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प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र लोगों को महंगी दवाओं से मुक्ति दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है, जहाँ दवा का 'साल्ट' और 'असर' बिल्कुल ब्रांडेड दवाइयों जैसा ही होने के बावजूद, ग्राहकों को काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है। इन केंद्रों पर रक्तचाप, शुगर और हृदय रोग सहित सभी तरह की बीमारियों के लिए WHO-GMP प्रमाणित जेनेरिक दवाएं 50% से 90% तक सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। यह पहल 'स्वास्थ्य भी, बचत भी' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य लोगों के मेडिकल बिल को आधा करना है। फार्मासिस्ट दीपक शर्मा के अनुसार, पीएम जनऔषधि केंद्र ब्रांडेड जैसी गुणवत्ता वाली दवाएं अत्यधिक किफायती दरों पर प्रदान करते हैं। ग्राहकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी जनऔषधि केंद्र पर आकर उत्तम दवाइयों का लाभ उठाएं और अपने स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बचत करें।
जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र लोगों को महंगी दवाओं से मुक्ति दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है, जहाँ दवा का 'साल्ट' और 'असर' बिल्कुल ब्रांडेड दवाइयों जैसा ही होने के बावजूद, ग्राहकों को काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है। इन केंद्रों पर रक्तचाप, शुगर और हृदय रोग सहित सभी तरह की बीमारियों के लिए WHO-GMP प्रमाणित जेनेरिक दवाएं 50% से 90% तक सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। यह पहल 'स्वास्थ्य भी, बचत भी' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य लोगों के मेडिकल बिल को आधा करना है। फार्मासिस्ट दीपक शर्मा के अनुसार, पीएम जनऔषधि केंद्र ब्रांडेड जैसी गुणवत्ता वाली दवाएं अत्यधिक किफायती दरों पर प्रदान करते हैं। ग्राहकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी जनऔषधि केंद्र पर आकर उत्तम दवाइयों का लाभ उठाएं और अपने स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बचत करें।
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- प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र लोगों को महंगी दवाओं से मुक्ति दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है, जहाँ दवा का 'साल्ट' और 'असर' बिल्कुल ब्रांडेड दवाइयों जैसा ही होने के बावजूद, ग्राहकों को काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है। इन केंद्रों पर रक्तचाप, शुगर और हृदय रोग सहित सभी तरह की बीमारियों के लिए WHO-GMP प्रमाणित जेनेरिक दवाएं 50% से 90% तक सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। यह पहल 'स्वास्थ्य भी, बचत भी' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य लोगों के मेडिकल बिल को आधा करना है। फार्मासिस्ट दीपक शर्मा के अनुसार, पीएम जनऔषधि केंद्र ब्रांडेड जैसी गुणवत्ता वाली दवाएं अत्यधिक किफायती दरों पर प्रदान करते हैं। ग्राहकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी जनऔषधि केंद्र पर आकर उत्तम दवाइयों का लाभ उठाएं और अपने स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बचत करें।1
- कोटपूतली-बहरोड़ के विराटनगर नगर पालिका के समस्त कर्मचारी पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जो आज 21वें दिन भी जारी रही। लंबे समय से मानदेय या सैलरी न मिलने के कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। आर्थिक तंगी से परेशान सफाईकर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों ने नगर पालिका प्रशासन और स्वायत्त शासन विभाग (DLB) के खिलाफ उग्र आक्रोश व्यक्त किया है। इस 21 दिवसीय हड़ताल के कारण कस्बे में व्यवस्थाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। लगातार तीन हफ्तों से सफाई न होने के चलते मुख्य बाजारों, चौराहों और रिहायशी वार्डों में गंदगी के ढेर लग गए हैं, जिससे शहर 'कचरा डिपो' में तब्दील हो गया है। नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिसके कारण मौसमी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके अलावा, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पट्टे जारी करने और अन्य आवश्यक राजस्व कार्यों सहित सभी प्रशासनिक कार्य भी पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वे अधिकारियों को बजट जारी करने के लिए पहले भी कई बार मौखिक और लिखित में चेतावनी दे चुके थे। कर्मचारियों के अनुसार, पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के कारण उनके बच्चों की स्कूल फीस, राशन का सामान और लोन की किस्तें (EMI) रुक गई हैं। उनका आरोप है कि अधिकारी सिर्फ बजट की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि धरातल पर कर्मचारियों का जीना दूभर हो चुका है। कर्मचारियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि जब तक उनके पूरे दो महीने का बकाया वेतन सीधे उनके बैंक खातों में नहीं आ जाता, तब तक 'झाड़ू डाउन हड़ताल' और विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं किया जाएगा।1
- राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ लगातार कई जिलों से चिंताजनक घटनाएँ सामने आ रही हैं। प्रदेश के कोटा में प्रसूताओं की मौत की खबरें हैं, वहीं टोंक में नवजात शिशुओं की मृत्यु के मामले सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त, बीकानेर में महिलाओं में किडनी फेल होने की घटनाएँ भी दर्ज की गई हैं। अब इसी कड़ी में जोधपुर से भी इसी तरह की परेशान करने वाली खबरें आ रही हैं। स्वास्थ्य प्रणाली की इस कथित विफलता और चिकित्सा लापरवाही के बीच, यह सवाल गहरा रहा है कि प्रदेश की सरकार इन गंभीर स्वास्थ्य संकटों के समाधान के लिए आखिर क्या कर रही है और क्यों इन घटनाओं पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।1
- जयपुर में एक सरकारी इलेक्ट्रिक बस ने एक टैक्सी वाहन को टक्कर मार दी, जिससे टैक्सी का बंपर क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और सभी लोग सुरक्षित रहे, जो एक राहत की बात रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद टैक्सी चालक ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। आरोप है कि बस चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। इस मामले की जानकारी संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन को दे दी गई है, और प्रशासन द्वारा अब आगे की कार्रवाई और जांच की जाएगी। सभी वाहन चालकों से सड़क पर वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करने और सावधानी बरतने का आग्रह किया गया है।1
- भारत सरकार की पहल, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (PMBJK), महंगी दवाइयों के भारी बिलों से परेशान लोगों को बड़ी राहत प्रदान कर रहा है। इन केंद्रों पर उच्च गुणवत्ता वाली, WHO-GMP प्रमाणित जेनेरिक दवाइयां बाज़ार से 50% से 90% तक कम कीमत पर उपलब्ध हैं, जिससे पैसों की महाबचत सुनिश्चित होती है। जनऔषधि केंद्रों पर बीपी, शुगर, थायराइड, हृदय रोग सहित सभी सामान्य व गंभीर बीमारियों की दवाएं आसानी से मिलती हैं। इन जेनेरिक दवाओं का 'साल्ट' और उनका असर बिल्कुल महंगी ब्रांडेड दवाओं जैसा ही है, जो 'साल्ट वही, असर वही, बस दाम कम!' के सिद्धांत को पुष्ट करता है। यह परियोजना लोगों को अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ अपनी गाढ़ी कमाई बचाने का अवसर देती है, जिससे उत्तम दवाई सबसे कम दाम पर सुलभ हो सके।1
- राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले में पनियाला-नारेड़ा बाईपास स्थित गोपालपुरा पुलिया पर मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहाँ एक तेज रफ्तार ट्रॉले ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण टक्कर में बाइक सवार बनार गांव निवासी महेंद्र यादव और उनकी बीमार भतीजी की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे दोनों के शव क्षत-विक्षत हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब महेंद्र अपनी भतीजी को कोटपूतली के अस्पताल से दिखाकर गांव लौट रहे थे। टक्कर मारने के बाद ट्रॉले का चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। इस घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना देने के बावजूद वे 1 से 2 घंटे की देरी से मौके पर पहुँचे। इस दौरान कोटपूतली, सरूण्ड और पनियाला थाना पुलिस के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर असमंजस बना रहा, जिससे राहत कार्यों में विलंब हुआ। प्रशासनिक लापरवाही से गुस्साए लोगों ने मौके पर पहुँची एम्बुलेंस में तोड़फोड़ कर दी और आरोपी ट्रॉले को भी आग लगाने का प्रयास किया। उग्र ग्रामीणों और परिजनों ने दोनों मृतकों के शवों को सड़क पर रखकर गोपालपुरा पुलिया और नारेड़ा बाईपास पर धरना शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप हाईवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह से ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी माँगें पूरी होने तक शव उठाने से इनकार कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोटपूतली एडीएम, एसडीएम योगेश देवल और डीएसपी सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। अधिकारियों ने सरकारी नियमानुसार उचित मुआवजा, हाईवे पर स्पीड ब्रेकर और सुरक्षा पुख्ता करने के साथ ही दोषी चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। लंबी समझाइश और समझौते के बाद ग्रामीणों ने कई घंटों से जारी धरना समाप्त किया, जिसके बाद यातायात सुचारु हुआ। पुलिस ने दोनों शवों को राजकीय बीडीएम अस्पताल की मोर्चरी में रखवाकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की और फरार ट्रेलर व चालक की तलाश भी शुरू कर दी है।1