में ऋण की राशि, ब्याज, भुगतान और बकाया राशि की जानकारियां उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। खाते मे विसंगति है तो बैंक प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि जांच कर तथ्यों मे स्थिति स्पष्ट करें। ना की अपशब्दों का प्रयोग करते हुए खाता बंद करने की धमकी, एफआईआर करने, बैंक से बाहर भागने शब्दों का प्रयोग बैंकिंग सेवा ग्राहक सम्मान के लिहाज में बेहद गंभीर विषय है। जहां विभागीय अमले को गहराई पर विचार-विमर्श कर कार्यवाही प्रस्तावित करना चाहिए।👇
रामनगर मैहर - बैंक एक विश्वास का आधार है। जहां हर कोई अपनी भविष्य निधि सुरक्षित बैंक पर रखता है। बैंक प्रबंधन द्वारा केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह से फ्राड पर खाताधारक अब किस पर भरोसा करेगा। समस्या निदान के लिए बैंक मैनेजर द्वारा अपशब्द का प्रयोग किया जाना कहा तक जायज है। भारत सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड केसीसी लोन किसानों को कम व्याजदर पर उपलब्ध कराया जाता है। जहां निर्धारित समय सीमा से पूर्व खाताधारक द्वारा पैसे जमा करने पर व्याजदर पर छूट का भी प्रावधान है। अन्नदाता किसानो को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना पर ऋण दिया जाता है। लेकिन जब इसी केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी फ्राडपन की शिकायत सामने आए और अपनी समस्या लेकर बैंक पहुंचने वाले खाताधारक को अपमानित और अभद्रता का सामना करना पड़े, तो बैंकिंग व्यवस्था सवालो के घेरे पर होती है। रामनगर विकासखंड के मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई शाखा से जुड़ा है मामला। खाताधारक ने अपने केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी होने का आरोप कथित और लिखित दोनों रूपो पर किया है। खाताधारक के मुताबिक, खाते से संबंधित समस्या *मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई मे केसीसी लोन खाताधारक से फ्राड, बैंक प्रबंधन पर सबाल, मैनेजर द्वारा अभद्रता भाषा का प्रयोग।* रामनगर मैहर - बैंक एक विश्वास का आधार है। जहां हर कोई अपनी भविष्य निधि सुरक्षित बैंक पर रखता है। बैंक प्रबंधन द्वारा केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह से फ्राड पर खाताधारक अब किस पर भरोसा करेगा। समस्या निदान के लिए बैंक मैनेजर द्वारा अपशब्द का प्रयोग किया जाना कहा तक जायज है। भारत सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड केसीसी लोन किसानों को कम व्याजदर पर उपलब्ध कराया जाता है। जहां निर्धारित समय सीमा से पूर्व खाताधारक द्वारा पैसे जमा करने पर व्याजदर पर छूट का भी प्रावधान है। अन्नदाता किसानो को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना पर ऋण दिया जाता है। लेकिन जब इसी केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी फ्राडपन की शिकायत सामने आए और अपनी समस्या लेकर बैंक पहुंचने वाले खाताधारक को अपमानित और अभद्रता का सामना करना पड़े, तो बैंकिंग व्यवस्था सवालो के घेरे पर होती है। रामनगर विकासखंड के मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई शाखा से जुड़ा है मामला। खाताधारक ने अपने केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी होने का आरोप कथित और लिखित दोनों रूपो पर किया है। खाताधारक के मुताबिक, खाते से संबंधित समस्या को लेकर जब बैंक मैनेजर के समक्ष अपनी बात रखी गई, तो समाधान करने के बजह अपशब्दों का प्रयोग किया गया। केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह और उनके पिता अरूण सिंह द्वारा निर्धारित समय अवधि दौरान केसीसी का पैसा जमा कर दिया जाता था। एक लाख रूपए का केसीसी ऋण खाता को क्लोज के लिए जब प्रनत पाल सिंह के पिता अरुण सिंह जमा करने गये तो उन्हें एक लाख ॠण लोन पर दो लाख सत्रह हजार रुपए की राशि जमा करना