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हजारीबाग: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग में एसी मिस्त्री की गिरने से मौत मिली सूचना के मुताबिक मो. सलीम उर्फ गुड्डू पिता मो. मुस्लिम खानसामा गली जमा मस्जिद हजारीबाग के रहने वाले हैं। परिजनों का आरोप है कि कोई सेफ्टी नहीं दिया गया था जिस कारण गिरने से मौत हुई। परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने धरना-प्रदर्शन कर गेट जाम किया।

2 hrs ago
user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
BaरKaट्ठा Ki आwaज
Court reporter बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
2 hrs ago
38ce39fe-d215-46d0-ab2c-7ee2cfbe4113

हजारीबाग: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग में एसी मिस्त्री की गिरने से मौत मिली सूचना के मुताबिक मो. सलीम उर्फ गुड्डू पिता मो. मुस्लिम खानसामा गली जमा मस्जिद हजारीबाग के रहने वाले हैं। परिजनों का आरोप है कि कोई सेफ्टी नहीं दिया गया था जिस कारण गिरने से मौत हुई। परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने धरना-प्रदर्शन कर गेट जाम किया।

More news from Hazaribagh and nearby areas
  • Post by Update news 24
    1
    Post by Update news 24
    user_Update news 24
    Update news 24
    Photographer Barkatha, Hazaribagh•
    22 hrs ago
  • झुमरी तिलैया के इंदरवा बस्ती के रहने वाले 28 वर्षीय गोलू सिन्हा की संदेहास्पद स्थिति में मिली शव को लेकर पूरा परिवार में मातम का माहौल । युवक का जल्द होने वाला था शादी।
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    झुमरी तिलैया के इंदरवा बस्ती के रहने वाले 28 वर्षीय गोलू सिन्हा की संदेहास्पद स्थिति में मिली शव को लेकर पूरा परिवार में मातम का माहौल । युवक का जल्द होने वाला था शादी।
    user_PRAVEEN NIRANJAN
    PRAVEEN NIRANJAN
    Central Government Office कोडरमा, कोडरमा, झारखंड•
    1 hr ago
  • हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में एसी मिस्त्री मो. सलीम उर्फ गुड्डू की गिरने से मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान कोई सेफ्टी सुविधा नहीं दी गई थी। घटना के विरोध में परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने जाम कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
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    हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में एसी मिस्त्री मो. सलीम उर्फ गुड्डू की गिरने से मौत हो गई। 
परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान कोई सेफ्टी सुविधा नहीं दी गई थी। 
घटना के विरोध में परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने जाम कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
    user_Abhay Kumar Singh
    Abhay Kumar Singh
    पत्रकार हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    4 hrs ago
  • विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
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    विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    4 hrs ago
  • कोडरमा: थाना क्षेत्र अंतर्गत कोल टैक्स के समीप एक बार फिर से चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है। जहां किराए में रहने वाली एक महिला के घर में उसकी उपस्थिति में चोर घर में घुस कर उनके जेवरात और नगदी लेकर फरार हो गए हैं। मामले की जानकारी देते हुए पीड़िता पूजा कुमारी पति बालमुकुंद कुमार ने बताया कि वह उक्त मकान में किराएदार के रूप में रह रही हैं। मंगलवार की शाम वे अपने गांव एक तिलक समारोह में शामिल होने के लिए गई हुई थी। वहीं बुधवार की सुबह वे वापस कोडरमा स्थित उक्त मकान पहुंची और अपने सारे जेवरात को एक बैग में डालकर अपने कमरे में खूंटी में टांग कर स्नान करने चली गई। इसके पश्चात जब वह स्नान करके वापस आईं और अपने छोटे बेटे जो विद्यालय से आया था, उसे लेने के लिए घर से बाहर सड़क पर आई और बेटे को लेकर अपने कमरे में चली गई। इसके बाद शाम करीब 6:00 बजे जब वे उक्त बैक को अलमीरा में रखने के लिए जाने लगीं तो देखा की बैग खूंटी से गायब था। इसके पश्चात उन्होंने उनके ठीक बगल के कमरे में किराए में रह रहे अपने भाई तथा भाभी से पूछताछ की तो उन्होंने इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इसके पश्चात वह अपने बच्चों से इसके संबंध में पूछताछ करने लगी। जब उसका कहीं कुछ पता नहीं चला तो वह इसकी सूचना कोडरमा पुलिस को दी। इसके पश्चात कोडरमा पुलिस के जवान उक्त घर पहुंचे और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुट गए। उन्होंने बताया कि उनके बैग में करीब डेढ़ लाख रुपए के सोने के जेवरात (मंगलसूत्र, कान की बाली और सोने के कंगन) रखे हुए थे। साथ ही पर्स में दो हजार रुपये नगद भी रखे हुए थे। इधर जब उन्होंने इस बात की सूचना आज पड़ोस में दी तो पता चला कि उनके घर के ठीक पीछे रहने वाले अनिल सिंह ने मकान में भी चोरों ने धावा बोला था। अनिल सिंह की भाभी ने बताया कि बुधवार दोपहर वे अपने कमरे में सोई हुई थीं। इसी बीच अचानक से कुछ आवाज़ सुनकर वे उठीं और मुख्य दरवाजे के समीप पहुंची तो देखा कि वहाँ एक महिला करीब 10-12 साल की एक बच्ची के साथ उनके दरवाजे पर खड़ी थी। इनको देखते ही वे भाग गईं। इधर उन्होंने देखा कि उनके देवर का कमरा खुला हुआ था और उक्त कमरे के अलमीरा का ड्रावर खुला था, जिसमें रखा 1 हजार रुपया गयं था। उन्होंने बताया कि अगर उनकी नींद नहीं खुलती तो और भी समान व नगद पैसों की चोरी हो सकती थी। इन दोनों घरों में हुई चोरी की घटना को लेकर लोगों को आशंका है कि उक्त महिला और बच्ची द्वारा ही घर में प्रवेश कर चोरी की घटना को अंजाम दिया गया है। वहीं मोहल्ले के कई लोगों ने उक्त महिला और बच्चों को मोहल्ले में घूमते हुए देखने की बात कही है। इधर चोर के इस प्रकार बेखौफ घरों में घुस जाने के कारण आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। महिलाएं घर में कुंडी लगाकर रह रही हैं और बाहर निकलने से घबरा रही हैं।
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    कोडरमा: थाना क्षेत्र अंतर्गत कोल टैक्स के समीप एक बार फिर से चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है। जहां किराए में रहने वाली एक महिला के घर में उसकी उपस्थिति में चोर घर में घुस कर उनके जेवरात और नगदी लेकर फरार हो गए हैं। मामले की जानकारी देते हुए पीड़िता पूजा कुमारी पति बालमुकुंद कुमार ने बताया कि वह उक्त मकान में किराएदार के रूप में रह रही हैं।  मंगलवार की शाम वे अपने गांव एक तिलक समारोह में शामिल होने के लिए गई हुई थी। वहीं बुधवार की सुबह वे वापस कोडरमा स्थित उक्त मकान पहुंची और अपने सारे जेवरात को एक बैग में डालकर अपने कमरे में खूंटी में टांग कर स्नान करने चली गई। इसके पश्चात जब वह स्नान करके वापस आईं और अपने छोटे बेटे जो विद्यालय से आया था, उसे लेने के लिए घर से बाहर सड़क पर आई और बेटे को लेकर अपने कमरे में चली गई।  इसके बाद शाम करीब 6:00 बजे जब वे उक्त बैक को अलमीरा में रखने के लिए जाने लगीं तो देखा की बैग खूंटी से गायब था। इसके पश्चात उन्होंने उनके ठीक बगल के कमरे में किराए में रह रहे अपने भाई तथा भाभी से पूछताछ की तो उन्होंने इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी।  इसके पश्चात वह अपने बच्चों से इसके संबंध में पूछताछ करने लगी। जब उसका कहीं कुछ पता नहीं चला तो वह इसकी सूचना कोडरमा पुलिस को दी। इसके पश्चात कोडरमा पुलिस के जवान उक्त घर पहुंचे और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुट गए। उन्होंने बताया कि उनके बैग में करीब डेढ़ लाख रुपए के सोने के जेवरात (मंगलसूत्र, कान की बाली और सोने के कंगन) रखे हुए थे। साथ ही पर्स में दो हजार रुपये नगद भी रखे हुए थे। इधर जब उन्होंने इस बात की सूचना आज पड़ोस में दी तो पता चला कि उनके घर के ठीक पीछे रहने वाले अनिल सिंह ने मकान में भी चोरों ने धावा बोला था। अनिल सिंह की भाभी ने बताया कि बुधवार दोपहर वे अपने कमरे में सोई हुई थीं। इसी बीच अचानक से कुछ आवाज़ सुनकर वे उठीं और मुख्य दरवाजे के समीप पहुंची तो देखा कि वहाँ एक महिला करीब 10-12 साल की एक बच्ची के साथ उनके दरवाजे पर खड़ी थी। इनको देखते ही वे भाग गईं। इधर उन्होंने देखा कि उनके देवर का कमरा खुला हुआ था और उक्त कमरे के अलमीरा का ड्रावर खुला था, जिसमें रखा 1 हजार रुपया गयं था। उन्होंने बताया कि अगर उनकी नींद नहीं खुलती तो और भी समान व नगद पैसों की चोरी हो सकती थी।
