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हड़ताल से गूंज उठा तंत्र, इंजीनियरों की एकजुट आवाज ने बढ़ाया दबाव मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। एक तरफ विकास कार्यों की रफ्तार और दूसरी तरफ अपने अधिकारों की लड़ाई… जब ये दोनों आमने-सामने आ जाएं तो तस्वीर बदल जाती है। कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ के बैनर तले प्रदेशभर में अभियंताओं ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार हड़ताल शुरू कर दी। बागेश्वर में भी इस हड़ताल का असर साफ दिखाई दिया, जहां लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, सिंचाई विभाग, जल निगम, जल संस्थान, आरडब्ल्यूडी, शहरी आवास और उरेडा से जुड़े अभियंताओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। अभियंताओं की मुख्य मांग चौवन सौ ग्रेड पे को लागू करने की है, जिसे वे पिछले लंबे समय से उठा रहे हैं और अब इसे लागू करने के लिए आंदोलन तेज कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग डांगर बंगला में बने धरनास्थल पर अभियंताओं का उत्साह और एकजुटता देखने लायक थी। इसी दौरान कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों ने भी मौके पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया। इस दौरान राजेंद्र टंगड़िया, कुंदन गोस्वामी, राम सिंह गढ़िया और गौरव परिहार सहित कई युवा साथियों ने अभियंताओं के समर्थन में अपनी आवाज उठाई। धरनास्थल पर पहुंचे लोगों ने कहा कि यह केवल अभियंताओं की मांग नहीं है, बल्कि यह एक न्यायसंगत अधिकार की लड़ाई है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इन मांगों को नहीं माना गया तो इसका असर विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है। इस पूरे आंदोलन में पूर्व विधायक ललित फर्श्वण भी शामिल हुए और उन्होंने अभियंताओं की मांगों को जायज बताते हुए उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द समाधान निकाले ताकि कामकाज प्रभावित न हो और अभियंताओं को उनका हक मिल सके। धरने में शामिल अभियंताओं ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब देखना होगा कि यह हड़ताल सरकार तक कितना असर डालती है और अभियंताओं की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है। फिलहाल बागेश्वर से उठी यह आवाज पूरे प्रदेश में गूंज रही है और सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। #BageshwarNews #EngineerStrike #GradePay5400 #UttarakhandNews #MeraHaqNews हड़ताल से गूंज उठा तंत्र, इंजीनियरों की एकजुट आवाज ने बढ़ाया दबाव मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। एक तरफ विकास कार्यों की रफ्तार और दूसरी तरफ अपने अधिकारों की लड़ाई… जब ये दोनों आमने-सामने आ जाएं तो तस्वीर बदल जाती है। कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ के बैनर तले प्रदेशभर में अभियंताओं ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार हड़ताल शुरू कर दी। बागेश्वर में भी इस हड़ताल का असर साफ दिखाई दिया, जहां लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, सिंचाई विभाग, जल निगम, जल संस्थान, आरडब्ल्यूडी, शहरी आवास और उरेडा से जुड़े अभियंताओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। अभियंताओं की मुख्य मांग चौवन सौ ग्रेड पे को लागू करने की है, जिसे वे पिछले लंबे समय से उठा रहे हैं और अब इसे लागू करने के लिए आंदोलन तेज कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग डांगर बंगला में बने धरनास्थल पर अभियंताओं का उत्साह और एकजुटता देखने लायक थी। इसी दौरान कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों ने भी मौके पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया। इस दौरान राजेंद्र टंगड़िया, कुंदन गोस्वामी, राम सिंह गढ़िया और गौरव परिहार सहित कई युवा