बताया, सुनते ही उनके चेस्ट पर दर्द उठा जैसे तुरंत ही हार्टअटैक हृदयगति रूक जाएगी। उस स्थिति को बयान करना मतलब पैर के नीचे से जमीन खिसकने वाली स्थिति निर्मित थी। खाताधारक अपने धन वित्तीय लेन-देन जानकारी पाने का हकदार है। ख़ासतौर पर किसान केसीसी खाते में ऋण की राशि, ब्याज, भुगतान और बकाया राशि की जानकारियां उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। खाते मे विसंगति है तो बैंक प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि जांच कर तथ्यों मे स्थिति स्पष्ट करें। ना की अपशब्दों का प्रयोग करते हुए खाता बंद करने की धमकी, एफआईआर करने, बैंक से बाहर भागने शब्दों का प्रयोग बैंकिंग सेवा ग्राहक सम्मान के लिहाज में बेहद गंभीर विषय है। जहां विभागीय अमले को गहराई पर विचार-विमर्श कर कार्यवाही प्रस्तावित करना चाहिए।👇
- रामनगर मैहर - बैंक एक विश्वास का आधार है। जहां हर कोई अपनी भविष्य निधि सुरक्षित बैंक पर रखता है। बैंक प्रबंधन द्वारा केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह से फ्राड पर खाताधारक अब किस पर भरोसा करेगा। समस्या निदान के लिए बैंक मैनेजर द्वारा अपशब्द का प्रयोग किया जाना कहा तक जायज है। भारत सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड केसीसी लोन किसानों को कम व्याजदर पर उपलब्ध कराया जाता है। जहां निर्धारित समय सीमा से पूर्व खाताधारक द्वारा पैसे जमा करने पर व्याजदर पर छूट का भी प्रावधान है। अन्नदाता किसानो को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना पर ऋण दिया जाता है। लेकिन जब इसी केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी फ्राडपन की शिकायत सामने आए और अपनी समस्या लेकर बैंक पहुंचने वाले खाताधारक को अपमानित और अभद्रता का सामना करना पड़े, तो बैंकिंग व्यवस्था सवालो के घेरे पर होती है। रामनगर विकासखंड के मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई शाखा से जुड़ा है मामला। खाताधारक ने अपने केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी होने का आरोप कथित और लिखित दोनों रूपो पर किया है। खाताधारक के मुताबिक, खाते से संबंधित समस्या *मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई मे केसीसी लोन खाताधारक से फ्राड, बैंक प्रबंधन पर सबाल, मैनेजर द्वारा अभद्रता भाषा का प्रयोग।* रामनगर मैहर - बैंक एक विश्वास का आधार है। जहां हर कोई अपनी भविष्य निधि सुरक्षित बैंक पर रखता है। बैंक प्रबंधन द्वारा केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह से फ्राड पर खाताधारक अब किस पर भरोसा करेगा। समस्या निदान के लिए बैंक मैनेजर द्वारा अपशब्द का प्रयोग किया जाना कहा तक जायज है। भारत सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड केसीसी लोन किसानों को कम व्याजदर पर उपलब्ध कराया जाता है। जहां निर्धारित समय सीमा से पूर्व खाताधारक द्वारा पैसे जमा करने पर व्याजदर पर छूट का भी प्रावधान है। अन्नदाता किसानो को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना पर ऋण दिया जाता है। लेकिन जब इसी केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी फ्राडपन की शिकायत सामने आए और अपनी समस्या लेकर बैंक पहुंचने वाले खाताधारक को अपमानित और अभद्रता का सामना करना पड़े, तो बैंकिंग व्यवस्था सवालो के घेरे पर होती है। रामनगर विकासखंड के मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक गोरहाई शाखा से जुड़ा है मामला। खाताधारक ने अपने केसीसी लोन खाते में गड़बड़ी होने का आरोप कथित और लिखित दोनों रूपो पर किया है। खाताधारक के मुताबिक, खाते से संबंधित समस्या को लेकर जब बैंक मैनेजर के समक्ष अपनी बात रखी गई, तो समाधान करने के बजह अपशब्दों का प्रयोग किया गया। केसीसी खाताधारक प्रनत पाल सिंह और उनके पिता अरूण सिंह द्वारा निर्धारित समय अवधि दौरान