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सरगुजा क्षेत्र के गांधीनगर थाना अंतर्गत साईं मंदिर के पास एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने पवित्र वस्त्र पहनकर और खुद को ब्राह्मण जाति का बताकर एक युवती के साथ झाड़-फूंक के बहाने बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य किया। बताया गया है कि इस घिनौने काम को दो आरोपियों ने अंजाम दिया, जिनमें प्रसोतम नाम का एक साथी भी शामिल है जो एक आंख से कमजोर है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि सरगुजा पुलिस अभी भी दो आरोपियों की तलाश कर रही है। इस वारदात ने पवित्र वस्त्र को भी कलंकित कर दिया है। पूरे घटनाक्रम को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही है कि क्या इस मामले को दबाने की साजिश की जाएगी।
जनता की ख़बर
सरगुजा क्षेत्र के गांधीनगर थाना अंतर्गत साईं मंदिर के पास एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने पवित्र वस्त्र पहनकर और खुद को ब्राह्मण जाति का बताकर एक युवती के साथ झाड़-फूंक के बहाने बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य किया। बताया गया है कि इस घिनौने काम को दो आरोपियों ने अंजाम दिया, जिनमें प्रसोतम नाम का एक साथी भी शामिल है जो एक आंख से कमजोर है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि सरगुजा पुलिस अभी भी दो आरोपियों की तलाश कर रही है। इस वारदात ने पवित्र वस्त्र को भी कलंकित कर दिया है। पूरे घटनाक्रम को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही है कि क्या इस मामले को दबाने की साजिश की जाएगी।
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- सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र में एक घायल आदिवासी युवक की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि दुद्धी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती रामविचार नामक युवक को बेहतर इलाज का झांसा देकर एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, कोन थाना क्षेत्र के ग्राम निगाई बोकराखाड़ी निवासी रामविचार पुत्र भोला सिंह गौड़ को रविवार देर रात लगभग 2:11 बजे घायल अवस्था में सीएचसी दुद्धी में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनके रिश्तेदार तिलक राज गोंड भी मौजूद थे। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान एक निजी अस्पताल से जुड़े कुछ लोग सीएचसी पहुंचे और युवक की हालत गंभीर बताते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए अपने अस्पताल ले जाने को कहा। आरोप है कि परिजनों को विश्वास में लेकर घायल युवक को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ सोमवार सुबह उन्हें उसकी मौत की जानकारी मिली। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि मौत के बाद युवक को दोबारा सीएचसी दुद्धी लाकर छोड़ दिया गया। इस घटना से परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह चिकित्सा नैतिकता, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाएगा। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, उनका कहना है कि गरीब और आदिवासी परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर किसी प्रकार की लापरवाही का सामना नहीं करना चाहिए। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच की मांग उठ रही है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।1
- चोपन थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक महिला को उस समय अपनी पकड़ में लिया है, जब वह एक शिशु को झोले में लेकर जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।1
- जेल से रिहा होने के बाद रौशन आनंद ने मीडिया से खुलकर बातचीत की, जहाँ उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों और हालिया घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने कुछ लोगों की आलोचना करते हुए अपनी नाराज़गी भी ज़ाहिर की। मीडिया से बात करते समय रौशन आनंद अपने भाई को याद कर भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि कठिन समय में उनके परिवार ने पूरा साथ दिया और उनके भाई की याद ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। भावुकता के इन पलों में उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को भी याद किया और अपने समर्थकों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। रौशन आनंद ने दृढ़ता से कहा कि वह भविष्य में भी अपनी बात मज़बूती से रखते रहेंगे और सच को सामने लाने का पूरा प्रयास करेंगे। उनकी रिहाई के बाद उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे। उनकी रिहाई के बाद दिए गए इस बयान और भावुक क्षण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। हालांकि, विवाद से जुड़े मामलों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी भी इंतजार किया जा रहा है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद को विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी है। अपने दौरे के दौरान, उन्होंने कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे को एक नई गति मिली है। इन पहलों से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।1