साथियों ने अभियंताओं के समर्थन में अपनी आवाज उठाई। धरनास्थल पर पहुंचे लोगों ने कहा कि यह केवल अभियंताओं की मांग नहीं है, बल्कि यह एक न्यायसंगत अधिकार की लड़ाई है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इन मांगों को नहीं माना गया तो इसका असर विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है। इस पूरे आंदोलन में पूर्व विधायक ललित फर्श्वण भी शामिल हुए और उन्होंने अभियंताओं की मांगों को जायज बताते हुए उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द समाधान निकाले ताकि कामकाज प्रभावित न हो और अभियंताओं को उनका हक मिल सके। धरने में शामिल अभियंताओं ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब देखना होगा कि यह हड़ताल सरकार तक कितना असर डालती है और अभियंताओं की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है। फिलहाल बागेश्वर से उठी यह आवाज पूरे प्रदेश में गूंज रही है और सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। #BageshwarNews #EngineerStrike #GradePay5400 #UttarakhandNews #MeraHaqNews

3 hrs ago
user_मेरा हक न्यूज
मेरा हक न्यूज
Local News Reporter बागेश्वर, बागेश्वर, उत्तराखंड•
3 hrs ago

हड़ताल से गूंज उठा तंत्र, इंजीनियरों की एकजुट आवाज ने बढ़ाया दबाव मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। एक तरफ विकास कार्यों की रफ्तार और दूसरी तरफ अपने अधिकारों की लड़ाई… जब ये दोनों आमने-सामने आ जाएं तो तस्वीर बदल जाती है। कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ के बैनर तले प्रदेशभर में अभियंताओं ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार हड़ताल शुरू कर दी। बागेश्वर में भी इस हड़ताल का असर साफ दिखाई दिया, जहां लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, सिंचाई विभाग, जल निगम, जल संस्थान, आरडब्ल्यूडी, शहरी आवास और उरेडा से जुड़े अभियंताओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। अभियंताओं की मुख्य मांग चौवन सौ ग्रेड पे को लागू करने की है, जिसे वे पिछले लंबे समय से उठा रहे हैं और अब इसे लागू करने के लिए आंदोलन तेज कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग डांगर बंगला में बने धरनास्थल पर अभियंताओं का उत्साह और एकजुटता देखने लायक थी। इसी दौरान कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों ने भी मौके पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया। इस दौरान राजेंद्र टंगड़िया, कुंदन गोस्वामी, राम सिंह गढ़िया और गौरव परिहार सहित कई युवा साथियों ने अभियंताओं के समर्थन में अपनी आवाज उठाई। धरनास्थल पर पहुंचे लोगों ने कहा कि यह केवल अभियंताओं की मांग नहीं है, बल्कि यह एक न्यायसंगत अधिकार की लड़ाई है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इन मांगों को नहीं माना गया तो इसका असर विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है। इस पूरे आंदोलन में पूर्व विधायक ललित फर्श्वण भी शामिल हुए और उन्होंने अभियंताओं की मांगों को जायज बताते हुए उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द समाधान निकाले ताकि कामकाज प्रभावित न हो और अभियंताओं को उनका हक मिल सके। धरने में शामिल अभियंताओं ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब देखना होगा कि यह हड़ताल सरकार तक कितना असर डालती है और अभियंताओं की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है। फिलहाल बागेश्वर से उठी यह आवाज पूरे प्रदेश में गूंज रही है और सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। #BageshwarNews #EngineerStrike #GradePay5400 #UttarakhandNews #MeraHaqNews हड़ताल से गूंज उठा तंत्र, इंजीनियरों की एकजुट आवाज ने बढ़ाया दबाव मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। एक तरफ विकास कार्यों की रफ्तार और दूसरी