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नवगछिया में “वर्दी का रौब” — ठेला चालक से गाली-गलौज का वीडियो वायरल। बिहार के नवगछिया इलाके से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुलिसकर्मी द्वारा ठेला चालक के साथ कथित बदसलूकी और गाली-गलौज करते हुए देखा जा रहा है।
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नवगछिया में “वर्दी का रौब” — ठेला चालक से गाली-गलौज का वीडियो वायरल। बिहार के नवगछिया इलाके से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुलिसकर्मी द्वारा ठेला चालक के साथ कथित बदसलूकी और गाली-गलौज करते हुए देखा जा रहा है।
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- बिहार के नवगछिया इलाके से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुलिसकर्मी द्वारा ठेला चालक के साथ कथित बदसलूकी और गाली-गलौज करते हुए देखा जा रहा है।1
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- Post by Akshay1
- सुल्तानगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 21 स्थित गंगापुर से संपर्क नारायणपुर रोड के पूरबी हिस्से में दशकों से पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो पाने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 1992 से यह सड़क दुधैला, मुंशीपट्टी, बैकुंठपुर, फुलवरिया और विष्णु टोला समेत लगभग 10 हजार की आबादी के लिए रेलवे स्टेशन और सुल्तानगंज बाजार आने-जाने का मुख्य मार्ग है। सड़क निर्माण व्यक्तिगत विरोध और आपसी जमीन विवाद के कारण अधर में लटका हुआ है। बरसात के दिनों में जलजमाव और कीचड़ के कारण स्थिति और भी बदतर हो जाती है। स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचने में कठिनाई होती है, वहीं बीमार व्यक्तियों को अस्पताल ले जाना भी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, एक पक्ष के राकेश कुमार रंजन ने सड़क निर्माण के लिए अपनी चार फीट निजी जमीन देने की सहमति दी थी। लेकिन आनंदी दास और उनके पुत्र वीरेंद्र प्रताप द्वारा इसका विरोध किया गया और मामला न्यायालय तक पहुंच गया। वर्ष 2013 में सीडब्ल्यूजेसी केश संख्या 1091 पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीसीएलआर द्वारा मामला खारिज कर दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी चंदा कर सड़क निर्माण कार्य शुरू किया, लेकिन विरोध के कारण बार-बार काम रुकता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर सड़क बन रही है, वहां 16 धूर बिहार सरकार के सिंचाई विभाग की जमीन भी उपलब्ध है, साथ ही निजी जमीन भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद निर्माण कार्य बाधित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह सड़क बन जाती है तो हजारों लोगों को रेलवे स्टेशन और बाजार तक पहुंचने में बड़ी सहूलियत होगी। वर्षों से लंबित यह समस्या अब भी समाधान की प्रतीक्षा में है।1
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