- झारखंड के गढ़वा जिले के लिए यह गौरव और खुशी की बात है कि स्थानीय फिल्म "लॉकडाउन के गोद में" को प्रतिष्ठित चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। इस उपलब्धि से जिले के फिल्म प्रेमियों, कलाकारों और युवाओं में उत्साह का माहौल है। यह फिल्म लॉकडाउन काल की संवेदनशील परिस्थितियों और आम लोगों के संघर्ष की कहानी को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत करती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे महज 20 वर्षीय युवा फिल्मकार विजय हिंद ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद मोबाइल फोन से शूट किया। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी (डीओपी) में नीरज कुमार, रवि रंजन और रमेश बाबू का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जबकि अजय बाबू समेत पूरी टीम ने निर्माण कार्य में अहम भूमिका निभाई। इस फिल्म का निर्माण गढ़वा के वरिष्ठ फिल्म निर्माता दयाशंकर गुप्ता द्वारा किया गया है। निर्माता दयाशंकर गुप्ता ने इस चयन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे झारखंड से आई सैकड़ों फिल्मों के बीच गढ़वा की फिल्म का चुना जाना जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गढ़वा में फिल्म निर्माण के लिए आधुनिक संसाधनों और सुविधाओं की कमी के बावजूद, यहां के युवा कलाकार अपनी प्रतिभा, मेहनत और जुनून से लगातार नई पहचान बना रहे हैं, जिसका उदाहरण विजय हिंद जैसे युवा फिल्मकार हैं जो दर्शाते हैं कि लगन और समर्पण से सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। "लॉकडाउन के गोद में" ने अपने प्रदर्शन के दौरान दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की थी और लॉकडाउन के दौरान आम लोगों की पीड़ा, संघर्ष व भावनात्मक पहलुओं को दर्शाने वाली इस फिल्म को एक प्रमुख न्यूज चैनल पर लगभग 20 लाख दर्शकों ने देखा था, जिसकी कहानी और प्रस्तुति को खूब सराहा गया। जानकारी के अनुसार, यह फिल्म 26 जून से 28 जून तक रांची स्थित सरला बिरला यूनिवर्सिटी में आयोजित चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की जाएगी। इस आयोजन में बॉलीवुड के कई प्रसिद्ध कलाकार, लेखक, निर्देशक और निर्माता शामिल होंगे, और ऐसे मंच पर गढ़वा की फिल्म का प्रदर्शन जिले के लिए सम्मान की बात मानी जा रही है। फिल्म के चयन की खबर मिलते ही गढ़वा जिले में खुशी का माहौल है, जहां कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों ने इसे स्थानीय प्रतिभाओं की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि जिले के अन्य युवा कलाकारों को भी प्रेरणा देगी और क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान प्राप्त होगी। वहीं, युवा फिल्मकार विजय हिंद की हालिया फिल्म "हॉस्पिटल" भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, जो दर्द, संघर्ष और रोमांच से भरपूर है। इसमें विजय हिंद मुख्य भूमिका में हैं, जबकि अभिनेत्री रौनक तिवारी ने अपने प्रभावशाली अभिनय से कहानी को मजबूत बनाया है। निर्माता दयाशंकर गुप्ता ने "हॉस्पिटल" के अंतिम क्लाइमैक्स की विशेष प्रशंसा की है, जिसे वे दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ने वाला मानते हैं। विजय हिंद ने दर्शकों के प्यार, स्नेह और आशीर्वाद को बेहतर फिल्में बनाने की प्रेरणा बताया है, यह कहते हुए कि उनका सपना है कि गढ़वा की फिल्मों को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पहचान मिले। गढ़वा की इस उपलब्धि को क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। फिल्म प्रेमियों का मानना है कि स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और समर्पण आने वाले समय में गढ़वा को झारखंड के महत्वपूर्ण फिल्म केंद्रों में शामिल कर सकता है, और "लॉकडाउन के गोद में" का चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में चयन जिले की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय प्रतिभाओं के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया है।1
- छत्तीसगढ़ में स्कूल खुलने के पहले ही दिन राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर सभी स्कूलों में प्रार्थना से लेकर छुट्टी तक मंत्रों का उच्चारण अनिवार्य कर दिया है। इस आदेश के तहत सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, गुरु मंत्र, सरस्वती वंदना और महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराना होगा, जबकि मध्यान्ह भोजन से पहले भोजन मंत्र तथा छुट्टी के समय राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले से राज्य की राजनीति गरमा गई है, जिसका विपक्षी दल कांग्रेस सहित अन्य संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भी सरकार के इस निर्णय का खुलकर विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। अंबिकापुर स्थित अपने आवास 'तपस्या' में मीडिया से बातचीत के दौरान सिंहदेव ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान का एक मूलभूत आधार है और धर्म के पालन या उच्चारण को स्वैच्छिक होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार इसे जबरदस्ती लागू कर रही है, तो यह संविधान के विपरीत एक पहल है। उनका तर्क है कि जो अपने देवी-देवताओं का पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन दूसरे धर्म के लोगों पर इसे लादना गलत है। सिंहदेव ने जोर देकर कहा कि सरकार को इस आदेश को वापस लेना चाहिए और जो इसमें शामिल नहीं होना चाहते, उन्हें छूट मिलनी चाहिए। कांग्रेसियों के बीच यह चर्चा है कि भाजपा इस आदेश को बच्चों और अभिभावकों पर जबरदस्ती थोप रही है, जो अन्य धर्म के लोगों और उनकी धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। वे मानते हैं कि स्कूली बच्चों को इसमें शामिल होने या न होने की छूट मिलनी चाहिए और इसे पूरी तरह से नियम बना देना अनुचित है। कई अन्य संगठनों ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है।1
- सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र में पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों में एक महिला को हिरासत में लिया है। यह महिला एक अज्ञात शिशु को झोले में लेकर जा रही थी, जिस पर पुलिस को शक हुआ। मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला को पकड़ा और बच्चे सहित चोपन थाने ले गई। इस दौरान कोटा निवासी तारा देवी ने पुलिस को बच्चे के साथ थाने लाने में सहयोग किया। पुलिस अब पूरे मामले की गहनता से जांच-पड़ताल कर रही है। उनका मुख्य उद्देश्य शिशु की पहचान स्थापित करना और यह पता लगाना है कि महिला उसे किस कारण से ले जा रही थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। इस घटना को लेकर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी आधिकारिक पुष्टि जांच के समापन के बाद ही की जाएगी।1
- सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र स्थित डाला चौकी के तहत तेलगुड़वा बस स्टैंड पर रविवार को एक महिला द्वारा अबोध बालक को बस में छोड़कर भागने की कोशिश किए जाने से हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों की सतर्कता और सूझबूझ से महिला को मौके पर ही पकड़ लिया गया और पुलिस को सौंप दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला एक छोटे बच्चे के साथ बस स्टैंड पहुंची थी। कुछ देर बाद उसने बच्चे को बस की सीट पर छोड़ दिया और वहां से जाने लगी। उसकी गतिविधियों पर संदेह होने पर बस स्टैंड पर मौजूद लोगों ने उसे रोका और तुरंत मामले की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही डायल 112 पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और महिला को अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। इस घटना की खबर तेजी से फैलने के बाद बस स्टैंड पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, और महिला व बालक को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस फिलहाल बालक की पहचान और महिला के साथ उसके संबंधों की जांच कर रही है, हालांकि मामले की वास्तविक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस संबंध में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।1
- गढ़वा में झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ की जिला शाखा ने अपनी विभिन्न सेवा संबंधी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है। संघ के प्रतिनिधियों ने पंचायत सचिवों की लंबित समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराते हुए उनके शीघ्र निराकरण की मांग की है। सौंपे गए ज्ञापन में, संघ ने विशेष रूप से उन नव नियुक्त पंचायत सचिवों की सेवा संपुष्टि (कन्फर्मेशन) की मांग की है जो लंबे समय से कार्यरत हैं। संघ का कहना है कि कई पंचायत सचिव वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा संपुष्टि न होने के कारण उनमें असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, पंचायत सचिवों को नियमित रूप से प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है, ताकि वे नई योजनाओं और विभागीय कार्यों की बढ़ती जिम्मेदारियों के लिए अद्यतन जानकारी और तकनीकी दक्षता प्राप्त कर अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकें। संघ ने यह भी उल्लेख किया कि जिले के कई प्रखंडों में पंचायत सचिवों की संख्या अपर्याप्त है, जिसके परिणामस्वरूप एक-एक पंचायत सचिव को कई पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयाँ आती हैं। संघ ने प्रशासन से रिक्त पदों पर जनसेवकों की नियुक्ति कर पंचायत सचिवों का कार्यभार कम करने की अपील की है। संघ के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पंचायत सचिव ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि यदि इन समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा और आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। संघ का कहना है कि उनकी मांगें न केवल कर्मचारियों के हित में हैं, बल्कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए भी आवश्यक हैं। पंचायत सचिव संघ ने उपायुक्त से इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के कई पदाधिकारी और पंचायत सचिव उपस्थित रहे, जिन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।1