तरफ अपने अधिकारों की लड़ाई… जब ये दोनों आमने-सामने आ जाएं तो तस्वीर बदल जाती है। कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ के बैनर तले प्रदेशभर में अभियंताओं ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार हड़ताल शुरू कर दी। बागेश्वर में भी इस हड़ताल का असर साफ दिखाई दिया, जहां लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, सिंचाई विभाग, जल निगम, जल संस्थान, आरडब्ल्यूडी, शहरी आवास और उरेडा से जुड़े अभियंताओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। अभियंताओं की मुख्य मांग चौवन सौ ग्रेड पे को लागू करने की है, जिसे वे पिछले लंबे समय से उठा रहे हैं और अब इसे लागू करने के लिए आंदोलन तेज कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग डांगर बंगला में बने धरनास्थल पर अभियंताओं का उत्साह और एकजुटता देखने लायक थी। इसी दौरान कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों ने भी मौके पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया। इस दौरान राजेंद्र टंगड़िया, कुंदन गोस्वामी, राम सिंह गढ़िया और गौरव परिहार सहित कई युवा साथियों ने अभियंताओं के समर्थन में अपनी आवाज उठाई। धरनास्थल पर पहुंचे लोगों ने कहा कि यह केवल अभियंताओं की मांग नहीं है, बल्कि यह एक न्यायसंगत अधिकार की लड़ाई है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इन मांगों को नहीं माना गया तो इसका असर विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है। इस पूरे आंदोलन में पूर्व विधायक ललित फर्श्वण भी शामिल हुए और उन्होंने अभियंताओं की मांगों को जायज बताते हुए उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द समाधान निकाले ताकि कामकाज प्रभावित न हो और अभियंताओं को उनका हक मिल सके। धरने में शामिल अभियंताओं ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब देखना होगा कि यह हड़ताल सरकार तक कितना असर डालती है और अभियंताओं की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है। फिलहाल बागेश्वर से उठी यह आवाज पूरे प्रदेश में गूंज रही है और सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। #BageshwarNews #EngineerStrike #GradePay5400 #UttarakhandNews #MeraHaqNews

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  • विडियो देखें- रूद्रप्रयाग (उत्तराखंड ) रुद्रप्रयाग मेघा कंपनी का टनल ऐसे टूट रहा है जैसे मेघ बरस रहा है इसके टूटते ही मची अफरा तफरी।
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    विडियो देखें- रूद्रप्रयाग (उत्तराखंड )
रुद्रप्रयाग मेघा कंपनी का टनल  ऐसे टूट रहा है जैसे मेघ बरस रहा है  इसके टूटते ही मची अफरा तफरी।
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    कोसिया कुटौली, नैनीताल, उत्तराखंड•
    7 hrs ago
  • Post by Surendra Kumar
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    Post by Surendra Kumar
    user_Surendra Kumar
    Surendra Kumar
    Paint Shop कोसिया कुटौली, नैनीताल, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
  • सूर्यागांव क्षेत्र में वन्य जीव के हमले में महिला की मौत के बाद वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया है। तीन दिन से लगातार चल रही कॉम्बिंग के बाद सोमवार रात करीब नौ बजे टीम को यह सफलता मिली। वन विभाग के अनुसार पकड़ी गई बाघिन की उम्र करीब ढाई से तीन वर्ष आंकी गई है। इसे फिलहाल रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है, जहां इसकी निगरानी की जा रही है। हालांकि अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि यही बाघिन महिला की मौत के लिए जिम्मेदार है। इसके लिए डीएनए सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे और मृतका के सैंपल से मिलान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। घटना से एक दिन पहले इसी क्षेत्र में एक बैल का भी शिकार हुआ था। टीम ने उसी स्थान के आसपास निगरानी बढ़ा दी थी। रविवार को जंतवाल गांव के पास जंगल में मृत बैल मिलने के बाद ट्रेंकुलाइज टीम ने वहीं डेरा डाल दिया। सोमवार रात जब टीम को बैल के पास हलचल दिखी, तो कुछ ही देर में एक बाघ को शिकार खाते हुए देखा गया। इसके बाद ट्रेंकुलाइज टीम प्रभारी डॉ. हिमांशु पांगती ने रात 9:05 बजे बाघ पर बेहोशी का डार्ट फायर किया। करीब 20 मिनट बाद सर्च करने पर कुछ दूरी पर बाघिन बेहोश हालत में मिल गई।