केसीसी का पैसा जमा कर दिया जाता था। एक लाख रूपए का केसीसी ऋण खाता को क्लोज के लिए जब प्रनत पाल सिंह के पिता अरुण सिंह जमा करने गये तो उन्हें एक लाख ॠण लोन पर दो लाख सत्रह हजार रुपए की राशि जमा करना बताया, सुनते ही उनके चेस्ट पर दर्द उठा जैसे तुरंत ही हार्टअटैक हृदयगति रूक जाएगी। उस स्थिति को बयान करना मतलब पैर के नीचे से जमीन खिसकने वाली स्थिति निर्मित थी। खाताधारक अपने धन वित्तीय लेन-देन जानकारी पाने का हकदार है। ख़ासतौर पर किसान केसीसी खाते में ऋण की राशि, ब्याज, भुगतान और बकाया राशि की जानकारियां उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। खाते मे विसंगति है तो बैंक प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि जांच कर तथ्यों मे स्थिति स्पष्ट करें। ना की अपशब्दों का प्रयोग करते हुए खाता बंद करने की धमकी, एफआईआर करने, बैंक से बाहर भागने शब्दों का प्रयोग बैंकिंग सेवा ग्राहक सम्मान के लिहाज में बेहद गंभीर विषय है। जहां विभागीय अमले को गहराई पर विचार-विमर्श कर कार्यवाही प्रस्तावित करना चाहिए।👇1
- *अमरपाटन सिविल अस्पताल में स्वच्छता व्यवस्था ध्वस्त, चारों ओर फैली गंदगी से मरीज परेशान* *दूसरी हेडलाइन - सिविल अस्पताल बना बदहाली का शिकार, गंदगी के ढेर में इलाज कराने को मजबूर मरीज *अमरपाटन सिविल अस्पताल में स्वच्छता व्यवस्था ध्वस्त, चारों ओर फैली गंदगी से मरीज परेशान* *दूसरी हेडलाइन - सिविल अस्पताल बना बदहाली का शिकार, गंदगी के ढेर में इलाज कराने को मजबूर मरीज* *अमरपाटन।* कहते हैं अस्पताल में सबसे ज्यादा साफ-सफाई की जरूरत होती है, लेकिन अमरपाटन के सिविल अस्पताल में ही स्वच्छता की धज्जियां उड़ रही हैं। अस्पताल परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर का जायजा लेने पर देखा गया कि वार्डों के बाहर, शौचालयों के आसपास और अस्पताल के पीछे कचरा बिखरा पड़ा है। नालियां चोक हैं और उनसे बदबू आ रही है। पीने के पानी के आसपास भी गंदगी फैली हुई है। वार्डों के अंदर भी स्थिति कुछ ठीक नहीं है। बेडशीट गंदी हैं और फर्श पर भी कचरा पड़ा हुआ है। मरीजों का कहना है कि गंदगी के कारण अस्पताल में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन यहां की गंदगी देखकर और बीमार होने का डर सताने लगता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में सफाई कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी हुई है। नियमित साफ-सफाई नहीं होने से अस्पताल की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। इस संबंध में जब जिम्मेदारों से बात करने की कोशिश की गई तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब देखना होगा कि खबर प्रकाशन के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस ओर ध्यान देते हैं या नहीं।2
- *मां शारदा शक्तिपीठ मैहर 14 10 2026 बुधवार को काल भैरव के दिव्य अलौकिक दर्शन एवम आरती🚩* *मां शारदा शक्तिपीठ मैहर 14 10 2026 बुधवार को काल भैरव के दिव्य अलौकिक दर्शन एवम आरती🚩*1
- मैहर नवरात्रि मेले के तृतीय दिवस पर माँ शारदा मंदिर प्रांगण में जिला प्रशासन द्वारा गरबा कार्यक्रम का आयोजन मैहर नवरात्रि मेले के तृतीय दिवस पर माँ शारदा मंदिर प्रांगण में जिला प्रशासन द्वारा गरबा कार्यक्रम का आयोजन हुआ मैहर, 13 अक्टूबर। मैहर नवरात्रि मेले के तृतीय दिवस पर माँ शारदा मंदिर प्रांगण में जिला प्रशासन द्वारा गरबा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर की महिला एवं छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। देवी गीतों पर गरबा कार्यक्रम में धूम रही। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी, पुलिस अधीक्षक श्री अवधेश प्रताप सिंह, अपर कलेक्टर श्री रोशन राय सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।1
