उत्तर प्रदेश सिद्धार्थ नगर के 5 लोगो को रिल्ब्नकर फेमश होना परा भारी l उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में काशीराम कॉलोनी के पास 2 मई 2026 को 5 किशोर 100 फीट ऊँची पानी की टंकी पर रील बनाने चढ़े थे। सीढ़ी टूटने से 3 किशोर नीचे गिर गए (1 की मौत, 2 घायल) और 2 बच्चे 16 घंटे तक ऊपर फंसे रहे, जिन्हें वायुसेना के Mi-17 हेलिकॉप्टर से 3 मई की सुबह सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। हादसे की मुख्य बातें: जगह: सिद्धार्थनगर, नवगढ़ तहसील के बेलसाद टप्पा थरौली का काशीराम कॉलोनी। वजह: रील (वीडियो) बनाने के लिए जर्जर पानी की टंकी पर चढ़ना। कैसे फंसे: रील बनाने के बाद नीचे उतरते समय टंकी की सीढ़ी टूट गई, जिससे 3 बच्चे नीचे गिर गए। रेस्क्यू: 16 घंटे तक फंसे 2 बच्चों को, सेना/IAF हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू वीडियो यहां देखें ( Jagran के अनुसार) 5:20 AM पर एयरलिफ्ट किया गया। परिणाम: 13 वर्षीय सिद्धार्थ की मौके पर ही मौत हो गई, 2 अन्य बच्चे गंभीर घायल हैं। यह घटना रील बनाने के लिए जोखिम भरे स्टंट के बढ़ते खतरे को उजागर करती है।
उत्तर प्रदेश सिद्धार्थ नगर के 5 लोगो को रिल्ब्नकर फेमश होना परा भारी l उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में काशीराम कॉलोनी के पास 2 मई 2026 को 5 किशोर 100 फीट ऊँची पानी की टंकी पर रील बनाने चढ़े थे। सीढ़ी टूटने से 3 किशोर नीचे गिर गए (1 की मौत, 2 घायल) और 2 बच्चे 16 घंटे तक ऊपर फंसे रहे, जिन्हें वायुसेना के Mi-17 हेलिकॉप्टर से 3 मई की सुबह सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। हादसे की मुख्य बातें: जगह: सिद्धार्थनगर, नवगढ़ तहसील के बेलसाद टप्पा थरौली का काशीराम कॉलोनी। वजह: रील (वीडियो) बनाने के लिए जर्जर पानी की टंकी पर चढ़ना। कैसे फंसे: रील बनाने के बाद नीचे उतरते समय टंकी की सीढ़ी टूट गई, जिससे 3 बच्चे नीचे गिर गए। रेस्क्यू: 16 घंटे तक फंसे 2 बच्चों को, सेना/IAF हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू वीडियो यहां देखें ( Jagran के अनुसार) 5:20 AM पर एयरलिफ्ट किया गया। परिणाम: 13 वर्षीय सिद्धार्थ की मौके पर ही मौत हो गई, 2 अन्य बच्चे गंभीर घायल हैं। यह घटना रील बनाने के लिए जोखिम भरे स्टंट के बढ़ते खतरे को उजागर करती है।
- राजधानी बस या किसी भी अन्य बस में चढ़ते समय पैर टूटने की घटना अक्सर जल्दबाजी, लापरवाही या बस के अचानक चलने के कारण होती है। हाल के दिनों में ऐसी कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। [1, 2] मुख्य कारण: चलती बस में चढ़ने की कोशिश: सबसे आम कारण यह है कि व्यक्ति बस के पूरी तरह रुकने से पहले ही उसमें चढ़ने की कोशिश करता है, जिससे उसका पैर फिसल जाता है और बस के नीचे आ जाता है। बस का अचानक चलना: जब यात्री बस के पायदान (step) पर होता है और चालक अचानक बस बढ़ा देता है, तो संतुलन बिगड़ने से यात्री गिर जाता है और पैर पहिये के नीचे आ सकता है। पैर फंस जाना: बस में चढ़ते समय पैर का पायदान और सड़क के बीच के गैप में फंस जाना और बस के आगे बढ़ने से पैर का टूटना। भीड़-भाड़ और धक्का-मुक्की: बस स्टॉप पर भीड़ के कारण किसी अन्य यात्री द्वारा धक्का दिए जाने से भी नीचे गिरने और पैर टूटने का खतरा रहता है।1
- गढ़वा जिला का उड़सुगी पंचायत के कुशमाहा में एक पानी टंकी पूरा के पूरा करेक्ट हो गया किसी दिन गिर सकता है टंकी1