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    सूर्यागांव क्षेत्र में वन्य जीव के हमले में
महिला की मौत के बाद वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया है। तीन दिन से लगातार चल रही कॉम्बिंग के बाद सोमवार रात करीब नौ बजे टीम को यह सफलता मिली।
वन विभाग के अनुसार पकड़ी गई बाघिन की उम्र करीब ढाई से तीन वर्ष आंकी गई है। इसे फिलहाल रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है, जहां इसकी निगरानी की जा रही है। हालांकि अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि यही बाघिन महिला की मौत के लिए जिम्मेदार है। इसके लिए डीएनए सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे और मृतका के सैंपल से मिलान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
घटना से एक दिन पहले इसी क्षेत्र में एक बैल का भी शिकार हुआ था। टीम ने उसी स्थान के आसपास निगरानी बढ़ा दी थी। रविवार को जंतवाल गांव के पास जंगल में मृत बैल मिलने के बाद ट्रेंकुलाइज टीम ने वहीं डेरा डाल दिया। सोमवार रात जब टीम को बैल के पास हलचल दिखी, तो कुछ ही देर में एक बाघ को शिकार खाते हुए देखा गया। इसके बाद ट्रेंकुलाइज टीम प्रभारी डॉ. हिमांशु पांगती ने रात 9:05 बजे बाघ पर बेहोशी का डार्ट फायर किया। करीब 20 मिनट बाद सर्च करने पर कुछ दूरी पर बाघिन बेहोश हालत में मिल गई।
    user_Nainital news
    Nainital news
    Local News Reporter Nainital, Uttarakhand•
    12 hrs ago
  • नासा का मिशन आर्टेमिस 2 में सवार चार यात्रियों का दल चंद्रमा के बेहद करीब जा पहुंचा है और 4070 मील दूर से चंद्रमा का ऑब्जर्वेशन कर रहा है। नासा का कहना है कि यह दूरी ऐतिहासिक है। जिसने अपोलो 13 द्वारा बनाई दूरी का रिकॉर्ड तोड़ा है। अंतरिक्ष यात्रियों का यह दल चांद के प्रभाव वाले यानी गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में है और चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा हैं । ओरियन कैप्सूल में सवार 5 अप्रैल को चंद्रमा के करीब पहुंच गए थे। चंद्र यात्रियों का दल निरंतर चंद्रमा की तस्वीरें ले रहे हैं और धरती को भेज रहे हैं। चंद्र यात्रियों को चन्द्रमा की कक्षा तक पहुंचने में 4 दिन लगे। पांचवे दिन चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे हैं। परिक्रमा पूरी होने के बाद छठे दिन पृथ्वी को वापस लौट जाएंगे। पृथ्वी तक वापस पहुंचने में चार दिन लगेंगे और 10वें दिन प्रशांत महासागर सागर में लैंड करेंगे। आर्टेमिस ll की अभी तक सफल रहे मिशन से नासा के वैज्ञानिक बेहद खुश हैं। चार यात्रियों के दल द्वारा भेजी जा रही तस्वीरें इन दिनों सोसल मीडिया में छाई हैं। चारों अंतरिक्ष यात्री के नाम वाइजमैन, ग्लोवर, कोच और हैनसेन हैं। जिसमें नासा के 3 और कनाडा स्पेस एजेंसी का एक अंतरिक्ष यात्री सवार है। नासा का यह ऐतिहासिक मिशन है। इसका उद्देश्य चांद पर बेस कैंप स्थापित करना है। बेस कैंप स्थापित करने का सफर आर्टेमिस के अगले मिशन में शुरू होगा। चंद्रमा की सतह पर बेस कैंप का मतलब होगा कि नासा ने चांद पर बस्ती बसाने का कार्य शुरू कर दिया है। इसके बाद मंगल ग्रह पर जाने की तैयारी करेगा, जो संभवतः आर्टेमिस 5 में पूरा किया जाएगा।