- लाड़ली बहना योजना से बहनों के जीवन में खुशियाँ आई हैं। शासन और प्रशासन में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका पर हमें गर्व है। लाड़ली बहना योजना से बहनों के जीवन में खुशियाँ आई हैं। शासन और प्रशासन में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका पर हमें गर्व है। कांग्रेस ने इस योजना का विरोध किया। उनके शासन में महिला एवं बाल विकास विभाग का बजट ₹350 करोड़ था, हमारी सरकार में ₹47 हज़ार करोड़ है। - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी1
- खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज चैनल मध्य प्रदेश सतना जिला नागौद में वैन चालक की गुंडागर्दी, बाइक सवार को साथियों संग पीटा, CCTV वायरल नागौद गांधी चौक पर 12 अक्टूबर दोपहर स्कूल वैन चालक की गुंडागर्दी सामने आई। आरोप है कि चालक ने सड़क किनारे खड़े बाइक सवार को टक्कर मार दी। इसके बाद दोनों में मारपीट हुई। वैन चालक ने मौके पर साथियों को बुलाकर युवक की पिटाई कर दी। युवक बाइक छोड़कर भागा। घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल हो रहा है। पीड़ित ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।1
- इंदौर में प्रधान आरक्षक के 15 ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 6.26 करोड़ की अकूत संपत्ति का खुलासा,, इंदौर में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के खिलाफ लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार सुबह 6 बजे से इंदौर-देवास समेत 15 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। जांच में करीब 6.26 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति मिलने का दावा किया गया है। यह संपत्ति उसकी ज्ञात आय से 223 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। लोकायुक्त टीम दस्तावेजों की जांच में जुटी है।1
- मैहर जिले में पंचायत की सड़क में भारी भ्रष्टाचार: अमरपाटन जनपद की ग्राम पंचायत मजगवां में घटिया सड़क निर्माण, सरपंच पर ठेके पर काम कराने का आरोप *मैहर जिले में पंचायत की सड़क में भारी भ्रष्टाचार: अमरपाटन जनपद की ग्राम पंचायत मजगवां में घटिया सड़क निर्माण, सरपंच पर ठेके पर काम कराने का आरोप* *अमरपाटन / मैहर।* मैहर जिले की जनपद पंचायत अमरपाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत मजगवां में लाखों की लागत से बन रही सड़क की गुणवत्ता की पोल खुल गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच द्वारा सड़क का निर्माण ठेके पर दे दिया गया है और निर्माण कार्य बेहद घटिया तरीके से किया जा रहा है। *मौके पर क्या मिला -* ग्रामीणों के अनुसार सीसी रोड में सीमेंट का अनुपात बेहद कम लगाया जा रहा है। रेत की जगह डस्ट और गिट्टी में मिट्टी मिलाकर ढलाई की जा रही है। सड़क की मोटाई कागजों में 6 इंच है, जबकि मौके पर 3 से 4 इंच ही बनाई जा रही है। नीचे बेस तक नहीं डाला गया और सीधे कच्ची मिट्टी पर ही सीमेंट डाल दिया गया है। *ठेके पर दिया काम -* नियमानुसार पंचायत के निर्माण कार्य में टेंडर प्रक्रिया और मजदूरों से काम कराना होता है, लेकिन यहां सरपंच ने पूरी सड़क ठेकेदार को दे दी है। काम मिक्सर मशीन और ठेका मजदूरों से कराया जा रहा है, जबकि मस्टर रोल में फर्जी जॉब कार्ड धारकों के नाम पर पैसा निकाला जा रहा है। निर्माण शुरू होने के बाद से ही ग्रामीण विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरपंच सुनने को तैयार नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क 2 महीने भी नहीं टिकेगी और पहली बारिश में ही उखड़ जाएगी। *ग्रामीणों ने की जांच की मांग -* ग्रामीणों ने जनपद पंचायत अमरपाटन के CEO और कलेक्टर मैहर से इस सड़क की तकनीकी जांच कराने और एस्टीमेट के अनुसार गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही ठेके पर काम देने वाले सरपंच-सचिव पर कार्रवाई की मांग की है।2