- मेरे कारण पत्रकारों की दुकानदारी चलती है: मंत्री इरफान अंसारी1
- गढ़वा के गढ़वा से भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी पहली बार आखिर किस पर इतना हुए गर्म?1
- Post by Sunil singh1
- भाजपा की बंगाल,असम व पुडुचेरी में हुई बंपर जीत के बाद विश्रामपुर मे विजय जुलूस निकला। गाने बाजे के साथ जुलूस बस स्टैंड से शुरू होकर नगर भ्रमण करते हुए गांधी चौक पहुंचा।जहां जुलूस सभा में तब्दील हो गया। जुलूस के दौरान भाजपा कार्यक्रताओं ने जमकर आतिशबाजी की,एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।1
- चिनिया से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियाँ प्रखंड कार्यालय में जनगणना 2027 को सफल बनाने के लिए सोमवार सुबह से प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के प्रथम बैच का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हो गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रखंड विकास पदाधिकारी सह चार्ज जनगणना पदाधिकारी सुबोध कुमार सहित अन्य ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर इसकी शुरुआत की। साथ ही प्रखंड विकास पदाधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण 16 मई से 14 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें मकानों की सूचीकरण और गणना की जाएगी। वहीं दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होकर जनसंख्या गणना पर केंद्रित रहेगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है। पहली बार स्व-गणना की सुविधा दी गई है, जो 1 मई से 15 मई 2026 तक चलेगी। साथ ही डिजिटल ऐप के जरिए डेटा संग्रहण किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और तेज बनेगी। अधिकारियों ने साफ किया कि नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। किसी भी स्थिति में आधार, पैन, बैंक डिटेल या OTP जैसी संवेदनशील जानकारी नहीं मांगी जाएगी। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और किसी अनधिकृत व्यक्ति को जानकारी न दें। जनगणना कर्मियों को QR कोड युक्त पहचान पत्र दिया जाएगा, जिससे उनकी पहचान आसानी से सत्यापित की जा सकेगी। आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए जनप्रतिनिधियों और मीडिया से सहयोग की भी अपील की गई। बैठक में मास्टर प्रशिक्षक अजय कुमार चंद्रवंशी, ओम प्रकाश सिंह, कमलेश कोरवा, संदीप कुमार सिंह, कुमार भानु प्रताप, पवन कुमार रजक, मंगल पांडे सहित प्रखंड स्तरीय स्तरीय अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।1
- दशहरी आम के पेड़ से फल तोड़ने के लिए आम तौर पर फूल आने के लगभग 110-120 दिन (या फल लगने के 20-25 दिन) के बाद फल तैयार हो जाते हैं। कलम (Grafted) वाले पौधे रोपण के लगभग 2 से 3 साल में फल देना शुरू कर देते हैं। दशहरी आम की तैयारी से जुड़ी मुख्य बातें: पकने का समय: उत्तर भारत में दशहरी आम आमतौर पर जून के महीने में बाजार में आते हैं। प्राकृतिक रूप से पकना: पेड़ से टूटने के बाद, ये प्राकृतिक रूप से 3-4 दिन में पककर तैयार हो जाते हैं। पौधे की आयु: बीज से लगे पेड़ों को फल देने में 5 से 8 साल लग सकते हैं। यदि आप आम के पेड़ लगाने या उनकी देखभाल के बारे में और जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं कि क्या: आप गमले में लगाना चाहते हैं या जमीन पर? आप कलम वाला पौधा (Grafted) चाहते हैं? आपकी मिट्टी का प्रकार क्या है?1