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    नासा का मिशन आर्टेमिस 2 में सवार चार यात्रियों का दल चंद्रमा के बेहद करीब जा पहुंचा है और 4070 मील दूर से चंद्रमा का ऑब्जर्वेशन कर रहा है। नासा का कहना है कि यह दूरी ऐतिहासिक है। जिसने अपोलो 13 द्वारा बनाई दूरी का रिकॉर्ड तोड़ा है। अंतरिक्ष यात्रियों का यह दल चांद के प्रभाव वाले यानी गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में है और चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा हैं । ओरियन कैप्सूल में सवार 5 अप्रैल को चंद्रमा के करीब पहुंच गए थे। चंद्र यात्रियों का दल निरंतर चंद्रमा की तस्वीरें ले रहे हैं और धरती को भेज रहे हैं।
चंद्र यात्रियों को चन्द्रमा की कक्षा तक पहुंचने में 4 दिन लगे। पांचवे दिन चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे हैं। परिक्रमा पूरी होने के बाद छठे दिन पृथ्वी को वापस लौट जाएंगे। पृथ्वी तक वापस पहुंचने में चार दिन लगेंगे और 10वें दिन प्रशांत महासागर सागर में लैंड करेंगे। 
आर्टेमिस ll की अभी तक सफल रहे मिशन से नासा के वैज्ञानिक बेहद खुश हैं। चार यात्रियों के दल द्वारा भेजी जा रही तस्वीरें इन दिनों सोसल मीडिया में छाई हैं। चारों अंतरिक्ष यात्री  के नाम वाइजमैन, ग्लोवर, कोच और हैनसेन हैं। जिसमें नासा के 3 और कनाडा स्पेस एजेंसी का एक अंतरिक्ष यात्री सवार है। 
नासा का यह ऐतिहासिक मिशन है। इसका उद्देश्य चांद पर बेस कैंप स्थापित करना है। बेस कैंप स्थापित करने का सफर आर्टेमिस के अगले मिशन में शुरू होगा। चंद्रमा की सतह पर बेस कैंप का मतलब होगा कि नासा ने चांद पर बस्ती बसाने का कार्य शुरू कर दिया है। इसके बाद मंगल ग्रह पर जाने की तैयारी करेगा, जो संभवतः आर्टेमिस 5 में पूरा किया जाएगा।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    15 hrs ago
  • बाराकोट ब्लॉक के PHC इजड़ा में विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता कार्यक्रम 💉
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    बाराकोट ब्लॉक के PHC इजड़ा में विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में  जागरूकता कार्यक्रम 💉
    user_Champawat news
    Champawat news
    Local News Reporter चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    1 hr ago
  • चंपावत:*“जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण के तहत ‘हुड्डी नदी संरक्षण अभियान’ का शुभारंभ”*
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    चंपावत:*“जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण के तहत ‘हुड्डी नदी संरक्षण अभियान’ का शुभारंभ”*
    user_The Public Matter
    The Public Matter
    पत्रकार चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    7 hrs ago
  • विडियो देखें- रूद्रपुर (उत्तराखंड) रुद्रपुर कैंप में सड़कों पर उतरी पब्लिक,-लोग बोले,बोरा गैस एजेंसी चोर है! चंन्द्रा गैस एजेंसी की तारीफ, दोनों एजेंसी है आमने-सामने क्या कहना है स्थानीय लोगों का गैस को लेकर सुनिए
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    विडियो देखें- रूद्रपुर (उत्तराखंड)
रुद्रपुर कैंप में सड़कों पर उतरी पब्लिक,-लोग बोले,बोरा गैस एजेंसी चोर है! चंन्द्रा गैस एजेंसी की तारीफ, दोनों एजेंसी है आमने-सामने
क्या कहना है स्थानीय लोगों का गैस को लेकर सुनिए
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    कोसिया कुटौली, नैनीताल, उत्तराखंड•
    7 hrs ago
  • आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज सभागार में स्कूल ऑफ एयरोसोल मॉडलिंग नामक कार्यशाला सोमवार से शुरू हो गई है। एरोसोल और जलवायु परिवर्तन को लेकर में कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मुंबई के एरोसोल विशेषज्ञ प्रो वाईएस मय्या ने कहा कि युवाओं के योगदान के बिना पर्यावरण को संतुलित किया जाना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का ज्ञान बेहद जरूरी है। एरीज के निदेशक डा मनीष नाजा ने कहा कि वर्तमान में प्रदूषण उत्सर्जन की अनेकों श्रोत हैं। नग्न आंखों से नहीं दिखाई देने वाले प्रदुषित अनेकों कण दुनिया में एक स्थान से दूसरे स्थानों में फैल जाते हैं। इसके लिए जब तक इनकी उत्पत्ति के श्रोत का पता नहीं चलेगा, तब तक निदान भी नहीं हो सकेगा। एयरोसोल मॉडलिंग बेहद महत्वपूर्ण तकनीक है, इसके जरिए प्रदूषण के श्रोत की जानकारी जुटाई जा सकती हैं । एयरोसोल मॉडलिंग को लेकर ही यह कार्यशाला आयोजित की गई है। जिसका लाभ विभिन्न नगरों से पहुंचे विद्यार्थियों को मिल सकेगा। आइएएसटीए मुंबई के सचिव डॉ मनीष जोशी ने कहा कि विकासशील देशों में धूल, कण और अन्य प्रदूषित गैसों की समस्या पर काबू पाने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने दुनिया के कई देशों में प्रदूषण की बढ़ती मात्रा पर जानकारी दी। डा नरेंद्र सिंह ने हिमालय के पिघलते ग्लेशियरों के साथ मध्य हिमालय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डाला। डॉ उमेश दुम्का ने ट्रांस गंगा समेत उत्तर भारत में एरोसोल की वृद्धि के कारणों और उनके दुष्प्रभावों की जानकारी दी। इस अवसर पर डा जेसी पांडे, डा प्रियंका श्रीवास्तव, मोहित पवार समेत विभिन्न महानगरों से पहुंचे शोध छात्र समेत एरीज के वैज्ञानिक मौजूद थे।
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    आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज सभागार में स्कूल ऑफ एयरोसोल मॉडलिंग नामक कार्यशाला सोमवार से शुरू हो गई है। एरोसोल और जलवायु परिवर्तन को लेकर में कार्यशाला को संबोधित करते हुए  मुख्य अतिथि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मुंबई के एरोसोल विशेषज्ञ प्रो वाईएस मय्या ने कहा कि युवाओं के योगदान के बिना पर्यावरण को संतुलित किया जाना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का ज्ञान बेहद जरूरी है। एरीज के  निदेशक डा मनीष नाजा ने कहा कि वर्तमान में प्रदूषण उत्सर्जन की अनेकों श्रोत हैं। नग्न आंखों से नहीं दिखाई देने वाले प्रदुषित अनेकों कण दुनिया में एक स्थान से दूसरे स्थानों में फैल जाते हैं। इसके लिए जब तक इनकी उत्पत्ति के श्रोत का पता नहीं चलेगा, तब तक निदान भी नहीं हो सकेगा। एयरोसोल मॉडलिंग बेहद महत्वपूर्ण तकनीक है, इसके जरिए प्रदूषण के श्रोत की जानकारी जुटाई जा सकती हैं । एयरोसोल मॉडलिंग को लेकर ही यह कार्यशाला आयोजित की गई है। जिसका लाभ विभिन्न नगरों से पहुंचे विद्यार्थियों को मिल सकेगा। आइएएसटीए मुंबई के सचिव डॉ मनीष जोशी ने कहा कि विकासशील देशों में धूल, कण और अन्य प्रदूषित गैसों की समस्या पर काबू पाने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने दुनिया के कई देशों में प्रदूषण की बढ़ती मात्रा पर जानकारी दी। डा नरेंद्र सिंह ने हिमालय के पिघलते ग्लेशियरों के साथ मध्य हिमालय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर प्रकाश डाला। डॉ उमेश दुम्का ने ट्रांस गंगा समेत उत्तर भारत में एरोसोल की वृद्धि के कारणों और उनके दुष्प्रभावों की जानकारी दी।   इस अवसर पर डा जेसी पांडे, डा प्रियंका श्रीवास्तव, मोहित पवार समेत विभिन्न महानगरों से पहुंचे शोध छात्र समेत एरीज के वैज्ञानिक मौजूद थे।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    15 hrs ago
  • चम्पावत:*सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ बनाए रखने हेतु चम्पावत पुलिस का सघन चेकिंग अभियान*
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    चम्पावत:*सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ बनाए रखने हेतु चम्पावत पुलिस का सघन चेकिंग अभियान*
    user_The Public Matter
    The Public Matter
    पत्रकार चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
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