इन दोनों घरों में हुई चोरी की घटना को लेकर लोगों को आशंका है कि उक्त महिला और बच्ची द्वारा ही घर में प्रवेश कर चोरी की घटना को अंजाम दिया गया है। वहीं मोहल्ले के कई लोगों ने उक्त महिला और बच्चों को मोहल्ले में घूमते हुए देखने की बात कही है। इधर चोर के इस प्रकार बेखौफ घरों में घुस जाने के कारण आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।  महिलाएं घर में कुंडी लगाकर रह रही हैं और बाहर निकलने से घबरा रही हैं।
    user_Koderma news
    Koderma news
    Data recovery service कोडरमा, कोडरमा, झारखंड•
    4 hrs ago
  • ✍रंजन चौधरी सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है। यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जि‌ह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अ‌द्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं। झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।
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    ✍रंजन चौधरी
सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। 
हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है।
यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जि‌ह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अ‌द्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं।
झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।
    user_Kashif Adib
    Kashif Adib
    Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    4 hrs ago
  • Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज
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    Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
    11 hrs ago
  • झुमरी तिलैया के इंदरवा बस्ती के रहने वाले 28 वर्षीय गोलू सिन्हा की संदेहास्पद स्थिति में मिली शव को लेकर पूरा परिवार में मातम का माहौल । युवक का जल्द होने वाला था शादी।
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    झुमरी तिलैया के इंदरवा बस्ती के रहने वाले 28 वर्षीय गोलू सिन्हा की संदेहास्पद स्थिति में मिली शव को लेकर पूरा परिवार में मातम का माहौल । युवक का जल्द होने वाला था शादी।
    user_PRAVEEN NIRANJAN
    PRAVEEN NIRANJAN
    Central Government Office कोडरमा, कोडरमा, झारखंड•
    1 hr ago
  • कोडरमा : झुमरी तिलैया में एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान इंदरवा बस्ती निवासी 28 वर्षीय गोलू श्रीवास्तव, पिता झूलन श्रीवास्तव के रूप में हुई है। जानकारी अनुसार, युवक का शव बाईपास पुल के पास बरामद किया गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।परिजनों का कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि हत्या का मामला हो सकता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।बताया जा रहा है कि मृतक बालू सप्लाई का कार्य करता था। ऐसे में पुलिस व्यवसायिक विवाद या आपसी रंजिश के पहलू से भी जांच कर रही है।फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। घटनास्थल का निरीक्षण किया जा रहा है और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस सभी संभावित एंगल पर जांच कर रही है। थाना प्रभारी विनय कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
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    कोडरमा : झुमरी तिलैया में एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान इंदरवा बस्ती निवासी 28 वर्षीय गोलू श्रीवास्तव, पिता झूलन श्रीवास्तव के रूप में हुई है।
जानकारी अनुसार, युवक का शव बाईपास पुल के पास बरामद किया गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।परिजनों का कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि हत्या का मामला हो सकता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।बताया जा रहा है कि मृतक बालू सप्लाई का कार्य करता था। ऐसे में पुलिस व्यवसायिक विवाद या आपसी रंजिश के पहलू से भी जांच कर रही है।फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। घटनास्थल का निरीक्षण किया जा रहा है और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस सभी संभावित एंगल पर जांच कर रही है।
थाना प्रभारी विनय कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
    user_Koderma news
    Koderma news
    Data recovery service कोडरमा, कोडरमा, झारखंड•
    6 hrs ago
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