बिहार के साहेबगंज बाजार में छात्रों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग को लेकर "Peaceful March For Education" निकाला। हाथों में बैनर-पोस्टर लिए दर्जनों छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतरे और "No Politics, No Hate, Only Education" का नारा लगाते हुए शिक्षा को राजनीति व नफरत से दूर रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने "We Want Quality Education For Every Student", "Education Is Our Right" और "Better Education Better Future" लिखे बैनर उठा रखे थे। इस मार्च की खास बात यह रही कि छात्रों ने लद्दाख के शिक्षाविद सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में भी जमकर नारेबाजी की। बैनर पर "We Support Sonam Wangchuk And His Peaceful March For Better Education" लिखकर छात्रों ने कहा कि जिस तरह वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण के लिए आवाज उठा रहे हैं, उसी तर्ज पर उन्हें भी अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भी हिस्सा लिया और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों व संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाते हुए गांव के बच्चों को भी शहर जैसी शिक्षा देने की मांग की। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शिक्षा नीति और शिक्षा में राजनीति न होना शामिल है। बाजार में निकले इस मार्च के कारण कुछ देर के लिए आवागमन प्रभावित हुआ, लेकिन जुलूस पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा। स्थानीय लोगों ने छात्रों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि युवा शिक्षा के लिए सड़कों पर आएंगे तो व्यवस्था में सुधार जरूर होगा।
बिहार के साहेबगंज बाजार में छात्रों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग को लेकर "Peaceful March For Education" निकाला। हाथों में बैनर-पोस्टर लिए दर्जनों छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतरे और "No Politics, No Hate, Only Education" का नारा लगाते हुए शिक्षा को राजनीति व नफरत से दूर रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने "We Want Quality Education For Every Student", "Education Is Our Right" और "Better Education Better Future" लिखे बैनर उठा रखे थे। इस मार्च की खास बात यह रही कि छात्रों ने लद्दाख के शिक्षाविद सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में भी जमकर नारेबाजी की। बैनर पर "We Support Sonam Wangchuk And His Peaceful March For Better Education" लिखकर छात्रों ने कहा कि जिस तरह वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण के लिए आवाज उठा रहे हैं, उसी तर्ज पर उन्हें भी अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भी हिस्सा लिया और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों व संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाते हुए गांव के बच्चों को भी शहर जैसी शिक्षा देने की मांग की। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शिक्षा नीति और शिक्षा में राजनीति न होना शामिल है। बाजार में निकले इस मार्च के कारण कुछ देर के लिए आवागमन प्रभावित हुआ, लेकिन जुलूस पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा। स्थानीय लोगों ने छात्रों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि युवा शिक्षा के लिए सड़कों पर आएंगे तो व्यवस्था में सुधार जरूर होगा।
- बिहार के साहेबगंज बाजार में छात्रों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग को लेकर "Peaceful March For Education" निकाला। हाथों में बैनर-पोस्टर लिए दर्जनों छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतरे और "No Politics, No Hate, Only Education" का नारा लगाते हुए शिक्षा को राजनीति व नफरत से दूर रखने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने "We Want Quality Education For Every Student", "Education Is Our Right" और "Better Education Better Future" लिखे बैनर उठा रखे थे। इस मार्च की खास बात यह रही कि छात्रों ने लद्दाख के शिक्षाविद सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में भी जमकर नारेबाजी की। बैनर पर "We Support Sonam Wangchuk And His Peaceful March For Better Education" लिखकर छात्रों ने कहा कि जिस तरह वांगचुक शिक्षा और पर्यावरण के लिए आवाज उठा रहे हैं, उसी तर्ज पर उन्हें भी अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भी हिस्सा लिया और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों व संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाते हुए गांव के बच्चों को भी शहर जैसी शिक्षा देने की मांग की। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शिक्षा नीति और शिक्षा में राजनीति न होना शामिल है। बाजार में निकले इस मार्च के कारण कुछ देर के लिए आवागमन प्रभावित हुआ, लेकिन जुलूस पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा। स्थानीय लोगों ने छात्रों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि युवा शिक्षा के लिए सड़कों पर आएंगे तो व्यवस्था में सुधार जरूर होगा।1
- NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुई विरोध की चिंगारी अब बिहार पहुँच चुकी है। इस मुद्दे को लेकर राजधानी पटना में जमकर हंगामा देखने को मिला है।1
- मुज़फ़्फ़रपुर के साहिबगंज विधानसभा 98 क्षेत्र अंतर्गत पकड़ी बशारत पंचायत के भीमपुरा गांव स्थित सरकारी स्कूल में बच्चों के लिए पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। स्कूल में छात्रों के लिए एक भी चापाकल मौजूद नहीं है, जिसके कारण बच्चे पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। लाइट चले जाने पर स्कूल में लगा समरसेबल भी काम नहीं करता, जिससे पेयजल की समस्या और अधिक विकराल हो जाती है। भीमपुरा सरकारी स्कूल में बच्चों की इस परेशानी को दूर करने के लिए जल्द से जल्द चापाकल की व्यवस्था कर समाधान निकालने की मांग की गई है।2
- बिहार विधानसभा में आज बिहार विधानसभा राज (संशोधन) विधेयक 2026 पारित हो गया है। सदन में इस विधेयक को पेश करते हुए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने अपना वक्तव्य रखा और विधेयक के संबंध में बात कही।1
- मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर प्रखंड स्थित बगवाड़ा स्कूल में औचक निरीक्षण के दौरान सैकड़ों बच्चे अनुपस्थित मिले हैं। स्कूल में बच्चों की इतनी बड़ी संख्या में गैरहाजिरी सामने आने के बाद बीडीओ अरविंद गुप्ता ने बीईओ को मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।1
- साहेबगंज के विशुनपुर पट्टी में मंगलवार की रात अज्ञात लोगों द्वारा वैशाली नहर कैनाल का बांध काट दिए जाने से खेत-खलिहानों में पानी भर गया, जिससे ग्रामीणों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इस घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल बन गया और अपनी बर्बाद होती फसल को देखकर परेशान किसानों ने सिंचाई विभाग तथा प्रशासन से मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया। विरोध प्रदर्शन के बाद साहेबगंज की अंचलाधिकारी पिंकी कुमारी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया और आश्वासन दिया। सीओ ने कहा कि फसल नुकसान की भरपाई के लिए अनुदान राशि दी जाएगी, जिसके लिए जिला अधिकारी को चिट्ठी लिखकर ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कराया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीण शांत हुए, जिसके बाद गुरुवार को सिंचाई विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर टूटे बांध पर मिट्टी भराई का काम शुरू कर दिया। जेसीबी और ट्रैक्टर से बालू के बोरे व मिट्टी डालकर बांध को मजबूत किया जा रहा है और विभाग ने आज ही इसे दुरुस्त करने का दावा किया है। वहीं पीड़ित किसानों का आरोप है कि रात के अंधेरे में किसी ने साजिश के तहत नहर का बांध काटा है, जिससे उनकी फसल डूब गई है। ग्रामीणों ने सरकार से उचित मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।1
- गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर प्रखंड स्थित बंगरा पुल से गुरुवार को एक युवक ने गंडक नदी में छलांग लगा दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंची और नदी में युवक की तलाश शुरू कर दी। छलांग लगाने वाले युवक की पहचान सारण जिले के पानापुर थाना क्षेत्र के चकिया गांव निवासी सत्रोहन सिन्हा के पुत्र विपिन कुमार के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलने पर बैकुंठपुर के अंचल अधिकारी भी कर्मचारियों की टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। SDRF की टीम गंडक नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अब तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका है। मौके पर बंगरा पुल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए हैं। पुलिस और प्रशासन की टीम मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई में जुटी हुई है, हालांकि युवक के छलांग लगाने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।1